# अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों के बीच डॉलर इंडेक्स 101.50 के पार, प्रमुख वैश्विक मुद्राओं पर बढ़ा दबाव

> सकल घरेलू उत्पाद में संशोधन और रोजगार आंकड़ों में सुधार के चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है। डॉलर इंडेक्स 101.50 से ऊपर टिका है, जिससे यूरो, जापानी येन और सोने की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-dollar-index-holds-above-101-50-as-revised-growth-and-labor-prints-put-rivals-on-back-foot-41073 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी डॉलर, विदेशी मुद्रा बाजार, फेडरल रिजर्व, सकल घरेलू उत्पाद, बैंक ऑफ जापान, सोना

वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार, 1 अक्टूबर को अमेरिकी मुद्रा की पकड़ मजबूत बनी हुई है, जहां विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं से आए मिले-जुले आर्थिक आंकड़ों के बावजूद डॉलर ने अपनी बढ़त बनाए रखी है। सप्ताह के कारोबारी रुझानों पर नजर डालें तो स्विस फ्रैंक के मुकाबले अमेरिकी डॉलर सबसे मजबूत स्थिति में उभरा है। इस बीच विदेशी मुद्रा विनिमय में प्रमुख मुद्राओं के आपसी उतार-चढ़ाव को मापने वाले हीट मैप से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि आधार मुद्रा और कोटेड मुद्रा के बीच अमेरिकी डॉलर का दबदबा अन्य प्रतिस्पर्धी परिसंपत्तियों पर भारी पड़ रहा है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स शुरुआती सुस्ती से उबरते हुए अमेरिकी कारोबारी सत्र के दौरान मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ और गुरुवार सुबह 101.50 के स्तर से ऊपर टिका हुआ है।

## रोजगार और विकास दर के संशोधित आंकड़ों ने दिया सहारा
अमेरिकी मुद्रा में यह मजबूती बुधवार को जारी हुए कई महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों के बाद देखने को मिली है। ऑटोमैटिक डेटा प्रोसेसिंग यानी एडीपी की ओर से जारी रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि सितंबर के महीने में अमेरिका के निजी क्षेत्र में 90 हजार नए रोजगार जुड़े हैं। बाजार के विश्लेषक इस आंकड़े के 70 हजार रहने का अनुमान लगा रहे थे, जिसके मुकाबले यह संख्या काफी बेहतर साबित हुई। निजी रोजगार सृजन के इस प्रदर्शन ने बाजार को चौंकाया है और आर्थिक गतिविधियों की सक्रियता का प्रमाण दिया है।

इसी दौरान अमेरिकी आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो (बीईए) ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के लिए वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी वृद्धि दर का संशोधित अनुमान जारी किया। प्रारंभिक अनुमान में जीडीपी वृद्धि 1.5 प्रतिशत आंकी गई थी, जिसे संशोधित करके 2.2 प्रतिशत कर दिया गया है। विकास दर में 0.7 प्रतिशत की यह तेज बढ़त दर्शाती है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पूर्व अनुमानों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में बनी हुई है।

दूसरी ओर, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के पसंदीदा मुद्रास्फीति मानक, कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (पीसीई) मूल्य सूचकांक के आंकड़े भी सामने आए। अगस्त में कोर पीसीई सूचकांक में सालाना आधार पर 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बाजार के जानकारों ने इसमें 3.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान जताया था। कोर मुद्रास्फीति का यह आंकड़ा उम्मीद से कम रहने के कारण ब्याज दरों में जल्द और आक्रामक बढ़ोतरी की आशंकाओं को कुछ हद तक राहत मिली, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतों से जुड़ी महंगाई की चिंताओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के पास बनाए रखा है।

## बैंक ऑफ जापान की बैठक के सार और येन में कमजोरी
एशियाई और यूरोपीय सत्र के दौरान जापानी मुद्रा पर भी खासा दबाव दर्ज किया गया। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) ने गुरुवार तड़के अपनी सितंबर मौद्रिक नीति बैठक का सारांश प्रकाशित किया। इस दस्तावेज में यह रेखांकित किया गया कि बैंक के कुछ सदस्यों का मानना है कि अर्थव्यवस्था और कीमतों के घटनाक्रम के अनुरूप नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रखना पूरी तरह से उचित होगा। इसके साथ ही बैंक ऑफ जापान ने इस बात को भी दोहराया कि उनका मुख्य ध्यान अंतर्निहित मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब स्थिर रखने पर केंद्रित होना चाहिए।

बुधवार को लगभग सपाट बंद होने के बाद, यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी ने गुरुवार को जोरदार तेजी दर्ज की। यूरोपीय कारोबारी सुबह में यूएसडी/जेपीवाई 0.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ 158.20 के करीब कारोबार करता दिखा, जो इसके साप्ताहिक दायरे के ऊपरी छोर 158.00 के पार है। हालांकि बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में संभावित मुद्रा हस्तक्षेप का जोखिम मौजूद है, लेकिन व्यापक डॉलर मजबूती और अमेरिका व ईरान के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के चलते सेफ-हेवन के रूप में डॉलर की मांग बनी हुई है।

## वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में डॉलर का ढांचा और इतिहास
अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा है, लेकिन इसके साथ ही यह दुनिया के कई अन्य देशों में स्थानीय नोटों के साथ समानांतर रूप से चलन में रहने वाली वस्तुतः वास्तविक मुद्रा भी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यह सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार के 88 प्रतिशत से अधिक हिस्से में अमेरिकी डॉलर शामिल रहता है, जिसका दैनिक लेन-देन औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर बैठता है।

ऐतिहासिक संदर्भ में देखें तो द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह लेते हुए दुनिया की शीर्ष आरक्षित मुद्रा का दर्जा हासिल किया था। अपने अधिकांश इतिहास में डॉलर की कीमत सोने से बंधी हुई थी, लेकिन 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के टूटने के साथ ही गोल्ड स्टैंडर्ड समाप्त हो गया और डॉलर एक मुक्त रूप से तैरती हुई वैश्विक फिएट मुद्रा बन गया।

## फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और डॉलर पर उसका प्रभाव
अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण अकेला कारक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक को मुख्य रूप से दो जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिनमें कीमतों में स्थिरता बनाए रखना यानी महंगाई को नियंत्रित करना और अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना शामिल है। इन दोनों प्राथमिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में समायोजन को अपने मुख्य हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता है।

जब वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं और महंगाई दर फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में इजाफा करता है। ऊंची ब्याज दरें अमेरिकी डॉलर के मूल्य को समर्थन देती हैं क्योंकि इससे डॉलर-आधारित संपत्तियों पर रिटर्न बढ़ता है। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत से नीचे गिर जाती है या बेरोजगारी दर बहुत अधिक हो जाती है, तो आर्थिक विकास को गति देने के लिए फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती का रास्ता चुनता है, जिससे डॉलर की कीमत पर नकारात्मक दबाव बनता है।

## क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का तंत्र
अत्यधिक आर्थिक संकट या असामान्य परिस्थितियों में फेडरल रिजर्व ब्याज दर में कटौती के अलावा अपरंपरागत तरीकों का भी सहारा ले सकता है। जब वित्तीय प्रणाली पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाती है और बैंकों द्वारा एक-दूसरे को ऋण देने से इनकार करने के कारण तरलता सूख जाती है, तब फेडरल रिजर्व अतिरिक्त डॉलर छापकर क्वांटिटेटिव ईजिंग (क्यूई) लागू करता है। यह एक ऐसा गैर-मानक कदम है जिसे तब उठाया जाता है जब महज ब्याज दरों में कमी करने से अर्थव्यवस्था में कर्ज का प्रवाह नहीं सुधर पाता।

साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के समय उपजे क्रेडिट क्रंच से निपटने के लिए फेडरल रिजर्व ने इसी हथियार का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था। क्वांटिटेटिव ईजिंग की प्रक्रिया में फेडरल रिजर्व नए डॉलर बनाता है और उनका उपयोग मुख्य रूप से वित्तीय संस्थानों से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदने के लिए करता है। बाजार में भारी मात्रा में मुद्रा की आपूर्ति बढ़ने के कारण क्वांटिटेटिव ईजिंग से आमतौर पर अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है।

इसके ठीक उलट प्रक्रिया को क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (क्यूटी) कहा जाता है। इसमें फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से नए बॉन्ड खरीदना पूरी तरह बंद कर देता है और अपने पास मौजूद जिन बॉन्डों की परिपक्वता अवधि पूरी हो जाती है, उनसे प्राप्त मूलधन को नए बॉन्ड में फिर से निवेश नहीं करता। इससे वित्तीय प्रणाली में डॉलर की कुल मात्रा कम होती है, जो सामान्य तौर पर अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर को मजबूत बनाने में मददगार साबित होता है।

## यूरो, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और सोने के बाजार का ताजा हाल
मुद्रा बाजार के अन्य प्रमुख जोड़ों में भी डॉलर की मजबूती का सीधा असर देखा गया है। यूरो/यूएसडी गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 तक लुढ़क गई, जो जनवरी में दर्ज 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यूरो में आई यह भारी गिरावट अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और यूरोप में ऊर्जा की ऊंची कीमतों से उपजी चिंताओं के साझा असर का नतीजा है। हालांकि यूरो क्षेत्र में मुद्रास्फीति के किसी नए झटके से यूरो को थोड़ी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।

उधर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (एयूडी/यूएसडी) जोड़ी दो महीने के निचले स्तर के करीब स्थिर होती दिखी और एशियाई कारोबारी सत्र में 0.6900 के मध्य स्तर के पास कारोबार करती रही। ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष अगस्त में तेजी से घटकर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, हालांकि इस आंकड़े का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर बहुत सीमित असर पड़ा। अमेरिका के कोर पीसीई आंकड़ों ने अक्टूबर में फेड द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी के दावों को कुछ धीमा जरूर किया, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों के चलते उपजने वाली महंगाई की आशंकाओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊंचा बनाए रखा है।

कमोडिटी बाजार में सोने की चाल भी अमेरिकी मुद्रा और बॉन्ड यील्ड के दबाव में नजर आई। नरम अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों के चलते सोना पिछले कारोबारी सत्र में 4,220 डॉलर के स्तर तक उछला था, जहां से मुनाफावसूली देखने को मिली। गुरुवार के एशियाई सत्र में 4,139 डॉलर के दायरे में निचले स्तरों पर खरीदारी आने से इसमें स्थिरता आई, लेकिन अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे बने रहने और डॉलर के मजबूत रुख के कारण बिना ब्याज देने वाली इस पीली धातु की किसी बड़ी बढ़त पर रुकावट बनी हुई है। वहीं डिजिटल परिसंपत्तियों में हाइपरलिक्विड (एचवाईपीई) का टोकन 2 प्रतिशत गिरकर कारोबार करता दिखा और इसने पिछले दिन की 5 प्रतिशत बढ़त का एक हिस्सा गंवा दिया। बुधवार को 5 मिलियन डॉलर के संस्थागत बहिर्वाह के बाद तकनीकी रूप से इस परिसंपत्ति की कीमत 90 डॉलर के नीचे सीमित बनी हुई है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती और ऊंचे स्तरों पर बनी बॉन्ड यील्ड से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विदेश यात्रा और जिंसों की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है।

- **भारत में:** डॉलर मजबूत रहने से भारतीय आयातकों के लिए कच्चा तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदना अधिक महंगा हो जाता है। इसके चलते घरेलू स्तर पर ईंधन और आयातित वस्तुओं की खुदरा कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना रह सकता है।
- **वैश्विक स्तर पर:** दुनिया भर में मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव बढ़ने से निर्यात और विदेशी पर्यटन का बजट प्रभावित होता है। यदि आप विदेश यात्रा या विदेशी विश्वविद्यालयों की फीस जमा करने की योजना बना रहे हैं, तो डॉलर आधारित भुगतान में अधिक स्थानीय मुद्रा खर्च करनी पड़ सकती है।
- **सोने के निवेशकों के लिए:** मजबूत डॉलर और ऊंची अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के कारण सर्राफा बाजार में सोने की बढ़त पर दबाव देखा जा रहा है। निवेशक मौजूदा स्तरों पर नई खरीदारी से पहले अमेरिकी रोजगार और मुद्रास्फीति के अगले आंकड़ों की प्रतीक्षा कर सकते हैं।
- **मुद्रा कारोबारियों के लिए:** यूरो/यूएसडी और यूएसडी/जेपीवाई जैसे प्रमुख जोड़ों में तेज उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। व्यापारियों को सख्त स्टॉप-लॉस सीमाओं के साथ जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी डॉलर में यह मजबूती बेहतर आर्थिक प्रदर्शन, सुरक्षित निवेश की मांग और कच्चे तेल से जुड़ी मुद्रास्फीति की चिंताओं के मेल से संभव हुई है।

- **आर्थिक आंकड़ों में सुधार:** अमेरिका में निजी क्षेत्र के रोजगार में 90 हजार की बढ़ोतरी और दूसरी तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर के 2.2 प्रतिशत तक संशोधित होने से अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंकाएं घटी हैं। इन सकारात्मक आंकड़ों ने निवेशकों को अमेरिकी संपत्तियों में बने रहने का ठोस आधार दिया।
- **मुद्रास्फीति और तेल की कीमतें:** हालांकि अगस्त का कोर पीसीई सूचकांक 3 प्रतिशत पर उम्मीद से थोड़ा कम रहा, लेकिन कच्चे तेल के ऊंचे भाव ने भविष्य में महंगाई बढ़ने की आशंकाओं को हवा दी है। इस स्थिति ने अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड को बहु-वर्षीय उच्च स्तरों पर बनाए रखा है, जिससे डॉलर को सीधा सहारा मिला।
- **भू-राजनीतिक तनाव:** अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते गतिरोध ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता पैदा की है। संकट की स्थिति में वैश्विक निवेशक अमेरिकी डॉलर को एक सुरक्षित ठिकाना मानते हैं, जिसके कारण इसमें पूंजी प्रवाह बढ़ा है।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स वर्तमान में किस स्तर पर बना हुआ है?
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स शुरुआती उतार-चढ़ाव से उबरने के बाद गुरुवार सुबह 101.50 के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है।

### 2. सितंबर महीने में अमेरिका के निजी क्षेत्र में कितने रोजगार जुड़े?
एडीपी की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में अमेरिकी निजी क्षेत्र में 90 हजार रोजगार बढ़े, जो 70 हजार के अनुमान से अधिक हैं।

### 3. अमेरिकी जीडीपी वृद्धि दर का संशोधित आंकड़ा क्या रहा?
आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो ने दूसरी तिमाही की वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर को 1.5 प्रतिशत के पूर्व अनुमान से बढ़ाकर 2.2 प्रतिशत कर दिया।

### 4. अगस्त माह में कोर पीसीई मुद्रास्फीति दर कितनी दर्ज की गई?
अगस्त में फेडरल रिजर्व का पसंदीदा मुद्रास्फीति पैमाना कोर पीसीई वार्षिक आधार पर 3 प्रतिशत बढ़ा, जो 3.3 प्रतिशत के बाजार अनुमान से कम था।

### 5. बैंक ऑफ जापान की बैठक में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख सामने आया?
दस्तावेज के अनुसार कुछ सदस्यों ने अर्थव्यवस्था और कीमतों के रुख को देखते हुए ब्याज दरें बढ़ाने का समर्थन किया, जिसका लक्ष्य महंगाई को 2 प्रतिशत के पास रखना है।

### 6. यूरो/यूएसडी विनिमय दर में कितनी गिरावट दर्ज की गई?
यूरो गिरकर 1.1312 पर पहुंच गया, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है और यह जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है।

### 7. कमोडिटी बाजार में सोने के भाव किस स्तर पर रुके?
सोने की कीमतें एशियाई सत्र में 4,139 डॉलर प्रति औंस के आसपास संभलती दिखीं, जो पिछले सत्र के 4,220 डॉलर के स्तर से नीचे आई थीं।

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