# वैश्विक तनाव और फेडरल रिजर्व के रुख से अमेरिकी डॉलर में तेजी, सोना फिसला और बिटकॉइन में सुस्ती

> फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण डॉलर इंडेक्स 100 के पार पहुंच गया है, जबकि सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-dollar-climbs-beyond-100-on-fed-tightening-stance-while-gold-slips-and-bitcoin-consolidates-36297 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी डॉलर, विदेशी मुद्रा बाजार, सोने की कीमत, बिटकॉइन, फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ जापान, ब्याज दर

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में मंगलवार, 22 सितंबर को अमेरिकी डॉलर का दबदबा देखने को मिल रहा है, जबकि निवेशक वैश्विक तनाव और केंद्रीय बैंकों के फैसलों के बीच संभलकर कदम उठा रहे हैं। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा में सबसे मजबूत बढ़त दर्ज की गई है। वित्तीय बाजारों में मुद्रा विनिमय दरों के उतार-चढ़ाव पर नजर रखने वाले संकेतकों से स्पष्ट है कि डॉलर प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले मजबूती बनाए हुए है। फेडरल रिजर्व द्वारा पिछले सप्ताह शुरू की गई मौद्रिक नीति सख्ती के फैसले के बाद अमेरिकी मुद्रा को लगातार समर्थन मिल रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि सप्ताह की शांत शुरुआत के बावजूद डॉलर का आधार बेहद मजबूत बना हुआ है। इस मजबूत रुख के चलते डॉलर इंडेक्स अगस्त की शुरुआत के बाद पहली बार 100.00 के स्तर से ऊपर निकलने में कामयाब रहा है। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, इस तेजी के मार्ग में अगला अहम रेजिस्टेंस स्तर 24 जून को बना साल का उच्च स्तर 101.80 रहने वाला है।

## सोने में बिकवाली का दबाव और जोखिम धारणा का खेल
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक और सख्त रुख के कारण बिना ब्याज वाली संपत्तियों से निवेशकों का रुझान घटता दिख रहा है। पीली धातु यानी सोना मंगलवार को यूरोप के कारोबारी सत्र की शुरुआत में 4,315 डॉलर प्रति औंस के दायरे में आ गया, जो तीन दिनों का निचला स्तर है। इससे पहले सोमवार को सोने में 0.8 प्रतिशत का नुकसान हुआ था, और मंगलवार को भी इसमें लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली, जहां यह 4,300 डॉलर के स्तर का परीक्षण कर रहा है। वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता को समझने के लिए आमतौर पर दो तकनीकी शब्दों, रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ का इस्तेमाल किया जाता है। ये शब्द यह बताते हैं कि किसी खास अवधि में निवेशक अनिश्चितता के बीच कितना जोखिम उठाने को तैयार हैं। जब बाजार में रिस्क-ऑन माहौल होता है, तब निवेशक भविष्य को लेकर आशावादी होते हैं और अधिक रिटर्न पाने की उम्मीद में शेयर बाजारों तथा जोखिम भरी संपत्तियों में पूंजी लगाते हैं। इसके विपरीत, जब बाजार में रिस्क-ऑफ की स्थिति बनती है, तब निवेशक सतर्क हो जाते हैं और अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए ऐसी संपत्तियों में निवेश करते हैं जहां रिटर्न भले ही मामूली हो, लेकिन पूंजी डूबने का खतरा न के बराबर रहे।

## जोखिम के माहौल में मुद्राओं और संपत्तियों का व्यवहार
बाजार में आशावाद या रिस्क-ऑन की स्थिति बनने पर आम तौर पर शेयर बाजारों में उछाल आता है। सोने को छोड़कर अधिकांश जिंसों या कमोडिटी उत्पादों के दामों में भी तेजी दर्ज की जाती है, क्योंकि बेहतर आर्थिक विकास परिदृश्य से कच्चे माल की मांग बढ़ती है। भारी मात्रा में जिंसों का निर्यात करने वाले देशों की मुद्राएं ऐसे समय में मजबूत होती हैं, क्योंकि उनकी मांग में इजाफा होता है, और इसी माहौल में क्रिप्टोकरेंसी संपत्तियां भी ऊपर की ओर बढ़ती हैं। वहीं दूसरी तरफ, जब बाजार में अनिश्चितता या रिस्क-ऑफ का माहौल छा जाता है, तब सरकारी बॉन्ड की कीमतों में तेजी आती है, खासकर प्रमुख देशों के सॉवरेन डेट पेपर्स में खरीदारी बढ़ जाती है। ऐसे दौर में सुरक्षित निवेश माने जाने वाले साधन जैसे कि सोना, जापानी येन, स्विस फ्रैंक और अमेरिकी डॉलर को सबसे ज्यादा फायदा पहुंचता है।

ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), कैनेडियन डॉलर (CAD), न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) के साथ-साथ दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR) और रूसी रूबल (RUB) जैसी मुद्राएं रिस्क-ऑन माहौल में बेहतर प्रदर्शन करती हैं। इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं अपनी आर्थिक वृद्धि के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे माल और जिंसों के निर्यात पर निर्भर हैं। जब आर्थिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद जगती है, तब कच्चे माल की मांग में बढ़ोतरी का अनुमान लगाकर निवेशक इन मुद्राओं में लिवाली बढ़ाते हैं। दूसरी तरफ, जब बाजार में चिंताएं हावी होती हैं, तो अमेरिकी डॉलर (USD), जापानी येन (JPY) और स्विस फ्रैंक (CHF) का दबदबा बढ़ता है। अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी है, और संकट के समय निवेशक अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में पैसा लगाते हैं क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के डिफॉल्ट करने की आशंका नहीं होती। जापानी येन को घरेलू निवेशकों के भारी समर्थन का भरोसा रहता है, क्योंकि जापान के सरकारी बॉन्ड का बड़ा हिस्सा स्थानीय निवेशकों के पास है जो संकट में भी उन्हें नहीं बेचते। वहीं, स्विट्जरलैंड के सख्त बैंकिंग कानून निवेशकों को पूंजी की अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराते हैं, जिससे संकट के समय स्विस फ्रैंक मजबूत होता है।

## प्रमुख मुद्रा जोड़ियों की हलचल और एशिया में व्यापार
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) 0.7100 के स्तर से ऊपर कारोबार करती दिखी। इसे रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया की असिस्टेंट गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक की सख्त और आक्रामक टिप्पणियों से समर्थन मिला। हालांकि, पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य और कूटनीतिक तनाव तथा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत दृष्टिकोण के चलते डॉलर का तेजी वाला रुख कायम है, जो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त को सीमित कर सकता है। बाजार के प्रतिभागी इस सप्ताह के उत्तरार्ध में होने वाले ट्रंप और शी के महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन पर भी पैनी नजर बनाए हुए हैं, जिसे व्यापक व्यापारिक दिशा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) का युग्म मंगलवार को एशियाई सत्र में 157.50 के स्तर के आसपास मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। जापानी मुद्रा बाजार में संभावित आधिकारिक हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन में बड़ी गिरावट को रोकने का काम किया है। हालांकि, बैंक ऑफ़ जापान द्वारा अपनी नीतिगत दर को बढ़ाकर 31 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचाने के बावजूद उसका रुख नरम माना गया, जिससे जापानी येन के खरीदार बैकफुट पर दिखाई दिए। केंद्रीय बैंक ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। यह कदम मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में उठाया गया है और यह बाजार की हफ्तों पुरानी उम्मीदों के पूरी तरह अनुरूप रहा है। इसके साथ ही, फेड के कड़े रुख और पश्चिम एशिया के तनाव ने डॉलर को मजबूती दी है, जो USD/JPY जोड़ी को सहारा दे रहा है।

## क्रिप्टो बाजार में ठहराव और संस्थागत निवेश
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में भी उतार-चढ़ाव की गति धीमी पड़ी है। सोमवार को 6.7 प्रतिशत की जोरदार छलांग लगाने के बाद मंगलवार को बिटकॉइन में मुनाफावसूली या पुलबैक देखा गया और यह 85,500 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा था। इस अस्थायी सुस्ती के बावजूद बड़े संस्थागत निवेशकों की ओर से मांग का मजबूत समर्थन बना हुआ है। हाजिर बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ में सोमवार को लगभग 1 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। इसके अतिरिक्त, कॉरपोरेट स्तर पर स्ट्रैटेजी ने अपने खजाने में 950 बीटीसी जोड़कर दीर्घकालिक विश्वास का संकेत दिया है। मुद्रा बाजार से लेकर कमोडिटी और डिजिटल टोकन तक, वित्तीय संपत्तियां इस समय केंद्रीय बैंकों के सख्त कदमों और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक हलचलों के बीच संतुलन साधने का प्रयास कर रही हैं।

## इसका आप पर असर
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों में बदलाव का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं, यात्रियों और निवेशकों पर पड़ता है।

- **भारत में:** डॉलर इंडेक्स के 100 के पार निकलने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे कच्चे तेल और आयातित सामानों की लागत बढ़ सकती है। आयात महंगा होने के कारण घरेलू स्तर पर ईंधन और इलेक्ट्रॉनिक्स के दाम प्रभावित हो सकते हैं।
- **विदेश यात्रा और शिक्षा:** जिन परिवारों के बच्चे विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं या जो विदेश यात्रा की योजना बना रहे हैं, उन्हें डॉलर मजबूत होने से अधिक रुपये खर्च करने पड़ेंगे। विदेशी विश्वविद्यालयों की फीस जमा करने और विदेशी मुद्रा कार्ड लोड कराने के लिए समय पर योजना बनाना जरूरी है।
- **सोने में निवेश:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने के भाव 4,300 डॉलर के स्तर पर फिसलने से घरेलू आभूषण बाजार में भी कीमतों में हल्की नरमी देखने को मिल सकती है। त्योहारी या शादी के मौसम के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे खरीदारों को कीमतों में गिरावट का लाभ मिल सकता है।
- **क्रिप्टो निवेशक:** बिटकॉइन के 85,500 डॉलर के नीचे आने के बावजूद संस्थागत ईटीएफ में आ रहा फंड बाजार की लंबी अवधि की मजबूती दर्शाता है। छोटे निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के दौरान अचानक बिकवाली करने से बचना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते वैश्विक बाजारों में डॉलर की मांग तेजी से बढ़ी है। इसके अलावा केंद्रीय बैंकों की नीतियों में भिन्नता ने पूंजी के सुरक्षित विकल्पों की ओर प्रवाह को तेज कर दिया है।

- **फेडरल रिजर्व की सख्त नीति:** फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में सख्ती शुरू करने के रुख ने अमेरिकी प्रतिभूतियों में निवेशकों के आकर्षण को बढ़ा दिया है। उच्च प्रतिफल मिलने की संभावना के चलते अंतरराष्ट्रीय पूंजी डॉलर की तरफ लौट रही है, जिससे डॉलर इंडेक्स 100 के पार निकल गया।
- **पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव:** पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य और रणनीतिक तनाव के कारण वैश्विक निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है। ऐसे समय में निवेशक सुरक्षित ठिकाना तलाशते हुए डॉलर और सॉवरेन बॉन्ड में खरीदारी बढ़ा रहे हैं।
- **बैंक ऑफ जापान का अप्रभावी कदम:** बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दर को 31 साल के उच्चतम स्तर 1.25% पर पहुंचाया, लेकिन नीतिगत बयान उम्मीद के मुताबिक नरम रहने से येन में अपेक्षित मजबूती नहीं आई। नतीजतन, येन की कमजोरी ने डॉलर को और अधिक बढ़त दिलाई।
- **सोने पर ब्याज दरों का दबाव:** फेड के आक्रामक रुख के कारण बिना प्रतिफल वाली परिसंपत्तियों जैसे सोने से पूंजी निकलकर ब्याज देने वाले साधनों में जाने लगी है, जिससे सोने में लगातार गिरावट दर्ज की गई।

## सवाल-जवाब

### 1. डॉलर इंडेक्स किस स्तर के पार पहुंचा है?
डॉलर इंडेक्स अगस्त की शुरुआत के बाद पहली बार 100.00 के स्तर से ऊपर निकल गया है।

### 2. सोने की कीमत में कितनी गिरावट आई है?
सोना मंगलवार को लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 4,315 डॉलर प्रति औंस के आसपास और 4,300 डॉलर के स्तर का परीक्षण कर रहा है।

### 3. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दर में क्या बदलाव किया?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जो 31 साल का उच्च स्तर है।

### 4. बिटकॉइन किस स्तर पर कारोबार कर रहा है?
सोमवार को 6.7 प्रतिशत की छलांग लगाने के बाद बिटकॉइन में गिरावट आई और यह 85,500 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा है।

### 5. स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ में कितना निवेश हुआ?
सोमवार को स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में लगभग 1 अरब डॉलर का शुद्ध संस्थागत निवेश दर्ज किया गया।

### 6. इस सप्ताह किन दो बड़े वैश्विक नेताओं की बैठक प्रस्तावित है?
सप्ताह के उत्तरार्ध में ट्रंप और शी के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन होने वाला है।

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