अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल से सोने की रफ्तार थमी, पीली धातु 4,167 डॉलर के करीब अटकी अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के साल 2002 के बाद उच्चतम स्तर पर पहुंचने और डॉलर की मजबूती के कारण सोने की कीमतों में सुस्ती देखने को मिल रही है। फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि की संभावना कम होने के बावजूद बुलियन को उच्च प्रतिफल से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुमूल्य धातुओं के कारोबार में गुरुवार को सुस्ती का माहौल देखने को मिला, जहां अमेरिकी डॉलर में लौटी मजबूती और सरकारी बॉन्ड प्रतिफल में आए तेज उछाल ने सोने की बढ़त की संभावनाओं को सीमित कर दिया। हाजिर सोने का भाव यानी XAU/USD लगभग 0.26 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 4,167 डॉलर के आसपास कारोबार करता नजर आया। कारोबारी सत्र की शुरुआत में धातु ने जो सीमित रिकवरी दिखाई थी, उसे आगे बनाए रखने में निवेशकों को भारी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। पूरे वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में बॉन्ड बाजार की तेजी सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों पर हावी होती दिख रही है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती और 2002 के बाद सबसे ऊंची यील्ड अमेरिकी मुद्रा की सेहत को छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले मापने वाला डॉलर इंडेक्स (DXY) 101.85 के करीब पहुंच गया, जो इस साल का अब तक का सबसे नया उच्च स्तर है। डॉलर में आई इस तेजी के साथ-साथ अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स के रिटर्न में भी जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। अमेरिका के 10-वर्षीय मानक बॉन्ड की यील्ड बढ़कर लगभग 5.34 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो साल 2002 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। जब सरकारी प्रतिभूतियों से मिलने वाला ब्याज इस तरह बहुवर्षीय रिकॉर्ड ऊंचाई को छूता है, तो बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने को रखने की अवसर लागत (अपॉर्चुनिटी कॉस्ट) अत्यधिक बढ़ जाती है। इसके साथ ही मजबूत होता डॉलर उन विदेशी खरीदारों के लिए भी सोने को महंगा बना देता है जो अन्य स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन करते हैं। मुद्रास्फीति के नरम आंकड़े और आर्थिक वृद्धि का मजबूत सहारा अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में यह तेजी उस समय दर्ज की जा रही है जब बाजार में इस बात की उम्मीदें कमजोर हुई हैं कि फेडरल रिजर्व (Fed) इस महीने अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा। बुधवार को सामने आए आर्थिक आंकड़ों ने ब्याज दरों के संबंध में मिली-जुली तस्वीर पेश की थी। पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में महंगाई दर में उम्मीद से अधिक नरमी दर्ज की गई। कोर PCE मुद्रास्फीति माह-दर-माह आधार पर 0.2 प्रतिशत बढ़ी, जो अर्थशास्त्रियों के 0.3 प्रतिशत के पूर्वानुमान से कम रही। वार्षिक आधार पर यह आंकड़ा 3.0 प्रतिशत पर स्थिर रहा, जबकि बाजार 3.3 प्रतिशत की दर का अनुमान लगा रहा था। हालांकि मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने दर वृद्धि के दबाव को कम किया, लेकिन अमेरिकी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के संशोधित आंकड़ों ने दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को उजागर किया। चालू वर्ष की दूसरी तिमाही में वार्षिक आधार पर GDP की वृद्धि दर 2.2 प्रतिशत दर्ज की गई, जो विश्लेषकों के 1.5 प्रतिशत के अनुमान से काफी अधिक रही। विकास दर के इस मजबूत प्रदर्शन ने निवेशकों को आश्वस्त किया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था उच्च दरों के दबाव को आसानी से झेल रही है, जिसने सुरक्षित बॉन्ड में निवेश को फिर से आकर्षित किया। दैनिक चार्ट पर तकनीकी संकेत और प्रमुख स्तर दैनिक तकनीकी चार्ट के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि निकट अवधि में XAU/USD पर मंदी का दबाव बना हुआ है। वर्तमान में सोने की कीमत 20-दिवसीय बॉलिंजर सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) से नीचे बनी हुई है, जो 4,301 डॉलर पर स्थित है। इसके अलावा, ऊपरी बॉलिंजर बैंड 4,471 डॉलर पर मौजूद है, जो किसी भी तेजी के प्रयास को कड़ाई से सीमित कर रहा है। तकनीकी संकेतकों में रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) लगभग 40 के स्तर पर है, जबकि मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) नकारात्मक बना हुआ है। ये दोनों संकेतक तेजी की गति के सीमित होने और कमजोर ट्रेंड के भीतर सुधारात्मक रुख का संकेत दे रहे हैं, जिसकी पुष्टि 19 के करीब मौजूद एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) से भी होती है। मूल्य स्तरों की बात करें तो नीचे की ओर पहला तात्कालिक समर्थन निचला बॉलिंजर बैंड 4,131 डॉलर के करीब प्रदान कर रहा है। इसके बाद 4,100 डॉलर का क्षैतिज स्तर एक अहम फ्लोर का काम करेगा। यदि बिकवाली का दबाव और गहराता है, तो कीमत 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर तक खिसक सकती है। दूसरी तरफ, यदि कीमत ऊपर की ओर सुधार करती है, तो सबसे पहले 4,301 डॉलर पर स्थित 20-दिवसीय SMA पर प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा, जिसके बाद अगला अवरोध 4,471 डॉलर के ऊपरी बैंड पर होगा। तकनीकी संरचना में एक मजबूत और टिकाऊ बदलाव तभी संभव होगा जब कीमत 4,700 डॉलर के संरचनात्मक बैरियर को निर्णायक रूप से पार कर ले। मूल्य संचय और संकट काल में केंद्रीय बैंकों की भूमिका मानव इतिहास में सोने ने हमेशा विनिमय के माध्यम और संपत्ति के सुरक्षित संचय (स्टोर ऑफ वैल्यू) के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान समय में आभूषण निर्माण और चमक के अलावा इसे एक प्रमुख सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के रूप में मान्यता प्राप्त है, जिसका अर्थ है कि संकट और अशांति के समय में इसे सबसे भरोसेमंद परिसंपत्ति माना जाता है। चूंकि सोना किसी विशेष देश या सरकार की वित्तीय स्थिति पर निर्भर नहीं करता, इसलिए इसे मुद्रा के अवमूल्यन और अनियंत्रित मुद्रास्फीति के खिलाफ एक अचूक सुरक्षा कवच के तौर पर देखा जाता है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। अशांत आर्थिक दौर में अपनी घरेलू मुद्राओं को स्थिरता प्रदान करने और अपनी वित्तीय साख को मजबूत करने के लिए केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाते हुए बड़े पैमाने पर सोना खरीदते हैं। पर्याप्त स्वर्ण भंडार किसी भी देश की साख और भुगतान क्षमता में वैश्विक विश्वास पैदा करता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों ने वर्ष 2022 में अपने भंडार में 1,136 टन सोना जोड़ा, जिसकी कुल कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से यह एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी स्वर्ण खरीद है। विशेष रूप से चीन, भारत और तुर्की जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार में तेजी से इजाफा कर रहे हैं। विदेशी मुद्रा बाजार, जोखिम संपत्तियां और अन्य परिसंपत्तियों की चाल सोने का अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी बॉन्ड्स के साथ विपरीत संबंध देखा जाता है, क्योंकि ये दोनों भी दुनिया भर में प्रमुख रिजर्व संपत्तियां हैं। सामान्य परिस्थितियों में जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोने की कीमतों में उछाल आता है। इसके अलावा इक्विटी और जोखिम संपत्तियों के साथ भी इसका विपरीत सहसंबंध होता है। शेयर बाजारों में तेजी आमतौर पर सोने की मांग को सुस्त करती है, जबकि जोखिम भरे बाजारों में गिरावट आने पर निवेशक सुरक्षित ठिकाने के रूप में सोने की शरण लेते हैं। भू-राजनीतिक तनाव या गहरी मंदी की आशंकाएं इस पीली धातु की मांग को अचानक भड़का सकती हैं। कम ब्याज दरें शून्य-प्रतिफल वाली धातु के लिए हमेशा अनुकूल होती हैं, जबकि पैसे की उच्च लागत सोने पर दबाव डालती है। वैश्विक बाजार के अन्य हिस्सों पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती का असर प्रमुख मुद्रा जोड़ियों और वैकल्पिक संपत्तियों पर भी साफ दिखाई दिया। एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD दो महीने के निचले स्तर 0.6900 के मध्य क्षेत्र में कंसोलिडेट करता नजर आया। ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष अगस्त में तेजी से घटकर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर सीमित असर पड़ा। वहीं, जापानी येन के मुकाबले डॉलर (USD/JPY) 158.00 से ऊपर अपने साप्ताहिक दायरे के शीर्ष पर बना रहा। अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध ने डॉलर की सुरक्षित मांग को सहारा दिया, जिससे बैंक ऑफ जापान की संभावित सख्ती का असर बेअसर साबित हुआ। दूसरी ओर, यूरोप में ऊर्जा संकट और डॉलर की मजबूती के बीच EUR/USD गिरकर 1.1312 पर आ गया, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है और जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। क्रिप्टो बाजार में हाइपरलिक्विड (HYPE) गुरुवार को 2 प्रतिशत गिर गया, जिससे पिछले दिन की 5 प्रतिशत की बढ़त घट गई। बुधवार को 5 मिलियन डॉलर के संस्थागत आउटफ्लो के बाद टोकन 90 डॉलर से नीचे सीमित बना हुआ है। इस प्रकार व्यापक वित्तीय बाजारों में डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड की बढ़त का असर विभिन्न संपत्तियों पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। इसका आप पर असर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है, जिसका सीधा असर आभूषण खरीदारों और कमोडिटी निवेशकों पर पड़ेगा। • भारत में खरीदारों पर असर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत सीमित दायरे में रहने से घरेलू बाजार में आभूषण खरीदारों को कीमतों में तत्काल बड़े उछाल से राहत मिलेगी। हालांकि, रुपये की चाल और स्थानीय करों के आधार पर ही अंतिम खुदरा कीमतें तय होंगी। • गोल्ड निवेशकों के लिए रणनीति: सोने में निवेश करने वाले ट्रेडर्स को 4,131 डॉलर और 4,100 डॉलर के समर्थन स्तरों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। मौजूदा मंदी के तकनीकी सेटअप को देखते हुए आक्रामक खरीदारी से बचना ही समझदारी होगी। • मुद्रा बाजार और आयात लागत: मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण अन्य स्थानीय मुद्राओं पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आयातित वस्तुओं की लागत पर असर पड़ेगा। डॉलर इंडेक्स के 101.85 के स्तर पर पहुंचने से विदेशी मुद्रा में व्यापार करने वाली कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। • फिक्स्ड इनकम संपत्तियों का आकर्षण: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के 5.34 प्रतिशत पर पहुंचने से सुरक्षित डेट और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है। निवेशक बिना रिटर्न वाली संपत्तियों के बजाय ब्याज देने वाले विकल्पों को तरजीह दे सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आर्थिक वृद्धि के मजबूत आंकड़ों और सरकारी बॉन्ड प्रतिफल के कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के कारण सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। हालांकि महंगाई के आंकड़े नरम रहे हैं, लेकिन अन्य कारकों ने बुलियन की मांग को सीमित कर दिया है। • बॉन्ड यील्ड में ऐतिहासिक उछाल: अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.34 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो साल 2002 के बाद का उच्चतम स्तर है। सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले इस ऊंचे ब्याज ने गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने में निवेश की अवसर लागत को काफी बढ़ा दिया है। • अमेरिकी डॉलर का वार्षिक शिखर: डॉलर इंडेक्स चढ़कर 101.85 के करीब पहुंच गया, जो इस साल का सबसे नया उच्च स्तर है। डॉलर के मजबूत होने से विदेशी मुद्राओं में खरीदारी करने वाले अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए सोना खरीदना काफी महंगा हो जाता है। • मजबूत आर्थिक वृद्धि का सहारा: अमेरिका की दूसरी तिमाही की GDP वृद्धि दर 2.2 प्रतिशत दर्ज की गई, जो विश्लेषकों के 1.5 प्रतिशत के अनुमान से कहीं बेहतर रही। मजबूत आर्थिक वृद्धि के कारण निवेशकों का भरोसा अमेरिकी संपत्तियों पर बढ़ा है, जिससे सोने में सुरक्षित निवेश की मांग घटी है। सवाल-जवाब 1. सोने की कीमत में मौजूदा सुस्ती का मुख्य कारण क्या है? अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के 5.34 प्रतिशत तक उछलने और डॉलर इंडेक्स के 101.85 पर पहुंचने से सोने की मांग पर दबाव बना हुआ है। 2. अगस्त में अमेरिकी कोर PCE मुद्रास्फीति दर कितनी रही? अगस्त में कोर PCE मुद्रास्फीति मासिक आधार पर 0.2 प्रतिशत और वार्षिक आधार पर 3.0 प्रतिशत रही, जो बाजार के अनुमान से कम है। 3. अमेरिका की दूसरी तिमाही की GDP वृद्धि दर क्या रही? संशोधित आंकड़ों के अनुसार दूसरी तिमाही में अमेरिकी GDP की वृद्धि दर 2.2 प्रतिशत रही, जो 1.5 प्रतिशत के पूर्वानुमान से अधिक थी। 4. चार्ट पर सोने के लिए प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर कौन से हैं? सोने के लिए नीचे की ओर 4,131 और 4,100 डॉलर पर सपोर्ट है, जबकि ऊपर की ओर 4,301 और 4,471 डॉलर पर कड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है। 5. वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने कितना सोना खरीदा था? वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने वर्ष 2022 में रिकॉर्ड 1,136 टन सोना खरीदा, जिसकी कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। https://trendkia.com/market/us-bond-yield-men-joradara-uchhala-se-gold-ki-raphtara-thami-pili-dhatu-4-167-dolara-ke-kariba-ataki-41289 TrendKia — Har trend, sabse pehle.