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  "type": "article",
  "title": "अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स की जीत के बीच संभले वायदा बाजार, डाउ जोंस में उछाल",
  "summary": "अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में सीनेट और प्रतिनिधि सभा पर डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण के बाद टेक शेयरों में घबराहट देखी गई, हालांकि निचले स्तरों पर खरीदारी से डाउ वायदा में बढ़त दर्ज की गई।",
  "content": "अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में बड़े उलटफेर के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में मिली-जुली हलचल देखने को मिल रही है। मध्यावधि चुनावों में अमेरिकी संसद के दोनों सदनों यानी सीनेट और प्रतिनिधि सभा पर डेमोक्रेटिक पार्टी का पूर्ण नियंत्रण स्थापित होने के बाद निवेशकों ने शुरुआती गिरावट का फायदा उठाते हुए निचले स्तरों पर लिवाली की। इसी के चलते बुधवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र में डाउ जोंस वायदा करीब 0.4 प्रतिशत की मजबूती के साथ 52,100 के स्तर पर पहुंच गया। व्यापक बाजार के सूचकांकों में भी मामूली तेजी दर्ज हुई, जहां एसएंडपी 500 वायदा 0.15 फीसदी सुधरकर 7,610 के आसपास और नैस्डैक 100 वायदा 0.14 प्रतिशत बढ़कर 28,340 के करीब कारोबार करता देखा गया।\n\nटेक दिग्गजों पर दबाव और कड़े नियमों की आशंका\nव्यापक सूचकांकों में आई इस रिकवरी के उलट प्री-मार्केट कारोबार में बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों पर भारी दबाव बना रहा। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स के आने से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों पर नियामक शिकंजा कस सकता है। इसी डर से एनवीडिया, एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट, अमेज़न और मेटा जैसी दिग्गज हाइपरस्केल कंपनियों के शेयरों में प्री-मार्केट सत्र के दौरान बिकवाली देखने को मिली। राबोबैंक के विश्लेषकों के अनुसार, नैस्डैक में आई यह शुरुआती कमजोरी किसी तकनीकी वजह से नहीं बल्कि नीतिगत चिंताओं से जुड़ी है। राबोबैंक के विश्लेषकों ने कहा कि चुनावी अभियान के दौरान डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने AI डेवलपर्स पर सख्त निगरानी की बात बार-बार दोहराई थी, जिससे निवेशकों का सतर्क होना स्वाभाविक था।\n\nभू-राजनीतिक तनाव और वाशिंगटन के फैसलों का इंतजार\nबाजारों की सतर्कता केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि भू-राजनीतिक मोर्चे पर भी अनिश्चितता गहरा रही है। अमेरिकी संसद में इस सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद अब सबकी निगाहें ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध से जुड़े वाशिंगटन के आगामी रणनीतिक फैसलों पर टिकी हैं। रक्षा और विदेश नीति से जुड़े इन संवेदनशील कदमों को लेकर निवेशक अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं, जिससे सूचकांकों के वायदा कारोबार पर लगातार दबाव बना हुआ है। किसी भी संभावित सैन्य फैसले का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर पड़ सकता है, जिसके चलते संस्थागत निवेशक आक्रामक दांव लगाने से बच रहे हैं।\n\nआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बुनियादी संरचना और इसका विस्तार\nआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मूल रूप से कंप्यूटर विज्ञान का एक ऐसा अकादमिक क्षेत्र है जिसका उद्देश्य मशीनों के भीतर मानवीय सोच, तार्किक समझ, धारणा और पैटर्न पहचानने की क्षमताओं को विकसित करना है। इस विषय के दायरे में कई प्रमुख उप-शाखाएं आती हैं, जिनमें आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क, मशीन लर्निंग या प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, सिम्बोलिक रीजनिंग, डीप लर्निंग, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग, स्पीच रिकॉग्निशन, इमेज रिकॉग्निशन और एक्सपर्ट सिस्टम्स शामिल हैं। इस पूरे तकनीकी प्रयास का अंतिम लक्ष्य आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) तैयार करना है। AGI का अर्थ ऐसी मशीन तैयार करने से है जो उन जटिल और मनमाने कार्यों को भी खुद सुलझा सके, जिनके लिए उसे पहले से कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं दिया गया हो।\n\nविभिन्न उद्योगों में AI के व्यावहारिक उपयोग\nवर्तमान दौर में इस तकनीक के कई व्यावहारिक उपयोग सामने आ चुके हैं। इनमें सबसे अधिक चर्चा जनरेटिव AI प्लेटफॉर्म्स की है, जो बड़े भाषा मॉडल्स (LLMs) के प्रशिक्षण के आधार पर पूछे गए लिखित सवालों के जवाब तैयार करते हैं। चैटजीपीटी और गूगल का बार्ड प्लेटफॉर्म इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इसी तरह मिडजर्नी नामक प्रोग्राम उपयोगकर्ताओं द्वारा दिए गए लिखित विवरण से मौलिक तस्वीरें तैयार करने में सक्षम है। इसके अलावा कई प्रणालियां आंकड़ों के विश्लेषण पर काम करती हैं, जैसे अपस्टार्ट का लेंडिंग प्लेटफॉर्म, जो इंटरनेट से आवेदकों के करियर, वित्तीय स्थिति और पेशेवर संपर्कों का मूल्यांकन करके उनकी ऋण पात्रता तय करता है। कई दवा कंपनियां वैज्ञानिक अध्ययनों के विशाल डेटाबेस की मदद से नई दवाओं के फॉर्मूले तलाश रही हैं। वहीं यूट्यूब, स्पॉटिफाई और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं की पसंद और आदतों का विश्लेषण करके उन्हें व्यक्तिगत सामग्री सुझाते हैं।\n\nचिप निर्माता और डेटा एनालिटिक्स कंपनियों की भूमिका\nइस तकनीकी लहर में बुनियादी ढांचे की आपूर्ति करने वाली कंपनियों का महत्व काफी बढ़ गया है। एनवीडिया (NVDA) ऐसी सेमीकंडक्टर कंपनी है जो AI-केंद्रित आधुनिक कंप्यूटर चिप्स के साथ वे प्लेटफॉर्म भी तैयार करती है जिन पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपने एप्लिकेशन विकसित करते हैं। कई बाजार विशेषज्ञ एनवीडिया को इस पूरी क्रांति का सबसे अहम आधार स्तंभ मानते हैं। दूसरी ओर पैलेंटिर टेक्नोलॉजीज (PLTR) एक बड़ी डेटा एनालिटिक्स फर्म है, जिसके पास अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के साथ बड़े अनुबंध हैं। अमेरिकी एजेंसियां इसके गोथम प्लेटफॉर्म का उपयोग खुफिया जानकारियों की पड़ताल और पैटर्न समझने में करती हैं। वहीं इसका फाउंड्री प्रोडक्ट निजी कॉरपोरेट्स द्वारा कर्मचारियों और ग्राहकों के डेटा का विश्लेषण करने तथा विसंगतियों की पहचान में काम आता है। इसी क्रम में माइक्रोसॉफ्ट (MSFT) ने चैटजीपीटी बनाने वाली गैर-सूचीबद्ध कंपनी ओपनएआई में बड़ा निवेश किया है और इसकी तकनीक को अपने बिंग सर्च इंजन के साथ जोड़ दिया है।\n\nवैल्यूएशन पर बहस: क्या यह 90 के दशक जैसा बुलबुला है?\nसाल 2022 के अंतिम महीनों में आम जनता के लिए चैटजीपीटी की पेशकश के बाद AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी उछाल दर्ज हुआ था। उदाहरण के लिए, एनवीडिया के शेयर इस लॉन्च के बाद के छह महीनों में 200 प्रतिशत से भी अधिक चढ़ गए। वॉल स्ट्रीट के कई विश्लेषकों ने इस बात पर चर्चा शुरू कर दी कि क्या बाजार किसी नए तकनीकी बुलबुले की चपेट में आ रहा है। पैलेंटिर और एनवीडिया दोनों में बड़ा निवेश रखने वाले दिग्गज निवेशक स्टेनली ड्रकनमिलर ने स्पष्ट किया था कि कोई भी बुलबुला महज छह महीने में खत्म नहीं होता। ड्रकनमिलर ने कहा कि यदि यह उत्साह किसी बुलबुले का रूप लेता है तो इसका अत्यधिक मूल्यांकन 1990 के दशक के डॉट-कॉम बुलबुले की तरह कम से कम ढाई साल या उससे अधिक समय तक खिंचेगा। साल 2023 के मध्य के आंकड़ों के अनुसार बाजार को पूरी तरह बुलबुले में नहीं माना जा सकता था। हालांकि उस समय एनवीडिया अपने फॉरवर्ड सेल्स के 27 गुना पर कारोबार कर रहा था, लेकिन विश्लेषकों को भविष्य में भारी राजस्व वृद्धि की उम्मीद थी। तुलनात्मक रूप से, डॉट-कॉम बुलबुले के चरम पर नैस्डैक 100 अपनी आय के 60 गुना पर था, जबकि 2023 के मध्य में यह मूल्यांकन 25 गुना पर था।\n\nमुद्रा बाजारों में हलचल: डॉलर पर दबाव, सोना 4,000 डॉलर के पार\nअमेरिकी चुनावी नतीजों और संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स के दबदबे से पैदा हुई अनिश्चितता ने विदेशी मुद्रा बाजार को सीधे प्रभावित किया है। शुरुआती रुझानों के बाद अमेरिकी डॉलर सूचकांक में भारी बिकवाली देखी गई, जिससे यह सितंबर के अंत के बाद के सबसे निचले स्तर तक लुढ़क गया। इस राजनीतिक उथल-पुथल के चलते सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग तेज हो गई, जिससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई और डॉलर पर दबाव और बढ़ गया। इसका असर प्रमुख मुद्राओं पर साफ दिखा। एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) 0.6965 के स्तर के आसपास दो सप्ताह के निचले स्तर से संभलकर स्थिर रहा, हालांकि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक (RBA) के नरम रुख ने इसकी बढ़त को सीमित रखा। दूसरी तरफ येन के मुकाबले डॉलर (USD/JPY) टूटकर 158.00 के नीचे आ गया। सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग में भारी उछाल आया और यूरोपीय सत्र में सोना 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के काफी ऊपर मजबूती के साथ कारोबार करता रहा।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी संसद के दोनों सदनों में राजनीतिक बदलाव और शेयर वायदा में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय खुदरा निवेशकों, आईटी सेक्टर और बुलियन बाजार पर पड़ेगा।\n\n• भारतीय शेयर बाजार पर प्रभाव: अमेरिकी टेक शेयरों पर संभावित विनियामक दबाव से घरेलू आईटी कंपनियों के शेयरों में अल्पावधि उतार-चढ़ाव रह सकता है। निवेशकों को प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नया आवंटन करने से पहले सतर्क रुख अपनाना चाहिए।\n• सोने और चांदी के भाव: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के 4,000 डॉलर के पार निकलने से भारतीय सर्राफा बाजारों में भी सोने की कीमतों में तेजी का रुख बना रहेगा। आभूषण खरीदारों और स्वर्ण निवेशकों को मौजूदा ऊंचे स्तरों पर चरणबद्ध तरीके से खरीदारी की रणनीति बनानी चाहिए।\n• मुद्रा और आयात लागत: डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से भारतीय रुपये को स्थिरता मिल सकती है, जिससे आयातित कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की लागत पर पड़ने वाला दबाव कुछ हद तक कम होगा। उपभोक्ताओं के लिए यह मुद्रास्फीति के दबाव को संतुलित करने में सहायक साबित हो सकता है।\n• वैश्विक म्यूचुअल फंड निवेशक: अमेरिका-केंद्रित इक्विटी या टेक फंडों में निवेश करने वाले भारतीय खुदरा निवेशकों के पोर्टफोलियो रिटर्न में थोड़ी अस्थिरता देखने को मिल सकती है। ऐसे निवेशकों को घबराहट में निकासी करने के बजाय अपने लंबी अवधि के एसआईपी निवेश पर टिके रहने की सलाह दी जाती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा संसद के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल करने के बाद निवेशकों ने संभावित नीतिगत बदलावों और नई विनियामक व्यवस्था की संभावनाओं के आधार पर अपनी वित्तीय स्थिति को पुनर्संतुलित किया है।\n\n• सख्त विनियामक नीतियां: चुनावी अभियानों के दौरान डेमोक्रेटिक नेताओं ने AI तकनीकों और कॉर्पोरेट एकाधिकार पर कड़े नियमों की लगातार वकालत की थी। दोनों सदनों में जीत के बाद इस नियामक एजेंडे के लागू होने की संभावना बढ़ गई, जिसने बड़ी तकनीकी कंपनियों में बिकवाली को बढ़ावा दिया।\n• सुरक्षित संपत्तियों में प्रवाह: राजनीतिक समीकरण बदलने और ईरान पर अमेरिकी-इजरायली युद्ध को लेकर वाशिंगटन के लंबित रणनीतिक फैसलों ने अनिश्चितता पैदा की। इसके परिणामस्वरूप संस्थागत पूंजी ने सरकारी बॉन्ड और सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों का रुख किया, जिससे डॉलर कमजोर हुआ और सोने के भाव 4,000 डॉलर से ऊपर पहुंच गए।\n• निचले स्तरों पर लिवाली: शुरुआती तेज गिरावट के बाद दीर्घकालिक फंड प्रबंधकों ने ब्लू-चिप कंपनियों के शेयरों में आई कमजोरी को खरीदारी का मौका माना। इस खरीदारी के सहारे डाउ जोंस और व्यापक अमेरिकी सूचकांकों के वायदा सौदों में यूरोपीय कारोबारी घंटों के दौरान रिकवरी दर्ज की गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद शेयर बाजारों में क्या रुझान देखने को मिला?\nडेमोक्रेट्स की दोनों सदनों में जीत के बाद शुरुआती गिरावट आई, लेकिन निचले स्तरों पर लिवाली से डाउ जोंस वायदा 0.4 प्रतिशत बढ़कर करीब 52,100 पर पहुंच गया।\n\n2. टेक कंपनियों के शेयरों में प्री-मार्केट सत्र में गिरावट क्यों आई?\nडेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कॉर्पोरेट कंपनियों पर कड़े विनियामक नियमों की आशंका बढ़ गई, जिससे एनवीडिया, एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे शेयर गिर गए।\n\n3. विदेशी मुद्रा बाजार और डॉलर इंडेक्स पर इसका क्या असर हुआ?\nराजनीतिक अनिश्चितता के चलते डॉलर इंडेक्स लुढ़ककर सितंबर के अंत के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गया और USD/JPY गिरकर 158.00 से नीचे चला गया।\n\n4. सोने की कीमतों में कैसी हलचल दर्ज की गई?\nकमजोर डॉलर और सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने के कारण सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर के काफी ऊपर कारोबार करता रहा।\n\n5. डॉट-कॉम दौर और 2023 के मध्य में टेक वैल्युएशन में क्या मुख्य अंतर था?\nडॉट-कॉम बुलबुले के चरम पर नैस्डैक 100 अपनी आय के 60 गुना पर था, जबकि 2023 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