वैश्विक तनाव और बॉन्ड यील्ड में तेजी से अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 102 के पार, सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी मध्य पूर्व में गहराते संकट और फ्रांस में बजटीय चिंताओं के बीच सुरक्षित निवेश के प्रवाह से अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 102.20 के स्तर को पार कर गया है। रोजगार के कमजोर आंकड़ों के बावजूद ट्रेजरी यील्ड में उछाल ने ग्रीनबैक को मजबूती दी है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में सप्ताह की शुरुआत डॉलर के दबदबे के साथ हुई है। शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र में छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी मुद्रा की ताकत मापने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) 102.20 के आसपास कारोबार करता नजर आया। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार यह इंडेक्स 102.43 के स्तर पर पहुंच गया है, जो इसके पिछले बंद भाव 101.93 की तुलना में 0.49 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश के विकल्प तलाश रहे हैं, जिससे अमेरिकी मुद्रा की मांग में तेजी बनी हुई है। बाजार भागीदार अब अमेरिकी सेवा क्षेत्र की वास्तविक स्थिति समझने के लिए आईएसएम सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। भू-राजनीतिक तनाव और ट्रेजरी यील्ड ने बढ़ाया सुरक्षित निवेश का आकर्षण मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष और यूरोप में फ्रांस की राजकोषीय चिंताओं ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में सतर्कता बढ़ा दी है। इसके साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड पर मिलने वाले यील्ड में आई तेजी ने सुरक्षित संपत्तियों के प्रवाह को रफ्तार दी है। बाजार रणनीतिकारों का मानना है कि मौजूदा माहौल में डॉलर सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है। ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि से अमेरिकी संपत्तियों का आकर्षण बढ़ा है और दुनिया भर में सरकारी ऋण पत्रों में बिकवाली के कारण निवेशक सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर ग्रीनबैक की ओर रुख कर रहे हैं। एबुरी में मार्केट स्ट्रैटेजी प्रमुख मैथ्यू रयान ने कहा, "मौजूदा माहौल में डॉलर सबसे बड़ा विजेता है, क्योंकि न केवल ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि अमेरिकी संपत्तियों के आकर्षण को बढ़ा रही है, बल्कि विश्व स्तर पर ऋण में व्यापक बिकवाली ग्रीनबैक में सुरक्षित-निवेश प्रवाह को बढ़ावा दे रही है।" कमजोर पेरोल आंकड़ों के बावजूद फेडरल रिजर्व के रुख पर नजरें अमेरिकी श्रम बाजार के हालिया आंकड़े हालांकि मिले-जुले रहे हैं। ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में अमेरिका में गैर-कृषि पेरोल (एनएफपी) में केवल 29,000 नौकरियों की वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा अगस्त में दर्ज 133,000 की वृद्धि और बाजार के 90,000 के अनुमान की तुलना में काफी कमजोर रहा। इसके चलते बेरोजगारी दर अगस्त के 4.1 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 4.2 प्रतिशत पर पहुंच गई। रोजगार के इन कमजोर आंकड़ों के कारण अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें थोड़ी सुस्त जरूर पड़ी हैं, लेकिन नीतिगत सख्ती की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। फेडरल रिजर्व की अधिकारी लोगन ने कड़ा रुख जाहिर करते हुए संकेत दिया है कि मूल्य स्थिरता बहाल करने के लिए दरों में कम से कम 50 आधार अंकों की और बढ़ोतरी आवश्यक हो सकती है। उनके अनुसार, बढ़ती बॉन्ड यील्ड भले ही टर्म प्रीमियम में वृद्धि को दर्शाती हो जिससे आगे की सख्ती की जरूरत कम लग सकती है, लेकिन मौजूदा मौद्रिक नीति अभी भी पूरी तरह प्रतिबंधात्मक स्तर पर नहीं पहुंची है। मजबूत आर्थिक विस्तार और श्रम बाजार के संतुलन के बीच यह तर्क मजबूत हो रहा है कि उच्च ब्याज दरों के बिना मुद्रास्फीति को फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य तक लाना संभव नहीं होगा। यह दृष्टिकोण डॉलर को लगातार समर्थन दे रहा है जबकि जोखिम-संवेदनशील संपत्तियों पर दबाव बना रहा है। सेवा क्षेत्र के संकेतकों पर टिकी बाजार की निगाहें आर्थिक गतिशीलता को परखने के लिए ट्रेडर अब अमेरिकी सेवा क्षेत्र के नए आंकड़ों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। टीडी सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि आईएसएम के ताजा आंकड़ों में अमेरिकी सेवा क्षेत्र में ठंडक के संकेत दिख सकते हैं। उनके अनुसार सेवाओं का सूचकांक अगस्त की अप्रत्याशित बढ़त को उलटते हुए सितंबर में घटकर 54.0 पर आ सकता है, जो आम सहमति के अनुमान से कम है। हालांकि नए ऑर्डरों और कारोबारी गतिविधियों के घटकों में सुधार दिखा है, लेकिन रोजगार घटक के लगातार दूसरे महीने संकुचन के दायरे में रहने की संभावना है। इसके अलावा जुलाई और अगस्त में भुगतान की गई कीमतों में वृद्धि के बाद सेवा क्षेत्र में लागत के दबावों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। तकनीकी चार्ट पर डॉलर इंडेक्स का रुख और प्रमुख स्तर दैनिक तकनीकी चार्ट पर डॉलर इंडेक्स का अल्पकालिक रुझान मजबूती का संकेत दे रहा है। इंडेक्स 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) और बोलिंगर मिडल बैंड के काफी ऊपर बना हुआ है, जो इसके तेजी के ढांचे को सहारा दे रहा है। हालांकि, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स RSI(14) वर्तमान में 75 से 76.34 के दायरे में है, जो ओवरबॉट स्थितियों की ओर इशारा करता है। इसका तात्पर्य यह है कि तेजी की गति काफी खिंच चुकी है और एक ताजा तेज उछाल के बजाय सूचकांक में सुधारात्मक ठहराव देखने को मिल सकता है। ऊपरी स्तरों पर तत्काल प्रतिरोध बोलिंगर अपर बैंड के पास 102.60 से 102.69 के करीब स्थित है, जबकि दैनिक पिवट 102.24 पर बना हुआ है। यदि ओवरबॉट दबाव बढ़ता है तो खरीदार अपनी पोजीशन हल्की कर सकते हैं। इसके पार अगला प्रतिरोध स्तर 102.83 पर देखा जा रहा है। नीचे की ओर, प्रारंभिक समर्थन बोलिंगर मिडल बैंड के पास 100.50 से 100.53 के आसपास उभरता है, जिसके बाद 100.15 पर 100-दिवसीय एसएमए एक महत्वपूर्ण ट्रेंड फ्लोर का काम करेगा। यदि अधिक गहरा सुधार आता है तो निचला बोलिंगर बैंड 98.37 से 98.40 के स्तर पर व्यापक मांग को पुनर्जीवित कर सकता है। लाइव डेटा के अनुसार 52-सप्ताह का दायरा 95.55 से 102.44 के बीच रहा है और एडीएक्स सूचकांक 38 पर ट्रेंडिंग स्थिति दर्शा रहा है। वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में डॉलर और फेड की नीतियां अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा है और कई अन्य देशों में स्थानीय नोटों के साथ वास्तविक मुद्रा के रूप में भी चलन में है। यह दुनिया भर में सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है, जिसकी विदेशी मुद्रा के कुल दैनिक कारोबार में 88 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार इसमें औसतन प्रतिदिन 6.6 ट्रिलियन डॉलर का लेन-देन होता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह लेते हुए दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा का दर्जा हासिल किया था। 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते तक डॉलर सोने द्वारा समर्थित था, जिसके बाद स्वर्ण मानक प्रणाली समाप्त कर दी गई। अमेरिकी डॉलर के मूल्य को निर्धारित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। फेडरल रिजर्व के पास दो मुख्य जिम्मेदारियां हैं: कीमतों में स्थिरता बनाए रखना यानी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना और पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों में समायोजन करना है। जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं और महंगाई 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो फेड दरें बढ़ाता है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब महंगाई घटती है या बेरोजगारी दर बहुत अधिक हो जाती है, तो दरें घटाई जाती हैं, जिसका असर ग्रीनबैक की कमजोरी के रूप में दिखता है। असाधारण वित्तीय संकटों के समय फेडरल रिजर्व अतिरिक्त डॉलर छापकर क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) का सहारा भी लेता है। इसके तहत वित्तीय प्रणाली में नकदी का प्रवाह बढ़ाया जाता है, जैसा कि 2008 के वित्तीय संकट के दौरान सरकारी बॉन्ड खरीदकर किया गया था। यह प्रक्रिया आमतौर पर डॉलर को कमजोर करती है। इसके विपरीत जब फेड बॉन्ड की खरीद बंद करता है और परिपक्व हो रहे बॉन्ड के मूलधन को दोबारा निवेश नहीं करता, तो उसे क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) कहा जाता है, जो डॉलर को मजबूती प्रदान करता है। अन्य वैश्विक परिसंपत्तियों और मुद्राओं की चाल डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर अन्य वैश्विक मुद्राओं और परिसंपत्तियों पर भी साफ देखा जा रहा है • EUR/USD: यूरो गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 के स्तर तक लुढ़क गई थी और यह अपने जनवरी के उच्चतम स्तर 1.2082 से काफी नीचे कारोबार कर रही है। यह गिरावट डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक संकट और ऊर्जा लागत के जोखिमों का संयुक्त परिणाम है। • USD/JPY: एशियाई सत्र में यूएसडी/जेपीवाई 158.00 के नीचे अपने नुकसान को बनाए रखे हुए है। बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख और संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिमों ने येन को सहारा दिया है, जिससे इस जोड़ी की बढ़त सीमित रही है। • AUD/USD: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में लगातार दूसरे दिन कुछ खरीदारी देखी गई, लेकिन कमजोर रोजगार डेटा और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में घट-बढ़ के बीच यह एक सीमित दायरे में बना रहा। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक (RBA) का सतर्क रुख भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की तेजी को सीमित कर रहा है। • सोना: गैर-उपज वाले सोने में नए सप्ताह की शुरुआत में निचले स्तरों पर कुछ खरीदारी देखी गई। अमेरिकी पेरोल डेटा में नरमी से बॉन्ड यील्ड में राहत मिलने से सोने को सहारा मिला, हालांकि डॉलर की समग्र मजबूती बहुमूल्य धातु के लिए अड़चन बनी हुई है। • कच्चा तेल: वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमत में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई और यह एशियाई कारोबार में 89.30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। जी7 देशों द्वारा आपातकालीन भंडार से 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति जताने के बाद कीमतों में यह सुस्ती आई है। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद ऊर्जा निर्यात प्रतिबंधों से बचने की प्रतिबद्धता के तहत लिया गया है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में उछाल और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का सीधा असर आयात लागत और मुद्रा विनिमय दरों पर पड़ेगा। • भारत में: मजबूत डॉलर के कारण भारतीय रुपये पर विनिमय दबाव बढ़ सकता है, जिससे विदेश में पढ़ाई और यात्रा का खर्च थोड़ा बढ़ सकता है। हालांकि जी7 द्वारा कच्चे तेल के आपातकालीन भंडार जारी करने से भारत के आयात बिल और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को अस्थायी राहत मिल सकती है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: मजबूत डॉलर और बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के चलते उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का जोखिम बढ़ सकता है। निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सुरक्षित संपत्तियों का हिस्सा बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। • सोने और कमोडिटी खरीदारों के लिए: डॉलर की मजबूती के कारण सोने और चांदी की कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव रहने की उम्मीद है। खरीदारों को आभूषण या निवेश की खरीदारी के लिए तकनीकी सुधार के स्तरों का इंतजार करना चाहिए। • निर्यातकों और आयातकों के लिए: अमेरिकी बाजार में सामान बेचने वाले भारतीय निर्यातकों को डॉलर की मजबूती से बेहतर प्राप्ति हो सकती है। वहीं डॉलर में भुगतान करने वाले आयातकों को करेंसी हेजिंग रणनीतियों को मजबूत करने की जरूरत होगी। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में यह उछाल मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक संकट और फ्रांस की बजटीय चिंताओं के कारण सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग का परिणाम है। इसके साथ ही अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने डॉलर को अतिरिक्त सहारा दिया है। • भू-राजनीतिक संकट: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और फ्रांस की राजकोषीय चिंताओं ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को जोखिम भरी संपत्तियों से निकालकर सुरक्षित पनाहगाहों की ओर जाने पर मजबूर किया है। ऐतिहासिक रूप से ऐसे तनावों में अमेरिकी डॉलर को पहली पसंद माना जाता है। • ट्रेजरी यील्ड में उछाल: वैश्विक बॉन्ड बाजारों में बिकवाली के बीच अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि हुई है, जिससे अमेरिकी परिसंपत्तियों पर मिलने वाला रिटर्न अधिक आकर्षक हो गया है। इस पूंजी प्रवाह ने डॉलर के भाव को ऊपर धकेला है। • फेडरल रिजर्व की सख्त टिप्पणियां: रोजगार के आंकड़ों में नरमी के बावजूद फेड अधिकारी लोगन द्वारा 50 आधार अंकों की अतिरिक्त दर वृद्धि के आह्वान ने मुद्रा को सहारा दिया है। ब्याज दरों के उच्च स्तर पर बने रहने की संभावना मुद्रा के मूल्य को मजबूती प्रदान करती है। सवाल-जवाब 1. सोमवार के कारोबारी सत्र में यूएस डॉलर इंडेक्स किस स्तर पर कारोबार कर रहा था? यूएस डॉलर इंडेक्स शुरुआती एशियाई सत्र में 102.20 के करीब कारोबार कर रहा था और लाइव आंकड़ों में 102.43 के स्तर पर देखा गया। 2. अमेरिकी डॉलर की मांग में अचानक तेजी का मुख्य कारण क्या है? मध्य पूर्व में जारी संघर्ष, फ्रांस में राजकोषीय चिंताएं और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी के कारण निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ना इसका मुख्य कारण है। 3. सितंबर महीने में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कितने नए रोजगार जुड़े? सितंबर में गैर-कृषि पेरोल में केवल 29,000 नई नौकरियां जुड़ीं, जो अगस्त के 133,000 और बाजार अनुमान के 90,000 से काफी कम थीं। 4. सितंबर में अमेरिका की बेरोजगारी दर कितनी दर्ज की गई? सितंबर में अमेरिका की बेरोजगारी दर अगस्त के 4.1 प्रतिशत से बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई। 5. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट क्यों आई? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद जी7 देशों द्वारा आपातकालीन भंडार से 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति से कच्चे तेल की कीमतें 89.30 डॉलर पर आ गईं। 6. यूरो/यूएसडी मुद्रा जोड़ी में क्या रुझान देखा गया? यूरो गिरकर मई 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया और बुधवार को 1.1312 के स्तर को छूने के बाद दबाव में कारोबार कर रहा था। https://trendkia.com/market/us-dollar-index-102-ke-para-surakshita-nivesha-ki-manga-barhi-43009 TrendKia — Har trend, sabse pehle.