अमेरिकी डॉलर और मध्य पूर्व के तनाव के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर संभला, सोना फिसला और बिटकॉइन में नरमी रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के सख्त रुख और कूटनीतिक हलचलों के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7100 के पार पहुंचा, वहीं बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि और अमेरिकी आंकड़ों से वैश्विक बाजार प्रभावित रहे। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में मंगलवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अपनी शुरुआती गिरावट को पीछे छोड़ते हुए मजबूती दर्ज की है। अमेरिका और ईरान के बीच नए कूटनीतिक संकेतों के कारण अमेरिकी डॉलर पर हल्का दबाव देखा गया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को संभलने में मदद मिली। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) के नीतिगत रुख ने भी मुद्रा को सहारा प्रदान किया है। दूसरी तरफ, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखने की संभावनाओं के कारण अमेरिकी डॉलर का समग्र रुख अब भी मजबूत बना हुआ है। ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को नीतिगत रुख से मिला सहारा एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7100 के स्तर से ऊपर खरीदारी आकर्षित करने में सफल रहा। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक की गवर्नर मिशेल बुलक और सहायक गवर्नर सारा हंटर की सख्त टिप्पणियों ने मुद्रा को समर्थन दिया। आरबीए गवर्नर मिशेल बुलक ने मंगलवार को कहा कि महंगाई में बढ़ोतरी के जोखिम सामने आ सकते हैं, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी नीतिगत बदलाव का संकेत नहीं दे रही हैं और अंतिम निर्णय बैंक के निदेशक मंडल पर निर्भर करता है। बुलक के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जिंसों की कीमतों और ब्याज दरों के अंतर को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर तटस्थ ब्याज दरें बढ़ रही हैं, जिससे बॉन्ड पर मिलने वाला वास्तविक प्रतिफल भी ऊंचा हो रहा है। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक ने इस वर्ष अपनी मौद्रिक नीतियों को कड़ा करते हुए ब्याज दरों में तीन बार वृद्धि की है, जिसके चलते कैश रेट बढ़कर 4.35 प्रतिशत हो गई है। देश में बुनियादी महंगाई दर अब भी 2 प्रतिशत से 3 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य दायरे से ऊपर बनी हुई है। अगले सप्ताह होने वाली नीतिगत समीक्षा बैठक से पहले आरबीए का यह सख्त दृष्टिकोण मुद्रा को निचली सतह पर मजबूत आधार दे रहा है। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती के चलते अमेरिकी डॉलर की बढ़त इस जोड़ी की तेजी को सीमित भी कर सकती है। इसके साथ ही इस सप्ताह के अंत में होने वाली ट्रंप और शी की महत्वपूर्ण शिखर वार्ता पर भी बाजार सहभागियों की करीबी नजर टिकी हुई है। अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और श्रम बाजार की स्थिति अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर रोजगार से जुड़े हालिया आंकड़ों ने श्रम बाजार की मौजूदा स्थिति को दर्शाया है। नवीनतम एडीपी एनईआर पल्स के अनुसार, 5 सितंबर को समाप्त हुए चार सप्ताह की अवधि के दौरान निजी नियोक्ताओं ने प्रति सप्ताह औसतन 20,000 नई नौकरियां जोड़ी हैं। यह संख्या इससे पिछली अवधि में दर्ज की गई प्रति सप्ताह 16,750 नौकरियों की औसत गति से अधिक है। रोजगार सृजन की इस रफ्तार ने यह संकेत दिया है कि अमेरिकी श्रम बाजार में गतिविधियों का दायरा बना हुआ है, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नरमी की प्रक्रिया को धीमा रखने की उम्मीदों को बल मिला है। मुद्रा विनिमय तालिका में प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती दर्ज की गई, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले डॉलर का प्रदर्शन सबसे मजबूत रहा। बैंक ऑफ जापान की ब्याज दर वृद्धि और येन का रुख जापानी मुद्रा के मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव देखा गया है। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) ने अपनी अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है। यह फैसला व्यापक रूप से बाजार की हफ्तों पुरानी उम्मीदों के अनुरूप ही रहा। इस निर्णय के साथ ही नीतिगत दरें 31 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। एशियाई सत्र में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में हल्की बढ़त देखने को मिली और यह जोड़ी 157.50 के स्तर के आसपास कारोबार कर रही थी। संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन की गिरावट को थामने में मदद की। हालांकि, केंद्रीय बैंक की दर वृद्धि के बावजूद इसका रुख अपेक्षाकृत नरम रहने की वजह से येन के पक्ष में आक्रामक खरीदारी सीमित रही। वहीं अमेरिकी डॉलर को फेडरल रिजर्व के रुख और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का समर्थन मिलना जारी रहा। सोने में लगातार दूसरे सत्र में गिरावट और बिटकॉइन में ठहराव कीमती धातुओं के बाजार में सोने की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में कमजोरी दर्ज की गई। पीली धातु लुढ़ककर 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गई, हालांकि बाद में इसमें आंशिक सुधार देखने को मिला। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और अमेरिकी डॉलर में मजबूती बने रहने के कारण सोने पर दबाव देखा जा रहा है, क्योंकि निवेशक यह मानकर चल रहे हैं कि फेडरल रिजर्व आने वाले समय में ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए रख सकता है। डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में बिटकॉइन में तेज उछाल के बाद मुनाफावसूली का दौर देखा गया। पिछले कारोबारी दिन 6.7 प्रतिशत की जोरदार छलांग लगाने के बाद मंगलवार को बिटकॉइन 85,500 डॉलर के स्तर से नीचे आ गया। इस गिरावट के बावजूद संस्थागत निवेशकों की मांग मजबूत बनी हुई है। सोमवार को स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में करीब 1 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया, जबकि स्ट्रैटेजी ने अपने खजाने में 950 बीटीसी और जोड़े हैं। इसका आप पर असर वैश्विक विदेशी मुद्रा और जिंस बाजारों में यह हलचल निवेशकों, विदेश यात्रा करने वालों और डिजिटल एसेट ट्रेडर्स के लिए प्रत्यक्ष परिणाम लेकर आई है। • मुद्रा विनिमय: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अन्य प्रमुख मुद्राओं में उतार-चढ़ाव से आयात-निर्यात और विदेशी यात्रा खर्च प्रभावित होंगे। डॉलर की मजबूती से विदेश में पढ़ाई और अंतरराष्ट्रीय भुगतान पर लागत बढ़ सकती है। • सोने के खरीदार: 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे आने से सोने की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नरमी देखी गई है। आभूषण खरीदारों और निवेशकों को कीमतों में स्थिरता का इंतजार करना चाहिए। • क्रिप्टो निवेशक: 85,500 डॉलर से नीचे आने के बाद बिटकॉइन में अस्थायी ठहराव आया है। हालांकि 1 अरब डॉलर के ईटीएफ इनफ्लो से संस्थागत भरोसा मजबूत बना हुआ है। • वैश्विक ब्याज दरें: बैंक ऑफ जापान और आरबीए की सख्त नीतियों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उधार महंगा हो रहा है। विदेशी परिसंपत्तियों में निवेश करने वालों को केंद्रीय बैंकों की अगली बैठकों पर नजर रखनी होगी। ऐसा क्यों हुआ केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीतियां, रोजगार के मजबूत आंकड़े और मध्य पूर्व के कूटनीतिक घटनाक्रम इन बाजार हलचलों के मुख्य कारक रहे हैं। • आरबीए का सख्त रुख: ऑस्ट्रेलिया में बुनियादी महंगाई 2% से 3% के दायरे से बाहर रहने के कारण आरबीए ने दरें 4.35% तक बढ़ाई हैं। गवर्नर मिशेल बुलक के मुद्रास्फीति जोखिम संबंधी बयानों ने मुद्रा को नीचे गिरने से बचाया। • अमेरिकी रोजगार आंकड़े: एडीपी के आंकड़ों में निजी क्षेत्र में साप्ताहिक 20,000 नई नौकरियां जुड़ने से फेड द्वारा दरें ऊंची रखने की उम्मीद बढ़ी है। इसने ट्रेजरी यील्ड और अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी, जिससे सोने पर दबाव बना। • जापान की नीतिगत दर वृद्धि: बैंक ऑफ जापान ने महंगाई को संतुलित करने के लिए अपनी दर 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दी, जो 31 साल का उच्च स्तर है। इससे येन में भारी गिरावट की आशंकाएं थमी हैं। • कूटनीतिक संकेत: अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संवाद के संकेतों से डॉलर पर हल्का दबाव आया, जबकि ट्रंप और शी की आगामी वार्ता से बाजार सतर्क है। सवाल-जवाब 1. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में मजबूती की मुख्य वजह क्या रही? आरबीए गवर्नर मिशेल बुलक की सख्त टिप्पणियों और अमेरिका-ईरान कूटनीतिक संकेतों के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7100 के पार संभला। 2. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया, जो 31 साल का उच्चतम स्तर है। 3. सोने की कीमतों में गिरावट क्यों दर्ज की गई? फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की संभावना और मजबूत डॉलर के दबाव में सोना गिरकर 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया। 4. बिटकॉइन की ताजा स्थिति क्या रही? पिछले दिन 6.7% की छलांग लगाने के बाद बिटकॉइन 85,500 डॉलर से नीचे आ गया, हालांकि स्पॉट ईटीएफ में 1 अरब डॉलर का प्रवाह देखा गया। 5. अमेरिकी श्रम बाजार का ताजा आंकड़ा क्या कहता है? एडीपी एनईआर पल्स के अनुसार 5 सितंबर को समाप्त चार हफ्तों में निजी कंपनियों ने प्रति सप्ताह औसतन 20,000 नई नौकरियां जोड़ीं। https://trendkia.com/market/us-dollar-aura-middle-east-ke-tanava-ke-bicha-australian-dollar-snbhala-gold-phisala-aura-bitcoin-men-narami-36526 TrendKia — Har trend, sabse pehle.