अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया की हलचल के बीच सोने में लौटी हल्की चमक, लेकिन आगे की राह आसान नहीं साप्ताहिक निचले स्तरों से उबरने के बाद सोने की कीमतों ने 4,200 डॉलर के करीब वापसी की है, हालांकि अमेरिकी मुद्रास्फीति के आगामी आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के ब्याज दर रुख को देखते हुए बाजार में सतर्कता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चाल पिछले कारोबारी दिनों में काफी उतार-चढ़ाव भरी रही। सप्ताह के शुरुआती हिस्से में बिकवाली के दबाव का सामना करने के बाद कीमती धातु ने संभलने के संकेत दिए और मामूली बढ़त के साथ सप्ताह का समापन किया। हाजिर सोने (XAU/USD) ने अपने मासिक निचले स्तरों से वापसी तो की, लेकिन खरीदारी का मजबूत रुझान अभी भी पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाया है। आने वाले दिनों में अमेरिका से आने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े और पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रम सोने की कीमतों की दिशा तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाएंगे। बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी का असर सप्ताह के दौरान अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने कीमती धातुओं को थोड़ी राहत दी। मंगलवार को जब 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट देखी गई, तब अमेरिकी डॉलर भी अपने प्रमुख प्रतिस्पर्धी मुद्राओं के मुकाबले कमजोर हुआ। इस कमजोरी के चलते सोने में लगभग 0.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, यह राहत ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। बुधवार को अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में फिर से जोरदार उछाल देखा गया और 10 साल का बेंचमार्क यील्ड 5.36 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो अप्रैल 2002 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर था। यील्ड के इस स्तर पर पहुंचते ही सोने की कीमतें दो महीने में पहली बार 4,100 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे फिसल गईं। बुधवार को अमेरिकी कारोबारी सत्र के दौरान फेडरल रिजर्व की सितंबर नीति बैठक के मिनट्स जारी किए गए। इन मिनट्स से पता चला कि नीति निर्माताओं में से अधिकांश सदस्य इस बात के पक्ष में थे कि साल के अंत तक ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी करना उचित हो सकता है। जैसे ही इस रुख के बाद ट्रेजरी यील्ड में थोड़ा सुधार आया, सोने ने अपने नुकसान के एक छोटे हिस्से की भरपाई कर ली। भू-राजनीतिक घटनाक्रम और केंद्रीय बैंक के बयानों से राहत सप्ताह के उत्तरार्ध में राजनीतिक और नीतिगत बयानों ने बाजार की दिशा को प्रभावित किया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान के साथ सकारात्मक चर्चा चल रही है। उन्होंने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल का प्रवाह रिकॉर्ड संख्या में बैरल के साथ जारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका शुरुआती नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा। इस बयान से भू-राजनीतिक तनाव में कमी आई, जिसने कच्चे तेल की कीमतों और व्यापक वित्तीय बाजार की धारणा को प्रभावित किया। इसी दौरान फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने मौद्रिक नीति पर बात करते हुए कहा कि नीतिगत दरों को और बढ़ाने की आवश्यकता तो है, लेकिन दरों में बदलाव की गति को लेकर लचीलापन भी जरूरी है। ड्यूश बैंक के अनुसार, गुरुवार को अमेरिकी ट्रेजरी बाजार में एक तेज इंट्राडे बदलाव देखा गया, जहां 10 साल का यील्ड 5.35 प्रतिशत के इंट्राडे शिखर पर पहुंचने के बाद दिन के अंत में 5.7 बेसिस प्वाइंट गिरकर 5.23 प्रतिशत पर बंद हुआ। क्रिस्टोफर वॉलर की इस टिप्पणी के बाद कि बढ़ोतरी लगातार बैठकों में होना आवश्यक नहीं है, बाजार ने नीतिगत सख्ती की गति का नए सिरे से आकलन किया। गुरुवार को मजबूत बंद के बाद सोने ने शुक्रवार को 4,200 डॉलर के क्षेत्र तक अपनी बढ़त को विस्तार दिया। आगामी मुद्रास्फीति आंकड़े और बाजार की दिशा आने वाले सप्ताह में अमेरिकी बाजार का फोकस मुद्रास्फीति पर रहने वाला है। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड बाजार कोलंबस डे के उपलक्ष्य में सोमवार को बंद रहेंगे, लेकिन बुधवार को यूएस ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स द्वारा सितंबर के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े जारी किए जाएंगे। बाजार इन आंकड़ों की बारीकी से समीक्षा करेगा। यदि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक उम्मीद से अधिक मजबूत आता है, तो भले ही यह अक्टूबर में तत्काल दर वृद्धि के लिए बाजार को पूरी तरह आश्वस्त न करे, लेकिन साल के अंत तक एक और दर वृद्धि की संभावना को बल देगा। इस स्थिति में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में फिर से तेजी आ सकती है, जो सोने पर दबाव बनाएगी। इसके विपरीत, यदि मुद्रास्फीति के आंकड़े उम्मीद से नरम आते हैं, तो ट्रेजरी यील्ड पर दबाव कम होगा और कीमती धातु में सुधार का दायरा बढ़ सकता है। इसके अलावा पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी नजर रहेगी; यदि तेल की कीमतें गिरती हैं और तनाव कम होता है, तो बाजार में स्थिरता से सोने को समर्थन मिल सकता है, जबकि नए सिरे से तनाव बढ़ने पर जोखिम धारणा प्रभावित होगी। तकनीकी संकेतक और समर्थन स्तर तकनीकी परिदृश्य पर नजर डालें तो सोने के लिए अल्पावधि में चुनौतियां बनी हुई हैं। दैनिक चार्ट पर रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) में सुधार देखा गया है, लेकिन यह 50 के स्तर से नीचे बना हुआ है, जो यह दर्शाता है कि तेजी की पुख्ता शुरुआत अभी बाकी है। इसके अलावा सोना अपने 20-दिवसीय, 50-दिवसीय, 100-दिवसीय और 200-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज (SMA) से नीचे कारोबार कर रहा है। गिरावट की स्थिति में सोने के लिए 4,100 डॉलर पर एक स्थिर समर्थन स्तर बना हुआ है। यदि यह स्तर टूटता है, तो अगला महत्वपूर्ण दायरा 4,000 डॉलर से 3,970 डॉलर का होगा, जो मार्च से अगस्त के बीच रही मंदी की चाल का निचला बिंदु और एक अहम मनोवैज्ञानिक स्तर भी है। वर्तमान लाइव आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमत 4,214 डॉलर पर दर्ज की गई है, जो पिछले बंद 4,157 डॉलर से 1.38 प्रतिशत अधिक है। लाइव आरएसआई (14) 43 के स्तर पर है, जबकि 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 4,255 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,314 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,439 डॉलर पर है। 50-दिवसीय ईएमए के 200-दिवसीय ईएमए से नीचे रहने से डेथ क्रॉस बना हुआ है। एमएसीडी -64.54 पर है, जो सिग्नल लाइन -58.05 से नीचे है और कमजोरी का संकेत देता है। तत्काल पिवट स्तर 4,201 डॉलर पर है, जिसमें पहला प्रतिरोध 4,247 डॉलर (R1) और दूसरा प्रतिरोध 4,279 डॉलर (R2) है, जबकि समर्थन स्तर 4,169 डॉलर (S1) और 4,124 डॉलर (S2) पर देखे जा रहे हैं। दैनिक वोलैटिलिटी दर्शाने वाला एटीआर (14) 88.93 पर है। सुरक्षित निवेश के रूप में सोने का ऐतिहासिक महत्व सोना मानव इतिहास में मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में एक केंद्रीय भूमिका निभाता रहा है। गहनों और सौंदर्य के अलावा, इसे वित्तीय अनिश्चितता के दौर में एक सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के रूप में देखा जाता है। किसी विशिष्ट सरकार या जारीकर्ता पर निर्भर न होने के कारण यह मुद्रास्फीति और गिरती मुद्राओं के खिलाफ एक मजबूत बचाव माना जाता है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। संकट के समय अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को सहारा देने और विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए वे सोना खरीदते हैं, जिससे देश की सॉल्वेंसी और अर्थव्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने वर्ष 2022 में अपने भंडार में 1,136 टन सोना जोड़ा, जिसकी कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। यह रिकॉर्ड की शुरुआत के बाद से किसी भी वर्ष में की गई सबसे बड़ी खरीद थी। वर्तमान में चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते देशों के केंद्रीय बैंक अपने सोने के भंडार में तेजी से इजाफा कर रहे हैं। सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ विपरीत संबंध देखने को मिलता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोने की कीमतों को सहारा मिलता है। इसी तरह, शेयर बाजारों में बड़ी तेजी के समय सोने में नरमी आ सकती है, जबकि जोखिम भरे बाजारों में बिकवाली के दौर में कीमती धातु को प्राथमिकता दी जाती है। चूंकि सोना कोई नियमित यील्ड नहीं देता, इसलिए ब्याज दरों के ऊंचे रहने पर इसकी मांग प्रभावित होती है, जबकि दरें घटने पर यह निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बन जाता है। अन्य मुद्रा जोड़ों का प्रदर्शन मुद्रा बाजार के अन्य प्रमुख जोड़ों में भी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। AUD/USD ने सप्ताह के निचले स्तर से वापसी करते हुए बढ़त बनाई और एशियाई सत्र में 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश की। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी ने डॉलर को 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे बनाए रखा, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को बल मिला, जबकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सख्त नीतिगत उम्मीदों ने भी इस जोड़ी को सहारा दिया। दूसरी ओर, USD/JPY 158.00 के आसपास कारोबार करता रहा। जापान के घरेलू खर्च के आंकड़ों में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिससे जापानी येन पर दबाव बना, हालांकि कमजोर डॉलर ने इस जोड़ी में बड़ी गिरावट को सीमित रखा। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव और बॉन्ड यील्ड के दबाव का सीधा असर खुदरा आभूषण खरीदारों और कमोडिटी निवेशकों की जेब पर पड़ता है। • भारत में आभूषण खरीदार: वैश्विक स्तर पर सोने के 4,100 से 4,200 डॉलर के दायरे में रहने से घरेलू बाजार में कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना सीमित है। आगामी त्योहारी और वैवाहिक सीजन में आभूषण खरीदने की योजना बना रहे परिवारों को मौजूदा भावों पर नजर रखकर खरीदारी करनी चाहिए। • कमोडिटी निवेशक: अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों से पहले बाजार में वोलैटिलिटी बढ़ने के आसार हैं। निवेशकों को 4,100 डॉलर के समर्थन स्तर और तकनीकी स्टॉप-लॉस सीमाओं का ध्यान रखते हुए ही नए पोजीशन बनाने चाहिए। • मुद्रा विनिमय और आयात: डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में उछाल से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। रुपये के कमजोर होने पर आयातित सोना घरेलू बाजार में अंतरराष्ट्रीय भाव की तुलना में अधिक महंगा हो जाता है। • पोर्टफोलियो विविधीकरण: अनिश्चित भू-राजनीतिक माहौल और मुद्रास्फीति के जोखिमों के बीच सोने को दीर्घकालिक सुरक्षा के रूप में देखा जा रहा है। निवेशक अपने कुल निवेश पोर्टफोलियो का 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में सोने में बनाए रख सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ सोने की कीमतों में हालिया गिरावट और उसके बाद आए हल्के सुधार के पीछे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रिकॉर्ड उछाल, मौद्रिक नीति की सख्ती और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियां मुख्य कारक रही हैं। • ट्रेजरी यील्ड में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 5.36 प्रतिशत तक पहुंचना सोने में तेज बिकवाली का प्राथमिक कारण बना। यील्ड में बढ़ोतरी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने की होल्डिंग लागत को बढ़ा देती है। • फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती: केंद्रीय बैंक के मिनट्स और अधिकारियों के बयानों से यह संकेत मिला कि इस वर्ष ब्याज दरों में एक और वृद्धि संभव है। उच्च ब्याज दरों की इस प्रत्याशा ने अमेरिकी डॉलर को सहारा दिया और सोने की कीमतों को सीमित रखा। • भू-राजनीतिक तनाव में नरमी के संकेत: होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल प्रवाह और हमलों की संभावना न होने संबंधी बयानों ने कच्चे तेल की कीमतों और बाजार की घबराहट को शांत किया। इससे तनाव के कारण सोने में पैदा हुआ अचानक जोखिम प्रीमियम कम हो गया। • तकनीकी स्तरों पर खरीदारी: 4,100 डॉलर प्रति औंस के दो महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद तकनीकी आधार पर खरीदारी लौटी। निचले स्तरों पर केंद्रीय बैंकों और संस्थागत खरीदारों की मौजूदगी ने कीमतों को तेज गिरावट से बचाया। सवाल-जवाब 1. हाल ही में सोने की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण क्या था? 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के 5.36 प्रतिशत तक पहुंचने और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चिंताओं के कारण सोने में बिकवाली देखी गई थी। 2. सप्ताह के अंत में सोने की कीमतों में सुधार कैसे हुआ? ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट, फेड अधिकारियों द्वारा नीतिगत लचीलेपन के बयान और पश्चिम एशिया में तनाव घटने के संकेतों से सोने में सुधार आया। 3. सोने के लिए कौन से महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर देखे जा रहे हैं? सोने के लिए 4,100 डॉलर पर मजबूत समर्थन है, जिसके बाद 4,000 से 3,970 डॉलर का दायरा अहम है, जबकि 4,247 डॉलर पर प्रतिरोध देखा जा रहा है। 4. अमेरिकी मुद्रास्फीति (CPI) के आंकड़ों का सोने पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? मजबूत मुद्रास्फीति दर वृद्धि की संभावना बढ़ाकर सोने पर दबाव डाल सकती है, जबकि कमजोर आंकड़े कीमतों में तेजी का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। 5. केंद्रीय बैंकों द्वारा सोना खरीदने का क्या महत्व है? केंद्रीय बैंक अपनी मुद्राओं को मजबूती देने, विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और वित्तीय संकट से बचाव के लिए बड़े पैमाने पर सोना जमा करते हैं। https://trendkia.com/market/us-bond-yields-men-utara-charhava-aura-middle-east-ki-halachala-ke-bicha-gold-men-lauti-halki-chamaka-lekina-age-ki-raha-asana-nah-45597 TrendKia — Har trend, sabse pehle.