# अमेरिकी बॉन्ड यील्ड गिरने से संभला ब्रिटिश पाउंड, बैंक ऑफ इंग्लैंड के फैसले से पहले सीमित बढ़त

> अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के बाद डॉलर में मुनाफावसूली से पाउंड स्टर्लिंग में हल्की रिकवरी दर्ज की गई, हालांकि बैंक ऑफ इंग्लैंड के नीतिगत फैसले से पहले कारोबारी सतर्क नजर आ रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-bond-yields-girane-se-snbhala-british-pound-bank-of-england-ke-phaisale-se-pahale-simita-barhata-33698 · **Language:** Hindi
**Tags:** ब्रिटिश पाउंड, अमेरिकी डॉलर, बैंक ऑफ इंग्लैंड, फेडरल रिजर्व, विदेशी मुद्रा, ब्याज दरें, बैंक ऑफ जापान, वित्त

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को ब्रिटिश पाउंड में गिरावट का सिलसिला थमता दिखा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसमें हल्की रिकवरी दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में 1.3375 से 1.3370 के दायरे तक फिसलने के बाद, जो 30 जुलाई के बाद का निचला स्तर था, स्टर्लिंग ने अपनी तीन दिनों की लगातार गिरावट पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। हालांकि, बैंक ऑफ इंग्लैंड के आगामी ब्याज दर फैसले को लेकर निवेशकों के सतर्क रुख के कारण यह बढ़त 1.3400 के आंकड़े के आसपास सीमित बनी हुई है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, मुद्रा जोड़ी 1.34 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 1.34 के मुकाबले 0.27 प्रतिशत की मजबूती को दर्शाती है।

## ट्रेजरी यील्ड में नरमी से डॉलर में मुनाफावसूली
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई मामूली गिरावट ने ग्रीनबैक यानी अमेरिकी डॉलर में मुनाफावसूली को बढ़ावा दिया, जिससे पाउंड स्टर्लिंग को सहारा मिला। फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख के बाद डॉलर सात सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। बुधवार को समाप्त हुई अपनी सितंबर की बैठक में अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने वर्ष 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की। इस फैसले और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित निवेश के तौर पर मजबूत आधार प्रदान किया है, जिसके चलते पाउंड की तेज बढ़त पर लगातार दबाव बना हुआ है।

## तकनीकी स्तर और रेजिस्टेंस बाधाएं
तकनीकी चार्ट पर पाउंड स्टर्लिंग अल्पकालिक अवधि में दबाव में दिख रहा है। यह 1.3461 के स्तर पर स्थित 100-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के नीचे बना हुआ है। इसके अलावा, स्पॉट कीमतें 1.3409 के स्तर पर स्थित 50.0 प्रतिशत रिट्रेसमेंट के ठीक नीचे कारोबार कर रही हैं, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का दबाव हावी है। लाइव तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 38 के स्तर पर है, जबकि 20-दिवसीय EMA 1.35 और 200-दिवसीय EMA 1.34 पर दर्ज किया गया है। बॉलिंगर बैंड्स की सीमा 1.34 से 1.37 के बीच है और एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 22 पर सीमित दायरे का संकेत दे रहा है। यदि गिरावट बढ़ती है, तो 1.3346 पर 61.8 प्रतिशत रिट्रेसमेंट और उसके बाद 1.3256 पर स्थित 78.6 प्रतिशत फिबोनाची स्तर अहम सपोर्ट के रूप में काम कर सकते हैं, जहां खरीदारों की दोबारा सक्रियता की संभावना रहेगी।

## अन्य प्रमुख मुद्राओं और जोखिम वाली संपत्तियों का रुख
विदेशी मुद्रा बाजार के व्यापक परिदृश्य में, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में नए सिरे से लिवाली देखी और 0.7100 का स्तर दोबारा छू लिया। अमेरिकी डॉलर की तेज रैली थमने, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं और अमेरिका व ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीदों ने जोखिम-संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को मजबूती दी। दूसरी ओर, डॉलर/येन की जोड़ी एशियाई सत्र में 156.00 के नीचे संक्षिप्त गिरावट दर्ज करने के बाद सुधरती दिखी। पिछले दिन लगभग दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद यह जोड़ी तीन दिन के लाभ को रोकने की कोशिश में है। बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने के संभावित कदमों ने जापानी येन को समर्थन दिया है, जिससे डॉलर/येन की ऊपरी चाल सीमित रही। निवेशकों की नजर अब शुक्रवार को आने वाले बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले पर टिकी है।

## सोने की कीमतों में सुधार और जापानी मौद्रिक नीति का प्रभाव
कमोडिटी बाजार में, सोने की कीमतें गुरुवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत से पहले 4,300 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गईं। हालांकि, यह पिछले दिन दर्ज किए गए छह सप्ताह के निचले स्तर के काफी करीब बनी हुई हैं। डॉलर के उच्च स्तरों से थोड़ा फिसलने से सर्राफा को मामूली समर्थन मिला, लेकिन फेडरल रिजर्व के कड़े रुख और पश्चिम एशिया के तनाव ने गैर-उपज वाले इस धातु की बढ़त को सीमित दायरे में रखा है। वैश्विक वित्तीय ढांचे में जापान की शून्य के करीब ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। चूंकि अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि की थी, जापान इस मामले में अलग बना रहा। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति को और कड़ा करने की उम्मीदों के साथ, यह वैश्विक फंडिंग चक्र एक नए और चुनौतीपूर्ण दौर में प्रवेश कर रहा है।

## इसका आप पर असर
वैश्विक मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर फैसलों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, यात्रा और निवेश पर पड़ता है।

- **भारतीय यात्रियों और छात्रों पर असर:** ब्रिटेन और अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों तथा पर्यटकों के लिए मुद्रा रूपांतरण लागत सीधे तौर पर पाउंड और डॉलर की विनिमय दरों से तय होती है। विनिमय दर में 1.33 से 1.34 की स्थिरता से ट्यूशन फीस और यात्रा बजट की अल्पकालिक योजना बनाना थोड़ा आसान हो सकता है।
- **आयात-निर्यात कारोबार:** अंतरराष्ट्रीय व्यापार करने वाले भारतीय निर्यातकों को डॉलर और पाउंड दोनों में भुगतान के उतार-चढ़ाव पर नजर रखनी होगी। हेजिंग की उचित लागत तय करने के लिए केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसलों का समयबद्ध विश्लेषण जरूरी है।
- **वैश्विक निवेश और पोर्टफोलियो:** विदेशी मुद्रा संपत्तियों या अंतरराष्ट्रीय फंडों में निवेश करने वाले भारतीय निवेशकों के रिटर्न पर डॉलर सूचकांक का असर पड़ता है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बदलाव के कारण उभरते बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेश के प्रवाह में अस्थिरता आ सकती है।
- **गोल्ड और कमोडिटी खरीदार:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के $4,300 के आसपास टिके रहने से घरेलू आभूषण बाजार में कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। स्थानीय खुदरा खरीदारों को सोने में कोई बड़ा निवेश करने से पहले वैश्विक दरों की दिशा स्पष्ट होने का इंतजार करना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
ब्रिटिश पाउंड में आई हालिया रिकवरी और अमेरिकी डॉलर की चाल के पीछे ट्रेजरी यील्ड में बदलाव, केंद्रीय बैंकों के कड़े फैसले और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियां मुख्य वजहें हैं।

- **ट्रेजरी यील्ड में मुनाफावसूली:** अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में हालिया उछाल के बाद मामूली गिरावट आई, जिससे डॉलर में तेजी से मुनाफावसूली हुई। इस तकनीकी करेक्शन ने पाउंड समेत अन्य प्रतिस्पर्धी मुद्राओं को निचले स्तरों से उबरने में मदद की।
- **फेडरल रिजर्व की ब्याज दर बढ़ोतरी:** अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने सितंबर की बैठक में वर्ष 2023 के बाद पहली बार नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की। इस कदम ने ग्रीनबैक को मजबूत सपोर्ट दिया है, जिससे अन्य मुद्राओं की बढ़त का दायरा सीमित हो गया।
- **बैंक ऑफ इंग्लैंड का आगामी फैसला:** बाजार के कारोबारी बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति बैठक से पहले बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं। नीतिगत दर में बदलाव की अनिश्चितता ने मुद्रा जोड़ी को 1.3400 के स्तर के पास फंसाए रखा है।
- **भू-राजनीतिक तनाव और जापानी मौद्रिक बदलाव:** पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की मांग बनी हुई है। साथ ही, बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति को कड़ा किए जाने की संभावनाओं ने वैश्विक स्तर पर सस्ते येन से चलने वाले कैरी-ट्रेड ढांचे को प्रभावित किया है।

## सवाल-जवाब

### 1. ब्रिटिश पाउंड ने गुरुवार को किस स्तर से रिकवरी की?
पाउंड स्टर्लिंग ने 1.3375 से 1.3370 के दायरे से रिकवरी की, जो 30 जुलाई के बाद का इसका निचला स्तर था।

### 2. अमेरिकी डॉलर की तेजी में ठहराव का मुख्य कारण क्या रहा?
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट के चलते निवेशकों ने डॉलर में मुनाफावसूली की, जिससे उसकी तेजी थमी।

### 3. फेडरल रिजर्व ने अपनी सितंबर बैठक में क्या बड़ा कदम उठाया?
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने वर्ष 2023 के बाद पहली बार सितंबर बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की।

### 4. पाउंड के लिए ऊपर की ओर कौन से तकनीकी अवरोध मौजूद हैं?
पाउंड के लिए 1.3409 पर 50.0 प्रतिशत रिट्रेसमेंट और 1.3461 पर 100-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज प्रमुख रेजिस्टेंस स्तर हैं।

### 5. गिरावट की स्थिति में पाउंड को कहां सहारा मिल सकता है?
गिरावट बढ़ने पर 1.3346 पर 61.8 प्रतिशत रिट्रेसमेंट और 1.3256 पर 78.6 प्रतिशत फिबोनाची स्तर अहम सपोर्ट साबित हो सकते हैं।

### 6. सोने की कीमत किस महत्वपूर्ण स्तर के पार कारोबार कर रही थी?
गुरुवार के सत्र में सोना $4,300 प्रति औंस के आंकड़े के ऊपर कारोबार कर रहा था।

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