अमेरिकी डॉलर में जोरदार वापसी, ईरान प्रतिबंधों के चलते सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी डेटा से भरे मंगलवार से पहले अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 99.00 के स्तर पर लौट आया है। ईरान पर सख्त प्रतिबंधों की घोषणा के बाद से सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर और सोने की मांग में तेजी आई है। हफ्ते के शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स यानी DXY ने पिछले बुधवार की भारी गिरावट से उबरते हुए 99.00 के महत्वपूर्ण स्तर को फिर से हासिल कर लिया है। डॉलर में आई इस मजबूती के पीछे मुख्य वजह सुरक्षित निवेश के प्रति निवेशकों का बढ़ता रुझान है। संयुक्त राज्य अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों के अभियान को और अधिक आक्रामक बनाने का एलान किया है। उन्होंने कड़े शब्दों में शून्य लीकेज यानी पूरी सख्ती के साथ नियमों का पालन कराने का वादा किया है और चेतावनी दी है कि आने वाले कुछ ही दिनों के भीतर किसी बड़े वित्तीय संस्थान पर भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। प्रमुख मुद्राओं की चाल और क्रॉस-करेंसी प्रदर्शन प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर के आज के प्रतिशत बदलाव को देखें तो यह कनाडाई डॉलर के सामने सबसे मजबूत स्थिति में नजर आया। मुद्रा बाजार के हीट मैप से यह स्पष्ट होता है कि आधार मुद्रा को बाएं कॉलम से और कोट मुद्रा को शीर्ष पंक्ति से चुनकर विभिन्न मुद्राओं के बीच आपसी प्रतिशत बदलाव को समझा जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि बाएं कॉलम से अमेरिकी डॉलर को चुना जाए और क्षैतिज रेखा पर आगे बढ़ते हुए जापानी येन तक देखा जाए, तो बॉक्स में दिखने वाला प्रतिशत बदलाव USD आधार और JPY कोट को दर्शाएगा। इसी तरह जापानी येन के कमजोर होने के बीच USD/JPY की जोड़ी 159.00 के स्तर से ऊपर मजबूती के साथ टिकी हुई है और लगातार ऊपर की ओर बढ़ रही है। सोने और कच्चे तेल की बाजार चाल ईरान को लेकर सामने आए ताजा घटनाक्रमों के कारण सुरक्षित निवेश की मांग में जबरदस्त उछाल आया है, जिससे सोना मजबूत बढ़त दर्ज करते हुए प्रति ट्रॉय औंस 4,650 डॉलर के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गया है। हालांकि, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद वेस्ट टेक्सاس इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड ऑयल में गिरावट देखने को मिल रही है और यह फिसलकर 85.00 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। शुरुआती बढ़त के बाद सोने ने अपनी कुछ तेजी जरूर गंवाई है, लेकिन इसके बावजूद यह सोमवार को प्रति ट्रॉय औंस 4,600 डॉलर के स्तर से ऊपर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। डॉलर में हल्की बढ़त और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली नरमी के बावजूद कीमती धातु में यह तेजी बनी हुई है। यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक आंकड़े वैश्विक स्तर पर यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं की बात करें तो जर्मनी की दूसरी तिमाही का सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP सुस्त गति से बने रहने का अनुमान जताया गया है। हालांकि, निवेशकों का मुख्य ध्यान अगस्त के IFO सर्वे पर केंद्रित है, जहां बिजनेस क्लाइमेट इंडेक्स के 86.6 से सुधरकर 87.2 पर पहुंचने की उम्मीद है। इसके अलावा मौजूदा स्थिति और भविष्य की उम्मीदों से जुड़े आंकड़े भी मजबूत रहने की संभावना है। सुबह के सत्र के अंत में फ्रांसीसी उपभोक्ता विश्वास सूचकांक भी जारी किया जाएगा। दिन के आखिर में निवेशकों का ध्यान ऑस्ट्रेलिया की ओर शिफ्ट हो जाएगा, जहां मासिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI के 3.8% से घटकर 3.2% पर आने की उम्मीद है। इसके साथ ही ट्रिमड मीन माप और दूसरी तिमाही के निर्माण आंकड़े भी सामने आएंगे, जो बुधवार के बाजार खुलने से पहले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की दिशा तय करेंगे। उधर, अमेरिकी ट्रेजरी ने अपने नियमित कैलेंडर से हटकर एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने 10 से 20 साल और 20 से 30 साल के सेक्टरों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन के आकार को कम से कम दोगुना करने का ऐलान किया है। इसके तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दी गई है, जो 9 सितंबर से प्रभावी होकर 4 नवंबर तक चलेगी। अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों का हाल सोमवार को वॉल स्ट्रीट पर कारोबार बंद होने के बाद EUR/USD की जोड़ी 1.1660 के आसपास मंडराते हुए रक्षात्मक रुख के साथ कारोबार कर रही है और शुक्रवार की हल्की गिरावट को आगे बढ़ा रही है। डॉलर में आई अच्छी रिकवरी और जैक्सन होल में चेयर वार्श के भाषण से पहले व्यापक सतर्कता के माहौल के बीच इस जोड़ी में यह सुस्ती आई है। दूसरी ओर, GBP/USD यानी केबल भी सप्ताह की शुरुआत में अपनी हालिया रिकवरी के एक हिस्से को पीछे छोड़ते हुए 1.3600 के निचले स्तरों के आसपास लौट आया है। अमेरिकी डेटा के आने और जैक्सन होल इवेंट से पहले निवेशकों की सावधानी के चलते ग्रीनबैक में हुई अच्छी खासी बढ़त के बीच यह जोड़ी मामूली मंदी के रुझान के साथ कारोबार कर रही है। इसका आप पर असर भारत में: विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल और सोने के दामों में उतार-चढ़ाव आ सकता है, जिससे आयातित वस्तुओं और ईंधन की कीमतों पर असर पड़ सकता है। व्यापक स्तर पर: वैश्विक निवेशकों के लिए सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से मुद्रा और जिंस बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है, जिससे ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन सावधानी से प्रबंधित करनी होगी। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में हालिया तेजी की मुख्य वजह क्या है? ईरान के खिलाफ सख्त प्रतिबंधों की घोषणा और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के कारण अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में यह उछाल आया है। 2. सोने की कीमतों में हालिया रुझान कैसा रहा है? ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ी है और यह प्रति ट्रॉय औंस 4,600 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है। 3. यूएस ट्रेजरी ने अपने बायबैक ऑपरेशन में क्या बदलाव किया है? ट्रेजरी विभाग ने 10 से 30 वर्ष के सेक्टरों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन के आकार को दोगुना करते हुए अधिकतम सीमा 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कर 4 अरब डॉलर कर दी है। 4. किन प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर निवेशकों की नजर टिकी हुई है? बाजार का ध्यान जर्मनी के IFO सर्वे, फ्रांस के उपभोक्ता विश्वास सूचकांक और ऑस्ट्रेलिया के मासिक CPI आंकड़ों पर केंद्रित है। https://trendkia.com/market/us-dollar-climbs-back-to-99-00-on-safe-haven-demand-as-iran-sanctions-loom-21461 TrendKia — Har trend, sabse pehle.