# अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी के बावजूद 0.7000 के स्तर से फिसला ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, वैश्विक तनाव के बीच डॉलर को मिला सहारा

> अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के बाद भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बना हुआ है, जबकि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और फेडरल रिजर्व के रुख ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-bond-yield-men-narami-ke-bavajuda-0-7000-ke-stara-se-phisala-australian-dollar-vaishvika-tanava-ke-bicha-usd-ko-mila-sahara-46741 · **Language:** Hindi
**Tags:** ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, अमेरिकी डॉलर, फेडरल रिजर्व, विदेशी मुद्रा बाजार, भारतीय रुपया, सोना

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत के साथ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अपनी हालिया बढ़त को बरकरार रखने में नाकाम रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान मामूली तेजी दर्ज करने के बावजूद यह 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे कारोबार करता दिखा और सोमवार की शुरुआत में छुए गए लगभग दो सप्ताह के उच्चतम स्तर से फिसल गया। हालांकि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बहु-वर्षीय उच्च स्तर से मामूली गिरावट देखी गई, जिसने अमेरिकी डॉलर पर कुछ दबाव बनाया, लेकिन व्यापक वैश्विक परिस्थितियों ने डॉलर के नुकसान को सीमित कर दिया है।

## भू-राजनीतिक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग
वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा शांति समझौते की उम्मीदों से ईंधन संकट कम होने और महंगाई घटने की संभावनाएं बनी हैं। इसके बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव अचानक बढ़ गया है, जिससे सुरक्षित परिसंपत्तियों की मांग में तेजी आई है। यमन में ईरान समर्थित हूती समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ अपना अभियान तेज करते हुए सप्ताहांत में रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बैलिस्टिक व क्रूज मिसाइलों और ड्रोनों से निशाना बनाया। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर फिर से हमले शुरू करने की संभावना जताई है। इस तनाव ने बाजार में जोखिम का माहौल बनाए रखा है, जिसके चलते सुरक्षित निवेश माने जाने वाले ग्रीनबैक यानी अमेरिकी डॉलर की खरीदारी निचले स्तरों पर लौट आई है।

## महंगाई के आगामी आंकड़े और फेड चेयरमैन के भाषण पर टिकी निगाहें
मुद्रा कारोबारी इस समय कोई भी आक्रामक दांव लगाने से बच रहे हैं। बाजार सहभागियों का ध्यान इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी महंगाई के महत्वपूर्ण आंकड़ों पर टिका हुआ है, जिसमें बुधवार को प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) और गुरुवार को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़े घोषित किए जाएंगे। इसके तुरंत बाद शुक्रवार को बैंकॉक में आईएमएफ और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श का संबोधन होना है। फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और ब्याज दरों पर वॉर्श के संकेत आने वाले दिनों में अमेरिकी डॉलर की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होंगे। ऑस्ट्रेलिया की बात करें तो रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा नवंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना कम होने से भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त सीमित हो गई है।

## वैश्विक वित्तीय तंत्र में अमेरिकी डॉलर की भूमिका और मौद्रिक नीति
अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य देशों में स्थानीय नोटों के समानांतर अनौपचारिक रूप से प्रचलन में है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, यह वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार में 88% से अधिक की हिस्सेदारी रखता है, जहां रोजाना औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर का लेनदेन होता है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा का स्थान लिया था। वर्ष 1971 में ब्रेटन वुड्स समझौते के तहत गोल्ड स्टैंडर्ड हटने से पहले तक इसका मूल्य सोने से जुड़ा हुआ था।

अमेरिकी डॉलर के मूल्य को निर्धारित करने वाला सबसे प्रमुख कारक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। केंद्रीय बैंक के दो मुख्य उद्देश्य हैं, मूल्य स्थिरता बनाए रखना और अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना। इसके लिए ब्याज दरों में समायोजन मुख्य हथियार है। जब महंगाई 2% के लक्ष्य से अधिक हो जाती है, तो फेड दरें बढ़ाता है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, महंगाई गिरने या बेरोजगारी बढ़ने पर ब्याज दरों में कटौती की जाती है, जो डॉलर पर दबाव डालती है। असाधारण संकट के समय केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) के तहत वित्तीय तंत्र में नकदी बढ़ाने के लिए डॉलर छापकर बॉन्ड खरीदता है, जो 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट में देखा गया था और इससे मुद्रा कमजोर होती है। वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) के तहत बॉन्ड खरीद रोक दी जाती है, जो आमतौर पर डॉलर के लिए सकारात्मक होती है।

## अन्य मुद्राओं, सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार का ताजा हाल
व्यापक विदेशी मुद्रा बाजार में जापानी येन के मुकाबले डॉलर (USD/JPY) 158.00 के स्तर से ऊपर सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। जापानी अधिकारियों द्वारा येन को सहारा देने के लिए हस्तक्षेप की अटकलों के बीच तेजी की गति सीमित रही है, जबकि जापान और अमेरिका में छुट्टियों के कारण कारोबारी तरलता पतली रही। भारतीय रुपये (INR) ने सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत शुरुआत की, जहां भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा डॉलर की मांग नियंत्रित करने के कदमों से USD/INR में 1% की गिरावट आई और यह 95.80 के करीब पहुंच गया। कमोडिटी बाजार में सोना अपने दो महीने के निचले स्तर $4,067 से उबरते हुए $4,200 के स्तर से ऊपर टिकने की कोशिश कर रहा है। वहीं क्रिप्टोकरेंसी बाजार में कॉइनग्लास के आंकड़ों के अनुसार लॉन्ग-टू-शॉर्ट अनुपात 1.01 पर पहुंचने के साथ कार्डानो (ADA) पिछले सप्ताह के 2.85% के करेक्शन के बाद प्रमुख सपोर्ट जोन से ऊपर लौट आया है।

## इसका आप पर असर
वैश्विक मुद्रा बाजारों में डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, यात्रा और आयात लागत पर पड़ता है।

- **भारत में:** रिजर्व बैंक द्वारा डॉलर की मांग पर नियंत्रण लगाने से रुपया 1% मजबूत होकर 95.80 के करीब आया है। इससे आयातकों के लिए बिल भुगतान में तात्कालिक राहत मिलेगी और कच्चे तेल व इलेक्ट्रॉनिक सामान की लागत स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने डॉलर इंडेक्स और सोने को निचली कीमतों पर सहारा दिया है। निवेशकों को आने वाले अमेरिकी महंगाई आंकड़ों और बैंकॉक में फेड चेयरमैन के भाषण से पहले अत्यधिक जोखिम भरे सौदों से बचना चाहिए।
- **अंतरराष्ट्रीय यात्रियों व छात्रों के लिए:** अमेरिकी डॉलर में स्थिरता और अन्य प्रमुख मुद्राओं पर दबाव से विदेश यात्रा और विदेशी शिक्षा के खर्च प्रभावित हो सकते हैं। विदेशी मुद्रा में शुल्क चुकाने वाले अभिभावकों को विनिमय दरों पर निरंतर नजर रखनी चाहिए।
- **कमोडिटी व क्रिप्टो व्यापारियों के लिए:** सोना $4,200 के स्तर से ऊपर संभल रहा है जबकि कार्डानो डेरिवेटिव्स में लॉन्ग पोजीशन बढ़ रही हैं। सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के बीच डिजिटल और पारंपरिक परिसंपत्तियों में सतर्कता आवश्यक है।

## ऐसा क्यों हुआ
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में गिरावट और अमेरिकी डॉलर को मिले समर्थन के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य तनाव, केंद्रीय बैंकों की नीतियां और आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़े प्रमुख कारण हैं।

- **पश्चिम एशिया में तनाव का बढ़ना:** यमन के हूती समूह ने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दोबारा हमले शुरू करने की चेतावनी दी। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ाकर सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की लिवाली तेज कर दी।
- **फेडरल रिजर्व का सख्त रुख:** अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के बावजूद अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर सख्त नीति बरकरार रहने की उम्मीद है। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के शुक्रवार को होने वाले संबोधन से पहले निवेशक डॉलर की बिकवाली से बच रहे हैं।
- **ऑस्ट्रेलियाई ब्याज दरों पर नरमी:** रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा नवंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना लगातार घट रही है। घरेलू ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कमजोर पड़ने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर अतिरिक्त दबाव बना है।
- **महंगाई के अहम आंकड़ों का इंतजार:** बुधवार को अमेरिकी उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) और गुरुवार को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े आने वाले हैं। महत्वपूर्ण डेटा से पहले बड़े संस्थागत निवेशक जोखिम भरे दांव लगाने के बजाय सुरक्षित मुद्राओं में बने रहना पसंद कर रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7000 के स्तर से नीचे क्यों फिसल गया?
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण अमेरिकी डॉलर में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त रुक गई।

### 2. पश्चिम एशिया में ताजा तनाव का मुख्य कारण क्या है?
यमन के हूती समूह ने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया, साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमलों की संभावना जताई है।

### 3. अमेरिकी डॉलर का वैश्विक मुद्रा बाजार में कितना हिस्सा है?
वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार के 88% से अधिक हिस्से और रोजाना 6.6 ट्रिलियन डॉलर के लेनदेन का प्रतिनिधित्व करता है।

### 4. भारतीय रुपये पर सोमवार को क्या असर दिखा?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा डॉलर मांग को नियंत्रित करने के कदमों के चलते USD/INR 1% गिरकर 95.80 के करीब आ गया, जिससे रुपये में मजबूती आई।

### 5. इस सप्ताह अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े कौन से बड़े आंकड़े आने वाले हैं?
बुधवार को प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) और गुरुवार को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़े जारी होंगे, जिसके बाद शुक्रवार को फेड चेयरमैन केविन वॉर्श का संबोधन होगा।

### 6. सोने और कार्डानो की कीमतों में क्या हलचल रही?
सोना अपने दो महीने के निचले स्तर $4,067 से सुधरकर $4,200 के ऊपर रहा, जबकि कार्डानो (ADA) 2.85% की साप्ताहिक गिरावट के बाद अपने अहम सपोर्ट से ऊपर लौट आया।

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