अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के बीच यूरो 1.1200 के ऊपर संभला, लेकिन लंबी अवधि का दबाव बरकरार कमजोर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और आगामी ब्याज दर फैसलों के बीच यूरो डॉलर के मुकाबले 1.1220 के आसपास टिकने की कोशिश कर रहा है, हालांकि तकनीकी चार्ट पर मंदी का रुझान अब भी बना हुआ है। सोमवार के शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र में विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर में 1.1220 के स्तर के आसपास स्थिरता देखने को मिली। अमेरिकी बॉन्ड बाजार में प्रतिफल घटने से ग्रीनबैक पर दबाव बना है, जिससे यूरो को सहारा मिला। इसके बावजूद 100-दिन के सिंपल मूविंग एवरेज के नीचे बने रहने के कारण तकनीकी रूप से इस करेंसी पेअर में अब भी मंदी का दबाव बना हुआ है। ट्रेजरी यील्ड और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का असर अमेरिकी बॉन्ड बाजार के आंकड़े डॉलर की दिशा तय करने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। पिछले कारोबारी सत्र में 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड फिसलकर 4.97% पर आ गई, जबकि 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.299% दर्ज की गई, जो करीब एक महीने के निचले स्तर के आसपास है। नेशनल ऑस्ट्रेलिया बैंक में एफएक्स स्ट्रैटेजी के प्रमुख रे एट्रिल के अनुसार, मौजूदा समय में अमेरिकी बॉन्ड बाजार व्यापक स्तर पर डॉलर के प्रदर्शन को संचालित कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि आगामी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले फेडरल रिजर्व अपनी ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को होने वाली आगामी अक्टूबर बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव न होने की 90.6% संभावना जताई जा रही है। वहीं, दिसंबर की बैठक में अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में बढ़ोतरी की संभावना 79.4% आंकी गई है। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष वॉर्श के हालिया संबोधन को एफएक्सएस स्पीचट्रैकर पर 5.6/10 का स्कोर दिया गया, जो 6.1/10 के ऐतिहासिक औसत से हल्का नरम है। संबोधन में वैश्विक वित्तीय संकट के गहरे प्रभावों का जिक्र करते हुए जोखिम प्रबंधन और वित्तीय स्थिरता को प्राथमिकता देने का संकेत दिया गया। हालांकि अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों के बारे में कोई पूर्व-निर्धारित फैसला न लेते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मांग-पक्षीय असर और डेटा पर जोर दिया गया है। यूरोपीय चुनौतियां और तकनीकी स्तर यूरोपीय मोर्चे पर फ्रांस में बढ़ता असंतोष और देश की बिगड़ती बजट समस्याएं साझी मुद्रा पर दबाव बना सकती हैं। तकनीकी चार्ट पर दैनिक समयसीमा में ईयूआर/यूएसडी 100-दिवसीय एसएमए और ऊपरी बोलिंजर बैंड के नीचे कारोबार कर रहा है। मूल्य बोलिंजर के मध्य बैंड के करीब है जो तत्काल प्रतिरोध का काम कर रहा है, जबकि 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 40 के आसपास रहते हुए कमजोर और मंदी के मोमेंटम का संकेत दे रहा है। ताजा लाइव मार्केट डेटा में यह दर 1.11 पर देखी गई है जहां 14-दिवसीय आरएसआई 28 पर ओवरसोल्ड क्षेत्र दर्शा रहा है और एमएसीडी -0.01 पर है। ऊपर की ओर पहला प्रतिरोध स्तर 16 अक्टूबर के उच्चतम स्तर 1.1270 पर है, जिसके बाद बोलिंजर बैंड की ऊपरी सीमा 1.1315 पर स्थित है। यदि खरीदारी जारी रहती है तो 100-दिवसीय एसएमए 1.1450 तक का रास्ता खुल सकता है। इसके विपरीत, नीचे की ओर 23 अक्टूबर का निचला स्तर 1.1185 पहला समर्थन स्तर है, जिसके बाद निचला बोलिंजर बैंड 1.1138 के स्तर पर सहारा प्रदान कर सकता है। इस स्तर से नीचे फिसलने पर 1.1100 का मनोवैज्ञानिक स्तर परीक्षण में आ सकता है। वैश्विक मुद्रा बाजार में यूरो की स्थिति यूरो यूरोपीय संघ के उन 20 सदस्य देशों की आधिकारिक मुद्रा है जो यूरोज़ोन का हिस्सा हैं। अमेरिकी डॉलर के बाद यह विश्व की दूसरी सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 में सभी विदेशी मुद्रा लेन-देन में यूरो की हिस्सेदारी 31% थी, जिसका औसत दैनिक कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा। वैश्विक स्तर पर ईयूआर/यूएसडी सबसे बड़ा करेंसी पेअर है, जिसकी कुल विदेशी मुद्रा लेन-देन में लगभग 30% हिस्सेदारी है। इसके बाद ईयूआर/जेपीवाई 4%, ईयूआर/जीबीपी 3% और ईयूआर/एयूडी 2% का स्थान आता है। जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ईसीबी) यूरोज़ोन का केंद्रीय बैंक है, जो मौद्रिक नीति तय करता है। ईसीबी का मुख्य दायित्व मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसके लिए ब्याज दरों का उपयोग किया जाता है। ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार बैठक करती है, जिसमें ईसीबी की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड सहित छह स्थायी सदस्य और राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुख शामिल होते हैं। हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज (एचआईसीपी) द्वारा मापी जाने वाली यूरोज़ोन की मुद्रास्फीति 2% के लक्ष्य से ऊपर जाने पर बैंक दरें बढ़ाने को बाध्य होता है। इसके अलावा जीडीपी, विनिर्माण एवं सेवा पीएमआई, रोजगार और व्यापार संतुलन जैसे आंकड़े मुद्रा के मूल्य को सीधे प्रभावित करते हैं। यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था का 75% हिस्सा जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से आता है। अन्य मुद्राओं, सोने और कमोडिटी का रुख सोमवार के कारोबारी सत्र में अन्य प्रमुख परिसंपत्तियों में भी हलचल देखी गई। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर डॉलर की कमजोरी के दम पर 0.7000 के ऊपर रहा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने इस तेजी को समर्थन दिया, जबकि नवंबर में रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा दर वृद्धि की उम्मीदों ने इसे बल दिया। उधर यूएसडी/जेपीवाई में नई बिकवाली देखी गई, जिससे यह 18 सितंबर के निचले स्तर के करीब रहा क्योंकि बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख से येन को लाभ मिला। सोने की कीमतों ने तीन महीने के निचले स्तर से उबरते हुए 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर वापसी की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ तत्काल सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार किए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में मामूली गिरावट आई, जिससे सोने को राहत मिली। डिजिटल एसेट्स के क्षेत्र में कार्डानो की गिरावट जारी रही और यह 0.202 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा था, जिसमें अक्टूबर की शुरुआत से लगातार तीन हफ्तों तक 20% से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। अमेरिकी बाजार में 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले कांग्रेस के नियंत्रण को लेकर होने वाली राजनीतिक खींचतान वित्तीय नीतियों और 2027 में मौद्रिक रुख की दिशा तय कर सकती है। इसका आप पर असर वैश्विक मुद्रा बाजार में डॉलर की चाल और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आयात लागत और विदेशी निवेश को प्रभावित करते हैं। • भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर: अमेरिकी डॉलर में नरमी आने से उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव कम होता है और कच्चे तेल के आयात बिल में राहत मिलती है। इससे भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी की गति धीमी हो सकती है। • आयातकों और निर्यातकों के लिए: वैश्विक विनिमय दरों में अस्थिरता से विदेशी मुद्रा में लेन-देन करने वाले व्यापारियों को हेजिंग रणनीतियों की समीक्षा करनी होगी। मुद्रा में तेज उतार-चढ़ाव से अनुबंध लागत और मुनाफे पर सीधा असर पड़ता है। • सोने और कमोडिटी निवेशकों पर: डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट से सोने की कीमतों को 4,000 डॉलर के ऊपर सहारा मिला है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग को बनाए रखता है। • वैश्विक यात्रियों और छात्रों के लिए: मुद्रा दरों में बदलाव से यूरोज़ोन और अमेरिका में यात्रा तथा पढ़ाई के खर्च प्रभावित होते हैं। विनिमय दर में 1-2% का बदलाव भी ट्यूशन फीस और रहने के बजट को प्रभावित करता है। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई हालिया गिरावट और आगामी केंद्रीय बैंक बैठकों के चलते डॉलर पर दबाव बना, जिससे यूरो को सीमित राहत मिली है। • अमेरिकी बॉन्ड बाजार में सुस्ती: 10-वर्षीय और 30-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स के एक महीने के निचले स्तर पर आने से डॉलर की मजबूती थमी है। यील्ड में इस गिरावट के कारण निवेशकों की डॉलर परिसंपत्तियों में नई पूंजी लगाने की गति धीमी हुई। • फेडरल रिजर्व की नीति पर अटकलें: बाजार में 90.6% संभावना जताई जा रही है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक अक्टूबर बैठक में दरों को स्थिर रखेगा। मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले आक्रामक फैसलों से बचने के संकेतों ने डॉलर की बढ़त पर लगाम लगाई है। • यूरोप में आंतरिक आर्थिक और राजनीतिक संकट: फ्रांस में बजटीय घाटे और राजनीतिक असंतोष की वजह से यूरो की बढ़त सीमित रही है। यूरोज़ोन की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के कारण साझी मुद्रा में बड़ा उछाल नहीं आ सका। सवाल-जवाब 1. ईयूआर/यूएसडी में सोमवार को क्या रुख देखा गया? शुरुआती एशियाई सत्र में यूरो डॉलर के मुकाबले सुधरकर 1.1220 के आसपास स्थिर हुआ, हालांकि 100-दिवसीय औसत के नीचे रहने से दबाव बना हुआ है। 2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में क्या बदलाव आया? 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड घटकर 4.97% और 30-वर्षीय यील्ड 5.299% पर आ गई, जो लगभग एक महीने के निचले स्तर के करीब है। 3. फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक को लेकर बाजार की क्या उम्मीद है? सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, अक्टूबर बैठक में ब्याज दरें स्थिर रहने की 90.6% संभावना और दिसंबर में बढ़ोतरी की 79.4% संभावना है। 4. यूरो के लिए प्रमुख तकनीकी प्रतिरोध और समर्थन स्तर क्या हैं? ऊपर की ओर पहला प्रतिरोध 1.1270 और 1.1315 पर है, जबकि नीचे की ओर प्राथमिक समर्थन 1.1185 और 1.1138 के स्तर पर देखा जा रहा है। 5. वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार में यूरो की कितनी हिस्सेदारी है? वर्ष 2022 में सभी विदेशी मुद्रा लेन-देन में यूरो की हिस्सेदारी 31% थी और इसका औसत दैनिक कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा। 6. फ्रांस के घटनाक्रम का यूरो पर क्या असर पड़ रहा है? फ्रांस में गहराते बजटीय संकट और विरोध प्रदर्शनों के कारण यूरोज़ोन की साझी मुद्रा पर नकारात्मक दबाव का जोखिम बना हुआ है। 7. सोने और कार्डानो की कीमतों में क्या हलचल रही? सोना तीन महीने के निचले स्तर से उबरकर 4,000 डॉलर के पार पहुंचा, जबकि कार्डानो तीन हफ्तों की गिरावट के बाद 0.202 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा था। https://trendkia.com/market/us-bond-yield-men-giravata-ke-bicha-euro-1-1200-ke-upara-snbhala-lekina-lnbi-avadhi-ka-dabava-barakarara-52208 TrendKia — Har trend, sabse pehle.