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  "type": "article",
  "title": "अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में ठहराव से सोने में मामूली रिकवरी, लेकिन अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की आशंका से साप्ताहिक गिरावट का खतरा बरकरार",
  "summary": "अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और ट्रेजरी यील्ड में हालिया उछाल थमने से सोने की कीमतों में सुधार दिखा है, लेकिन फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण साप्ताहिक दबाव बना हुआ है।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुमूल्य धातुओं के कारोबार में शुक्रवार को सोने की कीमतों में निचले स्तरों से हल्का सुधार देखने को मिला। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में जारी आक्रामक तेजी पर कुछ समय के लिए ब्रेक लगने से सोने को सहारा मिला है। हाजिर सोना (XAU/USD) गुरुवार को लुढ़ककर एक हफ्ते के निचले स्तर 4,244 डॉलर प्रति औंस पर आ गया था, जहां से उबरकर यह 4,310 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा। हालांकि, इस सीमित रिकवरी के बावजूद व्यापक तकनीकी और बुनियादी कारक मंदी का संकेत दे रहे हैं, जिससे सोने पर लगातार साप्ताहिक गिरावट का दबाव बना हुआ है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, सोने की ताजा कीमत 4,342 डॉलर दर्ज की गई है, जो पिछले बंद भाव 4,298 डॉलर की तुलना में 1.03 प्रतिशत अधिक है, जबकि इसका 52 हफ्तों का दायरा 3,752 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है।\n\nअमेरिकी डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड की चाल\nवैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY), जो दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं की तुलना में ग्रीनबैक की मजबूती को मापता है, गुरुवार को लगभग दो महीने के शीर्ष स्तर 101.40 तक चढ़ने के बाद शुक्रवार को फिसलकर 101 के आसपास आ गया। डॉलर में आई इस हल्की नरमी ने डॉलर-मूल्यवर्ग वाली संपत्तियों को फौरी राहत प्रदान की। वहीं, अमेरिका की बेंचमार्क 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड गुरुवार को 5.22 प्रतिशत के स्तर को छू गई थी, जो साल 2007 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर था। शुक्रवार को यह यील्ड घटकर 5.17 प्रतिशत के करीब आ गई। जब सरकारी बॉन्ड यील्ड पांच प्रतिशत के ऊपर टिकी रहती है, तो गैर-उपज वाली संपत्तियों जैसे सोने में निवेश की लागत बढ़ जाती है, जिससे बड़े संस्थागत निवेशक सरकारी प्रतिभूतियों की ओर रुख करने लगते हैं।\n\nपश्चिम एशिया में तनाव और तेल की कीमतों से उपजी महंगाई\nपश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संघर्ष और युद्ध की परिस्थितियों ने कच्चे तेल की कीमतों को भड़का दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव फिर से गहराने लगा है। तेल कीमतों में दो दिनों की लगातार तेजी ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को फिर से जिंदा कर दिया है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए महंगाई को अपने दो प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य तक लाने की प्रक्रिया काफी जटिल हो गई है। कूटनीतिक मोर्चे पर, ईरान ने यह पेशकश रखी है कि यदि वाशिंगटन अपने सैन्य दबाव को घटाता है और नाकाबंदी को हटाता है, तो वह सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल सकता है। अमेरिकी और ईरानी अधिकारी चरणबद्ध समझौते पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन दोनों पक्षों के रुख में भारी अंतर बना हुआ है और अभी तक कोई ठोस सफलता हासिल नहीं हुई है। ऊर्जा संकट से उपजी महंगाई केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने पर मजबूर कर रही है।\n\nफेडरल रिजर्व की सख्त नीतियां और आगामी आर्थिक आंकड़े\nवित्तीय बाजारों में फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख को लेकर आशंकाएं लगातार गहरा रही हैं। निवेशक अब अक्टूबर की बैठक में फेड द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी किए जाने की मजबूत संभावना मानकर चल रहे हैं। आगामी सप्ताह में बाजार का पूरा ध्यान कई महत्वपूर्ण अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर केंद्रित रहेगा, जिनमें व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मुद्रास्फीति आंकड़े, आईएसएम विनिर्माण पीएमआई (ISM Manufacturing PMI) और गैर-कृषि पेरोल (Nonfarm Payrolls) रिपोर्ट शामिल हैं। यदि रोजगार और महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा मजबूत आते हैं, तो फेडरल रिजर्व को सख्त मौद्रिक कदम उठाने की अतिरिक्त छूट मिलेगी, जो सोने की तेजी पर ब्रेक लगाने का काम कर सकता है।\n\nचार घंटे के चार्ट पर सोने का तकनीकी ढांचा\nचार घंटे के तकनीकी चार्ट पर XAU/USD ने निकट अवधि में एक सुधारात्मक रुख बनाए रखा है, क्योंकि यह बॉलिंजर बैंड्स के 20-पीरियड सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) 4,299 डॉलर के ऊपर टिकने में सफल रहा है, जबकि निचला बैंड 4,237 डॉलर पर समर्थन दे रहा है। कीमत हालिया उतार-चढ़ाव वाले दायरे के ऊपरी हिस्से की तरफ बढ़ रही है। 14-पीरियड रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) लगभग 51 के स्तर पर है, जो तटस्थ से मजबूत मोमेंटम को दर्शाता है, जबकि मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) का थोड़ा सकारात्मक होना हल्के बुलिश रुझान की पुष्टि करता है। ऊपर की तरफ, सोने के लिए तत्काल क्षैतिज अवरोध 4,330 डॉलर पर है, जिसके बाद बॉलिंजर का ऊपरी बैंड 4,362 डॉलर पर स्थित है। यदि कीमत इस स्तर से ऊपर टिकी रहती है, तो 4,450 डॉलर से 4,500 डॉलर का दायरा खुल सकता है। इसके विपरीत, नीचे की ओर पहला समर्थन 4,299 डॉलर के मिडिल बैंड पर है, जिसके टूटने पर निचला बैंड 4,237 डॉलर का परीक्षण हो सकता है और गहरा दबाव बनने पर 4,150 डॉलर से 4,200 डॉलर का समर्थन क्षेत्र सक्रिय हो जाएगा।\n\nलाइव तकनीकी संकेतक और दीर्घकालिक रुझान\nदैनिक समय-सीमा पर उपलब्ध लाइव संकेतकों के अनुसार, सोने का 14-दिवसीय आरएसआई (RSI) 45 पर है, जबकि एमएसीडी (MACD) -22.14 पर सिग्नल रेखा -4.20 के नीचे नकारात्मक हिस्टोग्राम (-17.94) के साथ मंदी का स्पष्ट संकेत दे रहा है। 20-दिवसीय घातीय मूविंग एवरेज (EMA20) 4,395 डॉलर, EMA50 4,384 डॉलर और EMA200 4,435 डॉलर पर स्थित है, जबकि 50-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज (SMA50) 4,355 डॉलर और SMA200 4,556 डॉलर पर है। चार्ट पर EMA50 का EMA200 से नीचे जाना डेथ क्रॉस का निर्माण करता है, जिससे दीर्घकालिक रुझान डाउनट्रेंड में बना हुआ है। बॉलिंजर बैंड्स 4,281 डॉलर से 4,536 डॉलर के दायरे में हैं, जिनका मध्य स्तर 4,409 डॉलर है। एडीएक्स (ADX) 15 के स्तर पर कमजोर ट्रेंड या सीमित दायरे का संकेत देता है, वहीं स्टोकेस्टिक में फास्ट लाइन 32 और सिग्नल लाइन 19 पर है। औसत वास्तविक दायरा (ATR) 97.71 डॉलर है, जो दैनिक अस्थिरता के लिए स्टॉप-लॉस बफर के रूप में कार्य करता है। अहम स्तरों में पिवट पॉइंट 4,328 डॉलर पर है, जिसके लिए रेजिस्टेंस R1 4,366 डॉलर व R2 4,389 डॉलर है, जबकि सपोर्ट S1 4,305 डॉलर व S2 4,267 डॉलर पर दर्ज किया गया है।\n\nमुद्रा बाजार और केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसले\nवैश्विक मुद्रा बाजारों में भी खासी हलचल देखी गई। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 200-दिवसीय एसएमए के नीचे खिसकने के बाद अगस्त की शुरुआत के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया और 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पास बेहद कमजोर नजर आया। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और तेल जनित महंगाई ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा दरें बढ़ाए जाने के अनुमानों को दबा दिया। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) तीन सप्ताह के उच्च स्तर 159.00 पर पहुंचने के बाद सुस्त पड़ा, क्योंकि जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप की आशंका से निवेशक सतर्क हो गए। इस बीच, बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम उठाते हुए अपने अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय सात-दो के बहुमत से लिया गया, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम था और बाजार की उम्मीदों के पूरी तरह अनुकूल रहा।\n\nसुरक्षित निवेश के रूप में सोने का ऐतिहासिक महत्व और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी\nमानव इतिहास में सोने ने हमेशा मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में एक बुनियादी भूमिका निभाई है। आभूषणों और चमक-दमक के अतिरिक्त, आधुनिक वित्तीय प्रणाली में इसे संकट के समय सबसे सुरक्षित आश्रय (सेफ-हेवन) माना जाता है। चूंकि यह किसी विशेष सरकार या बैंक की देनदारी पर निर्भर नहीं करता, इसलिए इसे मुद्रा अवमूल्यन और अनियंत्रित महंगाई के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में देखा जाता है। केंद्रीय बैंक दुनिया में सोने के सबसे बड़े धारक हैं। कठिन और अनिश्चित समय में अपनी घरेलू मुद्राओं को स्थिरता प्रदान करने और अपनी वित्तीय साख मजबूत करने के लिए वे अपने विदेशी मुद्रा भंडार का विविधीकरण करते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों ने वर्ष 2022 में अपने भंडार में 1,136 टन सोना जोड़ा था, जिसकी कुल कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। यह रिकॉर्ड इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक खरीद थी। विशेष रूप से चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते देशों के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार में तेजी से विस्तार कर रहे हैं।\n\nसोने, अमेरिकी डॉलर और जोखिम भरी संपत्तियों का विपरीत संबंध\nवित्तीय बाजारों में सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियों के साथ विपरीत संबंध माना जाता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का मूल्यांकन डॉलर (XAU/USD) में किया जाता है, इसलिए जब डॉलर की क्रय शक्ति घटती है या डॉलर कमजोर होता है, तो सोने के भाव चढ़ने लगते हैं। इसके विपरीत, जब डॉलर मजबूत होता है और सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दरें 5 प्रतिशत से ऊपर बनी रहती हैं, तो सोने की मांग पर सीधा दबाव पड़ता है। इसी तरह शेयर बाजार और जोखिम भरी संपत्तियों के साथ भी इसका उलटा संबंध होता है। जब शेयर बाजार तेजी में होते हैं, तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर इक्विटी में लगाते हैं, जबकि आर्थिक मंदी, युद्ध या वित्तीय संकट की आहट मिलते ही निवेशक जोखिम भरे बाजारों को छोड़कर सोने की शरण लेते हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका के महंगाई और रोजगार आंकड़े ही सोने की अंतिम दिशा तय करेंगे।\n\nइसका आप पर असर\nअंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने, डॉलर और बॉन्ड यील्ड में हो रहे बदलाव का सीधा असर भारतीय घरेलू बाजार, आभूषण खरीदारों और कमोडिटी निवेशकों पर पड़ता है।\n\n• भारत में खरीदारों और निवेशकों पर: वैश्विक स्तर पर डॉलर के मजबूत रहने और आयात महंगा होने से भारत में सोने की घरेलू कीमतें ऊंचे स्तरों पर बनी रह सकती हैं। आगामी त्योहारों और शादियों के सीजन में आभूषण खरीदने वालों को खरीदारी से पहले बाजार की अस्थिरता और कीमतों के उतार-चढ़ाव पर नजर रखनी चाहिए।\n• कमोडिटी और शेयर बाजार निवेशकों पर: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में 5 प्रतिशत से ऊपर का स्तर बने रहने से इक्विटी बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का जोखिम बना रहता है। पोर्टफोलियो में स्थिरता बनाए रखने के लिए निवेशक सोने में एक निश्चित अनुपात में एसआईपी या गोल्ड ईटीएफ के जरिए निवेश रणनीति बनाए रख सकते हैं।\n• कच्चे तेल और ईंधन उपभोक्ताओं पर: पश्चिम एशिया में तनाव और तेल की बढ़ती कीमतें भारत में आयात बिल और मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ा सकती हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड महंगा बना रहता है, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल और परिवहन लागत पर असर देखने को मिल सकता है।\n• मुद्रा विनिमय और डॉलर पर: अमेरिकी डॉलर इंडेक्स के 101 के आसपास बने रहने से रुपये की विनिमय दर पर दबाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। जो लोग विदेश यात्रा, शिक्षा या विदेशी आयात की योजना बना रहे हैं, उन्हें विनिमय दरों की निगरानी करनी चाहिए।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसोने की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव अमेरिकी डॉलर की चाल, बॉन्ड यील्ड के बहु-वर्षीय रिकॉर्ड स्तर और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता का परिणाम है।\n\n• अमेरिकी डॉलर और यील्ड में हल्का ठहराव: डॉलर इंडेक्स के 101.40 से फिसलकर 101 पर आने और 10-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के 5.22 प्रतिशत से घटकर 5.17 प्रतिशत पर आने से सोने को फौरी राहत मिली। इस मामूली गिरावट ने सोने में निचले स्तर 4,244 डॉलर से तकनीकी रिकवरी को प्रेरित किया।\n• फेडरल रिजर्व की सख्त ब्याज दर नीति: अमेरिकी फेड द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाने की मजबूत संभावनाओं ने सोने पर लगातार दबाव बनाए रखा है। जब गैर-ब्याज वाली संपत्तियों के मुकाबले सरकारी बॉन्ड पर 5 प्रतिशत से अधिक का प्रतिफल मिलता है, तो सोने में संस्थागत निवेश सीमित हो जाता है।\n• कच्चे तेल से उपजा मुद्रास्फीति दबाव: पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते तेल की कीमतों में लगातार तेजी आई है, जिससे वैश्विक महंगाई कम करने के केंद्रीय बैंकों के प्रयास कठिन हो गए हैं। यद्यपि ईरान ने शर्तों के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की बात कही है, लेकिन वार्ता में अब तक कोई बड़ा समझौता नहीं हो पाया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सोने की कीमत में शुक्रवार को सुधार क्यों देखा गया?\nअमेरिकी डॉलर इंडेक्स के 101.40 से घटकर 101 पर आने और 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के 5.22 प्रतिशत से फिसलकर 5.17 प्रतिशत होने से सोने की कीमतों में 4,244 डॉलर के निचले स्तर से सुधार आया।\n\n2. सोने पर साप्ताहिक गिरावट का खतरा क्यों बना हुआ है?\nफेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी किए जाने की मजबूत संभावना और बॉन्ड यील्ड का 5 प्रतिशत से ऊपर बना रहना सोने पर मंदी का दबाव बनाए हुए है।\n\n3. कच्चे तेल की कीमतों का फेडरल रिजर्व की नीतियों पर क्या असर पड़ रहा है?\nपश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में आई तेजी से मुद्रास्फीति की चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे फेड के लिए महंगाई को दो प्रतिशत के लक्ष्य तक लाना मुश्किल हो रहा है।\n\n4. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला किया है?\nबैंक ऑफ जापान ने सात-दो के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है।\n\n5. तकनीकी विश्लेषण के अनुसार सोने के लिए मुख्य सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर क्या हैं?\nसोने के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 4,330 डॉलर और 4,362 डॉलर पर है, जबकि नीचे की ओर प्राथमिक सपोर्ट 4,299 डॉलर और 4,237 डॉलर के स्तर पर स्थित है।\n\n6. केंद्रीय बैंकों ने वर्ष 2022 में कितना सोना खरीदा था?\nवर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने वर्ष 2022 में रिकॉर्ड 1,136 टन सोना खरीदा था, जिसकी कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी।",
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  "publishedAt": "2026-09-25",
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