अमेरिकी डॉलर 17 महीने के उच्चतम स्तर पर, सोने की कीमतों पर दबाव बरकरार वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण सोने की कीमतों में सीमित बढ़त देखी जा रही है, जिससे सर्राफा बाजार में निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। वैश्विक बाजार में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत के साथ ही सोने की चाल काफी सुस्त नजर आ रही है, जिसका सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर में आई जोरदार तेजी है। सोने की हाजिर कीमत एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान मामूली बढ़त दर्ज करने के बाद लगभग 4,150 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर रही। निवेशकों ने हालिया कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों को नजरअंदाज करते हुए अमेरिकी मुद्रा में नई खरीदारी की है, जिससे डॉलर अप्रैल 2025 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी डॉलर की यह जबर्दस्त मजबूती पीली धातु के किसी भी बड़े उछाल पर लगाम लगा रही है, हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं में आई कमी ने कीमतों को तेज गिरावट से बचाया है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश के विकल्प सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बाजार कारोबारी अभी भी करीब 85 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहे हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस साल के अंत तक उधारी लागत में बढ़ोतरी करेगा। इसके साथ ही मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के बढ़ते दायरे से पैदा हुई अनिश्चितताओं ने अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित निवेश के तौर पर जोरदार समर्थन दिया है। पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ टकराव का कोई सैन्य समाधान नहीं है, लेकिन तेहरान युद्ध में लौटने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने कहा कि जब तक हमारी शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला जाएगा। दूसरी ओर, यमन की प्रशासनिक परिषद के प्रमुख रशद अल-अलीमी ने देश में हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले शेष इलाकों को वापस लेने के लिए नए सैन्य अभियानों की घोषणा की है। यूरोपीय मोर्चे पर भी तनाव चरम पर है, जहां यूक्रेन ने रविवार को कीव क्षेत्र, खार्किव और नीप्रो में जानलेवा रूसी हवाई हमलों की जानकारी दी। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि रूस को इस हमले का निश्चित रूप से जवाब मिलेगा। इन सभी अंतरराष्ट्रीय तनावों ने वैश्विक बाजार में जोखिम का माहौल बनाए रखा है, जिससे डॉलर को मजबूती मिल रही है और सोने के खरीदारों को सतर्क रहने पर मजबूर होना पड़ रहा है। अब बाजार की नजर अमेरिका के आईएसएम सर्विसेज पीएमआई आंकड़ों और फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के प्रमुख सदस्यों के बयानों पर टिकी है। सोने के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर और रुकावटें सोने के तकनीकी परिदृश्य को देखें तो निकट अवधि में इसका झुकाव नीचे की ओर बना हुआ है। चार्ट पर पहली तकनीकी रुकावट 61.8 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर 4,225 डॉलर पर स्थित है। यदि कीमत इससे ऊपर निकलती है, तो 100-पीरियड एसएमए 4,269 डॉलर पर अगला अवरोध बनेगा। इसके बाद 50 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर 4,314 डॉलर और 38.2 प्रतिशत स्तर 4,403 डॉलर पर प्रमुख बाधाएं मौजूद हैं। दूसरी तरफ, नीचे की ओर तात्कालिक सहारा 78.6 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर 4,098 डॉलर पर है। अगर बिकवाली और गहरी होती है, तो पिछला निचला स्तर 3,936 डॉलर एक अहम ढांचागत आधार साबित हो सकता है, जहां खरीदार दोबारा सक्रिय हो सकते हैं। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, सोने की कीमत 4,159 डॉलर के आसपास कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद भाव 4,162 डॉलर की तुलना में 0.08 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्शाती है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत का 0.14 गुना दर्ज किया गया है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 34 के स्तर पर है और एमएसीडी -67.11 पर मंदी का रुझान दिखा रहा है। 20-दिवसीय ईएमए 4,295 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,339 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,442 डॉलर पर हैं, जिसमें ईएमए50 के ईएमए200 से नीचे जाने के कारण डेथ क्रॉस की स्थिति बनी हुई है। इसके साथ ही 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 4,116 डॉलर से 4,521 डॉलर के बीच फैला है और 14-दिवसीय एटीआर 92.54 के स्तर पर दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। वर्तमान में पिवट पॉइंट 4,167 डॉलर, पहला प्रतिरोध 4,182 डॉलर और प्राथमिक समर्थन 4,144 डॉलर पर आंका गया है। विदेशी मुद्रा बाजार में प्रमुख करेंसियों का हाल अमेरिकी डॉलर की ताजा तेजी का असर विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी साफ देखा गया। डॉलर के मुकाबले यूरो में सबसे अधिक कमजोरी दर्ज की गई। यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी गिरकर 1.1312 के स्तर तक पहुंच गई, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है और जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यह गिरावट यूरोप के ऊर्जा संकट के जोखिम और डॉलर की सुरक्षित मांग का मिलाजुला परिणाम है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी पर भी बिकवाली का दबाव बना रहा और यह गिरकर 0.6900 के स्तर की ओर आ गई, जहां निवेशक कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड पर नजर रखे हुए हैं। इसी तरह, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी ने शुरुआती नुकसान की भरपाई करते हुए एशियाई सत्र में 158.00 का स्तर फिर हासिल कर लिया। हालांकि बैंक ऑफ जापान की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदें और संभावित बाजार हस्तक्षेप का डर डॉलर-येन की बढ़त को सीमित कर सकता है। कुल मिलाकर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी के बावजूद डॉलर की व्यापक मजबूती ने सोने को एक सीमित दायरे में कैद कर रखा है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर की तेज मजबूती और सोने के सीमित दायरे का असर आम निवेशकों और आभूषण खरीदारों पर सीधा पड़ता है। • भारतीय खुदरा खरीदारों पर: वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में ठहराव के बावजूद घरेलू बाजार में डॉलर के मजबूत होने से आयात लागत बढ़ सकती है। इसके चलते भारतीय बाजारों में सोने के आभूषणों के दाम बहुत ज्यादा सस्ते होने की उम्मीद कम है। • कमोडिटी और शेयर निवेशकों पर: डॉलर इंडेक्स के 17 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से कमोडिटी पोर्टफोलियो में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। निवेशकों को अपने स्टॉप लॉस स्तरों को सख्त रखते हुए आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की घोषणा का इंतजार करना चाहिए। • विदेशी यात्रा और खर्च पर: मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण विदेश यात्रा, विदेश में शिक्षा और डॉलर में होने वाले लेनदेन महंगे बने रहेंगे। योजना बनाने वाले परिवारों को अपने विदेशी मुद्रा खर्च के बजट की समीक्षा पहले से कर लेनी चाहिए। • सुरक्षित निवेश की रणनीति पर: भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद जब डॉलर बढ़ता है तो सोने की चमक थोड़ी धीमी पड़ जाती है। ऐसे समय में निवेशकों को एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय किस्तों में संचय करने पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ सोने की कीमतों में ठहराव और अमेरिकी डॉलर की नई छलांग कई वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक कारणों का संयुक्त परिणाम है। • सुरक्षित निवेश का रुख डॉलर की ओर: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और यूक्रेन में नए हमलों ने वैश्विक निवेशकों को सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अमेरिकी मुद्रा की ओर आकर्षित किया है। जब निवेशक नकदी और डॉलर को प्राथमिकता देते हैं, तो सोने की तात्कालिक मांग सीमित हो जाती है। • फेडरल रिजर्व की नीतिगत दरें: हालांकि अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना घटी है, फिर भी करीब 85 प्रतिशत संभावना है कि फेड इस साल के अंत तक उधारी लागत बढ़ा सकता है। ऊंची ब्याज दरों का डर पारंपरिक रूप से ब्याज न देने वाले सोने के आकर्षण को कम करता है। • वैश्विक व्यापार और ऊर्जा संकट: होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी बयानबाजी और यूरोपीय ऊर्जा चिंता ने विदेशी मुद्राओं पर दबाव बनाया है। यूरो के 17 महीने के निचले स्तर पर फिसलने से डॉलर इंडेक्स को अतिरिक्त मजबूती मिली है। सवाल-जवाब 1. सोने की कीमत किस स्तर के आसपास संघर्ष कर रही है? सोना वर्तमान में लगभग 4,150 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर होकर कारोबार कर रहा है। 2. अमेरिकी डॉलर में ताजा उछाल का मुख्य कारण क्या है? मध्य पूर्व और यूक्रेन संकट के कारण उपजे भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग ने डॉलर को मजबूती दी है। 3. फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की क्या संभावना है? फेडवॉच टूल के अनुसार, लगभग 85 प्रतिशत संभावना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस साल के अंत तक ब्याज दरें बढ़ाएगा। 4. चार्ट पर सोने के लिए तात्कालिक समर्थन और प्रतिरोध स्तर क्या हैं? सोने के लिए 4,225 डॉलर पर पहला प्रतिरोध और 4,098 डॉलर पर तात्कालिक समर्थन स्तर मौजूद है। 5. यूरो में किस स्तर तक की गिरावट दर्ज की गई है? यूरो डॉलर के मुकाबले गिरकर 1.1312 के स्तर पर आ गया है, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। https://trendkia.com/market/us-dollar-17-mahine-ke-uchchatama-stara-para-gold-ki-kimaton-para-dabava-barakarara-43072 TrendKia — Har trend, sabse pehle.