{
  "type": "article",
  "title": "अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी से पहले पाउंड पर दबाव, महंगाई के आंकड़ों के बाद फिसला स्टर्लिंग",
  "summary": "ब्रिटेन में महंगाई दर 3.1 प्रतिशत पर स्थिर रहने और अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की संभावनाओं के बीच पाउंड में गिरावट दर्ज की गई है। जानिए मुद्रा बाजार में इसका क्या असर पड़ रहा है।",
  "content": "मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड पर बिकवाली का दबाव गहराता दिखाई दे रहा है। ब्रिटेन में ताजा मुद्रास्फीति के आंकड़े सामने आने के बाद जीबीपी/यूएसडी (GBP/USD) जोड़ी ने 1.3500 के स्तर से ठीक नीचे तेजी दिखाई, लेकिन यह उछाल ज्यादा देर टिक नहीं सका और देखते ही देखते इसमें 53 पिप्स की गिरावट आ गई। विदेशी मुद्रा बाजार में निवेशकों की नजरें अमेरिकी केंद्रीय बैंक के ब्याज दर फैसले पर टिकी हुई हैं, जहां दरें बढ़कर ब्रिटेन की वर्तमान 3.75 प्रतिशत की दर से आगे निकलने की उम्मीद है। इसी अनिश्चितता के कारण बाजार में पाउंड की बढ़त तुरंत बिकवाली में तब्दील हो गई।\n\nमुद्रास्फीति के आंकड़े और घरेलू अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति\nब्रिटेन में अगस्त महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े पूर्वानुमान के बिल्कुल अनुरूप रहे हैं। वार्षिक आधार पर उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति 3.1 प्रतिशत दर्ज की गई, जो जुलाई में 2.9 प्रतिशत थी। यह बदलाव पूरी तरह से अर्थशास्त्रियों के अनुमान के मुताबिक था। दूसरी तरफ कोर मुद्रास्फीति, जिसमें खाद्य पदार्थ, ऊर्जा, शराब और तंबाकू के अस्थिर दामों को शामिल नहीं किया जाता, 2.6 प्रतिशत पर पूरी तरह अपरिवर्तित बनी रही। इसके साथ ही सेवा क्षेत्र की मुद्रास्फीति भी 3.4 प्रतिशत पर स्थिर रही।\n\nइन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि ब्रिटेन की घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्रास्फीति के दबाव में कोई आंतरिक हलचल नहीं हुई है। मुद्रास्फीति में जो भी वृद्धि दर्ज की गई है, उसका मुख्य कारण मोटर ईंधन की बढ़ती कीमतें हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में होर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रमों और वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के चलते तेल कीमतों पर दबाव बना हुआ है, जिसे बैंक ऑफ इंग्लैंड की ब्याज दरों में बढ़ोतरी से हल नहीं किया जा सकता।\n\nअमेरिकी और ब्रिटिश ब्याज दरों का तुलनात्मक समीकरण\nवर्तमान समय में बैंक ऑफ इंग्लैंड की मानक ब्याज दर 3.75 प्रतिशत पर है। इसके विपरीत अमेरिका में केंद्रीय बैंक की ब्याज दर 3.50 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में चल रही है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ओर से 18:00 जीएमटी पर नीतिगत फैसले की घोषणा होनी है, जिसमें ब्याज दरों को बढ़ाकर 3.75 से 4.00 प्रतिशत किए जाने की प्रबल संभावना है। यदि यह बढ़ोतरी होती है, तो साल 2023 के बाद अमेरिकी नीतिगत दरों में यह पहली बढ़ोतरी होगी।\n\nअमेरिकी ब्याज दरों के दायरे के मध्य बिंदु को देखा जाए, तो अब तक पाउंड में रखी गई रकम पर डॉलर के मुकाबले आठवें हिस्से (एक-आठवां प्रतिशत) का अधिक ब्याज मिल रहा था। इस आगामी फैसले के बाद पाउंड का यह ब्याज लाभ खत्म हो जाएगा और डॉलर में रखी गई पूंजी पर पाउंड से आठवां हिस्सा अधिक प्रतिफल मिलेगा। इस बदलाव के मद्देनजर निवेशकों ने पहले ही पाउंड से दूरी बनानी शुरू कर दी थी, जिसके चलते अगस्त के अपने उच्च स्तर से पाउंड अब तक करीब 230 पिप्स गंवा चुका है।\n\nफ्यूचर्स बाजार और नीतिगत अनुमानों का बड़ा असर\nमुद्रा बाजार के लिए केवल आज का ब्याज दर अंतर ही नहीं, बल्कि भविष्य का संभावित मार्ग अधिक मायने रखता है। अमेरिकी नीतिगत फैसले के साथ जारी होने वाले आर्थिक अनुमान इस मुद्रा जोड़ी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। फ्यूचर्स बाजार के आकलन के अनुसार, दिसंबर तक अमेरिकी ब्याज दर 4.15 प्रतिशत और साल 2027 की गर्मियों तक 4.52 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। हालांकि समिति के पिछले अनुमानों में इसे अगले साल 3.6 प्रतिशत पर लौटने की बात कही गई थी।\n\nब्रिटिश फ्यूचर्स बाजार के आंकड़ों को देखें, तो वहां बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीतिगत दर नवंबर तक 4 प्रतिशत और 2027 की शुरुआत में करीब 4.25 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। दोनों ही देशों के लिए ब्याज दर अनुमानों को बढ़ाया जा रहा है, लेकिन डॉलर के लिए दरों में बढ़ोतरी की गति पाउंड के मुकाबले काफी तेज है। यही अंतर जीबीपी/यूएसडी के मूल्य निर्धारण में सबसे निर्णायक कारक बना हुआ है।\n\nबैंक ऑफ इंग्लैंड की आगामी बैठक और समिति का रुख\nबैंक ऑफ इंग्लैंड गुरुवार को 11:00 जीएमटी पर अपने नीतिगत फैसले की घोषणा करेगा। बाजार का व्यापक अनुमान है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल दरों को यथावत रखेगा। मतदान में छह सदस्यों द्वारा दरें स्थिर रखने और तीन सदस्यों द्वारा बढ़ोतरी के पक्ष में वोट देने की उम्मीद है, जबकि दर घटाने के पक्ष में किसी के वोट देने का अनुमान नहीं है। जुलाई में भी नीति समिति में यही विभाजन देखने को मिला था, जब तीन सदस्यों ने दरों को तत्काल 4 प्रतिशत करने की मांग की थी।\n\nहालांकि फ्यूचर्स बाजार में दर बढ़ने की संभावना करीब 30 प्रतिशत आंकी जा रही है, जो एक हफ्ते पहले 10 प्रतिशत से भी कम थी। दर बढ़ाने के पक्षधर तीन सदस्यों के पास अपने ठोस तर्क मौजूद हैं। ब्रिटेन में उत्पादक मूल्य सूचकांक यानी फैक्ट्री गेट की कीमतें अगस्त में 0.7 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि 0.3 प्रतिशत का अनुमान था। वार्षिक आधार पर यह वृद्धि 3.7 प्रतिशत रही, जबकि अनुमान 3.3 प्रतिशत का था। थोक स्तर पर बढ़ी यही कीमतें कुछ महीनों के अंतराल के बाद खुदरा दुकानों तक पहुंचती हैं।\n\nखुदरा बिक्री के आंकड़े और समिति की आंतरिक असहमति\nदूसरी तरफ दरें स्थिर रखने के पक्षधर बहुमत के समर्थन में शुक्रवार को आने वाले खुदरा बिक्री के आंकड़े खड़े दिखाई देते हैं। जुलाई में खुदरा बिक्री में 0.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद अगस्त में भी इसमें 0.2 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है। यदि ईंधन की बिक्री को अलग कर दिया जाए, तब भी बिक्री में 0.2 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है।\n\nगुरुवार को पाउंड के उतार-चढ़ाव के लिए मुख्य बिंदु यह नहीं होगा कि दरें स्थिर रखी गईं, बल्कि मतदान में सदस्यों की संख्या सबसे महत्वपूर्ण होगी। यदि असहमति जताने वाले तीन सदस्यों के साथ कोई चौथा सदस्य जुड़ता है, या फिर नीतिगत बयान में नवंबर में दर बढ़ोतरी का स्पष्ट संकेत मिलता है, तो पाउंड की चाल बदल सकती है। फिलहाल पाउंड से उसी फैसले की उम्मीद की जा रही है, जहां समिति पिछले अनुपात में ही खुद में विभाजित नजर आएगी।\n\nतकनीकी स्तर: समर्थन, प्रतिरोध और बाजार का रुझान\nतकनीकी चार्ट पर 1.3500 से ठीक नीचे का आज का उच्चतम स्तर पहला कड़ा प्रतिरोध बना हुआ है। पूरे सप्ताह इस स्तर के ऊपर टिकने में यह जोड़ी संघर्ष करती रही है। इसके पार 1.3550 का स्तर मौजूद है, जिसने सितंबर की शुरुआत से लेकर अब तक हर तेजी को रोक रखा है।\n\nनीचे की ओर, 1.3450 के ठीक नीचे आज का निचला स्तर मुख्य समर्थन स्तर साबित हुआ है। इस स्तर पर मूल्य 200-दिवसीय घातीय गतिशील औसत (EMA) से एक पिप नीचे गया था, जिसके बाद दोबारा लिवाली देखने को मिली। जुलाई के अंत से लेकर अब तक इस औसत के नीचे कोई दैनिक बंद नहीं देखा गया है। इसके नीचे अगला मजबूत समर्थन 1.3400 पर स्थित है।\n\nजब तक 1.3500 का स्तर पार नहीं होता, तब तक बाजार का रुख मंदी की ओर झुका हुआ है। इसमें पहला गिरावट का लक्ष्य 1.3400 और उसके बाद 1.3350 का स्तर रहेगा। मोमेंटम संकेतक दैनिक स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (Stoch RSI) 16 के करीब चल रहा है और पिछले तीन कारोबारी सत्रों से अपने निचले दायरे में सपाट बना हुआ है। यदि 1.3500 की तरफ कोई हल्की रिकवरी आती भी है, तो इस संकेतक के रुख में बड़ा बदलाव नहीं होगा, जब तक कि इसके ऊपर दैनिक बंद न मिल जाए।\n\nलाइव मार्केट डेटा के अनुसार, जीबीपी/यूएसडी (GBPUSD=X) 1.34 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद भाव 1.34 से 0.28 प्रतिशत ऊपर है। इस जोड़ी का 52-सप्ताह का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना पर दर्ज किया गया। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 38 पर है और एमएसीडी मंदी का संकेत दे रहा है। 20-दिवसीय ईएमए 1.35, 50-दिवसीय ईएमए 1.35 और 200-दिवसीय ईएमए 1.34 पर स्थित है। 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से ऊपर होना गोल्डन क्रॉस दर्शाता है, लेकिन समग्र मूल्य दीर्घकालिक डाउनट्रेंड में बना हुआ है। बोलिंजर बैंड्स 1.34 से 1.37 के बीच हैं, 14-दिवसीय एडीएक्स 22 पर सीमित दायरे का संकेत दे रहा है, और औसत वास्तविक दायरा (ATR) 0.01 पर है। पिवट स्तर 1.34 के आसपास टिका हुआ है।\n\nपाउंड स्टर्लिंग का ऐतिहासिक महत्व और विदेशी मुद्रा बाजार में भूमिका\nब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग दुनिया की सबसे पुरानी सक्रिय मुद्रा मानी जाती है, जिसका इतिहास वर्ष 886 ईस्वी से जुड़ा हुआ है। यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है। वैश्विक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में यह चौथी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार के कुल लेनदेन में पाउंड की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत है, जो प्रतिदिन औसतन 630 अरब डॉलर के कारोबार का प्रतिनिधित्व करती है।\n\nविदेशी मुद्रा बाजार में इसके सबसे प्रमुख व्यापारिक जोड़ों में जीबीपी/यूएसडी शामिल है, जिसे ट्रेडर्स 'केबल' के नाम से भी पुकारते हैं। यह जोड़ी वैश्विक मुद्रा कारोबार के 11 प्रतिशत हिस्से को कवर करती है। इसके अलावा जीबीपी/जेपीवाई (GBP/JPY), जिसे ट्रेडर्स की भाषा में 'ड्रैगन' कहा जाता है, कुल बाजार के 3 प्रतिशत हिस्से पर काबिज है, जबकि यूरो और पाउंड की जोड़ी (EUR/GBP) 2 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है। पाउंड स्टर्लिंग का निर्गमन बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा किया जाता है।\n\nकेंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति और मुद्रा के मूल्य पर नियंत्रण\nपाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा निर्धारित की जाने वाली मौद्रिक नीति है। केंद्रीय बैंक अपने सभी निर्णय मूल्य स्थिरता के प्राथमिक लक्ष्य को ध्यान में रखकर लेता है, जिसके तहत मुद्रास्फीति की दर को लगभग 2 प्रतिशत के आसपास बनाए रखने का लक्ष्य रखा जाता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ब्याज दरों में समायोजन करना केंद्रीय बैंक का सबसे प्रमुख साधन है।\n\nजब अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति अत्यधिक बढ़ जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में इजाफा करता है। ब्याज दरें बढ़ने से व्यक्तियों और व्यवसायों के लिए ऋण लेना महंगा हो जाता है, जिससे उपभोग और मांग में कमी आती है। सामान्य तौर पर यह कदम पाउंड के लिए सकारात्मक साबित होता है, क्योंकि उच्च ब्याज दरें विदेशी निवेशकों को अपनी पूंजी ब्रिटेन में जमा करने के लिए आकर्षित करती हैं। इसके विपरीत जब मुद्रास्फीति काफी नीचे गिर जाती है, तो यह आर्थिक विकास की सुस्ती का संकेत होता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करता है ताकि कर्ज सस्ता हो सके और कंपनियां विकास कार्यों में निवेश बढ़ा सकें।\n\nआर्थिक संकेतक और व्यापार संतुलन का विदेशी मुद्रा पर प्रभाव\nब्रिटेन से जारी होने वाले विभिन्न आर्थिक आंकड़े अर्थव्यवस्था की सेहत का पैमाना होते हैं और इनका सीधा असर पाउंड की मजबूती पर पड़ता है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई, तथा रोजगार से जुड़े आंकड़े पाउंड स्टर्लिंग की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था पाउंड को सीधे तौर पर मजबूती देती है, क्योंकि यह अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करती है और केंद्रीय बैंक को दरें बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है। कमजोर आंकड़ों की स्थिति में पाउंड में बिकवाली देखने को मिलती है।\n\nइसके साथ ही व्यापार संतुलन के आंकड़े भी मुद्रा के उतार-चढ़ाव में बड़ी भूमिका निभाते हैं। यह संकेतक किसी निश्चित अवधि में देश के कुल निर्यात से होने वाली कमाई और आयात पर होने वाले खर्च के अंतर को मापता है। यदि किसी देश के निर्यात उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग होती है, तो खरीदारों को वे उत्पाद खरीदने के लिए उस देश की मुद्रा की जरूरत पड़ती है, जिससे मुद्रा मजबूत होती है। सकारात्मक शुद्ध व्यापार संतुलन मुद्रा को ताकत देता है, जबकि नकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा पर दबाव बढ़ाता है।\n\nवैश्विक बाजारों की हलचल: डॉलर, येन, सोना और तेल का मिजाज\nवैश्विक वित्तीय बाजारों में व्यापक स्तर पर हलचल देखने को मिल रही है। बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) में लगातार तीसरे दिन कमजोरी देखी गई और यह 0.7100 के स्तर का बचाव करते हुए महीने के निचले स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। तेल की ऊंची कीमतों से उपजी महंगाई की चिंताओं और अमेरिकी ब्याज दर वृद्धि की संभावनाओं के कारण अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जिससे अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के उच्च स्तर के पास मजबूत बना हुआ है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से डॉलर को सुरक्षित पनाहगाह का लाभ मिल रहा है।\n\nअमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) एशियाई सत्र में 155.00 के पार निकलकर एक सप्ताह के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में होने वाले फेडरल रिजर्व के फैसले और गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठक से पहले खरीदारों की सतर्कता के चलते यह 155.50 के नीचे ही बना रहा। दूसरी ओर, जापान में एक दशक से अधिक समय से चली आ रही बेहद कम ब्याज दरों ने वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह नीति सख्त करने की संभावनाओं के बीच यह समीकरण अब नए चरण में प्रवेश कर रहा है।\n\nकमोडिटी बाजार में सोने ने लगातार दो दिनों की गिरावट को पीछे छोड़ते हुए कुछ स्थिरता हासिल की है। बुधवार को कीमती धातु में अच्छी बढ़त दर्ज की गई और यह 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में लौट आया। अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बावजूद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी और आगामी नीतिगत फैसलों से पहले निवेशकों की स्थिति सुधारने की कवायद से सोने को समर्थन मिला है।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी और ब्रिटेन में मुद्रास्फीति के आंकड़ों का सीधा असर मुद्रा बाजार के कारोबारियों, आयातकों और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों पर पड़ेगा।\n\n• मुद्रा कारोबारियों के लिए: ब्याज दरों के बदलते अंतर के कारण जीबीपी/यूएसडी जोड़ी में अस्थिरता और बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। ट्रेडर्स को 1.3450 और 1.3500 के प्रमुख तकनीकी स्तरों पर सख्त स्टॉप लॉस के साथ नजर रखनी चाहिए।\n• ब्रिटेन से आयात करने वालों के लिए: पाउंड में डॉलर के मुकाबले आ रही कमजोरी से ब्रिटेन के निर्यात उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर थोड़े सस्ते हो सकते हैं। हालांकि अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से डॉलर में बिल किए जाने वाले आयातों की लागत बढ़ जाएगी।\n• विदेशी निवेशकों के लिए: अमेरिकी दरों के बढ़कर 3.75 से 4.00 प्रतिशत होने से पूंजी प्रवाह डॉलर संपत्तियों की तरफ तेज हो सकता है। निवेशकों को अपने वैश्विक पोर्टफोलियो में यील्ड अंतर के आधार पर करेंसी हेजिंग पर विचार करना चाहिए।\n• वैश्विक ऊर्जा और जिंस खरीदारों के लिए: तेल कीमतों के कारण बढ़ी महंगाई और होर्मुज जलडमरूमध्य के तनाव से ऊर्जा लागत पर दबाव बना रहेगा। इससे आने वाले महीनों में विनिर्माण और परिवहन लागत में अतिरिक्त बढ़ोतरी का जोखिम बना रहेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपाउंड में ताजा गिरावट मुख्य रूप से ब्याज दरों के बदलते संतुलन और तेल कीमतों से प्रेरित मुद्रास्फीति के कारण आई है, जिससे बाजार का ध्यान ब्रिटेन के आंकड़ों से हटकर अमेरिकी नीतिगत बदलावों पर केंद्रित हो गया।\n\n• फेडरल रिजर्व की नीतिगत सख्ती: अमेरिकी ब्याज दरों के 3.75 से 4.00 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद ने डॉलर को अतिरिक्त मजबूती दी है। इसके चलते पाउंड का पूर्ववर्ती यील्ड लाभ समाप्त होकर डॉलर के पक्ष में झुकने की संभावना बन गई है।\n• ईंधन आधारित मुद्रास्फीति का दबाव: ब्रिटेन में अगस्त की मुद्रास्फीति 3.1 प्रतिशत पर पहुंची, जिसका मुख्य कारण मोटर ईंधन की बढ़ती लागत थी। चूंकि घरेलू कोर मुद्रास्फीति 2.6 प्रतिशत पर स्थिर रही, इसलिए केंद्रीय बैंक द्वारा आक्रामक रुख अपनाने की गुंजाइश सीमित मानी गई।\n• कमजोर उपभोक्ता मांग के संकेत: ब्रिटेन में खुदरा बिक्री के आंकड़ों में लगातार गिरावट का अनुमान है, जिससे बैंक ऑफ इंग्लैंड पर अर्थव्यवस्था की सुस्ती रोकने का दबाव है। इस स्थिति ने नीति निर्माताओं के लिए ब्याज दरों में तुरंत बढ़ोतरी करना कठिन बना दिया है।\n• होर्मुज जलडमरूमध्य और भू-राजनीतिक तनाव: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति मार्गों में बाधाओं ने डॉलर की सुरक्षित पनाहगाह मांग को मजबूत किया है। इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने जोखिम वाली मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर को बढ़त दिला दी है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अगस्त में ब्रिटेन की मुद्रास्फीति दर कितनी दर्ज की गई?\nअगस्त में ब्रिटेन की वार्षिक उपभोक्ता मुद्रास्फीति 3.1 प्रतिशत रही, जो जुलाई के 2.9 प्रतिशत से अधिक थी लेकिन अनुमान के बिल्कुल अनुरूप रही।\n\n2. ब्रिटेन की कोर मुद्रास्फीति का स्तर क्या रहा?\nखाद्य, ऊर्जा, शराब और तंबाकू को छोड़कर ब्रिटेन की कोर मुद्रास्फीति 2.6 प्रतिशत पर पूरी तरह अपरिवर्तित बनी रही।\n\n3. अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर क्या अनुमान है?\nअमेरिकी ब्याज दरों के 3.50-3.75 प्रतिशत से बढ़कर 3.75-4.00 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी होगी।\n\n4. बैंक ऑफ इंग्लैंड की वर्तमान ब्याज दर कितनी है?\nबैंक ऑफ इंग्लैंड की मानक ब्याज दर वर्तमान में 3.75 प्रतिशत पर स्थिर है।\n\n5. जीबीपी/यूएसडी के लिए प्रमुख तकनीकी समर्थन स्तर कौन सा है?\nतकनीकी रूप से 1.3450 का स्तर तत्काल समर्थन है, जिसके ठीक नीचे 200-दिवसीय घातीय गतिशील औसत और 1.3400 का स्तर मौजूद है।\n\n6. ब्रिटिश उत्पादक कीमतों में क्या बदलाव देखा गया?\nअगस्त में फैक्ट्री गेट की कीमतें 0.7 प्रतिशत बढ़ीं और वार्षिक आधार पर यह वृद्धि 3.7 प्रतिशत रही, जो अनुमान से अधिक थी।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-09-19",
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