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  "type": "article",
  "title": "अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से डॉलर लुढ़का, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच क्रूड और शेयर बाजार में हलचल",
  "summary": "अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के कारण डॉलर में कमजोरी आई है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.5 प्रतिशत से अधिक उछल गया है।",
  "content": "वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर को अमेरिकी डॉलर पर बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट के चलते डॉलर की विनिमय दरों में लगातार सुस्ती दर्ज की गई। इस कारोबारी सत्र में ग्रीनबैक प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले कमजोर साबित हुआ, जहां ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले इसमें सबसे तीव्र गिरावट दर्ज की गई। मुद्रा बाजार के विभिन्न समीकरणों में व्यापक उथल-पुथल रही, क्योंकि निवेशक एक ओर गिरती यील्ड का आकलन कर रहे थे, तो दूसरी ओर मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक अस्थिरता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों के भावी कदमों का विश्लेषण करने में जुटे थे।\n\nभू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल\nमध्य पूर्व के राजनीतिक घटनाक्रमों ने ऊर्जा बाजार और विदेशी मुद्रा दोनों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को राजनयिक रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि अमेरिका को अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटानी होगी और कूटनीतिक रूप से संघर्ष समाप्त करने की गंभीरता दिखानी होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि अमेरिका की ओर से न्यायसंगत और सम्मानजनक समाधान की सच्ची इच्छा दिखाई देती है, तो ईरान कूटनीति को एक और मौका देने के लिए तैयार है। इस कूटनीतिक गतिरोध और अनिश्चितता का असर कच्चे तेल के व्यापार पर तुरंत दिखाई दिया। बुधवार को मामूली नुकसान दर्ज करने के बाद गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर चढ़ीं, जिसमें वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI का भाव दिन के कारोबार में 1.5 प्रतिशत से अधिक बढ़कर कारोबार करने लगा। कच्चे तेल की यह मजबूती सीधे तौर पर वैश्विक महंगाई की चिंताओं को फिर से हवा दे रही है।\n\nविदेशी मुद्रा बाजार की संरचना और हीट मैप का गणित\nमुद्रा बाजार के उतार-चढ़ाव को मापने के लिए उपयोग किए जाने वाले हीट मैप में इस हफ्ते डॉलर का प्रदर्शन अधिकांश प्रमुख प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कमजोर दर्शाया गया। किसी भी मुद्रा विनिमय तालिका में बेस करेंसी को बाईं ओर के कॉलम से चुना जाता है, जबकि कोट करेंसी को शीर्ष पंक्ति से निर्धारित किया जाता है। जब निवेशक अमेरिकी डॉलर को बेस करेंसी के रूप में चुनते हैं और क्षैतिज रेखा पर जापानी येन की ओर बढ़ते हैं, तो प्रदर्शित प्रतिशत परिवर्तन USD/JPY के अनुपात को व्यक्त करता है। इस गणित के आधार पर गुरुवार को डॉलर सूचकांक में व्यापक गिरावट स्पष्ट रूप से दिखाई दी, क्योंकि अन्य अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं सापेक्षिक रूप से मजबूत स्थिति प्रदर्शित कर रही थीं।\n\nजापानी येन के सामने पस्त हुआ डॉलर\nबुधवार को अनिश्चित दिशा में रहने के बाद USD/JPY की जोड़ी गुरुवार को भारी मंदी के दबाव में आ गई। इस मुद्रा जोड़ी में तेज बिकवाली देखी गई और यह अक्टूबर की शुरुआत के बाद के अपने सबसे निचले स्तर 157.20 के नीचे फिसल गया। गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यह जोड़ी एक सप्ताह के निचले स्तर तक लुढ़क गई। बाजार में मंदी के कारोबारी अब कोई नया दांव लगाने से पहले 157.00 के मध्य क्षेत्र के आसपास बने बहु-सप्ताह के समर्थन स्तर के टूटने का इंतजार कर रहे हैं। दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं और मध्य पूर्व की चिंताओं के बावजूद, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आई हालिया गिरावट ने डॉलर को तीन सप्ताह के निचले स्तर के करीब दबाए रखा है। इसके अतिरिक्त, बैंक ऑफ जापान यानी BoJ की ओर से नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें और जापानी मुद्रा बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को मजबूत सहारा दिया है, जिससे इस जोड़ी पर नीचे की ओर दबाव गहरा गया है।\n\nऑस्ट्रेलियाई डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंक के संकेत\nऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले भी अमेरिकी डॉलर की चाल काफी उतार-चढ़ाव भरी रही। AUD/USD जोड़ी गुरुवार की शुरुआत में महीने के उच्चतम स्तर को छूने के बाद पीछे हट गई और एशियाई सत्र के दौरान फिसलकर 0.7000 के स्तर पर आ गई। मध्य पूर्व में तनाव के और अधिक बढ़ने की खबरों ने जोखिम के प्रति संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कुछ हद तक कमजोर किया। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी RBA के अधिकारियों की ओर से आई हालिया सख्त टिप्पणियां ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को निचले स्तरों पर ठोस समर्थन दे सकती हैं। इसके साथ ही, फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की संभावनाओं और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद डॉलर पर बना व्यापक बिकवाली का माहौल AUD/USD के नुकसान को सीमित रखने का काम कर रहा है।\n\nवैश्विक वित्तीय तंत्र में अमेरिकी डॉलर का ऐतिहासिक महत्व\nअमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा है, लेकिन इसके साथ ही यह दुनिया भर के कई अन्य देशों की वास्तविक यानी डी फैक्टो मुद्रा भी बन चुकी है, जहां यह स्थानीय नोटों के साथ खुले तौर पर प्रचलन में पाई जाती है। तरलता और व्यापार की दृष्टि से यह दुनिया में सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा के कुल टर्नओवर में 88 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी अमेरिकी डॉलर की है, जो प्रतिदिन औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर के लेनदेन के बराबर बैठती है। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद ब्रिटिश पाउंड का प्रभाव कम होने पर अमेरिकी डॉलर ने दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा का स्थान हासिल किया था। अपने लंबे इतिहास के अधिकांश हिस्से में अमेरिकी डॉलर सोने द्वारा समर्थित था, लेकिन 1971 में हुए ब्रेटन वुड्स समझौते के टूटने के साथ ही गोल्ड स्टैंडर्ड की व्यवस्था हमेशा के लिए समाप्त हो गई।\n\nफेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और डॉलर का मूल्य निर्धारण\nअमेरिकी डॉलर के मूल्य को निर्धारित करने वाला सबसे निर्णायक एकल कारक फेडरल रिजर्व द्वारा बनाई जाने वाली मौद्रिक नीति है। फेडरल रिजर्व के पास मुख्य रूप से दो वैधानिक जनादेश हैं: मूल्य स्थिरता हासिल करना यानी मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखना और अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना। इन दोनों लक्ष्यों को संतुलित करने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों का समायोजन है। जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं और महंगाई फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर चली जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। दरों में यह बढ़ोतरी डॉलर में निवेश के आकर्षण को बढ़ाती है, जिससे ग्रीनबैक का मूल्य मजबूत होता है। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत से नीचे आ जाती है या बेरोजगारी की दर बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो फेड अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जो आम तौर पर डॉलर की विनिमय दरों पर दबाव डालती है।\n\nक्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग की भूमिका\nअत्यधिक गंभीर और संकटपूर्ण आर्थिक परिस्थितियों में फेडरल रिजर्व पारंपरिक ब्याज दर कटौती से आगे बढ़कर नए डॉलर छापने और क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी QE लागू करने का निर्णय लेता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत केंद्रीय बैंक अवरुद्ध वित्तीय प्रणाली में ऋण के प्रवाह को तेजी से बढ़ाने का प्रयास करता है। यह एक गैर-मानक नीतिगत उपाय है, जिसका सहारा तब लिया जाता है जब वित्तीय संस्थानों के बीच काउंटरपार्टी डिफॉल्ट के डर से आपसी उधारी पूरी तरह सूख जाती है। वर्ष 2008 के भीषण वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान उपजे क्रेडिट क्रंच से निपटने के लिए फेड ने इसी हथियार का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था। इस प्रक्रिया में केंद्रीय बैंक अतिरिक्त डॉलर छापकर मुख्य रूप से वित्तीय संस्थानों से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदता है। भारी मात्रा में नकदी आने से ऋण उपलब्धता तो सुधरती है, लेकिन QE की यह नीति आम तौर पर अमेरिकी डॉलर को कमजोर करती है। इसके ठीक उलट, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी QT की व्यवस्था में फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड से मिलने वाले मूलधन का नए बॉन्ड में पुनर्निवेश नहीं करता। यह प्रक्रिया बाजार से डॉलर की तरलता को घटाती है, जो सामान्य परिस्थितियों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती का आधार बनती है। समष्टि अर्थशास्त्र के जानकार एरेन सेंगेज़र जैसे विशेषज्ञ इन व्यापक आर्थिक आंकड़ों, केंद्रीय बैंक नीतियों और राजनीतिक घटनाओं के अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रभावों का सूक्ष्म विश्लेषण करते हैं।\n\nसोने में फिसलन और महंगाई की नई आशंकाएं\nविदेशी मुद्रा बाजार के अलावा कीमती धातुओं में भी गुरुवार को उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सोना 4,100 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे गिर गया और इसने एक सप्ताह का नया निचला स्तर छू लिया। कच्चे तेल की कीमतों में आई उछाल ने बाजार में ऊर्जा जनित मुद्रास्फीति के जोखिम को फिर से बढ़ा दिया है, जिससे निवेशकों के बीच फेडरल रिजर्व द्वारा आगे ब्याज दरें बढ़ाए जाने के दांव और पुख्ता हो गए। यूरोपीय सत्र की ओर बढ़ते हुए इस संभावना ने गैर-यील्ड वाली पीली धातु की मांग को दबा दिया। हालांकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट ने डॉलर को तीन सप्ताह के निचले स्तर पर सीमित रखा, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद सोने को इस माहौल से कोई खास सहारा नहीं मिल सका, जिससे इसमें और गिरावट की संभावना प्रबल हो गई है।\n\nक्रिप्टो बाजार और डॉगकॉइन की स्थिति\nडिजिटल परिसंपत्तियों के क्षेत्र में मीम कॉइन डॉगकॉइन भी दबाव में कारोबार करता दिखा। सप्ताह की शुरुआत में हल्के सुधार के बावजूद इसकी कीमत 0.081 डॉलर से नीचे बनी रही। ब्लॉकचेन डेटा विश्लेषण प्लेटफॉर्म सेंटिमेंट के आंकड़े बताते हैं कि बड़े वॉलेट्स द्वारा इस स्तर पर संचय के संकेत दिख रहे हैं। इसके साथ ही डॉगकॉइन फाउंडेशन और डॉगकॉइन लैब्स के बीच घोषित साझेदारी ने बाजार में थोड़ा सकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया है। इसके बावजूद डेरिवेटिव बाजार के मिश्रित संकेतकों और घटते गति संकेतकों के कारण डॉगकॉइन की तेज रिकवरी बाधित हो रही है।\n\nवॉल स्ट्रीट का प्रदर्शन: डॉव जोन्स और नैस्डैक में बढ़त\nइक्विटी बाजारों पर नजर डालें तो बुधवार के अमेरिकी कारोबारी सत्र में डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी तेजी का सबसे बड़ा फायदा मिला। यह सूचकांक 52,800 के करीब बंद हुआ, जो सितंबर की शुरुआत के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। दिलचस्प तथ्य यह रहा कि इस तेजी में मुख्य योगदान एक बड़े निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स और भारी मशीनरी निर्माता कैटरपिलर की ओर से देखने को मिला। दूसरी ओर, अंतरिक्ष अन्वेषण कंपनी स्पेसएक्स ने अपनी आय में 161 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की। नैस्डैक कंपोजिट सूचकांक में भी 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई, लेकिन मूल्य भारित सूचकांक संरचना के चलते डाउ की बढ़त में गोल्डमैन सैक्स और कैटरपिलर के शेयरों ने सबसे अहम भूमिका निभाई।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी डॉलर में कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आयात, मुद्रा विनिमय और घरेलू शेयर बाजार पर पड़ता है।\n\n• भारत में प्रभाव: डॉलर के कमजोर होने से भारतीय रुपये को स्थिरता मिल सकती है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा। हालांकि कच्चे तेल में 1.5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि भारत के आयात बिल को बढ़ा सकती है, जिसका असर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है।\n• वैश्विक बाजार में: अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में डॉलर की कमजोरी धातुओं और कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित करती है। विदेशी मुद्रा में निवेश करने वाले ट्रेडर्स को विभिन्न करेंसी जोड़ों में बढ़ते उतार-चढ़ाव के प्रति सतर्क रहना होगा।\n• सोने और आभूषण खरीदारों पर: वैश्विक स्तर पर सोना 4,100 डॉलर से नीचे आने से खरीदारों को अल्पावधि में राहत मिल सकती है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महंगाई बढ़ने से केंद्रीय बैंकों के सख्त रुख के कारण सोने में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।\n• इक्विटी और म्यूचुअल फंड निवेशकों पर: अमेरिकी शेयर बाजारों में डॉव जोन्स का 52,800 के करीब पहुंचना वैश्विक बाजार धारणा को मजबूत करता है। भारतीय आईटी और वित्तीय शेयरों को वैश्विक संकेतों से सकारात्मक दिशा मिल सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअमेरिकी डॉलर में आई सुस्ती और वित्तीय बाजारों में हलचल मुख्य रूप से ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और मध्य पूर्व में तनाव के चलते पैदा हुई है।\n\n• बॉन्ड यील्ड में गिरावट: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हालिया गिरावट ने डॉलर पर सीधा दबाव बनाया। कम प्रतिफल के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए डॉलर में नई पूंजी लगाना कम आकर्षक हो गया।\n• मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची द्वारा अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मांग और कूटनीतिक रुख ने अनिश्चितता बढ़ा दी। इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 1.5 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया, जिससे महंगाई की चिंताएं दोबारा बढ़ गईं।\n• केंद्रीय बैंकों की नीतियां: बैंक ऑफ जापान द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी और रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सख्त टिप्पणियों ने संबंधित मुद्राओं को मजबूती दी। दूसरी ओर, फेड द्वारा भविष्य की नीतियों पर अनिर्णय की स्थिति ने डॉलर को बैकफुट पर रखा।\n• इक्विटी में चुनिंदा कंपनियों का दबदबा: डॉव जोन्स की बढ़त में व्यापक बाजार के बजाय गोल्डमैन सैक्स और कैटरपिलर जैसी दिग्गज कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन ने मुख्य भूमिका निभाई। स्पेसएक्स के 161 प्रतिशत आय वृद्धि जैसे आंकड़ों ने भी तकनीकी और कॉर्पोरेट धारणा को बल दिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अमेरिकी डॉलर में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?\nअमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में आई गिरावट और अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले बढ़ी बिकवाली के कारण डॉलर कमजोर हुआ है।\n\n2. कच्चे तेल की कीमतों में 1.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त क्यों दर्ज की गई?\nमध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और नाकेबंदी से जुड़े बयानों के बाद आपूर्ति चिंताओं से WTI क्रूड में तेजी आई।\n\n3. USD/JPY जोड़ी किस स्तर तक फिसल गई है?\nUSD/JPY जोड़ी गिरकर 157.20 के नीचे आ गई, जो अक्टूबर की शुरुआत के बाद का इसका सबसे निचला स्तर है।\n\n4. डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज किस स्तर पर बंद हुआ?\nडॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 52,800 के करीब बंद हुआ, जो सितंबर की शुरुआत के बाद का इसका उच्चतम स्तर है।\n\n5. सोने के भाव में क्या रुख देखने को मिला?\nसोना गिरकर 4,100 डॉलर प्रति औंस से नीचे फिसल गया और इसने एक सप्ताह का नया निचला स्तर छू लिया।\n\n6. डॉगकॉइन का ताजा कारोबारी स्तर क्या रहा?\nडॉगकॉइन सीमित सुधार के बावजूद 0.081 डॉलर के स्तर से नीचे दबाव में कारोबार करता रहा।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-10-23",
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