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  "type": "article",
  "title": "अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और कच्चे तेल के नरम पड़ने से सोने में उछाल, $4,165 के करीब पहुंचा भाव",
  "summary": "ट्रेजरी यील्ड में नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच एशियाई बाजार में सोने की कीमत बढ़कर लगभग $4,165 प्रति औंस हो गई। निवेशक अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी एफओएमसी मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुधवार के शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र में बहुमूल्य धातुओं के रुख में सकारात्मक बदलाव देखा गया, जहां सोने की कीमतें गति पकड़ते हुए लगभग $4,165 प्रति ट्रॉय औंस के स्तर पर पहुंच गईं। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों की मुद्रास्फीति तथा ब्याज दरों में बढ़ोतरी से जुड़ी चिंताओं को कम किया है। इसके साथ ही वित्तीय बाजारों के कारोबारी भविष्य की मौद्रिक नीति की दिशा को स्पष्ट रूप से समझने के लिए यूएस फेडरल रिजर्व की एफओएमसी मिनट्स के जारी होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।\n\nअमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल में नरमी का असर\nअमेरिकी बॉन्ड बाजार में पिछले सत्र के दौरान जोरदार तेजी के बाद इस सत्र में कुछ राहत देखने को मिली है। 10 साल की बेंचमार्क अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड पिछले सत्र में अप्रैल 2002 के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छूने के बाद 2 आधार अंक (bps) से अधिक गिरकर 5.286% पर आ गई। इसी तरह 30 साल की लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड 5.661% पर आ गई, जो इससे पहले मई 2002 के बाद के अनदेखे स्तरों तक चढ़ गई थी। छोटी अवधि वाली 2 साल की ट्रेजरी यील्ड भी 3 आधार अंक से अधिक फिसलकर 4.798% दर्ज की गई।\n\nसरकारी बॉन्ड यील्ड में आई इस कमी और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दामों में कमजोरी ने महंगाई को लेकर बने दबाव को कुछ हद तक हल्का कर दिया है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे और आक्रामक बढ़ोतरी किए जाने की आशंकाएं घटी हैं, जिसने प्रत्यक्ष रूप से पीली धातु यानी सोने को खरीदारी का नया सहारा प्रदान किया है। सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय बाजारों के कारोबारी अब अक्टूबर की नीतिगत बैठक में फेडरल रिजर्व द्वारा दरों को जस का तस रखने की करीब 79.5% संभावना मानकर चल रहे हैं।\n\nविश्लेषकों का आकलन और दीर्घकालिक अनुमान\nवित्तीय संस्थान कॉमर्सबैंक के विश्लेषकों ने इस हलचल पर गौर करते हुए कहा है कि सोना फिलहाल लगभग 4,150 अमेरिकी डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में स्थिर हो गया है। उनका कहना है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी को लेकर उपजी चिंताएं हाल के दिनों में कुछ हद तक कम हुई हैं। विश्लेषकों के अनुसार इस तेजी में ईटीएफ निवेशकों का रुख भी अहम साबित हो रहा है, जिन्होंने हाल के दिनों में अपने निवेश में कोई बहुत बड़ा इजाफा तो नहीं किया है, लेकिन कम से कम अपनी होल्डिंग्स में कटौती भी नहीं की है, जिससे कीमतों को निचले स्तरों पर टिकाव मिला है।\n\nलंबी अवधि के परिदृश्य पर नजर डालते हुए कॉमर्सबैंक ने मेटल फोकस नामक कंसल्टेंसी फर्म के वार्षिक प्रकाशन का भी उल्लेख किया। फर्म भविष्य को लेकर आशावादी रुख बनाए हुए है और उसका अनुमान है कि मध्यम अवधि में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के बूते 2027 में सोने की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं।\n\nफेड अधिकारी श्मिड का सख्त मौद्रिक रुख\nदूसरी तरफ फेडरल रिजर्व के अधिकारी श्मिड ने अपने ताजा संबोधन में मुद्रास्फीति को लेकर कड़ा रुख जाहिर किया है। एफएक्सएस स्पीचट्रैकर पर उनके बयान को 8/10 का स्कोर दिया गया, जो 7.5/10 के ऐतिहासिक औसत से अधिक है। यह स्कोर दर्शाता है कि फेड के भीतर महंगाई के जोखिमों पर सामान्य से अधिक ध्यान दिया जा रहा है। श्मिड ने जोर देकर कहा कि श्रम बाजार मजबूत स्थिति में बना हुआ है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने लगातार बनी हुई महंगाई पर निराशा व्यक्त की और स्पष्ट चेतावनी दी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अब मुद्रास्फीति के सबसे बड़े चालकों में से एक बन रही है।\n\nमूल्य स्थिरता को नीतिगत प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि फेडरल रिजर्व की साख दांव पर लगी है। उनके मुताबिक लंबी अवधि की ऊंची बॉन्ड यील्ड के बावजूद अल्पकालिक ब्याज दरों पर अभी भी काम किया जाना बाकी है। उनका यह भाषण स्पष्ट संकेत देता है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने और समय से पहले नीति में ढील देने के किसी भी कदम का विरोध करने के पक्ष में है। समय से पूर्व राहत देने से अमेरिकी डॉलर कमजोर हो सकता था और बॉन्ड यील्ड को फिर से समर्थन मिल सकता था।\n\nदैनिक चार्ट पर तकनीकी संकेत\nतकनीकी विश्लेषण के मोर्चे पर दैनिक चार्ट में XAU/USD पर दबाव बना हुआ है क्योंकि यह 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) और बोलिंगर बैंड्स की मध्य रेखा से नीचे कारोबार कर रहा है। यह तकनीकी बनावट अल्पावधि के रुख को मंदी की ओर झुकाए रखती है। हालांकि हालिया रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 40.69 पर दर्ज किया गया है, जो किसी अत्यधिक बिकवाली (ओवरसोल्ड) की स्थिति के बजाय केवल सामान्य मंदी की गति को दर्शाता है।\n\nऊपर की ओर शुरुआती प्रतिरोध स्तर $4,265 से $4,270 के दायरे में बना हुआ है, जहां बोलिंगर बैंड की मध्य रेखा और 100-दिवसीय SMA किसी भी संभावित उछाल को सीमित कर सकते हैं। इसके पार जाने पर $4,440 का बोलिंगर अपर बैंड अगला बड़ा अवरोध होगा। वहीं नीचे की तरफ पहला प्रमुख समर्थन बोलिंगर लोअर बैंड के करीब $4,090 पर मौजूद है। यदि कीमतें इस स्तर से नीचे निर्णायक रूप से टूटती हैं, तो दैनिक रुझान में एक गहरा सुधारात्मक दौर शुरू होने के रास्ते खुल सकते हैं।\n\nसुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ऐतिहासिक भूमिका\nमानव इतिहास में सोने ने हमेशा से मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में एक केंद्रीय भूमिका निभाई है। वर्तमान समय में अपनी चमक और आभूषणों के उपयोग से इतर यह कीमती धातु एक सुरक्षित ठिकाने (सेफ-हेवन एसेट) के रूप में प्रतिष्ठित है, जिसका सीधा अर्थ है कि अनिश्चितता या संकट के दौर में इसे एक उत्कृष्ट निवेश माना जाता है। चूंकि सोना किसी एक विशिष्ट जारीकर्ता या सरकार पर निर्भर नहीं करता, इसलिए इसे मुद्रास्फीति और गिरती मुद्राओं के खिलाफ एक मजबूत ढाल माना जाता है।\n\nदुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। अशांत और अस्थिर दौर में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को समर्थन देने के इरादे से केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाते हैं और सोने की खरीदारी करते हैं ताकि उनकी अर्थव्यवस्था और मुद्रा की मजबूती पर वैश्विक भरोसा बना रहे। उच्च स्वर्ण भंडार किसी भी देश की वित्तीय शोधन क्षमता (सॉल्वेंसी) के प्रति विश्वास का बड़ा स्रोत बनता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार केंद्रीय बैंकों ने वर्ष 2022 में अपने भंडारों में करीब 70 अरब डॉलर मूल्य का 1,136 टन सोना जोड़ा था, जो रिकॉर्ड रखे जाने के बाद से किसी एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी सालाना खरीदारी है। इस संदर्भ में चीन, भारत और तुर्की जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक तेजी से अपने स्वर्ण भंडार का विस्तार कर रहे हैं।\n\nअमेरिकी डॉलर, प्रतिभूतियों और अन्य परिसंपत्तियों से संबंध\nसोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ विपरीत संबंध देखा जाता है, जो दोनों ही वैश्विक स्तर पर प्रमुख आरक्षित और सुरक्षित निवेश संपत्तियां हैं। जब डॉलर की कीमत घटती है, तो सोने के भाव में तेजी आने की प्रवृत्ति होती है, जिससे निवेशकों और केंद्रीय बैंकों को कठिन समय में अपनी संपत्तियों में विविधता लाने में मदद मिलती है। इसी तरह सोने का जोखिम वाली परिसंपत्तियों के साथ भी विपरीत संबंध है। शेयर बाजार में तेजी आने पर अक्सर सोने की कीमतें सुस्त पड़ जाती हैं, जबकि अधिक जोखिम वाले बाजारों में भारी बिकवाली का माहौल इस पीली धातु के पक्ष में काम करता है।\n\nसोने की चाल कई तरह के कारकों से संचालित होती है। भू-राजनीतिक अस्थिरता या किसी गंभीर आर्थिक मंदी की आशंकाएं सेफ-हेवन दर्जे के कारण सोने के दाम को बहुत तेजी से ऊपर ले जा सकती हैं। ब्याज न देने वाली परिसंपत्ति होने के चलते कम ब्याज दरों के माहौल में सोना चमकता है, जबकि पूंजी की बढ़ती लागत इस धातु पर दबाव बनाती है। फिर भी अधिकांश उतार-चढ़ाव इस बात पर निर्भर करते हैं कि अमेरिकी डॉलर का व्यवहार कैसा रहता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना डॉलर में ही आंका जाता है (XAU/USD)। मजबूत डॉलर सोने की कीमत को नियंत्रित रखता है, जबकि कमजोर डॉलर सोने के भाव को नई ऊंचाई देने की क्षमता रखता है।\n\nमुद्रा बाजारों में अन्य प्रमुख उतार-चढ़ाव\nवैश्विक मुद्रा बाजार में भी समानांतर गतिविधियां दर्ज की गईं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) अपनी बढ़त को आगे बढ़ाते हुए लगातार तीसरे दिन मजबूत हुआ और मंगलवार को महत्वपूर्ण 0.7000 के स्तर के बेहद करीब कारोबार कर रहा था। जोखिम परिसंपत्तियों में व्यापक सुधार ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की तेजी को बनाए रखा, जबकि अमेरिकी डॉलर में ताजा बिकवाली के दबाव ने भी इसमें योगदान दिया।\n\nवहीं USD/JPY की जोड़ी मंगलवार को शुरुआती यूरोपीय कारोबार में फिर से 158.00 के पार निकल गई। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की सख्त मौद्रिक नीति संबंधी अपेक्षाओं और हस्तक्षेप के बढ़ते जोखिमों के बावजूद जापानी येन में कोई खास उत्साह नहीं दिखा। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तरों ने अमेरिकी डॉलर को उसके साल के उच्चतम स्तर के करीब बनाए रखा, भले ही अक्टूबर में फेड की दर वृद्धि की उम्मीदें घट रही हों। जापान के महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों और BoJ की समयसीमा के स्पष्ट न होने के बीच येन 158.00 के पास मंडरा रहा है। उधर यूरोप में भी केंद्रीय बैंक के सामने जटिल स्थिति है, जहां महंगाई लक्ष्य से दोगुनी रहने पर सामान्यतः दरें बढ़ाई जाती हैं, लेकिन इस बार बॉन्ड बाजार पहले ही सख्ती का हिस्सा संभाल चुका है, जिससे यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) के समक्ष एक गंभीर असमंजस खड़ा हो गया है। मंगलवार को सोना $4,200 के महत्वपूर्ण स्तर को फिर से हासिल करने के लिए संघर्ष करता दिखा, हालांकि ट्रेजरी यील्ड में गिरावट ने इसके निचले स्तरों को मजबूती दी है।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल में आई गिरावट से सोने की कीमतों में सुधार हुआ है, जिससे निवेशकों और खुदरा खरीदारों की लागत पर सीधा असर पड़ सकता है।\n\n• भारत में: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के मजबूत होने और कच्चे तेल के नरम रहने से घरेलू स्तर पर सोने की खरीदारी महंगी हो सकती है जबकि आयात बिल पर दबाव कम होगा। आगामी त्योहारी और वैवाहिक सीजन में आभूषण खरीदारों को अपनी खरीदारी योजना बनाते समय कीमतों पर नजर रखनी होगी।\n• वैश्विक निवेशकों के लिए: बॉन्ड यील्ड में नरमी आने से गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने में निवेश की आकर्षण क्षमता बढ़ती है। ईटीएफ या प्रत्यक्ष सोने में निवेश करने वाले निवेशक पोर्टफोलियो में स्थिरता के लिए होल्डिंग्स बनाए रख सकते हैं।\n• ब्याज दरों के रुझान पर: सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार अक्टूबर में फेड द्वारा दरें न बढ़ाने की लगभग 79.5% संभावना से ऋण बाजारों में अनिश्चितता घटी है। इससे वैश्विक स्तर पर कर्ज की लागत में तुरंत नई बढ़ोतरी की आशंका कुछ समय के लिए टलती दिख रही है।\n• मुद्रा बाजार पर असर: अमेरिकी डॉलर में नरमी और सोने की मजबूती से अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं को निचले स्तरों पर थोड़ी राहत मिलती है। आयात और निर्यात से जुड़े कारोबारी मुद्रा विनिमय दरों के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर अपने सौदे हेज कर सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में रिकॉर्ड स्तरों से आई गिरावट और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दामों में कमजोरी ने महंगाई तथा ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी की चिंताओं को कम किया है।\n\n• बॉन्ड यील्ड में सुधार: 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 2 आधार अंक गिरकर 5.286% और 30 साल की यील्ड 5.661% पर आने से सोने पर दबाव कम हुआ। लंबी अवधि की यील्ड में दो दशक के उच्चतम स्तर से आए इस सुधार ने निवेशकों को फिर से सर्राफा बाजार की ओर आकर्षित किया।\n• कच्चे तेल में गिरावट: तेल की कीमतों में कमी आने से समग्र लागत मुद्रास्फीति को लेकर पैदा हुआ डर कम हुआ है। इससे केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को और अधिक बढ़ाने की बाध्यता तात्कालिक रूप से कमजोर पड़ी है।\n• फेड नीति पर उम्मीदें: बाजारों में लगभग 79.5% संभावना जताई जा रही है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखेगा। दरों के स्थिर रहने की इस उम्मीद ने सोने की कीमतों को आधार प्रदान किया है।\n• सुरक्षित निवेश मांग: केंद्रीय बैंकों द्वारा स्वर्ण भंडार में रिकॉर्ड वृद्धि और ईटीएफ निवेशकों द्वारा बिकवाली न करने से कीमतों को ठोस समर्थन मिला है। इतिहास में अनिश्चित आर्थिक और भू-राजनीतिक माहौल हमेशा सोने की सेफ-हेवन खरीदारी को बढ़ावा देता रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सोने की कीमत बढ़कर किस स्तर पर पहुंच गई?\nबुधवार के शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र में सोने की कीमत मजबूत होकर लगभग $4,165 प्रति ट्रॉय औंस पर पहुंच गई।\n\n2. अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में क्या बदलाव दर्ज किया गया?\n10-वर्षीय यील्ड 2 बीपीएस से अधिक गिरकर 5.286%, 30-वर्षीय यील्ड घटकर 5.661% और 2-वर्षीय यील्ड 3 बीपीएस फिसलकर 4.798% पर आ गई।\n\n3. फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक को लेकर बाजार का क्या अनुमान है?\nसीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार कारोबारी लगभग 79.5% संभावना मान रहे हैं कि फेडरल रिजर्व अक्टूबर की नीतिगत बैठक में ब्याज दरें नहीं बढ़ाएगा।\n\n4. दैनिक चार्ट पर सोने के लिए मुख्य तकनीकी स्तर क्या हैं?\nशुरुआती प्रतिरोध $4,265 से $4,270 के दायरे में है, जबकि नीचे की ओर तात्कालिक समर्थन बोलिंगर लोअर बैंड के पास $4,090 पर स्थित है।\n\n5. केंद्रीय बैंकों ने 2022 में कितना सोना खरीदा था?\nवर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक केंद्रीय बैंकों ने 2022 में करीब 70 अरब डॉलर मूल्य का 1,136 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा था।",
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  "publishedAt": "2026-10-06",
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