अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और ईरान कूटनीति से डॉलर फिसला, कच्चे तेल में गिरावट और सोने में लौटी चमक अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रेडर्स द्वारा डॉलर में लॉन्ग पोजीशन घटाने और वाशिंगटन-तेहरान कूटनीतिक बातचीत के संकेतों के बीच वैश्विक मुद्रा बाजार में नरमी देखी गई, जबकि कच्चे तेल में सुस्ती और सोने में सुधार दर्ज हुआ। वैश्विक वित्तीय बाजारों में सोमवार को एक उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला जब अमेरिकी डॉलर प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले दबाव में आ गया। वाशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक वार्ताओं की संभावनाओं और संयुक्त राज्य अमेरिका में होने वाले महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। मुद्रा बाजार में डॉलर इंडेक्स में नरमी देखी गई, जहां अमेरिकी मुद्रा यूरो के मुकाबले सबसे अधिक कमजोर साबित हुई। इस बीच कमोडिटी बाजार, विशेषकर कच्चे तेल और सोने में भी राजनीतिक घटनाक्रमों के अनुसार हलचल दर्ज की गई। मध्यावधि चुनाव से पहले डॉलर में एहतियाती बिकवाली बाजार विश्लेषकों के अनुसार, डॉलर के लिए सबसे बड़ा तात्कालिक कारक मंगलवार को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पूर्व नेट-लॉन्ग पोजीशन को कम करना रहा। वित्तीय रणनीतिकारों का मानना है कि इस समय बुनियादी आर्थिक संकेतकों के बजाय बाजार की पोजीशनिंग कीमतों की दिशा तय कर रही है। प्रेडिक्शन मार्केट्स में इस बात की 68% संभावना जताई जा रही है कि डेमोक्रेटिक पार्टी क्लीन स्वीप कर सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि डेमोक्रेटिक स्वीप होता है, तो यह कई कोणों से अमेरिकी डॉलर के लिए थोड़ा नकारात्मक साबित हो सकता है। इसमें सरकार के कामकाज ठप होने का बढ़ता जोखिम, ऋण सीमा वार्ताओं में संभावित गतिरोध और पहले से ही डगमगाते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े मार्केट सेंटिमेंट को लगने वाला संभावित झटका शामिल है। इसी परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए आईएनजी के विश्लेषकों ने स्पष्ट किया है कि वे अगले कुछ दिनों में डॉलर की तेजी के पीछे भागने से बचने और सावधानी बरतने की सलाह देंगे। ईरान युद्ध पर कूटनीतिक प्रयास और कच्चे तेल की चाल सप्ताहांत के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सैन्य बल का उपयोग किए बिना ईरान के साथ जारी गतिरोध को कूटनीतिक रूप से सुलझाना चाहते हैं। इस बयान से वैश्विक बाजारों में तनाव कुछ कम होने की उम्मीद बंधी। दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने अपने शीर्ष सैन्य कमांडरों को अमेरिका और इजरायल के साथ नए सिरे से टकराव के लिए तैयार रहने और जवाबी कार्रवाई के विकल्पों को विस्तार देने का निर्देश दिया, यद्यपि उनके शीर्ष राजनयिक ने कूटनीतिक बातचीत में प्रगति के संकेत भी दिए। कूटनीतिक समाधान की सुगबुगाहट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में नरमी दर्ज की गई। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड ऑयल के भाव में दिन के कारोबार में लगभग 2% की गिरावट आई। ताजा आंकड़ों के अनुसार, क्रूड ऑयल वायदा $100.61 प्रति बैरल पर आ गया, जो पिछले बंद भाव $104.12 के मुकाबले 3.37% नीचे है। तकनीकी विश्लेषण पर नजर डालें तो क्रूड का 14-दिवसीय RSI 55 के स्तर पर है और MACD 2.50 पर बना हुआ है, जो इसके सिग्नल 2.32 से ऊपर है। 20-दिवसीय EMA $99.06, 50-दिवसीय EMA $94.99 और 200-दिवसीय EMA $84.52 पर स्थित हैं, जिससे यह लंबी अवधि के अपट्रेंड और गोल्डन क्रॉस स्थिति में बना हुआ है। ट्रेडिंग के लिए पिवट $101.17, पहला रेजिस्टेंस $102.19, दूसरा रेजिस्टेंस $103.77, जबकि पहला सपोर्ट $99.59 और दूसरा सपोर्ट $98.57 पर मौजूद है। मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव: येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मुद्रा जोड़ी USD/JPY यूरोपीय सत्र के दौरान मामूली बढ़त के साथ आगे बढ़ी, हालांकि यह 158.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे ही बनी रही। पिछले सप्ताह बैंक ऑफ जापान की बैठक के बाद 157.00 से नीचे के स्तर तक गिरने के बाद इसमें सुधार देखा गया। जापानी वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संयुक्त विदेशी मुद्रा वक्तव्य प्रभावी है और जापान सरकार मुद्रा के किसी भी अनियंत्रित या अत्यधिक उतार-चढ़ाव के खिलाफ आवश्यक कदम उठाएगी। टोक्यो की ओर से ताजा हस्तक्षेप की चेतावनी के बावजूद यह जोड़ी 158.00 के करीब बनी रही। दूसरी ओर, AUD/USD ने एशियाई सत्र की गिरावट से उबरते हुए मजबूती दर्ज की। ईरान पर कूटनीतिक आशावाद से निवेशकों के विश्वास को बढ़ावा मिला, जिसने सेफ-हेवन डॉलर पर दबाव बनाए रखा और जोखिम-संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन दिया। हालांकि, गुरुवार को छुए गए एक महीने के उच्च स्तर से नीचे ही कारोबार होता रहा क्योंकि खरीदार रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के नीतिगत फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सोने में उछाल और क्रिप्टो बाजार की स्थिति सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने ने नए सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की। लगातार दो दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए पीली धातु ने शुक्रवार को $3,900 से नीचे के नुकसान की आंशिक भरपाई की, जो अक्टूबर 2025 के बाद का इसका निचला स्तर था। अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की उम्मीद से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे सोने को गति मिली। हालांकि, कच्चे तेल से जुड़ी मुद्रास्फीति चिंताओं के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं अभी भी बरकरार हैं, जो बिना यील्ड वाली धातुओं के लिए दबाव का काम कर सकती हैं। डिजिटल एसेट बाजार में भी आंशिक सुधार देखने को मिला। अक्टूबर के पूरे महीने में लगातार चार हफ्तों की गिरावट दर्ज करने के बाद बिटकॉइन, एथेरियम और एक्सआरपी में सोमवार को संभलने के संकेत दिखे। बिटकॉइन अपने प्रमुख सपोर्ट जोन से उठकर $78,462 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। वहीं, एथेरियम सुधरकर $2,295 के ऊपर आ गया, लेकिन प्रमुख एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज से नीचे रहने के कारण इसका निकट अवधि का दृष्टिकोण सतर्क बना हुआ है। वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर की भूमिका और नीतियां अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया के कई देशों में स्थानीय नोटों के समानांतर चलने वाली वास्तविक मुद्रा भी है। वैश्विक स्तर पर यह सबसे अधिक ट्रेड होने वाली करेंसी है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, कुल वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार में 88% से अधिक हिस्सेदारी डॉलर की रही है, जिसका औसत दैनिक लेनदेन लगभग $6.6 ट्रिलियन रहा। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा का दर्जा हासिल किया था। वर्ष 1971 में ब्रेटन वुड्स समझौते के खत्म होने तक इसका मूल्य सोने से जुड़ा हुआ था, जिसके बाद गोल्ड स्टैंडर्ड समाप्त हो गया। अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा कारक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। फेड के दो मुख्य अधिदेश हैं: मूल्य स्थिरता बनाए रखना यानी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना और रोजगार के अधिकतम अवसर सुनिश्चित करना। जब मुद्रास्फीति 2% के लक्ष्य से अधिक तेजी से बढ़ती है, तो फेड दरों में बढ़ोतरी करता है जिससे डॉलर मजबूत होता है। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति कमजोर होती है या बेरोजगारी बढ़ती है, तो ब्याज दरों में कटौती की जाती है जो डॉलर को नरम करती है। गंभीर आर्थिक संकटों के समय केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी क्यूई का सहारा लेकर सिस्टम में नकदी बढ़ाता है और बॉन्ड खरीदता है, जिससे आमतौर पर डॉलर कमजोर होता है। वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी के तहत बॉन्ड खरीद बंद की जाती है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में आए इस बदलाव का सीधा असर आयात लागत, मुद्रा विनिमय दरों और खुदरा निवेश पर पड़ेगा। • भारत में: कच्चे तेल की कीमतों में आई 3.37% की गिरावट भारत के लिए तेल आयात बिल को कम करने में मददगार साबित हो सकती है। अगर कच्चे तेल के दाम $100 प्रति बैरल के आसपास स्थिर रहते हैं तो खुदरा ईंधन की कीमतों और घरेलू महंगाई दर को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। • वैश्विक निवेशकों के लिए: अमेरिकी मध्यावधि चुनावों और कूटनीतिक वार्ताओं से डॉलर में आई नरमी सोने और विदेशी मुद्राओं में निवेश को सहारा देगी। पोर्टफोलियो में सुरक्षित संपत्तियों और इक्विटी के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए यह समय सतर्कता बरतने का है। • क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडर्स के लिए: लगातार चार हफ्तों के नुकसान के बाद प्रमुख टोकनों में आंशिक सुधार से निकट अवधि में राहत मिल सकती है। निवेशकों को $78,462 के ऊपर बिटकॉइन के स्तरों पर नजर रखते हुए स्टॉप-लॉस का सख्त पालन करना चाहिए। • मुद्रा बाजार कारोबारियों के लिए: बैंक ऑफ जापान और फेडरल रिजर्व की नीतियों के कारण प्रमुख जोड़ियों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। ट्रेडर्स को किसी भी नई पोजीशन से पहले केंद्रीय बैंकों के आगामी फैसलों और बयानों का इंतजार करना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी और वैश्विक संपत्तियों में यह उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से राजनीतिक घटनाक्रमों और कूटनीतिक बयानों के मिले-जुले असर के कारण हुआ है। ट्रेडर्स ने बड़े राजनीतिक आयोजनों से पहले अपना जोखिम घटाने का फैसला किया है। • मध्यावधि चुनाव का जोखिम: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में प्रेडिक्शन मार्केट्स द्वारा डेमोक्रेटिक स्वीप की 68% संभावना जताए जाने के कारण ट्रेडर्स ने डॉलर में अपनी लंबी पोजीशन को एहतियातन बंद करना शुरू किया। इसके कारण कर्ज सीमा पर गतिरोध और सरकारी कामकाज ठप होने की आशंकाएं बढ़ गई हैं। • मध्य पूर्व कूटनीति: अमेरिकी विदेश मंत्री द्वारा ईरान के साथ मुद्दे को सैन्य बल के बिना कूटनीतिक रूप से सुलझाने की इच्छा जताए जाने से भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने की उम्मीद जगी। इसके चलते सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग घटी और कच्चे तेल के दाम 2% से अधिक फिसल गए। • तकनीकी सपोर्ट और मौद्रिक नीतियां: सोने और क्रिप्टोकरेंसी ने पिछले सप्ताह भारी बिकवाली के बाद अपने प्रमुख तकनीकी सपोर्ट स्तरों से वापसी की। हालांकि, तेल जनित महंगाई के कारण केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाएं अब भी बाजारों को प्रभावित कर रही हैं। सवाल-जवाब 1. सोमवार को अमेरिकी डॉलर में गिरावट क्यों आई? अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रेडर्स द्वारा डॉलर में लॉन्ग पोजीशन कम करने और ईरान के साथ कूटनीतिक वार्ता की उम्मीदों से डॉलर पर दबाव पड़ा। 2. ईरान को लेकर क्या कूटनीतिक बयान सामने आए हैं? अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ तनाव को बिना सैन्य बल के कूटनीतिक रूप से सुलझाना चाहते हैं। 3. कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा है? कूटनीतिक उम्मीदों के बीच WTI क्रूड के दाम लगभग 2% गिरकर $100.61 प्रति बैरल के आसपास आ गए। 4. अमेरिकी मध्यावधि चुनाव को लेकर बाजार में क्या अनुमान हैं? प्रेडिक्शन मार्केट्स में डेमोक्रेटिक स्वीप की संभावना लगभग 68% आंकी जा रही है, जिसे डॉलर के लिए आंशिक रूप से नकारात्मक माना जा रहा है। 5. जापान के वित्त मंत्री ने येन की चाल पर क्या चेतावनी दी? वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा ने कहा कि अमेरिका के साथ संयुक्त बयान प्रभावी है और सरकार अनियंत्रित मुद्रा उतार-चढ़ाव पर कार्रवाई करेगी। 6. सोने और क्रिप्टोकरेंसी में क्या रुख रहा? सोने ने $3,900 के स्तर से नीचे की गिरावट से उबरते हुए बढ़त बनाई, जबकि बिटकॉइन सुधरकर $78,462 के ऊपर पहुंच गया। https://trendkia.com/market/us-dollar-dips-on-midterm-election-uncertainty-and-iran-talks-as-crude-slides-and-gold-rebounds-54876 TrendKia — Har trend, sabse pehle.