# अमेरिकी डॉलर में बड़ी गिरावट, एनएफपी आंकड़ों पर टिकी निवेशकों की नजर

> ट्रेजरी यील्ड में नरमी और जापानी येन में तेज उछाल के चलते अमेरिकी डॉलर सूचकांक में कमजोरी आई है। अब सभी की निगाहें शुक्रवार को आने वाली नॉनफार्म पेरोल रिपोर्ट पर टिकी हैं।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-dollar-extends-decline-as-nfp-takes-centre-stage-27318 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी डॉलर, नॉनफार्म पेरोल, फेडरल रिजर्व, ट्रेजरी यील्ड, फॉरेक्स मार्केट, जापानी येन, अर्थव्यवस्था

गुरुवार को विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर में भारी नरमी देखने को मिली और यह फिसलकर 99.00 के स्तर से नीचे आ गया। पिछले एक सप्ताह में यह डॉलर का सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की तरफ से दिए गए नरम बयानों के कारण ग्रीनबैक पर लगातार दबाव बना हुआ है। बाजार के तमाम निवेशक अब शुक्रवार को जारी होने वाले रोजगार के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जो यह तय करेंगे कि डॉलर में आगे और गिरावट आएगी या फिर इसमें कोई रिकवरी देखने को मिलेगी।

अमेरिकी डॉलर सूचकांक, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को मापता है, गुरुवार को लुढ़ककर 98.90 के आसपास कारोबार कर रहा था। बुधवार को यह सूचकांक 99.86 के ऊंचे स्तर तक पहुंच गया था, जिसके बाद एक दिन में इसमें 0.67 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। डॉलर में इस तेज कमजोरी के पीछे जापानी येन में आया जोरदार उछाल मुख्य वजह है। यूएसडी-जेपीवाई जोड़ी लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ 155.45 के आसपास कारोबार कर रही थी, जो एक महीने का सबसे निचला स्तर है और जुलाई के बाद हुए हस्तक्षेप के करीब पहुंच गया है। येन की इस अचानक हलचल ने बाजार में नए सिरे से सरकारी दखल की अटकलों को हवा दे दी है, हालांकि जापानी अधिकारियों की तरफ से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई मामूली नरमी ने भी डॉलर की चाल को कमजोर किया है। बेंचमार्क 10-वर्षीय यील्ड घटकर 4.75 प्रतिशत के आसपास आ गई, जबकि बुधवार को यह अक्टूबर 2023 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर 4.81 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। सीएमई फेडवॉच टूल के मुताबिक, सितंबर की बैठक में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना पिछले दिन के 63 प्रतिशत से घटकर अब लगभग 50 प्रतिशत रह गई है। बाजार अब इस बात का अनुमान लगा रहा है कि केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीति में किस तरह का रुख अपनाएगा।

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर, अगस्त महीने में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 58,000 नई नौकरियां जुड़ने का अनुमान जताया गया है, जबकि जुलाई में 23,000 नौकरियां कम हुई थीं। इसके साथ ही बेरोजगारी दर के 4.1 प्रतिशत पर स्थिर रहने की उम्मीद है। बाजार के जानकारों की नजरें वेतन वृद्धि और पिछले आंकड़ों के संशोधन पर भी रहेंगी, क्योंकि जुलाई की रिपोर्ट में मई और जून के रोजगार आंकड़ों में कुल मिलाकर 1,03,000 नौकरियों की कटौती की गई थी। नॉनफार्म पेरोल रिपोर्ट अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो की मासिक रोजगार रिपोर्ट का एक मुख्य हिस्सा होती है, जो कृषि क्षेत्र को छोड़कर पिछले महीने देश में कामकाजी लोगों की संख्या में आए बदलाव को मापती है।

नॉनफार्म पेरोल के आंकड़े फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसलों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं क्योंकि ये यह बताते हैं कि बैंक पूर्ण रोजगार और 2 प्रतिशत महंगाई के लक्ष्य को हासिल करने में कितना सफल हो रहा है। जब पेरोल के आंकड़े मजबूत आते हैं तो इसका मतलब होता है कि ज्यादा लोगों के पास रोजगार है, वे ज्यादा कमाई कर रहे हैं और बाजार में उनकी खपत भी बढ़ रही है। इसके विपरीत, कमजोर आंकड़े यह दर्शाते हैं कि लोगों को काम खोजने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। जब बेरोजगारी कम होने से महंगाई बढ़ती है तो फेडरल रिजर्व आमतौर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, जबकि सुस्त श्रम बाजार को गति देने के लिए दरों में कटौती की जाती है।

ऐतिहासिक रूप से नॉनफार्म पेरोल का अमेरिकी डॉलर के साथ सकारात्मक संबंध रहा है, जिसका अर्थ है कि जब ये आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं तो डॉलर में तेजी आती है और कमजोर आंकड़ों पर यह गिर जाता है। मुद्रास्फीति, मौद्रिक नीति की उम्मीदों और ब्याज दरों पर प्रभाव डालकर एनएफपी सीधे तौर पर डॉलर की दिशा तय करता है। इसके अलावा, सोने की कीमतों के साथ नॉनफार्म पेरोल का नकारात्मक संबंध देखा गया है, यानी मजबूत रोजगार आंकड़े सोने के भाव पर दबाव बनाते हैं क्योंकि डॉलर के मजबूत होने से डॉलर में तौले जाने वाले सोने को खरीदने के लिए कम मुद्रा की आवश्यकता होती है। साथ ही, उच्च ब्याज दरों के कारण सोने की तुलना में नकदी में निवेश करना अधिक आकर्षक हो जाता है।

व्यापक आर्थिक परिदृश्य में, अन्य मुद्राएं और बाजार भी अमेरिकी डॉलर की चाल से प्रभावित हो रहे हैं। एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियन डॉलर 0.7150 के ऊपर कारोबार कर रहा है, जिसे कमजोर अमेरिकी आंकड़ों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच समर्थन मिल रहा है। दूसरी ओर, सोने की कीमतें 4,500 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के करीब बनी हुई हैं, जिसे ट्रेजरी यील्ड की कमजोरी से बल मिल रहा है। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन 77,700 डॉलर के आसपास स्थिर है, जबकि ऊर्जा बाजार में डीजल के दाम ऊंचे बने हुए हैं और अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर में आई इस गिरावट और आगामी रोजगार आंकड़ों का असर मुद्रा बाजारों, निवेशकों और वैश्विक व्यापार पर सीधा पड़ता है।

- **भारत में:** डॉलर के कमजोर होने से रुपये की विनिमय दर को थोड़ा संबल मिल सकता है, जिससे आयातित वस्तुओं और कच्चे तेल के भुगतान पर मामूली असर पड़ सकता है।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** फॉरेक्स और जिंस बाजारों में कारोबार करने वाले निवेशकों को मुद्रा की चाल और ब्याज दरों की उम्मीदों के आधार पर अपनी रणनीतियों में बदलाव करना होगा।
- **ब्याज दरों पर असर:** एनएफपी के आंकड़े यह तय करेंगे कि आने वाले महीनों में फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है, जिससे वैश्विक उधार लागत प्रभावित होती है।
- **सोने और कमोडिटी बाजार:** डॉलर और यील्ड में उतार-चढ़ाव के कारण सोने और अन्य बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
- **ऊर्जा लागत:** डीजल और तेल बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच मुद्रा बाजार की यह हलचल परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत को परोक्ष रूप से प्रभावित कर सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिकी डॉलर सूचकांक में हालिया गिरावट की मुख्य वजह क्या है?
ट्रेजरी यील्ड में नरमी और जापानी येन में आए तेज उछाल के कारण अमेरिकी डॉलर सूचकांक 99.00 के स्तर से नीचे आ गया है।

### 2. नॉनफार्म पेरोल रिपोर्ट क्या दर्शाती है?
यह रिपोर्ट कृषि क्षेत्र को छोड़कर पिछले महीने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में जोड़े गए या कम हुए रोजगार की कुल संख्या को मापती है।

### 3. फेडरल रिजर्व के लिए एनएफपी आंकड़े क्यों महत्वपूर्ण हैं?
यह आंकड़े केंद्रीय बैंक को पूर्ण रोजगार और 2 प्रतिशत महंगाई के अपने लक्ष्यों को पूरा करने की प्रगति का आकलन करने में मदद करते हैं।

### 4. सोने की कीमतों पर नॉनफार्म पेरोल का क्या असर होता है?
आमतौर पर मजबूत एनएफपी आंकड़े सोने की कीमतों पर दबाव डालते हैं क्योंकि इससे डॉलर मजबूत होता है और सोने का आकर्षण कम होता है।

### 5. सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना अब कितनी है?
सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, सितंबर की बैठक में दरें बढ़ने की संभावना घटकर लगभग 50 प्रतिशत रह गई है।

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