अमेरिकी डॉलर 18 महीने के उच्चतम स्तर पर, गैर-कृषि रोजगार आंकड़ों से पहले वैश्विक बाजारों में भारी हलचल अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 102.00 का अहम स्तर पार कर 18 महीने के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जबकि वैश्विक मुद्रा, कच्चा तेल और सोना बाजार अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से पहले सतर्क बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को अमेरिकी डॉलर में जबर्दस्त तेजी देखने को मिली, जिसके चलते डॉलर इंडेक्स 18 महीने के अपने नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। निवेशक और ट्रेडर्स सप्ताह के अंत में सामने आने वाले अमेरिकी गैर-कृषि रोजगार यानी एनएफपी आंकड़ों और बेरोजगारी दर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, तथा फ्रांस की अर्थव्यवस्था को लेकर सामने आई नई चिंताओं ने सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर अमेरिकी डॉलर की मांग को काफी मजबूती दी है। डॉलर का यह मजबूत रुख आखिरी बार अप्रैल 2025 की शुरुआत में देखा गया था, और अब यह इंडेक्स 102.00 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर चुका है। प्रमुख मुद्राओं पर अमेरिकी डॉलर का भारी दबाव अमेरिकी डॉलर के आक्रामक रुख ने दुनिया की प्रमुख मुद्राओं को गहरे दबाव में धकेल दिया है। ब्रिटिश पाउंड में डॉलर के मुकाबले भारी कमजोरी दर्ज की गई है। पाउंड और डॉलर की जोड़ी यानी GBP/USD अपने पिछले दिन के सुधार के प्रयासों को गंवाते हुए चार महीने के निचले स्तर पर फिसल गई और 1.3200 के स्तर से नीचे कारोबार करती नजर आई। ब्रिटेन के आर्थिक मोर्चे पर बैंक ऑफ इंग्लैंड का डिसीजन मेकर पैनल डेटा ही अकेला प्रमुख घटनाक्रम है, जिससे ट्रेडर्स किसी बड़े घरेलू संकेत के अभाव में पूरी तरह वैश्विक धारणा पर निर्भर हैं। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भी दबाव से बच नहीं सका। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान AUD/USD दो महीने के निचले स्तर के करीब लगभग 0.6900 के मध्य क्षेत्र में सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा। अगस्त महीने में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष तेजी से गिरकर 49.5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं तो बढ़ीं, लेकिन मुद्रा पर इसका तात्कालिक असर सीमित ही रहा। अमेरिका के पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर डेटा ने अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका को कुछ हद तक शांत जरूर किया है, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से उपजी महंगाई की चिंता ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊंचे स्तरों पर बनाए रखा है, जिससे डॉलर को लगातार बढ़त मिल रही है। येन और कच्चे तेल के बाजारों में अस्थिरता जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी USD/JPY ने एशियाई सत्र में 158.00 के स्तर को पार करते हुए अपने साप्ताहिक दायरे के शीर्ष पर जगह बनाई। हालांकि, बाद में यह 158.00 के पार अपनी बढ़त को पूरी तरह बरकरार रखने में नाकाम रहा और गिरकर 157.00 के निचले स्तर के करीब आ गया, फिर भी दिन के अंत तक इसने अच्छी-खासी बढ़त कायम रखी। बैंक ऑफ जापान द्वारा संभावित सख्त मौद्रिक नीति और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप के जोखिम के बावजूद, डॉलर की चौतरफा मजबूती येन पर हावी बनी हुई है। आने वाले सत्रों में टोक्यो सीपीआई, बेरोजगारी दर और मॉनेटरी बेस से जुड़े जापानी आंकड़े बाजार की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। ऊर्जा बाजार में भी तेज हलचल देखने को मिल रही है। फ्रंट-मंथ डब्ल्यूटीआई क्रूड फ्यूचर्स बुधवार की तेजी को आगे बढ़ाते हुए 93.00 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को चुनौती देने पहुंच गया। तेल की कीमतों में इस नए उछाल के पीछे चीन का तेल उत्पादों के निर्यात को निलंबित करने का हालिया फैसला मुख्य कारण रहा है, जिसने वैश्विक आपूर्ति में रुकावट की चिंताओं को फिर से भड़का दिया है। आपूर्ति पर दबाव बने रहने से महंगाई के दोबारा भड़कने का खतरा गहरा रहा है, जो सीधे तौर पर केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियों को प्रभावित कर सकता है। सोने और क्रिप्टोकरेंसी पर अनिश्चितता का साया कीमती धातुओं के बाजार में सोने के भाव में उतार-चढ़ाव भरा रुख बना हुआ है। सोना लगातार 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर से नीचे अटका हुआ है। एक तरफ जहां मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष और अमेरिका-ईरान तनाव के चलते सोने को सुरक्षित ठिकाने के तौर पर सहारा मिलना चाहिए, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी डॉलर की जोरदार मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर इसकी बढ़त पर ब्रेक लगा रहे हैं। इसके साथ ही ट्रेडर्स उम्मीद से नरम आए महंगाई आंकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संभावित ब्याज दर पथ का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। डिजिटल एसेट्स यानी क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी बिकवाली और सतर्कता का माहौल है। प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन 82,500 डॉलर के समर्थन स्तर और 85,000 डॉलर के प्रतिरोध स्तर के बीच एक संकरे दायरे में कारोबार कर रहा है। इसी तरह इथेरियम भी लगातार दबाव में है और 2,700 डॉलर के स्तर से नीचे बना हुआ है, जहां 2,600 डॉलर का स्तर इसके लिए तात्कालिक सहारा बना हुआ है। रिपल की कीमत भी फिसलकर महत्वपूर्ण 1.50 डॉलर के स्तर से नीचे आ गई है, जिससे यह साफ झलकता है कि पारंपरिक वित्तीय बाजारों की अनिश्चितता और मजबूत डॉलर का सीधा असर जोखिम भरी डिजिटल संपत्तियों पर भी पड़ रहा है। फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा पर टिकी नजरें अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व के अगले कदमों को लेकर बाजार की उम्मीदों में अप्रत्याशित बदलाव आया है। केवल एक हफ्ते पहले तक अधिकांश निवेशक यह मानकर चल रहे थे कि अक्टूबर की बैठक में नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी तय है। लेकिन हालिया नरम मुद्रास्फीति आंकड़ों और नीति निर्माताओं के सतर्क बयानों के बाद अब ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने यानी ठहराव का परिदृश्य सबसे मजबूत होकर उभरा है। इस पूरे माहौल में फेड की लोरी लोगन का आगामी भाषण, अमेरिकी फैक्ट्री ऑर्डर्स और अंतिम कारोबारी दिन जारी होने वाले आधिकारिक श्रम बाजार आंकड़े वैश्विक वित्तीय बाजारों का रुख तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक व्यापार लागत, आयात बिल और स्थानीय मुद्रा की मजबूती को सीधे प्रभावित करेंगी। • भारत में: कच्चे तेल के 93 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंचने और डॉलर के 18 महीने के उच्च स्तर पर जाने से भारत का ईंधन आयात बिल काफी बढ़ सकता है। इसके चलते घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और परिवहन लागत पर दबाव बढ़ने की संभावना है। • वैश्विक स्तर पर: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से ब्रिटिश पाउंड, यूरो और जापानी येन जैसी प्रमुख मुद्राओं में कमजोरी आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रा, विदेश में पढ़ाई और आयातित वस्तुओं की खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं को अधिक लागत वहन करनी पड़ सकती है। • निवेशकों के लिए: सोने के 4,200 डॉलर से नीचे रहने और बिटकॉइन के 82,500 डॉलर पर समर्थन तलाशने से जोखिम भरी संपत्तियों में सुस्ती देखी जा रही है। जो निवेशक इन संपत्तियों में ट्रेड करते हैं, उन्हें अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के आने तक अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। • ऋण और ब्याज दरों पर: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में जल्द कटौती की गुंजाइश सीमित हो रही है। आम कर्जदारों के लिए वैश्विक स्तर पर होम लोन और पर्सनल लोन की दरों में राहत मिलने में देरी हो सकती है। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल में यह जोरदार उछाल भू-राजनीतिक टकराव, आपूर्ति में अचानक रुकावट और बदलती नीतिगत अपेक्षाओं के मिले-जुले असर के कारण देखने को मिला है। • भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और फ्रांस की आर्थिक चिंताओं ने निवेशकों को जोखिम भरी संपत्तियों से निकालकर अमेरिकी डॉलर में शरण लेने पर मजबूर किया। संकट के समय डॉलर को सबसे सुरक्षित वैश्विक विकल्प माना जाता है, जिससे डॉलर इंडेक्स 102.00 के पार पहुंच गया। • चीन द्वारा तेल उत्पाद निर्यात का निलंबन: चीन द्वारा रिफाइंड तेल उत्पादों के निर्यात को रोकने के अप्रत्याशित निर्णय ने वैश्विक स्तर पर आपूर्ति संकट की आशंकाओं को जन्म दे दिया। इसी फैसले के कारण डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल तेजी से उछलकर 93.00 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेड पर बदलती धारणा: हालिया पीसीई आंकड़ों ने अक्टूबर में ब्याज दर वृद्धि की संभावना को कम किया है, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतों से दोबारा मुद्रास्फीति भड़कने के डर ने अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल को उच्च स्तरों पर टिकाए रखा है। इससे डॉलर को अतिरिक्त मजबूती मिली है और बाकी मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया है। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स ने हाल में क्या नया स्तर हासिल किया है? अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 102.00 के प्रमुख स्तर को पार कर 18 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। 2. कच्चे तेल की कीमतों में 93 डॉलर के करीब उछाल क्यों आया? चीन द्वारा तेल उत्पादों के निर्यात को निलंबित करने के फैसले के बाद आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा हुईं, जिससे डब्ल्यूटीआई क्रूड 93.00 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गया। 3. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड का क्या हाल रहा? ब्रिटिश पाउंड चार महीने के निचले स्तर पर फिसलकर 1.3200 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है। 4. सोने की कीमत किस स्तर के नीचे अटकी हुई है? सोने की कीमत उतार-चढ़ाव के बीच 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर से नीचे बनी हुई है। 5. प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी जैसे बिटकॉइन और इथेरियम किस स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं? बिटकॉइन 82,500 डॉलर के समर्थन और 85,000 डॉलर के प्रतिरोध के बीच है, जबकि इथेरियम 2,700 डॉलर से नीचे और रिपल 1.50 डॉलर से नीचे फिसल चुका है। 6. फेडरल रिजर्व की आगामी ब्याज दर नीति को लेकर बाजार की राय कैसे बदली है? एक हफ्ते पहले अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन नरम महंगाई आंकड़ों के बाद अब दरों में कोई बदलाव न करने यानी ठहराव का परिदृश्य सबसे मजबूत माना जा रहा है। https://trendkia.com/market/us-dollar-18-mahine-ke-uchchatama-stara-para-nfp-se-pahale-vaishvika-bajaron-men-bhari-halachala-41465 TrendKia — Har trend, sabse pehle.