अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में नरमी से सोने में तेजी, 4,200 डॉलर के स्तर पर टिकी नजरें कमजोर डॉलर, गिरती बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच सोने की कीमतों में सुधार दर्ज किया गया, जिससे पीली धातु दो महीने के निचले स्तर से उबरकर 4,200 डॉलर की ओर बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में शुक्रवार को सकारात्मक रुख देखने को मिला, जहां पीली धातु हाल के दो महीने के निचले स्तर से उबरते हुए मजबूती की ओर बढ़ रही है। अमेरिकी डॉलर के 18 महीने के उच्चतम स्तर से फिसलने, सरकारी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट और कच्चे तेल के नरम पड़ने से बहुमूल्य धातुओं को सहारा मिला है। वित्तीय बाजारों में निवेशक अब अमेरिका के आगामी आर्थिक संकेतकों और उपभोक्ता भावना से जुड़े आंकड़ों से पहले अपनी पोजीशन को नए सिरे से संतुलित करने में जुटे हैं। अमेरिकी डॉलर का दबाव घटा, कच्चे तेल और बॉन्ड बाजार में राहत विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर की हालिया रिकॉर्ड तेजी में मुनाफावसूली का दौर शुरू हुआ है। डॉलर इंडेक्स में नरमी आने से कमोडिटी बाजार में खरीदारी लौटी है। इसके साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने भी सराफा कीमतों को मजबूती दी है, क्योंकि वित्तीय बाजार बॉन्ड कीमतों में आई पिछली भारी गिरावट को अब जरूरत से ज्यादा आक्रामक मान रहे हैं। ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत के संदर्भ में दिए गए बयानों से भू-राजनीतिक तनाव कुछ कम हुआ है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन और ईरान के बीच सकारात्मक बातचीत जारी है और तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि कांग्रेस चुनावों से पहले किसी तरह के हमले की योजना नहीं है। इस बयान ने उन अटकलों पर विराम लगा दिया जिनमें चुनाव से पहले संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका जताई जा रही थी, जिससे तेल के दामों में गिरावट आई और बाजारों को फौरी राहत मिली। सप्ताह के अंत में अहम अमेरिकी आंकड़ों पर टिकी निवेशकों की निगाहें सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में बाजार भागीदार अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड के उतार-चढ़ाव और मिशिगन प्रारंभिक उपभोक्ता भावना सूचकांक के साथ-साथ अक्टूबर के मुद्रास्फीति प्रत्याशा आंकड़ों पर पैनी नजर रख रहे हैं। इन प्रमुख आंकड़ों के जारी होने से पहले सोने की चाल यह संकेत दे रही है कि धातु पिछले तीन हफ्तों में अपनी पहली साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने की राह पर आगे बढ़ रही है। कारोबारी सत्र के अंत में होने वाले पूंजी प्रवाह का असर भी सर्राफा बाजार के रुख पर साफ दिखेगा। सोने का तकनीकी ढांचा और प्रमुख स्तर दैनिक तकनीकी चार्ट पर XAU/USD का हाजिर भाव 4,174.76 डॉलर के करीब बना हुआ है, जबकि लाइव मार्केट में यह 4,203 डॉलर पर कारोबार कर रहा है। चार्ट पर कई प्रमुख मूविंग एवरेज कीमतें ऊपर की ओर सीमित कर रही हैं, जिससे निकट अवधि का रुख अभी भी सतर्कता भरा है। 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) 4,259.87 डॉलर पर, 50-दिवसीय SMA 4,334.80 डॉलर पर और 200-दिवसीय SMA 4,529.19 डॉलर पर बना हुआ है। जब तक हाजिर कीमतें इन प्रमुख औसतों से नीचे बनी हुई हैं, तब तक मौजूदा तेजी को एक सुधारात्मक पुलबैक के रूप में देखा जा रहा है। दैनिक चार्ट पर 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) लगभग 44 के स्तर पर है, जबकि लाइव तकनीकी आंकड़ों के अनुसार यह 42 पर दर्ज है। यह स्तर दर्शाता है कि निचले स्तरों पर स्थिरता आने के बावजूद मंदी का दबाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। लाइव आंकड़ों के अनुसार मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) -65.42 पर है जो सिग्नल लाइन -58.23 से नीचे बना हुआ है। प्रतिरोध और समर्थन स्तरों का विश्लेषण ऊपर की ओर, कीमतों के लिए प्रारंभिक प्रतिरोध 100-दिवसीय SMA के पास 4,259.87 डॉलर पर स्थित है। इसके पार निकलने पर अगला अवरोध 50-दिवसीय SMA यानी 4,334.80 डॉलर पर देखा जा सकता है, जबकि सबसे मजबूत तकनीकी बाधा 200-दिवसीय SMA के करीब 4,529.19 डॉलर पर स्थित है। लाइव डेटा के आधार पर पिवट स्तर 4,188 डॉलर है, जबकि रेजिस्टेंस R1 4,220 डॉलर और R2 4,237 डॉलर पर आंका गया है। गिरावट की स्थिति में, सोने के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक स्तर 4,001.53 डॉलर के आसपास उभरती हुई बढ़ती ट्रेंड-लाइन का समर्थन है। यदि कीमतें इस अहम सीमा से नीचे फिसलती हैं, तो बिकवाली का दौर गहरा सकता है और गिरावट और तेज हो सकती है। इसके विपरीत, जब तक भाव 4,001.53 डॉलर के स्तर से ऊपर टिके रहते हैं, तब तक ऊपर स्थित मूविंग एवरेज की दिशा में धीरे-धीरे सुधार की संभावना बनी रहेगी। लाइव स्तरों पर सपोर्ट S1 4,171 डॉलर और S2 4,139 डॉलर पर मौजूद है, जबकि 20-दिवसीय समर्थन दायरा 4,091 डॉलर और प्रतिरोध 4,440 डॉलर के पास है। मुद्रास्फीति, ब्याज दरें और सोने का पारंपरिक समीकरण मुद्रास्फीति सामान्य वस्तुओं और सेवाओं की एक प्रतिनिधि टोकरी के मूल्य में होने वाली वृद्धि को दर्शाती है। हेडलाइन मुद्रास्फीति को आमतौर पर महीने-दर-महीने और साल-दर-साल प्रतिशत बदलाव के रूप में व्यक्त किया जाता है। दूसरी ओर, कोर मुद्रास्फीति में खाद्य और ईंधन जैसे अस्थिर घटकों को अलग रखा जाता है, क्योंकि इनमें भू-राजनीतिक और मौसमी कारणों से तेज उतार-चढ़ाव होता है। अर्थशास्त्री और केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से कोर आंकड़ों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिनका लक्ष्य मुद्रास्फीति को लगभग 2 प्रतिशत के प्रबंधनीय स्तर पर बनाए रखना होता है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) समय के साथ वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में परिवर्तन को मापता है। जब कोर CPI केंद्रीय बैंकों के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर जाता है, तो नीति निर्माता ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हैं। उच्च ब्याज दरें आम तौर पर संबंधित देश की मुद्रा को मजबूती प्रदान करती हैं, क्योंकि वे विदेशी पूंजी प्रवाह को आकर्षित करती हैं। इसके विपरीत, मुद्रास्फीति में कमी आने पर ब्याज दरों में कटौती की संभावना बनती है, जिससे मुद्रा पर दबाव आता है। ऐतिहासिक रूप से सोने को मुद्रास्फीति से बचाव के एक मजबूत साधन के रूप में देखा जाता रहा है क्योंकि यह अपनी आंतरिक क्रय शक्ति बनाए रखता है। हालांकि, आधुनिक वित्तीय बाजारों में जब मुद्रास्फीति अनियंत्रित होती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में तेजी से वृद्धि करते हैं। उच्च ब्याज दरों के माहौल में सोने को अपने पास रखने की अवसर लागत (अपॉर्चुनिटी कॉस्ट) बढ़ जाती है, क्योंकि निवेशक ब्याज देने वाले बॉन्ड या नकद जमा खातों को प्राथमिकता देने लगते हैं। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति ठंडी पड़ती है और ब्याज दरें घटती हैं, तो बिना ब्याज वाली संपत्ति होने के बावजूद सोना निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक विकल्प बन जाता है। विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख मुद्राओं का प्रदर्शन वैश्विक मुद्रा बाजारों में शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) ने मजबूती का रुख दिखाया। पिछले कारोबारी दिन के साप्ताहिक निचले स्तर से उबरते हुए यह एशियाई सत्र में 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश करता दिखा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट के चलते डॉलर अपने 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे रहा, जिसका फायदा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मिला। इसके साथ ही, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के कड़े रुख की उम्मीदों ने भी इस जोड़ी को सहारा दिया। दूसरी ओर, डॉलर-येन जोड़ी (USD/JPY) 158.00 के स्तर के आसपास स्थिर बनी रही। जापान में जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिससे जापानी येन पर दबाव बढ़ गया। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रात भर आई गिरावट ने फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और भू-राजनीतिक चिंताओं के असर को संतुलित किया, जिससे इस मुद्रा जोड़ी की गिरावट सीमित रही। इन सभी व्यापक बाजार कारकों के बीच सर्राफा निवेशक सतर्क रहकर पोजीशन बना रहे हैं। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में नरमी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में फौरी सुधार हुआ है, जिससे खुदरा और संस्थागत खरीदारों दोनों के लिए बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है। • भारत में: घरेलू बाजार में सोने के भाव अंतरराष्ट्रीय रुख के आधार पर स्थिर या हल्के मजबूत हो सकते हैं। आगामी त्योहारी और वैवाहिक सीजन में आभूषण खरीदारों को अपनी खरीदारी से पहले 4,200 डॉलर के प्रमुख स्तर पर अंतरराष्ट्रीय रुख पर नजर रखनी चाहिए। • कमोडिटी निवेशकों के लिए: सोने के तकनीकी संकेत अभी भी पूर्ण तेजी की पुष्टि नहीं कर रहे हैं। ट्रेडर्स को नए सौदे लेने से पहले 4,001.53 डॉलर के समर्थन और 4,259.87 डॉलर के प्रतिरोध स्तरों को ध्यान में रखकर स्टॉप-लॉस निर्धारित करना चाहिए। • करेंसी और आयात लागत: डॉलर के उच्चतम स्तर से फिसलने से आयातित वस्तुओं पर मुद्रा दबाव में हल्की कमी आ सकती है। हालांकि मजबूत ट्रेंड की पुष्टि के लिए अमेरिकी सीपीआई और आर्थिक आंकड़ों का इंतजार करना आवश्यक होगा। • सुरक्षित निवेश पर प्रभाव: भू-राजनीतिक तनाव में अस्थायी नरमी से सोने की सेफ-हेवन मांग पर अल्पकालिक असर पड़ सकता है। जोखिम से बचने वाले निवेशकों को आक्रामक खरीदारी के बजाय चरणबद्ध तरीके से पूंजी लगानी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ सोने की कीमतों में हालिया सुधार अमेरिकी डॉलर में मुनाफावसूली, सरकारी बॉन्ड यील्ड में नरमी और कच्चे तेल पर दबाव के संयुक्त प्रभाव के कारण संभव हुआ है। • डॉलर और बॉन्ड यील्ड में गिरावट: अमेरिकी डॉलर 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे फिसला और निवेशकों ने बॉन्ड बाजार की भारी बिकवाली को अत्यधिक माना। बॉन्ड यील्ड में कमी से बिना ब्याज वाली परिसंपत्ति होने के बावजूद सोने को रखने की अवसर लागत घटी है। • कच्चे तेल पर भू-राजनीतिक राहत: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान से कि ईरान से सकारात्मक चर्चा जारी है और चुनावों से पहले कोई हमला नहीं होगा, तेल की कीमतों पर दबाव बना। ऊर्जा लागत में नरमी से मुद्रास्फीति की तात्कालिक आशंकाएं कुछ कम हुईं। • डेटा से पहले पोजीशन का पुनर्संतुलन: निवेशक मिशिगन उपभोक्ता भावना और मुद्रास्फीति प्रत्याशा आंकड़ों के जारी होने से पूर्व अपनी पोजीशन को समायोजित कर रहे हैं। तीन हफ्तों की लगातार गिरावट के बाद निचले स्तरों पर तकनीकी खरीदारी ने भी कीमतों को सहारा दिया। सवाल-जवाब 1. सोने की कीमत में हालिया तेजी का मुख्य कारण क्या है? अमेरिकी डॉलर का 18 महीने के उच्चतम स्तर से फिसलना, बॉन्ड यील्ड में नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट सोने में तेजी के मुख्य कारण हैं। 2. सोने के लिए कौन से तकनीकी स्तर अहम माने जा रहे हैं? ऊपर की तरफ 4,259.87 डॉलर और 4,334.80 डॉलर पर प्रतिरोध है, जबकि नीचे की ओर 4,001.53 डॉलर पर अहम ट्रेंड-लाइन समर्थन है। 3. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के संदर्भ में क्या बयान दिया? ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और ईरान के बीच सकारात्मक बातचीत चल रही है और तीन नवंबर के चुनावों से पहले किसी हमले की योजना नहीं है। 4. मुद्रास्फीति बढ़ने पर सोने पर क्या असर पड़ता है? मुद्रास्फीति बढ़ने पर जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो ब्याज न देने वाले सोने को रखने की लागत बढ़ने के कारण इसकी मांग पर दबाव आ सकता है। 5. अक्टूबर के लिए बाजार किन अमेरिकी आंकड़ों का इंतजार कर रहा है? बाजार मिशिगन प्रारंभिक उपभोक्ता भावना और मुद्रास्फीति प्रत्याशा सूचकांक के जारी होने का इंतजार कर रहा है। https://trendkia.com/market/us-dollar-aura-bond-yield-men-narami-se-gold-men-teji-4-200-dollar-ke-stara-para-tiki-najaren-45144 TrendKia — Har trend, sabse pehle.