अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से सोने पर दबाव, 4,100 डॉलर के समर्थन स्तर पर टिकी नजरें ऊंची ट्रेजरी यील्ड और मजबूत डॉलर के बीच सोने के भाव दबाव में बने हुए हैं, जिससे बाजार 4,100 डॉलर के स्तर पर नजरें गड़ाए है। नरम श्रम बाजार के बावजूद जिद्दी महंगाई के संकेतों से पीली धातु सीमित दायरे में कारोबार कर रही है। वैश्विक वित्तीय बाजारों में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में लगातार जारी तेजी और मजबूत अमेरिकी डॉलर के चलते सोने की कीमतों पर भारी दबाव बना हुआ है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों में आई तेज गिरावट के बावजूद पीली धातु सुस्त दायरे में फंसी हुई है। लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में दोबारा बढ़त दर्ज की गई है, कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तरों पर बनी हुई हैं, और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े आईएसएम मूल्य सूचकांक में फिर से वृद्धि हुई है। इन तमाम कारकों ने बाजार में महंगाई को लेकर चिंताओं को जिंदा रखा है, जिससे गैर-यील्ड वाली संपत्तियों के प्रति निवेशकों का उत्साह सीमित हो गया है। आने वाले दिनों में यदि अमेरिकी आर्थिक आंकड़े नरम श्रम बाजार स्थितियों के बावजूद लगातार स्थिर महंगाई की ओर इशारा करते हैं, तो सोना और अधिक कंसॉलिडेशन या सुस्ती के प्रति संवेदनशील रह सकता है। चालू कारोबारी सत्र में सोने की कीमत 4,140 डॉलर के स्तर पर रही, जबकि इंट्राडे कारोबार में यह 4,100 डॉलर के दो महीने के निचले स्तर से ऊपर टिकने में सफल रही है। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, सोने की कीमत 4,172 डॉलर पर चल रही है, जो पिछले बंद भाव 4,157 डॉलर से 0.37 प्रतिशत अधिक है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच है। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो दैनिक चार्ट पर आरएसआई 36 के स्तर पर और एमएसीडी -68.22 पर नकारात्मक बना हुआ है, जबकि मूविंग एवरेज में दबाव देखा जा रहा है जो आम तौर पर बड़े ब्रेकआउट ट्रेड से पहले देखा जाता है। डॉलर की मजबूती और विदेशी मुद्रा बाजारों की हलचल फिक्स्ड इनकम बाजार में बिकवाली का सिलसिला लंबा खिंचने के कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब टिकी हुई है। इस परिस्थिति और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती प्रदान की है। हालांकि अक्टूबर में फेड द्वारा दर वृद्धि की संभावना कम होने से सोने को कुछ हद तक राहत मिली है और गिरावट सीमित हुई है, लेकिन मजबूत ग्रीनबैक लगातार कमोडिटी की मांग को प्रभावित कर रहा है। मुद्रा बाजार के मोर्चे पर भी व्यापक उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। एशियाई सत्र में एयूडी/यूएसडी में गिरावट आई, जिससे पिछले हफ्ते छुए गए दो महीने के निचले स्तर से पिछले दो दिनों की रिकवरी थम गई। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने डॉलर के बुलिश रुख को समर्थन दिया है, हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) द्वारा चालू महीने में एक और दर वृद्धि की उम्मीद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए सहारा बन सकती है। दूसरी ओर, शुरुआती यूरोपीय सत्र में यूएसडी/जेपीवाई बढ़कर 158.00 के स्तर से ऊपर निकल गया। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) की सख्त मौद्रिक नीति संबंधी अपेक्षाओं और बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद जापानी येन में कोई खास मजबूती नहीं आ सकी, जिससे यह मुद्रा जोड़ी मजबूत बनी रही। यूरोप की राजनीतिक अस्थिरता और ईसीबी की चुनौती मंगलवार के कारोबारी सत्र में कोई बड़ा टियर-1 डेटा जारी नहीं होना था, जिससे निवेशकों का मुख्य ध्यान यूरोपीय बाजारों के घटनाक्रम और मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति पर टिका रहा। फ्रांस में आने वाले दिनों का मुख्य मुद्दा यह तय करेगा कि क्या सोशलिस्ट और मरीन ले पेन की नेशनल रैली बजट के मुद्दे पर मौजूदा सरकार को गिराने के संकेत देते हैं या नहीं। इस तरह की राजनीतिक उठापटक ने यूरोपीय परिसंपत्तियों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। इस बीच, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) एक जटिल असमंजस का सामना कर रहा है। सामान्य परिस्थितियों में, जब मुद्रास्फीति अपने लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तो ईसीबी के पास ब्याज दरें बढ़ाने का सीधा रास्ता होता है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां सामान्य नहीं हैं। इस बार बॉन्ड बाजार पहले ही यील्ड बढ़ाकर सख्त मौद्रिक नीति का काम खुद कर रहा है, जिससे ईसीबी के लिए दरों को लेकर कोई भी नया फैसला लेना बेहद कठिन चुनौती बन गया है। तकनीकी स्तर और सोने के लिए अहम दायरे तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से सोना फिलहाल एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है जहां 4,100 डॉलर का समर्थन स्तर बेहद नाजुक बना हुआ है। तकनीकी चार्ट्स पर ईएमए20 4,283 डॉलर, ईएमए50 4,332 डॉलर और ईएमए200 4,439 डॉलर पर स्थित है, जो दीर्घकालिक मंदी की प्रवृत्ति और डेथ क्रॉस (ईएमए50 का ईएमए200 से नीचे जाना) की पुष्टि करता है। वर्तमान में 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 4,100 डॉलर से 4,510 डॉलर के बीच फैला हुआ है, जबकि दैनिक वोलैटिलिटी (एटीआर14) 90.07 दर्ज की गई है। अल्पकालिक कारोबारियों के लिए पिवट स्तर 4,161 डॉलर पर है। ऊपर की ओर पहला रेजिस्टेंस आर1 4,191 डॉलर और दूसरा रेजिस्टेंस आर2 4,210 डॉलर पर देखा जा रहा है। नीचे की तरफ पहला सपोर्ट एस1 4,142 डॉलर और दूसरा प्रमुख सपोर्ट एस2 4,112 डॉलर पर स्थित है। सोने का 20-दिवसीय तकनीकी समर्थन लगभग 4,131 डॉलर और प्रतिरोध 4,480 डॉलर के आसपास है। यदि आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़े स्थिर मुद्रास्फीति की पुष्टि करते हैं, तो 4,100 डॉलर के नीचे फिसलने पर सोने में और बड़ी बिकवाली देखने को मिल सकती है। इसका आप पर असर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में गिरावट का सीधा असर खुदरा और वित्तीय निवेशकों पर पड़ रहा है। • सोने के खरीदारों और निवेशकों के लिए: वैश्विक बाजार में सोने के 4,100 डॉलर के समर्थन स्तर पर बने रहने से कीमतों में फिलहाल कोई बड़ा उछाल देखने को नहीं मिल रहा है। खुदरा खरीदारों और आभूषण निवेशकों को खरीदारी करने से पहले अमेरिकी मुद्रास्फीति और फेडरल रिजर्व के रुख पर स्पष्टता का इंतजार करना चाहिए। • मुद्रा और आयात लागत पर असर: मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण स्थानीय मुद्राओं पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आयातित वस्तुओं की लागत में इजाफा होने की संभावना रहती है। घरेलू बाजार में आयात महंगा होने से स्थानीय सोने की कीमतों में गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाजार जितनी तेज नहीं दिख सकती है। • बॉन्ड बाजार और निश्चित आय: लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि से सुरक्षित फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में रिटर्न आकर्षक बना हुआ है। इसके चलते गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने में नई पूंजी का प्रवाह फिलहाल सुस्त रहने के आसार हैं। • वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता: कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और यूरोपीय राजनीतिक खींचतान महंगाई को हवा दे सकती हैं। यदि महंगाई काबू में नहीं आती है तो केंद्रीय बैंकों को दरों में कटौती टालनी पड़ सकती है, जिससे बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। ऐसा क्यों हुआ सोने की कीमतों पर यह दबाव मुख्य रूप से लंबी अवधि की अमेरिकी यील्ड में वृद्धि, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आईएसएम मूल्य सूचकांक के मजबूत आंकड़ों के कारण बना हुआ है। फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दरें बढ़ाने की संभावना घटने के बावजूद लगातार स्थिर महंगाई की चिंताओं ने डॉलर को मजबूत बनाए रखा है। • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी: फिक्स्ड इनकम बाजार में बिकवाली के कारण ट्रेजरी यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गई है। बांड पर ऊंचा ब्याज मिलने से गैर-यील्ड वाली पीली धातु के प्रति निवेशकों का आकर्षण कम हुआ है। • लगातार बनी हुई महंगाई की चिंता: कच्चे तेल के ऊंचे स्तर और आईएसएम मूल्य सूचकांक में बढ़ोतरी ने मुद्रास्फीति के दोबारा भड़कने का खतरा पैदा किया है। नरम श्रम बाजार के बावजूद स्थिर महंगाई ने केंद्रीय बैंकों के लिए दरों में जल्द कटौती का रास्ता कठिन बना दिया है। • मजबूत अमेरिकी डॉलर: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आकर्षक यील्ड के कारण डॉलर लगातार मजबूत स्थिति में है। वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती सीधे तौर पर सोने जैसी डॉलर-मूल्यवर्ग वाली कमोडिटीज की मांग को दबा देती है। सवाल-जवाब 1. सोने की कीमतों पर वर्तमान में दबाव क्यों बना हुआ है? अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार तेजी, मजबूत डॉलर और जिद्दी महंगाई के आंकड़ों की वजह से सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। 2. सोने के लिए कौन सा स्तर इस समय प्रमुख समर्थन माना जा रहा है? सोने के लिए 4,100 डॉलर का स्तर एक महत्वपूर्ण समर्थन बना हुआ है, जो दो महीने का निचला स्तर भी है। 3. क्या अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना है? अक्टूबर में फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों में तेज गिरावट आई है, जिससे सोने को कुछ हद तक सहारा मिला है। 4. यूएसडी/जेपीवाई और एयूडी/यूएसडी में क्या रुख देखा जा रहा है? यूएसडी/जेपीवाई 158.00 के स्तर से ऊपर निकल गया है, जबकि एयूडी/यूएसडी में एशियाई सत्र के दौरान गिरावट दर्ज की गई है। 5. यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) किस दुविधा का सामना कर रहा है? ईसीबी को लक्ष्य से दोगुनी महंगाई का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन बॉन्ड बाजार पहले ही सख्ती कर रहा है, जिससे नीतिगत फैसले लेना कठिन हो गया है। https://trendkia.com/market/us-bond-yields-men-teji-se-gold-para-dabava-4-100-dollar-ke-samarthana-stara-para-tiki-najaren-43816 TrendKia — Har trend, sabse pehle.