अमेरिकी डॉलर पर मंडराया डिबेसमेंट का खतरा, अमेरिकी ट्रेजरी की चाल और ईरान प्रतिबंधों पर टिकी निवेशकों की नजर बाजार में इन दिनों मुद्रा अवमूल्यन यानी डिबेसमेंट की चर्चा तेज है और अमेरिकी डॉलर के भविष्य को लेकर निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है। हफ्ते की शुरुआत के साथ ही विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की चाल स्थिर बनी हुई है, लेकिन निवेशकों के बीच डिबेसमेंट यानी मुद्रा के अवमूल्यन का मुद्दा चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है। वित्तीय गलियारों में इस बात पर गहरी माथापच्ची चल रही है कि लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी को थामने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी आगे क्या नए कदम उठाने की योजना बना रही है। जानकारों का मानना है कि इस हफ्ते आने वाले कुछ अहम घटनाक्रम और नीतियां इस बात की दिशा तय करेंगे कि निकट भविष्य में डॉलर का रुख किस तरफ मुड़ेगा और बाजार की धारणा में क्या बदलाव आएगा। अमेरिकी ट्रेजरी के बॉन्ड बायबैक और लिक्विडिटी प्लान बुधवार को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने तय कैलेंडर से हटकर एक बड़ा कदम उठाया, जिस पर बाजार की पैनी नजर टिकी हुई है। दोपहर 12:32 GMT पर विभाग ने यह घोषणा की कि वह 10 से 20 साल और 20 से 30 साल के सेक्टरों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन का आकार कम से कम दोगुना करने जा रहा है। इसके तहत अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से प्रभावी होगी और 4 नवंबर तक जारी रहेगी। इसी ट्रेजरी बायबैक योजना के कारण पिछले हफ्ते डॉलर में बड़ी बिकवाली देखने को मिली थी, जिससे उबरने के लिए अब अमेरिकी मुद्रा हल्की रिकवरी की कोशिश कर रही है। ईरान पर प्रतिबंध और कमोडिटी बाजार का हाल सोमवार को यूरोपीय सत्र के दौरान विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव का साफ असर देखने को मिला। ईरान पर संभावित अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर फैली अनिश्चितताओं के बीच ब्रिटिश पाउंड और यूरो दबाव में नजर आ रहे हैं। यूरोपीय कारोबार में EUR/USD जोड़ी 1.1700 के स्तर से नीचे रक्षात्मक रुख के साथ ट्रेड कर रही है, जबकि GBP/USD जोड़ी 1.3600 के मध्य स्तरों पर नकारात्मक रुझान के साथ बनी हुई है। ईरान प्रतिबंधों से जुड़े ब्योरे की घोषणा आज बाद में होने की उम्मीद है, जिसके चलते बाजार के ट्रेडर और निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। सोने की चमक और अमेरिकी-कनाडा व्यापार तनाव दूसरी ओर, सुरक्षित निवेश के रूप में माने जाने वाले सोने की कीमतों में जोरदार तेजी बरकरार है। यूरोपीय सत्र में पीली धातु अपने तीन महीने के उच्चतम स्तर के करीब 4,650 डॉलर के आसपास मजबूत स्थिति में कारोबार कर रही है। अमेरिकी डॉलर में लगातार बनी कमजोरी, अमेरिकी ट्रेजरी के बॉन्ड बायबैक प्लान और हालिया अमेरिकी-कनाडा व्यापार तनाव ने सोने की कीमतों को जबरदस्त सहारा दिया है। हालांकि, बाजार के जानकारों का यह भी कहना है कि अगर ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई काफी गंभीर और असरदार साबित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल आ सकता है और शुरुआती दौर में डॉलर को भी मजबूती मिल सकती है। फिसल कंसोलिडेशन और बॉन्ड यील्ड का भविष्य मौजूदा हालात में केवल एक घटना के आधार पर डॉलर के दीर्घकालिक रुख का अनुमान लगाना मुश्किल है क्योंकि निवेशकों का पूरा ध्यान फिलहाल डिबेसमेंट की चिंताओं पर केंद्रित है। बॉन्ड बायबैक की घोषणा के बाद स्कॉट बेसेंट द्वारा राजकोषीय समेकन यानी फिसलन कंसोलिडेशन योजनाओं पर विस्तृत जानकारी दिए जाने की संभावना है, हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि इस मोर्चे से किसी बड़े चमत्कार की उम्मीद कम ही है। इसके अलावा, यदि दीर्घकालिक बॉन्ड बाजार में कोई ठोस राजकोषीय उपाय सामने नहीं आते हैं, तो 30 साल की बॉन्ड यील्ड पिछले हफ्ते बनाए गए 5.34 प्रतिशत के उच्च स्तर को भी पार कर सकती है। कुल मिलाकर, इस पूरे हफ्ते के दौरान अमेरिकी डॉलर पर मंदी का जोखिम बना हुआ है और निवेशकों को हर छोटी हलचल पर बारीकी से नजर रखनी होगी। इसका आप पर असर भारत में: अमेरिकी डॉलर में उतार-चढ़ाव और वैश्विक स्तर पर कमोडिटी कीमतों में तेजी का असर भारतीय रुपये के विनिमय मूल्य और आयात बिल पर पड़ सकता है। व्यापक स्तर पर: वैश्विक निवेशकों और कमोडिटी ट्रेडर्स को बॉन्ड यील्ड और करेंसी डिबेसमेंट से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए अपनी निवेश रणनीतियों की समीक्षा करनी चाहिए। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी ट्रेजरी ने बॉन्ड बायबैक ऑपरेशन में क्या बदलाव किया है? अमेरिकी ट्रेजरी ने 10 से 20 साल और 20 से 30 साल के सेक्टरों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन का आकार बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन कर दिया है। 2. सोने की कीमतें यूरोपीय सत्र में किस स्तर के करीब कारोबार कर रही हैं? सोना अपने तीन महीने के उच्चतम स्तर के करीब 4,650 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। 3. EUR/USD जोड़ी किस स्तर से नीचे ट्रेड कर रही है? EUR/USD जोड़ी 1.1700 के स्तर से नीचे रक्षात्मक रुख के साथ ट्रेड कर रही है। 4. इस हफ्ते बाजार का ध्यान किस मुख्य मुद्दे पर केंद्रित है? बाजार का मुख्य ध्यान मुद्रा अवमूल्यन यानी डिबेसमेंट की चर्चा और अमेरिकी ट्रेजरी की बॉन्ड योजनाओं पर केंद्रित है। https://trendkia.com/market/us-dollar-debasement-fears-mount-as-treasury-actions-and-iran-sanctions-keep-markets-on-edge-21198 TrendKia — Har trend, sabse pehle.