अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों से तय होगी फेडरल रिजर्व की चाल, मुद्रा बाजार में बढ़ी हलचल हालिया अमेरिकी नौकरियों के आंकड़ों और महंगाई रिपोर्ट के आने से पहले बाजार में ब्याज दरों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। वैश्विक मुद्रा बाजारों और कमोडिटीज में इस हफ्ते बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और रोजगार रिपोर्ट के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में नीतिगत बदलावों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बैंक ऑफ न्यूयॉर्क मेलन के जिओफ यू के अनुसार, हाल ही में आए मजबूत अमेरिकी पेरोल आंकड़ों ने सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है। इसके साथ ही, अमेरिकी केंद्रीय बैंक के संचार ब्लैकआउट में प्रवेश करने के बाद अब पूरा ध्यान आगामी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई आंकड़ों पर टिक गया है। अगस्त महीने के ये आंकड़े यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि बाजार में सख्ती की उम्मीदों को और बल मिलता है या फिर उनमें नरमी आती है। रोजगार आंकड़ों का बाजार पर असर बीते हफ्ते आए अमेरिकी पेरोल आंकड़ों ने बाजार के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया, जहां नॉनफार्म पेरोल 162,000 दर्ज किया गया जबकि शुरुआती उम्मीद सिर्फ 55,000 की थी। इस बड़े उछाल के कारण बाजार में सितंबर के दौरान फेड द्वारा दरें बढ़ाने की संभावना 50 प्रतिशत से बढ़कर करीब 60 प्रतिशत हो गई। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ब्याज दरों को लेकर निवेशकों का रुख किस हद तक सीधे तौर पर आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करता है। चूंकि फेडरल रिजर्व अब अपने दो हफ्ते के संचार ब्लैकआउट दौर में है, इसलिए इस छुट्टी के छोटे हफ्ते का पूरा फोकस पूरी तरह से महंगाई के आंकड़ों पर केंद्रित हो गया है। कमजोर सीपीआई आंकड़ों के मायने दूसरी तरफ, यदि आने वाले सीपीआई आंकड़े कमजोर रहते हैं, तो इससे बाजारों को नीतिगत सख्ती की हालिया उम्मीदों को थोड़ा कम करने का अवसर मिल जाएगा। यह स्थिति तब और महत्वपूर्ण हो जाती है जब फेडरल रिजर्व खुद खामोश है और इस समय बाजार के माहौल को सीधे तौर पर दिशा देने में असमर्थ है। ऐसे में निवेशकों की नजरें पूरी तरह से मुद्रास्फीति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में डॉलर और अन्य परिसंपत्तियों की दिशा तय करेंगी। विदेशी मुद्रा बाजार और अन्य परिसंपत्तियों में हलचल विदेशी मुद्रा बाजारों में विभिन्न मुद्राओं की चाल में भी बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियन डॉलर यानी AUD/USD जोड़ी मई के मध्य के बाद से अपने उच्चतम स्तर के ठीक नीचे समेकित हो रही है और सप्ताह की शुरुआत में मिश्रित संकेतों के बीच लगभग 0.7200 पर मंडरा रही है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से आ रहे सख्त रुख की उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा के लिए मददगार साबित हो रही हैं। वहीं, मजबूत अमेरिकी पेरोल रिपोर्ट ने फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाने की उम्मीदों को बल दिया है, जो बढ़ते अमेरिकी-ईरान तनाव के साथ मिलकर सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर को मजबूती दे रहा है और इस करेंसी पेयर पर ऊपरी स्तर पर दबाव बना रहा है। येन और सोने की चाल दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में तेजी का रुख जारी है और सोमवार को यूरोपीय सत्र के दौरान यह 154.00 के स्तर का परीक्षण कर रहा है। बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत दरों में आक्रामक सख्ती की संभावनाओं के कारण जापानी येन लगातार मजबूत हो रहा है। इसके विपरीत, अमेरिकी डॉलर पर देश के बढ़ते कर्ज के बोझ और शुक्रवार को आने वाले अमेरिकी सीपीआई आंकड़ों से पहले फेड की नीतिगत दिशा को लेकर अनिश्चितता का दबाव बना हुआ है। उधर, सोने की कीमतें 4,400 डॉलर के स्तर के ठीक नीचे कुछ स्थिरता दिखा रही हैं और यूरोपीय सत्र के शुरुआती दौर में इसने अपने शुरुआती नुकसान की भरपाई कर ली है। हालांकि, निवेशक इस हफ्ते के अंत में आने वाले अमेरिकी महंगाई के ताजा आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जिसके चलते सोने में किसी भी बड़ी तेजी पर फिलहाल सीमाएं लगी हुई हैं। क्रिप्टोकरेनसी और ऊर्जा बाजार के हाल डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में बिट्टोरेंट यानी TAO में सोमवार को बढ़त का रुख देखा जा रहा है। पिछले पांच दिनों से जारी अपने स्थिर ऊर्ध्वगामी रुझान को बरकरार रखते हुए इसमें 25 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। सोलाना ब्लॉकचेन पर इसी नाम से लॉन्च हुए एक मीम कॉइन और चैटजीपीटी-6 अस्त्रा के रिलीज होने के बाद बिट्टोरेंट को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं। तकनीकी मोर्चे पर टीएओ का दृष्टिकोण तेजी का बना हुआ है क्योंकि इसकी गति मजबूत हो रही है और खरीदारों की नजरें अब 300 डॉलर के ब्रेकआउट स्तर पर टिकी हैं। इसके अलावा, ऊर्जा बाजार में भले ही सामान्य माहौल दिख रहा हो, लेकिन डीजल का बाजार एक अलग ही कहानी बयां कर रहा है। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, जो कि डब्ल्यूटीआई क्रूड के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम है, हाल ही में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया और इंट्रा-डे रिकॉर्ड बनाते हुए 102.00 डॉलर के थोड़ा ही ऊपर पहुंच गया। इसका आप पर असर वैश्विक वित्तीय बाजारों में हो रहे इन बदलावों का सीधा असर मुद्रास्फीति, ब्याज दरों और निवेश की लागत पर पड़ता है। • भारत में: अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल व डीजल के बढ़ते दामों के कारण भारत में आयातित वस्तुओं और ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे महंगाई दर प्रभावित हो सकती है। • वैश्विक स्तर पर: निवेशकों और व्यापारियों के लिए ब्याज दरों की अनिश्चितता के चलते शेयर बाजार, मुद्रा बाजार और कमोडिटीज में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है, जिससे निवेश रणनीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना क्यों बढ़ी है? हाल ही में आए मजबूत अमेरिकी पेरोल आंकड़ों के कारण दरें बढ़ाने की संभावना बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई है। 2. अगस्त के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आंकड़ों का क्या महत्व है? ये आंकड़े यह तय करेंगे कि बाजार में मौद्रिक सख्ती की उम्मीदों को और बढ़ाया जाए या उनमें कटौती की जाए। 3. सोने की कीमत में सीमित उतार-चढ़ाव का क्या कारण है? व्यापारी इस हफ्ते आने वाले अमेरिकी महंगाई के ताजा आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे सोने में बड़ी तेजी सीमित है। 4. बिट्टोरेंट (TAO) में हाल ही में कितनी तेजी आई है? सोलाना पर एक मीम कॉइन लॉन्च होने और चैटजीपीटी-6 अस्त्रा के रिलीज के बाद TAO में पिछले पांच दिनों में 25 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। 5. अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड में क्या रिकॉर्ड दर्ज हुआ है? यूएस डीजल क्रैक स्प्रेड पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकलकर इंट्रा-डे रिकॉर्ड 102.00 डॉलर पर पहुंच गया है। https://trendkia.com/market/us-dollar-and-global-markets-brace-for-us-inflation-data-after-fed-blackout-28944 TrendKia — Har trend, sabse pehle.