# अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से चांदी पर दबाव, 60.60 डॉलर के पास फिसले भाव

> अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल और डॉलर की मजबूती के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों में नरमी देखी जा रही है, जिससे भाव 60.60 डॉलर के करीब पहुंच गए हैं।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-bond-yields-men-teji-se-silver-para-dabava-60-60-dollar-ke-pasa-phisale-bhava-44484 · **Language:** Hindi
**Tags:** चांदी भाव, कमोडिटी बाजार, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, डॉलर इंडेक्स, सोना चांदी, वित्तीय बाजार, वित्त

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुधवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान चांदी की कीमतों में मामूली बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे भाव 60.60 डॉलर के करीब फिसल गए। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट के बाद आई ताजा मजबूती ने गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव बना दिया है। इस बीच, ताजा कारोबारी आंकड़ों के अनुसार चांदी का भाव 60.85 डॉलर पर दर्ज हुआ है, जो पिछले बंद 61.17 डॉलर के मुकाबले 0.53 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। इस दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के मुकाबले 10.65 गुना देखा गया, जबकि इसका 52 हफ्तों का दायरा 45.85 डॉलर से 121.30 डॉलर के बीच रहा है।

## अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर इंडेक्स की चाल
अमेरिकी प्रतिभूतियों पर मिलने वाले रिटर्न में तेजी के चलते निवेशकों का रुझान सरकारी बॉन्ड की ओर बढ़ा है। 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 0.4 प्रतिशत बढ़कर 5.31 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले सप्ताह दर्ज किए गए दो दशक के उच्चतम स्तर 5.35 प्रतिशत के बेहद करीब है। बॉन्ड यील्ड में इस सुधार ने अमेरिकी डॉलर को भी सहारा दिया है। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ लगभग 102.18 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। डॉलर मजबूत होने से विदेशी खरीदारों के लिए चांदी अपेक्षाकृत महंगी हो जाती है, जिससे इसकी मांग सीमित होती है।

## कच्चे तेल में उछाल और बॉन्ड बाजार का परिदृश्य
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई इस ताजा बढ़त को कच्चे तेल की कीमतों में लौटी खरीदारी से भी समर्थन मिला है। डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल अपने मंगलवार के मासिक निचले स्तर 86.32 डॉलर से उबरने के संकेत दे रहा है। ऊर्जा उत्पादों में यह तेजी मेक्सिको की खाड़ी में बन रहे एक तूफान के कारण आई है, जिसके अगले दो दिनों में 2026 के पहले अटलांटिक तूफान में बदलने की आशंका जताई गई है। माना जा रहा है कि यह तूफान तेल और गैस उत्पादन सुविधाओं को प्रभावित कर सकता है। दूसरी तरफ, दांस्के बैंक के विश्लेषकों का कहना है कि ट्रेजरी आपूर्ति और हाइपरस्केलर्स के प्रभाव के कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड लंबी अवधि के अपट्रेंड में बनी हुई है। बैंक ने आगाह किया है कि लंबी अवधि के प्रीमियम की बढ़ती मांग के चलते 10 वर्षीय और 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के 6 प्रतिशत तक पहुंचने का जोखिम बना हुआ है, क्योंकि आगामी जारी होने वाले बॉन्ड को खपाने के लिए टर्म प्रीमियम में और वृद्धि की आवश्यकता पड़ सकती है।

## तकनीकी संकेत और प्रमुख स्तर
दैनिक चार्ट पर चांदी का परिदृश्य 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 62.71 डॉलर के नीचे रहने के कारण कमजोर बना हुआ है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) लगभग 40 पर होने से तेजी की गति धीमी जान पड़ती है और जब तक भाव इस ईएमए बाधा के नीचे बने रहते हैं, तब तक इसमें कमजोरी का जोखिम बना रहेगा। ताजा तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय आरएसआई 41 पर स्थित है, जबकि एमएसीडी (MACD) -1.20 पर है जो इसके -0.86 के सिग्नल स्तर से नीचे होने के चलते बियरिश रुझान की पुष्टि करता है। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 20-दिवसीय ईएमए 62.66 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 63.78 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 67.30 डॉलर पर है, जहां 50-दिवसीय ईएमए के 200-दिवसीय ईएमए से नीचे होने के कारण डेथ क्रॉस का दबाव देखा जा रहा है। इसके अलावा 50-दिवसीय एसएमए 64.06 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 72.57 डॉलर पर स्थित है। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड 58.85 डॉलर से 67.28 डॉलर के बीच है और भाव बैंड के भीतर बने हुए हैं। 14-दिवसीय एडीएक्स 19 पर है जो सीमित दायरे का संकेत देता है, जबकि स्टोकेस्टिक इंडिकेटर की फास्ट लाइन 12 और सिग्नल लाइन 14 पर है। दैनिक उतार-चढ़ाव को मापने वाला 14-दिवसीय एटीआर 1.41 है। आगामी स्तरों के लिए पिवट पॉइंट 61.12 डॉलर है, जिसके ऊपर पहला रेजिस्टेंस 61.57 डॉलर और दूसरा 62.30 डॉलर पर है, जबकि नीचे की तरफ पहला सपोर्ट 60.39 डॉलर और दूसरा 59.94 डॉलर पर है। 2 अक्टूबर का निचला स्तर 59.70 डॉलर भी एक अहम सपोर्ट जोन माना जा रहा है।

## निवेश और विनिमय के माध्यम के रूप में चांदी की भूमिका
चांदी एक बहुमूल्य धातु है जिसे वित्तीय बाजारों में बड़े पैमाने पर ट्रेड किया जाता है। ऐतिहासिक रूप से इसका इस्तेमाल मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के तौर पर होता रहा है। सोने की तुलना में कम लोकप्रिय होने के बावजूद निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने, आंतरिक मूल्य और उच्च मुद्रास्फीति के समय बचाव के साधन के रूप में इसका रुख करते हैं। निवेशक भौतिक रूप में चांदी के सिक्के और छड़ें खरीद सकते हैं, या फिर अंतरराष्ट्रीय बाजारों के भाव को ट्रैक करने वाले एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) के माध्यम से इसमें कारोबार कर सकते हैं।

## कीमतों को प्रभावित करने वाले बुनियादी कारक
चांदी की चाल कई वैश्विक और मैक्रोइकॉनॉमिक कारकों पर निर्भर करती है। भू-राजनीतिक अस्थिरता या गंभीर मंदी की आशंकाएं चांदी की सुरक्षित निवेश वाली मांग को बढ़ा सकती हैं, हालांकि सोने की तुलना में यह प्रभाव कुछ कम रहता है। बिना ब्याज वाली संपत्ति होने के कारण ब्याज दरों में कटौती होने पर चांदी को मजबूती मिलती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका मूल्य निर्धारण डॉलर में होने के कारण अमेरिकी डॉलर के उतार-चढ़ाव का इस पर सीधा असर पड़ता है। जब डॉलर मजबूत होता है तो चांदी के भाव सीमित रहते हैं, जबकि डॉलर की कमजोरी इसे ऊपर की ओर ले जाती है। खनन आपूर्ति, निवेश मांग और रीसाइक्लिंग की दरें भी आपूर्ति श्रृंखला के तहत इसके भाव तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

## औद्योगिक मांग और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं का असर
चांदी का एक बड़ा हिस्सा उद्योगों में उपयोग होता है, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा क्षेत्रों में। तांबे और सोने से भी अधिक विद्युत चालकता होने की वजह से आधुनिक तकनीक और हरित ऊर्जा के विनिर्माण में इसकी भारी मांग रहती है। औद्योगिक गतिविधियों में तेजी से इसके भाव बढ़ते हैं, जबकि मंदी के दौरान नरमी आती है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका, चीन और भारत की आर्थिक स्थितियां भी इसके भाव तय करने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। अमेरिका और विशेष रूप से चीन के बड़े औद्योगिक क्षेत्र विभिन्न विनिर्माण प्रक्रियाओं में चांदी का भारी उपयोग करते हैं। वहीं भारत में आभूषणों और घरेलू मांग के लिए उपभोक्ताओं की खरीदारी वैश्विक मूल्य निर्धारण में एक प्रमुख भूमिका निभाती है।

## गोल्ड/सिल्वर रेशियो और अन्य परिसंपत्तियों की स्थिति
चांदी की चाल आमतौर पर सोने के कदमों का अनुसरण करती है। जब सोने में तेजी आती है, तो सुरक्षित निवेश वाली समानता के कारण चांदी में भी तेजी की संभावना बनती है। गोल्ड/सिल्वर रेशियो यह दर्शाता है कि सोने के एक औंस के मूल्य के बराबर पहुंचने के लिए चांदी के कितने औंस की आवश्यकता होगी। निवेशक इस अनुपात का उपयोग दोनों धातुओं के सापेक्ष मूल्यांकन का आकलन करने के लिए करते हैं। एक उच्च अनुपात यह संकेत दे सकता है कि चांदी का मूल्यांकन कम है या सोना अधिक मूल्यांकित है, जबकि कम अनुपात सोने के मुकाबले चांदी के महंगे होने की ओर इशारा करता है।

मुद्रा बाजार और अन्य संपत्तियों में भी बुधवार को व्यापक हलचल देखी गई। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7000 के नीचे दबाव में कारोबार कर रहा था, जहां भू-राजनीतिक अनिश्चितता और बॉन्ड यील्ड में तेजी के चलते डॉलर को नए खरीदार मिले हैं, जबकि बाजार रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सख्त नीति के बीच एफओएमसी मिनट्स की प्रतीक्षा कर रहा है। डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्चतम स्तर पर रहा, जहां बैंक ऑफ जापान के नरम रुख के बीच डॉलर मांग से जोड़ी को समर्थन मिला और ट्रेडर्स 200-दिवसीय एसएमए के पार जाने का इंतजार कर रहे हैं। सोने में भी यूरोपीय सत्र की शुरुआत में मंदी का रुख बना रहा और भाव पिछले दिन छुए गए दो महीने के निचले स्तर लगभग 4,100 डॉलर के करीब रहे, जिस पर डॉलर की मजबूती का सीधा असर देखा गया। क्रिप्टो बाजार में डॉगकॉइन 5 प्रतिशत से अधिक गिरकर 0.090 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था, जहां शॉर्ट पोजिशन एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। भारतीय रुपया भी रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति बैठक के बाद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ और USD/INR उछलकर चार महीने के उच्च स्तर 96.72 के करीब पहुंच गया। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 5.5 प्रतिशत कर दिया है, जो फरवरी 2023 के बाद पहली वृद्धि है। वहीं यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के समक्ष लक्ष्य से दोगुनी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने की दुविधा बनी हुई है, जहां बॉन्ड बाजार पहले ही आंशिक सख्ती का संकेत दे रहा है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में आई मजबूती से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी और अन्य कीमती धातुओं में सुस्ती का माहौल बन गया है।

- **भारत में:** घरेलू बाजार में वैश्विक नरमी के बावजूद रुपये की कमजोरी (96.72 प्रति डॉलर) स्थानीय चांदी की कीमतों को पूरी तरह गिरने से रोक सकती है। भारतीय खरीदारों और आभूषण निर्माताओं को आयात महंगा पड़ने के कारण सतर्क रहकर खरीदारी करने की जरूरत है।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.31 प्रतिशत के करीब पहुंचने से गैर-ब्याज वाली संपत्तियों में निवेश का आकर्षण घटा है। निवेशक अपने पोर्टफोलियो में बॉन्ड और कीमती धातुओं के अनुपात को पुनर्गठित कर सकते हैं।
- **औद्योगिक खरीदारों के लिए:** सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में उपयोग होने वाली चांदी के भाव 60.60 डॉलर के आसपास आने से खरीद लागत में मामूली राहत मिल सकती है। हालांकि विनिर्माण कंपनियां आगामी आपूर्ति जोखिमों और तूफान के प्रभाव पर नजर रखेंगी।
- **खुदरा आभूषण उपभोक्ताओं के लिए:** त्योहारी और शादी के सीजन में खरीदारी की योजना बना रहे ग्राहकों को सीमित दायरे में भाव मिलने की संभावना है। कीमतों में बड़े उछाल के अभाव में स्थिर दरों पर योजनाबद्ध खरीद की जा सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
चांदी की कीमतों में आई यह नरमी अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई तेजी, डॉलर इंडेक्स की मजबूती और कच्चे तेल में उछाल के संयुक्त असर से पैदा हुई है।

- **बॉन्ड यील्ड में तेजी:** 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.31 प्रतिशत पर पहुंच गई, जिससे निवेशकों ने गैर-ब्याज वाली संपत्तियों से हाथ खींचना शुरू किया। अधिक यील्ड वाले सुरक्षित सरकारी बॉन्ड हमेशा कीमती धातुओं की निवेश मांग को सीमित करते हैं।
- **डॉलर इंडेक्स की मजबूती:** डॉलर सूचकांक 0.33 प्रतिशत बढ़कर 102.18 के स्तर पर पहुंचा, जिसने अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की खरीदारी को महंगा बना दिया। वैश्विक स्तर पर डॉलर में तय होने वाली कमोडिटीज के लिए मजबूत डॉलर सीधे दबाव का कारण बनता है।
- **कच्चे तेल में तेजी और मुद्रास्फीति दबाव:** मेक्सिको की खाड़ी में संभावित तूफान के चलते डब्ल्यूटीआई तेल 86.32 डॉलर के निचले स्तर से सुधरा है। ऊर्जा लागत बढ़ने की आशंकाओं से मुद्रास्फीति और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
- **तकनीकी स्तरों पर बिकवाली:** दैनिक चार्ट पर 20-दिवसीय ईएमए 62.71 डॉलर के नीचे रहने और आरएसआई के 40 के करीब कमजोर होने से ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली जारी रखी। तकनीकी रूप से प्रमुख रेजिस्टेंस पार न होने तक बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा।

## सवाल-जवाब

### 1. बुधवार को चांदी की कीमतों में गिरावट क्यों आई?
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.31 प्रतिशत होने और डॉलर इंडेक्स के 102.18 पर मजबूत होने के कारण चांदी पर बिकवाली का दबाव देखा गया।

### 2. वर्तमान में चांदी के लिए अहम तकनीकी स्तर कौन से हैं?
ऊपर की तरफ 20-दिवसीय ईएमए 62.71 डॉलर एक प्रमुख रेजिस्टेंस है, जबकि नीचे की ओर 2 अक्टूबर का निचला स्तर 59.70 डॉलर अहम सपोर्ट क्षेत्र है।

### 3. कच्चे तेल की कीमतों का बॉन्ड यील्ड पर क्या असर पड़ा?
मेक्सिको की खाड़ी में तूफान की आशंका से डब्ल्यूटीआई क्रूड 86.32 डॉलर के निचले स्तर से सुधरा, जिससे बॉन्ड यील्ड को फिर से चढ़ने में मदद मिली।

### 4. दांस्के बैंक ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड को लेकर क्या अनुमान जताया है?
दांस्के बैंक के विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ते ट्रेजरी सप्लाई और टर्म प्रीमियम के दबाव में 10 वर्षीय और 30 वर्षीय यील्ड 6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

### 5. भारतीय रुपये और रिजर्व बैंक की नीति का क्या ताजा अपडेट है?
आरबीआई द्वारा रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत करने के बाद रुपया कमजोर होकर 96.72 प्रति डॉलर के चार महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया।

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