# अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख से डॉलर इंडेक्स मजबूत, वैश्विक बाजारों में हलचल

> ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के संकेतों और नीतिगत सख्ती के बीच डॉलर इंडेक्स 100.50 के करीब पहुंच गया है, जबकि वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में दबाव देखा जा रहा है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-dollar-index-ke-sakhta-rukha-se-dollar-index-majabuta-vaishvika-bajaron-men-halachala-36295 · **Language:** Hindi
**Tags:** डॉलर इंडेक्स, फेडरल रिजर्व, ब्याज दरें, मुद्रा बाजार, अमेरिकी अर्थव्यवस्था, कच्चा तेल, सोना, वित्त

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती लगातार बढ़ती जा रही है। मंगलवार के कारोबारी सत्र के दौरान छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर के मूल्य को मापने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) 100.45 के स्तर के आसपास कारोबार करता हुआ देखा गया। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा हाल ही में ब्याज दरों में की गई वृद्धि और चालू वर्ष के अंत से पहले नीतिगत दरों में और बढ़ोतरी के संकेतों ने डॉलर को यह अतिरिक्त ताकत प्रदान की है। इसके साथ ही भू-राजनीतिक मोर्चे पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान संभावित कूटनीतिक वार्ताओं पर भी वित्तीय बाजारों की पैनी नजर बनी हुई है।

## फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती और ब्याज दरों में बढ़ोतरी
अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने पिछले हफ्ते अपनी मानक ब्याज दर में सर्वसम्मति से 25 आधार अंकों (bps) की वृद्धि की, जिससे लक्ष्य सीमा बढ़कर 3.75% से 4.00% तक पहुंच गई। पिछले तीन वर्षों की अवधि में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में की गई यह पहली बढ़ोतरी मानी जा रही है। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सख्त टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि मुद्रास्फीति बहुत अधिक बनी हुई है और लंबे समय से उच्च स्तर पर टिकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नीति निर्माताओं को यह आश्वस्त होना होगा कि अंतर्निहित मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के निर्धारित लक्ष्य की ओर स्पष्ट रूप से और पर्याप्त गति से आगे बढ़ रही है।

सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, डेरिवेटिव और मुद्रा व्यापारी अब फेड की अक्टूबर बैठक में ब्याज दरों में कम से कम 25 आधार अंकों की एक और बढ़ोतरी की संभावना 56.5% मान रहे हैं। यह संभावना केवल एक सप्ताह पहले के 43.5% के स्तर से उल्लेखनीय रूप से अधिक है। केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के सख्त बयानों ने बाजार में यह भरोसा मजबूत किया है कि मुद्रास्फीति पर पूरी तरह काबू पाने से पहले उधारी लागत में राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।

## मुसालेम का वक्तव्य और फेड भावना सूचकांक का रुख
नीति निर्माता मुसालेम के हालिया भाषण ने केंद्रीय बैंक के आक्रामक तेवर को और स्पष्ट किया है। उनके वक्तव्य को एफएक्सएस स्पीचट्रैकर पर 8/10 का स्कोर दिया गया, जो 7.4/10 के ऐतिहासिक औसत से ऊपर है और स्थापित आधार रेखा की तुलना में अधिक सख्त रुख का संकेत देता है। मुसालेम ने चेतावनी दी कि अतिरिक्त नीतिगत संयम के बिना मुद्रास्फीति अगले 18 महीनों में 2% के आधिकारिक लक्ष्य से काफी ऊपर रहने की संभावना है। कोर मुद्रास्फीति का दबाव अभी भी लगभग 3% पर अत्यधिक बना हुआ है और कई व्यवसाय अपनी कीमतें 3% के करीब बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

मुसालेम ने मांग और आपूर्ति दोनों से प्रेरित मूल्य वृद्धि का मुकाबला करने के लिए शुरुआती और चरणबद्ध ब्याज दर बढ़ोतरी का समर्थन किया। उन्होंने तेल के अलावा अन्य व्यापक कमोडिटी झटकों के जोखिम को भी रेखांकित किया। उनके अनुसार अमेरिकी श्रम बाजार पूर्ण रोजगार के करीब है, लेकिन यह मुद्रास्फीति के दबाव का मुख्य स्रोत नहीं है। इसका तात्पर्य यह है कि केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति रोजगार बाजार को ठंडा करने के बजाय लगातार बनी हुई मूल्य वृद्धि की गतिशीलता पर पूरी तरह केंद्रित है। इसी पृष्ठभूमि में एफएक्सएस फेड सेंटीमेंट इंडेक्स 0.42 अंक बढ़कर 149.96 पर पहुंच गया, जो तटस्थ 100 के स्तर से काफी ऊपर है और यह दर्शाता है कि फेडरल रिजर्व का रुख लगातार सख्त बना हुआ है।

## तकनीकी चार्ट पर डॉलर इंडेक्स की स्थिति
दैनिक तकनीकी चार्ट पर डॉलर इंडेक्स का निकट अवधि का रुझान सकारात्मक और तेजी का बना हुआ है। इंडेक्स की कीमत 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) और बोलिंगर मध्य बैंड से ऊपर टिकी हुई है, जिससे हालिया सुधार को मजबूत तकनीकी समर्थन मिल रहा है। चार्ट पर बोलिंगर का ऊपरी बैंड निकटतम प्रतिरोध स्तर का काम कर रहा है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI(14) लगभग 65 के स्तर पर है, जो अत्यधिक खरीदारी की स्थिति में पहुंचे बिना ठोस सकारात्मक गति को दर्शाता है।

लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, यूएस डॉलर इंडेक्स 100.61 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 100.43 के बंद स्तर से 0.18% की बढ़त दिखाता है। तकनीकी संकेतकों में 20-दिवसीय ईएमए 99.75, 50-दिवसीय ईएमए 99.79 और 200-दिवसीय ईएमए 99.32 के स्तर पर स्थित हैं, जहां 50-दिवसीय और 200-दिवसीय ईएमए के बीच बना गोल्डन क्रॉस लंबी अवधि के अपट्रेंड की पुष्टि करता है। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड की सीमा 98.42 से 100.63 के बीच है, जिसमें मध्य रेखा 99.52 पर है। इंडेक्स के लिए पहला प्रतिरोध 100.70 (R1) और अगला स्तर 100.80 (R2) पर है, जबकि तात्कालिक समर्थन 100.42 (S1) और 100.23 (S2) पर स्थित है। 100.60 से ऊपर एक निर्णायक ब्रेकआउट आगे की तेजी का मार्ग प्रशस्त करेगा।

## वैश्विक कूटनीति और संयुक्त राष्ट्र महासभा में वार्ता
मुद्रा बाजार के व्यापारी संयुक्त राष्ट्र महासभा में संभावित अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली वार्ताओं पर भी करीबी नजर रख रहे हैं। ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान कर रहे हैं, जो न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सत्र में भाग लेने पहुंचे हैं। मध्य पूर्व में तनाव कम करने और राजनयिक समाधान तलाशने की उम्मीदों के बीच यह बैठक काफी संवेदनशील मानी जा रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि वह महासभा के दौरान पेजेशकियान से मिलने के लिए संभवतः तैयार हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति के कोई संकेत मिलते हैं, तो इससे वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने की भावना में सुधार हो सकता है। यह स्थिति सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग को कुछ हद तक सीमित कर सकती है और इंडेक्स पर हल्का दबाव बना सकती है।

## डॉलर का वैश्विक वर्चस्व और केंद्रीय बैंक की नीतियां
अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य देशों में स्थानीय नोटों के समानांतर व्यावहारिक मुद्रा के रूप में स्वीकार की जाती है। यह विश्व की सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्रा है, जो वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार के 88% से अधिक हिस्से के लिए जिम्मेदार है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार इसमें प्रतिदिन औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर के वित्तीय लेनदेन होते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्रा का स्थान लिया। अपने इतिहास के अधिकांश समय में डॉलर स्वर्ण समर्थित था, जब तक कि 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के बाद गोल्ड स्टैंडर्ड समाप्त नहीं हो गया।

अमेरिकी डॉलर के मूल्य को तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। फेड के पास दो प्रमुख अधिदेश हैं: कीमतों में स्थिरता बनाए रखना यानी मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में समायोजन करता है। जब मुद्रास्फीति 2% के लक्ष्य से अधिक हो जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति नीचे गिरती है या बेरोजगारी दर बहुत अधिक हो जाती है, तो ब्याज दरों में कटौती की जाती है, जिससे डॉलर का मूल्य घटता है।

गंभीर वित्तीय संकटों के दौरान फेडरल रिजर्व परिमाणात्मक सहजता (Quantitative Easing या QE) लागू करता है, जिसके तहत अतिरिक्त डॉलर जारी करके वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड खरीदे जाते हैं ताकि नकदी का प्रवाह बढ़ाया जा सके। 2008 के वित्तीय संकट में इस नीति का व्यापक उपयोग हुआ था, जो आमतौर पर डॉलर को कमजोर करता है। इसके विपरीत परिमाणात्मक सख्ती (Quantitative Tightening या QT) में बॉन्ड की पुनर्खरीद रोक दी जाती है, जिससे डॉलर को आम तौर पर समर्थन प्राप्त होता है।

## अन्य प्रमुख मुद्राओं और कमोडिटीज पर असर
डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बैंकों के नीतिगत निर्णयों का असर अन्य अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) एशियाई सत्र के दौरान 0.7100 के ऊपर पहुंच गया। रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक की सख्त टिप्पणियों ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा दिया। हालांकि फेड के कड़े रुख और मध्य पूर्व के तनाव ने डॉलर को मजबूत बनाए रखा, जिससे इस जोड़ी की बढ़त सीमित रह सकती है। इसके अलावा इस सप्ताह के अंत में होने वाले ट्रंप और शी के महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन पर भी नजरें टिकी हुई हैं।

जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) 157.50 के आसपास मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित मुद्रा बाजार हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन की गिरावट को कुछ हद तक थामा है। हालांकि बैंक ऑफ़ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया, जो 31 वर्षों का उच्चतम स्तर है। नीति के सामान्यीकरण की दिशा में यह कदम पहले से अपेक्षित था, लेकिन मौद्रिक रुख तुलनात्मक रूप से नरम रहने के कारण येन पर दबाव बना रहा।

कमोडिटी बाजार में सोने पर बिकवाली का दबाव देखा गया। एशियाई सत्र में मामूली बढ़त के बाद सोना 4,350 डॉलर प्रति औंस से नीचे फिसल गया। बिना ब्याज देने वाली पीली धातु के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख एक प्रमुख नकारात्मक कारक साबित हो रहा है। दूसरी ओर, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑयल ने चार दिनों की गिरावट के सिलसिले को तोड़ा और पिछले दिन के 91.00 डॉलर से नीचे के दो सप्ताह के निचले स्तर से उबरते हुए 93.00 डॉलर के पास कारोबार किया। दिन के दौरान इसमें लगभग 1.40% की बढ़त दर्ज की गई, क्योंकि निवेशक मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर सतर्क नजर बनाए हुए हैं।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी और मजबूत डॉलर का सीधा असर वैश्विक पूंजी प्रवाह, आयात लागत और घरेलू मुद्रा पर पड़ता है।

- **भारत में:** डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और आयातित कच्चा तेल महंगा हो सकता है। इससे घरेलू बाजार में परिवहन लागत और आयातित उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का जोखिम रहता है।
- **वैश्विक बाजारों में:** अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स बढ़ने से उभरते बाजारों से विदेशी संस्थागत पूंजी निकासी की गति तेज हो सकती है। निवेशकों को अपने विदेशी निवेश और इक्विटी पोर्टफोलियो के जोखिम प्रबंधन पर अतिरिक्त ध्यान देना चाहिए।
- **कमोडिटी खरीदारों के लिए:** सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों पर दबाव बना रह सकता है, जबकि कच्चे तेल में आपूर्ति चिंताओं से उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। ऊर्जा आयातक देशों और आभूषण खरीदारों को कीमतों में तेज बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
- **मुद्रा कारोबारियों के लिए:** प्रमुख मुद्राओं जैसे येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में अस्थिरता बढ़ेगी, जबकि डॉलर इंडेक्स 100.60 के प्रतिरोध के करीब कारोबार कर रहा है। फॉरेक्स ट्रेडर्स को सख्त स्टॉप-लॉस सीमाओं के साथ पोजिशन प्रबंधित करने की सलाह दी जाती है।

## ऐसा क्यों हुआ
डॉलर इंडेक्स में हालिया उछाल फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख, लगातार बनी हुई मुद्रास्फीति और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के संयुक्त प्रभाव से संचालित हुआ है।

- **फेडरल रिजर्व की नीतिगत दर वृद्धि:** अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए अपनी मानक दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75%-4.00% कर दिया, जो तीन साल में पहली दर वृद्धि है। फेड अधिकारियों ने संकेत दिया है कि 2% लक्ष्य की दिशा में प्रगति धीमी होने पर आगे भी दरें बढ़ाई जा सकती हैं।
- **जिद्दी कोर मुद्रास्फीति का दबाव:** कोर मूल्य दबाव लगभग 3% के उच्च स्तर पर बना हुआ है और कंपनियां आगामी महीनों में कीमतों में वृद्धि की योजना बना रही हैं। मांग और व्यापक कमोडिटी झटकों के चलते केंद्रीय बैंक को लंबे समय तक मौद्रिक सख्ती बनाए रखनी पड़ रही है।
- **वैश्विक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश मांग:** मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और संयुक्त राष्ट्र में संभावित वार्ताओं को लेकर अनिश्चितता ने सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की वैश्विक मांग को मजबूत बनाए रखा है।

## सवाल-जवाब

### 1. डॉलर इंडेक्स (DXY) किस स्तर पर कारोबार कर रहा है?
डॉलर इंडेक्स मंगलवार को यूरोपीय सत्र में लगभग 100.45 के स्तर के पास कारोबार कर रहा था, जबकि लाइव आंकड़ों में यह 100.61 पर देखा गया।

### 2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है?
फेडरल रिजर्व ने अपनी मानक उधारी दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75% से 4.00% की लक्ष्य सीमा में कर दिया है, जो पिछले तीन वर्षों में पहली बढ़ोतरी है।

### 3. फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श ने मुद्रास्फीति पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति बहुत अधिक है और लंबे समय से उच्च बनी हुई है, तथा इसे लक्ष्य तक लाने के लिए केंद्रीय बैंक का आश्वस्त होना आवश्यक है।

### 4. अक्टूबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की क्या संभावना है?
सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, व्यापारी अक्टूबर में कम से कम 25 आधार अंकों की दर वृद्धि की लगभग 56.5% संभावना मान रहे हैं।

### 5. बैंक ऑफ़ जापान (BoJ) ने क्या नीतिगत निर्णय लिया?
बैंक ऑफ़ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया, जो 31 साल का उच्चतम स्तर है।

### 6. इस माहौल में सोने और कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा?
सोना फिसलकर 4,350 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया, जबकि WTI कच्चा तेल लगभग 1.40% चढ़कर 93.00 डॉलर के करीब पहुंच गया।

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