अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.6980 के पास संभला, महंगाई आंकड़ों पर टिकी नजर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी और जोखिम लेने के रुझान से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.6980 के करीब पहुंचा, हालांकि आगामी अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों के चलते 0.7000 का स्तर पार करने में संघर्ष जारी है। वैश्विक मुद्रा बाजार में शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) ने अमेरिकी डॉलर (USD) के मुकाबले मजबूती दिखाई और यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान करीब 0.3 प्रतिशत की बढ़त के साथ 0.6980 के स्तर के आसपास पहुंच गया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई हालिया गिरावट ने जोखिम लेने वाले निवेशकों को सहारा दिया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा में उछाल देखा गया। इसके बावजूद यह मुद्रा जोड़ी 0.6990 और 0.7000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर निकलने के लिए कड़ा संघर्ष कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आया यह करेक्शन अस्थायी साबित हो सकता है क्योंकि फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी करने की प्रबल संभावना बनी हुई है। ट्रेजरी यील्ड में नरमी और बाजार का मूड अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड में 0.42 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5.26 प्रतिशत के आसपास कारोबार दर्ज किया गया, लेकिन यह स्तर तब सामने आया जब यील्ड 5.36 प्रतिशत के शिखर को पार करने में नाकाम रहने के बाद पीछे हटी। बॉन्ड यील्ड में आई इस मामूली नरमी ने शेयर बाजारों और कमोडिटी से जुड़ी मुद्राओं को थोड़ी राहत दी। शुक्रवार को एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.33 प्रतिशत चढ़कर करीब 7,800 के स्तर पर पहुंच गए, जो निवेशकों के बीच मजबूत कारोबारी धारणा को दर्शाता है। मुद्रा बाजार के हीटमैप के अनुसार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर शुक्रवार को प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में शीर्ष प्रदर्शन करने वाली करेंसी रही और इसने विशेष रूप से जापानी येन के मुकाबले सबसे जोरदार बढ़त दर्ज की। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल का दबाव ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की आगे की बढ़त सीमित रहने के पीछे एक बड़ा कारण भू-राजनीतिक तनाव का बरकरार रहना है। आईएनजी के रणनीतिकारों ने अपने नोट में स्पष्ट किया कि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में जो ठहराव आया है, उसे किसी बड़े करेक्शन की शुरुआत नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि वे किसी व्यापक गिरावट के संकेत नहीं देख रहे हैं। रणनीतिकारों ने वैश्विक पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए बताया कि यद्यपि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा, फिर भी तेल बाजार उस भू-राजनीतिक प्रीमियम को छोड़ने को तैयार नहीं है जिसने खाड़ी आपूर्ति में सुधार के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनाए रखा है। ऊर्जा कीमतों का यह उच्च स्तर महंगाई को भड़काए रखने का काम कर रहा है। अमेरिकी सीपीआई आंकड़ों पर टिका अगला रुख मुद्रा बाजार के सहभागियों की नजर अब अमेरिका के सितंबर महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आंकड़ों पर टिकी हुई है, जो बुधवार को जारी होने वाले हैं। यह मुद्रास्फीति रिपोर्ट अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की भावी दिशा तय करने के लिए सबसे बड़ा उत्प्रेरक बनेगी। बाजार को उम्मीद है कि ये आंकड़े फेडरल रिजर्व की ब्याज दर संबंधी अपेक्षाओं को काफी हद तक प्रभावित करेंगे। यदि मुद्रास्फीति के आंकड़े अनुमान से अधिक मजबूत आते हैं, तो ट्रेजरी यील्ड में दोबारा तेजी लौट सकती है, जिससे अमेरिकी डॉलर को नई मजबूती मिलेगी और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव गहरा जाएगा। तकनीकी विश्लेषण और लाइव मार्केट संकेत दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो यह मुद्रा जोड़ी 0.6978 पर कारोबार कर रही है और निकट अवधि में मंदी का रुख बनाए हुए है क्योंकि स्पॉट भाव 0.7019 पर स्थित 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के नीचे बना हुआ है। इस अल्पकालिक ट्रेंड गेज के नीचे फिसलने से संकेत मिलता है कि किसी भी उछाल पर बिकवाली का दबाव बना रहेगा। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) लगभग 39 के आसपास है, जो कमजोर लेकिन ओवरसोल्ड न होने वाले मोमेंटम का संकेत देता है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, AUD/USD 0.6979 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद 0.6964 से 0.21 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। 52-हफ्तों का दायरा 0.6422 से 0.7277 के बीच रहा है और वॉल्यूम 20-दिन के औसत के बराबर है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय RSI 38 पर है और एमएसीडी मंदी का रुख दिखा रहा है। 20-दिवसीय ईएमए 0.7024, 50-दिवसीय ईएमए 0.7058 और 200-दिवसीय ईएमए 0.6969 पर स्थित है, जहां ईएमए 50 के ईएमए 200 से ऊपर होने के कारण लॉन्ग-टर्म अपट्रेंड में गोल्डन क्रॉस बना हुआ है। बॉलिंजर बैंड्स 0.6890 से 0.7184 के बीच हैं और भाव बैंड के अंदर है। इसके अलावा एडीएक्स 40 पर ट्रेंडिंग स्थिति दिखा रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 33 और सिग्नल लाइन 30 पर है। ट्रेडिंग स्तरों के संदर्भ में पिवट पॉइंट 0.6976 पर है, जिसके लिए रेजिस्टेंस R1 0.6992 और R2 0.7006 पर है, जबकि सपोर्ट S1 0.6962 और S2 0.6946 पर स्थित है। 20-दिन का समर्थन 0.6905 और प्रतिरोध 0.7159 के करीब देखा जा रहा है। रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ का मुद्रा बाजार पर प्रभाव वित्तीय बाजार में रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ की अवधारणाएं निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता को दर्शाती हैं। जब बाजार रिस्क-ऑन मोड में होता है, तब निवेशक भविष्य के प्रति आशान्वित रहते हैं और अधिक रिटर्न के लिए इक्विटी तथा उभरते बाजारों की संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। ऐसे समय में शेयर बाजारों में तेजी आती है, सोने को छोड़कर अन्य कमोडिटीज के भाव बढ़ते हैं क्योंकि आर्थिक वृद्धि की बेहतर संभावनाओं से मांग बढ़ती है। इसके विपरीत रिस्क-ऑफ माहौल में निवेशक घबराकर सरकारी बॉन्ड, सोना और सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राओं जैसे अमेरिकी डॉलर, जापानी येन और स्विस फ्रैंक में पूंजी लगाने लगते हैं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), कनाडाई डॉलर (CAD), न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) के साथ-साथ रूसी रूबल (RUB) और दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR) जैसी मुद्राएं रिस्क-ऑन दौर में मजबूत होती हैं क्योंकि इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं कमोडिटी निर्यात पर अत्यधिक निर्भर हैं। वैश्विक स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद से कच्चे माल की मांग बढ़ती है, जिसका सीधा लाभ इन मुद्राओं को मिलता है। दूसरी ओर रिस्क-ऑफ दौर में अमेरिकी डॉलर अपनी वैश्विक आरक्षित मुद्रा की हैसियत के कारण बढ़ता है क्योंकि निवेशक अमेरिकी सरकारी ऋण को पूरी तरह सुरक्षित मानते हैं। जापानी येन में घरेलू निवेशकों द्वारा जापानी सरकारी बॉन्ड रखे जाने के कारण स्थिरता रहती है, जबकि स्विस फ्रैंक को स्विट्जरलैंड के सख्त बैंकिंग कानूनों और पूंजी सुरक्षा के चलते पनाहगाह माना जाता है। अन्य वैश्विक संपत्तियों और मुद्राओं का प्रदर्शन शुक्रवार को वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में अन्य मुद्राओं और संपत्तियों में भी महत्वपूर्ण हलचल देखी गई। एशियाई सत्र में AUD/USD ने सप्ताह के निचले स्तर से उछाल दर्ज करते हुए 0.7000 के स्तर को छूने का प्रयास किया था, जिसे रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की आक्रामक मौद्रिक नीति संबंधी अपेक्षाओं और अमेरिकी डॉलर के 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे रहने से सहारा मिला। उधर USD/JPY की जोड़ी 158.00 के करीब टिकी रही, क्योंकि शुक्रवार को आए आंकड़ों से पता चला कि जापान में घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट आई है, जिसने जापानी येन को कमजोर किया। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने डॉलर पर दबाव बनाए रखा। कमोडिटी बाजार में सोना दो महीने के निचले स्तर से उबरते हुए शुक्रवार को फिर से 4,200 डॉलर के स्तर को छूने में कामयाब रहा। तेल की कीमतों और ट्रेजरी यील्ड में नरमी के साथ अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी ने सोने को सहारा दिया, हालांकि दैनिक आरएसआई अभी भी मंदी के संकेत दे रहा है। इसके अतिरिक्त कनाडा के सांख्यिकी विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी किए जाने वाले सितंबर लेबर फोर्स सर्वे पर भी बाजार की नजर है, जहां अगस्त की भारी गिरावट के बाद रोजगार में मामूली सुधार की उम्मीद की जा रही है। यह रिपोर्ट इसलिए भी खास है क्योंकि यह 22 अगस्त से लागू हुए नए अमेरिकी शुल्कों के प्रभाव को पूरी तरह दर्शाने वाला पहला आधिकारिक आंकड़ा होगा। इसका आप पर असर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव और वैश्विक मुद्रा बाजार की इस हलचल से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों पर सीधा असर पड़ेगा। • मुद्रा विनिमय और आयातकों पर: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में मजबूती से ऑस्ट्रेलिया से आयात होने वाली वस्तुओं की लागत में मामूली बदलाव आ सकता है। भारतीय व्यापारियों और विदेशी मुद्रा निवेशकों को आगामी अमेरिकी सीपीआई डेटा से पहले सतर्क रहकर हेजिंग करनी चाहिए। • वैश्विक निवेश और शेयर बाजार: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी से वैश्विक इक्विटी बाजारों को अल्पकालिक राहत मिली है। यदि अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़े उम्मीद से ज्यादा आते हैं, तो शेयर बाजारों में दोबारा बिकवाली देखने को मिल सकती है। • कच्चे तेल और ईंधन कीमतों पर: भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहने से ईंधन लागत ऊंची बनी रहेगी। इससे दैनिक परिवहन और आयात आधारित अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का दबाव बना रहेगा। • सोना और सुरक्षित निवेश: सोने की कीमतों में 4,200 डॉलर के स्तर पर स्थिरता देखने को मिल रही है। सुरक्षित निवेश चाहने वाले खरीदारों को ब्याज दरों के नए संकेतों पर नजर रखनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में यह उछाल और अमेरिकी डॉलर की चाल मुख्य रूप से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट और बाजार में बने अल्पकालिक रिस्क-ऑन रुझान के कारण हुई है। • ट्रेजरी यील्ड में तकनीकी करेक्शन: अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.36 प्रतिशत के स्तर को पार करने में विफल रही और 5.26 प्रतिशत के करीब वापस आ गई। इस गिरावट ने अमेरिकी डॉलर की तेजी पर कुछ समय के लिए ब्रेक लगा दिया। • फेड की ब्याज दर नीति की अनिश्चितता: बाजार को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व इस साल एक और ब्याज दर वृद्धि कर सकता है। आगामी बुधवार को आने वाले सितंबर सीपीआई आंकड़ों से पहले निवेशक नए दांव लगाने से बच रहे हैं। • भू-राजनीतिक जोखिम और महंगे क्रूड का प्रभाव: ईरान पर चुनाव पूर्व किसी हमले की संभावना न होने के बावजूद कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। इस महंगाई कारक ने बॉन्ड यील्ड में किसी बड़ी गिरावट को रोक रखा है। सवाल-जवाब 1. शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर किस स्तर पर कारोबार कर रहा था? ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यूरोपीय कारोबारी सत्र में 0.3 प्रतिशत की बढ़त के साथ करीब 0.6980 के स्तर पर पहुंच गया था। 2. अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में क्या बदलाव दर्ज किया गया? अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 0.42 प्रतिशत बढ़कर 5.26 प्रतिशत के करीब थी, जो 5.36 प्रतिशत के स्तर से पीछे हटने के बाद दर्ज हुई। 3. बाजार के लिए अगला सबसे बड़ा आर्थिक ट्रिगर क्या है? बाजार की नजर बुधवार को जारी होने वाले अमेरिका के सितंबर सीपीआई (मुद्रास्फीति) आंकड़ों पर टिकी है, जो फेड की ब्याज दर नीति को दिशा देंगे। 4. क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर क्यों बनी हुई हैं? सप्लाई में सुधार के बावजूद भू-राजनीतिक तनाव और जोखिम प्रीमियम बने रहने के कारण कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने हुए हैं। https://trendkia.com/market/us-bond-yields-men-giravata-ke-bicha-australian-dollar-0-6980-ke-pasa-snbhala-us-cpi-para-najara-45425 TrendKia — Har trend, sabse pehle.