अमेरिकी केंद्रीय बैंक 16 सितंबर को ब्याज दरें बढ़ाकर 3.75% से 4.00% कर सकता है, अर्थशास्त्रियों के सर्वे में संकेत अर्थशास्त्रियों के नए सर्वेक्षण के अनुसार अमेरिकी फेडरल रिजर्व 16 सितंबर को ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। साथ ही मार्च 2027 के अंत तक कम से कम दो और दरों में वृद्धि की संभावना जताई गई है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मौद्रिक नीतियों को लेकर बाजार की नजरें केंद्रीय बैंक के आगामी कदमों पर टिकी हैं। हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, 16 सितंबर को होने वाली बैठक में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को बढ़ाकर 3.75% से 4.00% के दायरे में ले जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके साथ ही, लंबे समय के नीतिगत दृष्टिकोण को लेकर भी जानकारों की राय में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ताजा सर्वेक्षण में शामिल 70 अर्थशास्त्रियों में से 37 का मानना है कि फेडरल रिजर्व मार्च 2027 के अंत तक फेड फंड्स रेट में कम से कम दो बार और बढ़ोतरी करेगा। इससे पहले कराए गए एक सर्वेक्षण में स्थिति काफी अलग थी, जहाँ 82 में से केवल 21 अर्थशास्त्रियों ने इस अवधि तक दो बार दरें बढ़ने की संभावना जताई थी। यह बदलाव स्पष्ट करता है कि बाजार अब लंबे समय तक सख्त मौद्रिक रुख की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के दोहरे वित्तीय लक्ष्य और दर निर्धारण तंत्र संयुक्त राज्य अमेरिका में पूरी मौद्रिक नीति का संचालन और नियंत्रण फेडरल रिजर्व के हाथों में होता है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक को दो प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिन्हें उसका दोहरा अधिदेश कहा जाता है। पहला कार्य कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है, जबकि दूसरा कार्य अर्थव्यवस्था में अधिकतम रोजगार सुनिश्चित करना है। इन दो महत्वपूर्ण लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों में सामयिक बदलाव करना है। जब अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें अनियंत्रित गति से बढ़ने लगती हैं और मुद्रास्फीति फेडरल रिजर्व के निर्धारित 2% के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तब बैंक अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी का रास्ता अपनाता है। दरों के बढ़ने से समूची अर्थव्यवस्था में कर्ज की लागत महंगी हो जाती है। जब उधारी की लागत बढ़ती है, तो अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अपनी पूंजी अमेरिका में लगाना अधिक आकर्षक बन जाता है, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिकी डॉलर को उल्लेखनीय मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब महंगाई दर 2% के आधिकारिक लक्ष्य से नीचे लुढ़क जाती है या बेरोजगारी दर चिंताजनक स्तर तक बढ़ जाती है, तब फेडरल रिजर्व अपनी ब्याज दरों में कटौती करने का विकल्प चुनता है। दरों में नरमी लाने से बाजार में कर्ज लेना सस्ता और आसान हो जाता है, जिससे कारोबारी गतिविधियों और खपत को गति मिलती है। हालांकि, ब्याज दरों में इस तरह की कटौती आमतौर पर अमेरिकी मुद्रा पर दबाव बनाती है और डॉलर की ताकत को कमजोर करती है। ब्याज दरों का यह चक्र देश के आर्थिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने का मुख्य आधार बना रहता है। एफओएमसी का गठन और साल में आठ बार होने वाली बैठकें फेडरल रिजर्व पूरे साल के दौरान आठ आधिकारिक नीतिगत बैठकें आयोजित करता है। इन बैठकों में फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी देश के मौजूदा आर्थिक हालात, महंगाई, रोजगार आंकड़ों और वित्तीय जोखिमों की गहन समीक्षा करती है और उसी के आधार पर मौद्रिक दिशा तय करती है। एफओएमसी की नीतिगत बैठकों में कुल 12 प्रमुख अधिकारी हिस्सा लेते हैं। इस समिति में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के 7 सदस्य अनिवार्य रूप से शामिल होते हैं। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के अध्यक्ष इस समिति के स्थायी सदस्य के रूप में भाग लेते हैं। बाकी बचे 11 क्षेत्रीय रिजर्व बैंकों में से 4 क्षेत्रीय बैंकों के अध्यक्ष एक-एक साल के चक्रीय आधार पर इस समिति में सेवा देते हैं। यह 12 सदस्यीय समूह मिलकर मतदान करता है और ब्याज दरों से जुड़ा अंतिम निर्णय लेता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग और असामान्य संकट के दौरान नकदी प्रवाह गंभीर और असाधारण परिस्थितियों में, जब ब्याज दरों के पारंपरिक उपाय पर्याप्त साबित नहीं होते, तब फेडरल रिजर्व एक विशेष गैर-पारंपरिक नीति का सहारा ले सकता है जिसे क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी क्यूई कहा जाता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग वह जटिल प्रक्रिया है जिसके जरिए केंद्रीय बैंक वित्तीय तंत्र में नकदी और कर्ज के प्रवाह को बड़े पैमाने पर गति प्रदान करता है। इस नीति का उपयोग आमतौर पर भीषण आर्थिक संकट के दौर में या जब मुद्रास्फीति बेहद निचले स्तर पर चली जाती है, तब किया जाता है। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने इसी नीति को अपने सबसे बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया था। इस रणनीति के तहत फेडरल रिजर्व नए डॉलर जारी करता है और उनके जरिए विभिन्न वित्तीय संस्थानों से उच्च गुणवत्ता वाले बॉन्ड खरीदता है। बॉन्ड खरीद की यह प्रक्रिया वित्तीय बाजार में तरलता तो बढ़ाती है, लेकिन इसके व्यापक प्रभाव से सामान्यतः अमेरिकी डॉलर की कीमत कमजोर पड़ती है। क्वांटिटेटिव टाइटनिंग और बैलेंस शीट को सिकोड़ने की प्रक्रिया क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी पूरी तरह से क्वांटिटेटिव ईजिंग के उलट काम करने वाली वित्तीय प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय बैंक के पास पहले से मौजूद जिन बॉन्ड की परिपक्वता अवधि पूरी हो जाती है, उनसे प्राप्त होने वाले मूलधन को नए बॉन्ड खरीदने में फिर से निवेश नहीं किया जाता। इस तरह केंद्रीय बैंक अपनी बैलेंस शीट को धीरे-धीरे सिकोड़ता है और अर्थव्यवस्था में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी को सोखने का काम करता है। बाजार से नकदी कम होने की इस प्रक्रिया का सीधा असर मुद्रा के मूल्य पर पड़ता है, और यह कदम आमतौर पर अमेरिकी डॉलर के मूल्य को मजबूती देने में मददगार साबित होता है। वैश्विक मुद्रा बाजार में डॉलर का रुख और करेंसी जोड़ों की चाल फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत दिशा का असर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान सोमवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी AUD/USD फिसलकर डेढ़ सप्ताह के निचले स्तर लगभग 0.7140 के पास पहुँच गई। हालांकि इस गिरावट के बाद बाजार में कोई बहुत तेज बिकवाली का सिलसिला आगे नहीं बढ़ा। स्पॉट कीमतें 0.7100 के मध्य स्तर से ठीक ऊपर कारोबार कर रही हैं, जो दैनिक आधार पर लगभग 0.25% की गिरावट दर्शाती हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन यानी USD/JPY की जोड़ी में नए सप्ताह के आरंभ में कुछ खरीदारी का रुझान उभरा। एशियाई सत्र के दौरान यह जोड़ी 154.00 के स्तर के करीब चढ़ने में सफल रही, जिससे शुक्रवार को हुए नुकसान के एक हिस्से की भरपाई हो सकी। इसके बावजूद, स्पॉट कीमतें पिछले एक सप्ताह से बने एक सीमित दायरे में ही फंसी हुई हैं। यह दायरा पिछले मंगलवार को छुए गए करीब सात महीने के निचले स्तर के बेहद नजदीक बना हुआ है। विदेशी मुद्रा कारोबारी चालू सप्ताह में प्रमुख केंद्रीय बैंकों के महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों और घटनाओं के इंतजार में सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। कनाडा के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और डिजिटल एसेट्स की स्थिति वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में कनाडा के अगस्त महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़े सोमवार को जारी होने वाले हैं, जिन पर निवेशकों की पैनी नजरें टिकी हुई हैं। स्टैटिस्टिक्स कनाडा द्वारा पेश किए जाने वाले ये आंकड़े बाजार को मूल्य दबावों और महंगाई के स्तर की नई जानकारी देंगे। यह रिपोर्ट बैंक ऑफ कनाडा की 2 सितंबर को संपन्न हुई बैठक के तुरंत बाद सामने आ रही है, जिसमें नीति निर्माताओं ने ब्याज दर को 2.25% पर अपरिवर्तित रखा था। बैंक ऑफ कनाडा का यह फैसला विश्लेषकों की आम सहमति के पूरी तरह अनुरूप रहा था। डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में पाई नेटवर्क यानी PI ने सोमवार को अपनी सुधार यात्रा जारी रखी। लगातार दो हफ्तों की बढ़त के बाद यह टोकन $0.097 के स्तर से ऊपर कारोबार करता नजर आया। इस नेटवर्क के इकोसिस्टम में लगातार हो रहे विकास और डेवलपर टूल्स में किए गए सुधारों से इसकी उपयोगिता को बल मिल रहा है। हालांकि तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो सुधार की यह गति अभी सतर्क नजर आती है, क्योंकि एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी ईएमए का ऊपरी प्रतिरोध स्तर बना हुआ है, जो टोकन की तेजी को सीमित करने की चुनौती पेश कर रहा है। इसका आप पर असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी वैश्विक वित्तीय बाजारों, विदेशी मुद्रा दरों और कर्ज की लागत को सीधे प्रभावित करेगी। • भारतीय निवेशकों पर असर: अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ने से विदेशी संस्थागत निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर अमेरिका का रुख कर सकते हैं। इसके चलते भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और रुपये की विनिमय दर पर डॉलर के मुकाबले दबाव देखा जा सकता है। • आयात और खर्च: मजबूत होता अमेरिकी डॉलर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और अन्य जरूरी आयातित सामानों के बिल को बढ़ा सकता है। यदि आयात महंगा होता है तो इसका असर घरेलू स्तर पर वस्तुओं की कीमतों और रोजमर्रा के बजट पर पड़ सकता है। • वैश्विक कर्जदार: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर में कर्ज लेने वाले कारोबारियों और सरकारों के लिए ब्याज भुगतान का बोझ बढ़ जाएगा। कंपनियों को अपने विदेशी कर्ज के पुनर्वित्तपोषण के लिए अधिक लागत चुकानी पड़ सकती है। • मुद्रा बाजार के ट्रेडर: करेंसी मार्केट में डॉलर के मजबूत होने से प्रमुख विदेशी मुद्रा जोड़ों में तेज अस्थिरता रहने की संभावना है। ट्रेडर और निर्यातकों को अपनी हेजिंग रणनीतियों में आवश्यक बदलाव करने होंगे। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति को अपने आधिकारिक लक्ष्य पर लाने और अर्थव्यवस्था में कीमतों का संतुलन बहाल करने के लिए दरों में बढ़ोतरी का रास्ता चुन रहा है। • मुद्रास्फीति का दबाव: फेडरल रिजर्व का प्राथमिक अधिदेश कीमतों को स्थिर रखना और महंगाई को 2% के दायरे में बनाए रखना है। जब आर्थिक मांग और कीमतों की वृद्धि लक्ष्य से अधिक बनी रहती है, तो ब्याज दरें बढ़ाना अनिवार्य कदम बन जाता है। • आर्थिक चक्र और कर्ज नियंत्रण: उधारी लागत बढ़ाकर केंद्रीय बैंक बाजार में अत्यधिक ऋण विस्तार और सट्टेबाजी पर लगाम लगाता है। इससे समग्र मांग में संयम आता है और उत्पादन लागत का संतुलन सुधरता है। • विश्लेषकों की बदलती राय: हालिया आर्थिक आंकड़ों के बाद 70 में से 37 अर्थशास्त्रियों ने माना है कि मार्च 2027 तक कम से कम दो और बढ़ोतरी आवश्यक होंगी। पूर्व सर्वेक्षण में केवल 21 अर्थशास्त्रियों ने यह राय दी थी, जो सख्त मौद्रिक वातावरण की निरंतर आवश्यकता को दर्शाता है। सवाल-जवाब 1. 16 सितंबर को फेडरल रिजर्व से किस फैसले की उम्मीद की जा रही है? अर्थशास्त्रियों के सर्वेक्षण के अनुसार, फेडरल रिजर्व 16 सितंबर को ब्याज दरें बढ़ाकर 3.75% से 4.00% के दायरे में कर सकता है। 2. मार्च 2027 तक दर वृद्धि को लेकर अर्थशास्त्रियों का क्या अनुमान है? सर्वेक्षण में शामिल 70 में से 37 अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मार्च 2027 के अंत तक कम से कम दो बार ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की जाएगी। 3. फेडरल रिजर्व के दो प्रमुख उद्देश्य क्या हैं? फेडरल रिजर्व के दो मुख्य कार्य कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और अर्थव्यवस्था में अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना हैं। 4. फेडरल ओपन मार्केट कमेटी में कितने सदस्य मतदान करते हैं? एफओएमसी में कुल 12 सदस्य हिस्सा लेते हैं, जिनमें बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के 7 सदस्य, न्यूयॉर्क फेड के अध्यक्ष और 4 क्षेत्रीय बैंक अध्यक्ष शामिल होते हैं। 5. क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में क्या अंतर है? क्वांटिटेटिव ईजिंग में केंद्रीय बैंक नए डॉलर से बॉन्ड खरीदकर बाजार में नकदी बढ़ाता है, जबकि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में बॉन्ड खरीदना बंद कर बैलेंस शीट घटाई जाती है। 6. बैंक ऑफ कनाडा ने अपनी हालिया बैठक में क्या फैसला लिया था? बैंक ऑफ कनाडा ने 2 सितंबर की अपनी बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव न करते हुए इसे 2.25% पर स्थिर रखा था। https://trendkia.com/market/us-central-bank-likely-to-push-interest-rates-to-3-75-4-00-on-september-16-economist-survey-shows-34045 TrendKia — Har trend, sabse pehle.