अमरीकी डॉलर इंडेक्स में बढ़त की रफ्तार थमी, 101.70 के चैनल सपोर्ट पर टिकी नजरें अमरीकी डॉलर इंडेक्स 101.70 के अहम चैनल सपोर्ट के पास कारोबार कर रहा है, जहाँ 101.98 के 9-दिवसीय ईएमए से रेजिस्टेंस मिल रहा है और फेडरल रिजर्व की नीतियों पर बाजार की नजरें टिकी हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमरीकी डॉलर इंडेक्स मंगलवार को सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा और बढ़त बनाने के बाद 101.80 के करीब फिसल गया। वैश्विक स्तर पर छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत मापने वाला यह इंडेक्स एक ओर 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी ईएमए के ऊपर अपनी स्थिति मजबूत बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर नौ-दिवसीय ईएमए इसके लिए एक तात्कालिक रुकावट बना हुआ है। तकनीकी चार्ट्स पर डॉलर इंडेक्स अपने असेंडिंग चैनल के निचले स्तर का परीक्षण कर रहा है, जिससे ट्रेडर इस बात को लेकर सतर्क हैं कि क्या यहाँ से कोई नया उछाल देखने को मिलेगा या फिर सपोर्ट टूटने पर गिरावट गहराएगी। तकनीकी संकेतकों का मिजाज और अहम स्तर दैनिक चार्ट पर डॉलर इंडेक्स की स्थिति को देखें तो यह फिलहाल असेंडिंग चैनल पैटर्न के निचले दायरे का परीक्षण कर रहा है। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार यह स्तर बेहद संवेदनशील मोड़ पर है। यदि यहाँ से ट्रेंडलाइन सपोर्ट का सहारा मिलता है, तो डॉलर में एक बार फिर तेजी की वापसी हो सकती है और अपट्रेंड बहाल हो सकता है। इसके विपरीत, यदि विक्रेता इस स्तर को तोड़ने में सफल रहते हैं, तो एक तेज बेयरिश ब्रेकडाउन का जोखिम खड़ा हो जाएगा। तात्कालिक तौर पर इंडेक्स को 101.70 के आसपास असेंडिंग चैनल की निचली सीमा पर मजबूत सहारा मिल रहा है। यदि यह सपोर्ट स्तर टूटता है, तो अगला बड़ा सहारा 100.94 पर स्थित 50-दिवसीय ईएमए होगा। लाइव तकनीकी आँकड़ों के मुताबिक 20-दिवसीय ईएमए 101.68 और 50-दिवसीय ईएमए 100.99 पर मौजूद है, जबकि 200-दिवसीय ईएमए 99.75 के स्तर पर है। लंबी अवधि में 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से ऊपर होना गोल्डन क्रॉस की पुष्टि करता है, जो दीर्घकालिक अपट्रेंड को दर्शाता है। हालांकि, यदि मंदी का दबाव बढ़ता है और 50-दिवसीय ईएमए का दायरा भी टूट जाता है, तो 20 अगस्त को दर्ज किया गया पाँच महीने का निचला स्तर 98.56 फिर से परीक्षण के दायरे में आ सकता है। ऊपर की ओर, किसी भी संभावित उछाल को 101.98 पर स्थित नौ-दिवसीय ईएमए पर तत्काल रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है। यदि इंडेक्स इस शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज को पार कर जाता है, तो खरीदारों का भरोसा मजबूत होगा। इसके बाद डॉलर इंडेक्स 14 अक्टूबर को छुए गए 18 महीने के उच्चतम स्तर 102.94 की ओर बढ़ सकता है। इस स्तर के पार जाने पर अगला बड़ा तकनीकी लक्ष्य असेंडिंग वेज की ऊपरी सीमा 103.90 के आसपास आंका गया है। इसके अलावा 20-दिवसीय बॉलिंजर बैंड्स 101.03 से 102.73 के दायरे में बने हुए हैं, जिससे स्पष्ट है कि मौजूदा कीमतें इस समय अपने सामान्य तकनीकी दायरे के भीतर ही झूल रही हैं। आरएसआई और तकनीकी मोमेंटम का विश्लेषण मोमेंटम इंडिकेटर्स की बात करें तो 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 55 के आसपास बना हुआ है। आरएसआई का यह स्तर दर्शाता है कि बाजार में मोमेंटम स्थिर है और डॉलर इंडेक्स अभी ओवरबॉट या अत्यधिक खरीद के दायरे में नहीं पहुँचा है। यह स्थिति खरीदारों को संभलने का मौका देती है, लेकिन आक्रामक तेजी के लिए अतिरिक्त उत्प्रेरक की आवश्यकता जताती है। वहीं अन्य संकेतकों में मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी एमएसीडी 0.41 पर है जबकि इसका सिग्नल स्तर 0.52 है, जिसका हिस्टोग्राम -0.12 पर बेयरिश संकेत दे रहा है। 14-दिवसीय एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स यानी एडीएक्स 41 पर स्थित है, जो बाजार में एक मजबूत ट्रेंडिंग स्थिति की पुष्टि करता है। स्टोकेस्टिक संकेतक पर फास्ट लाइन 19 और सिग्नल लाइन 29 पर नजर आ रही है। इसके साथ ही 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज यानी एटीआर 0.47 के आसपास दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है, जिसे ट्रेडर अपने स्टॉप-लॉस बफर के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। वर्तमान में मुख्य पिवट 101.79 पर है, जहाँ ऊपर की ओर 101.81 और 101.84 पर रेजिस्टेंस तथा नीचे 101.76 और 101.74 पर तात्कालिक सपोर्ट स्तर मौजूद हैं। फेडरल रिजर्व की नीति और नीतिगत बयानों का असर अमरीकी डॉलर की दिशा तय करने में नीतिगत उम्मीदों की भूमिका सबसे अहम बनी हुई है। फेड सेंटीमेंट इंडेक्स के 127.51 के करीब आने से संकेत मिलता है कि व्यापक मौद्रिक नीतिगत उम्मीदें अब डॉलर को बहुत आक्रामक समर्थन नहीं दे रही हैं, जिससे ऊपरी स्तरों पर दबाव बना हुआ है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉर्श के हालिया संबोधन को स्पीच ट्रैकर पर 5.6/10 का स्कोर दिया गया है, जो 6.1/10 के ऐतिहासिक औसत की तुलना में कुछ नरम रुख को दर्शाता है। स्ट्रक्चरल ग्रोथ और निवेश में उछाल पर उनकी सकारात्मक टिप्पणियों के बावजूद उनके स्वर में सतर्कता साफ महसूस की गई। उन्होंने स्वीकार किया कि वैश्विक वित्तीय संकट के गहरे असर अभी भी जेहन में हैं, जिससे यह साफ होता है कि नीति निर्माता जोखिमों को लेकर बेहद सजग हैं। मूल्य स्थिरता पर दिए गए जोर और आगामी अक्टूबर तथा दिसंबर की महत्वपूर्ण बैठकों के बावजूद यह रुख बहुत सख्त यानी हॉकिश नजर नहीं आता। चेयरमैन वॉर्श ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई को माँग पक्ष को गति देने वाले एक कारक के रूप में देखा और साथ ही वित्तीय स्थिरता से जुड़े जोखिमों पर भी बात की। इससे यह संदेश मिलता है कि केंद्रीय बैंक बुनियादी आर्थिक आशावाद का स्वागत तो करता है, लेकिन वह वर्ष 2026 की शेष अवधि के लिए किसी निश्चित नीतिगत रास्ते पर पहले से प्रतिबद्ध होने को तैयार नहीं है। वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में अमरीकी डॉलर की भूमिका अमरीकी डॉलर संयुक्त राज्य अमरीका की आधिकारिक मुद्रा है और दुनिया के कई देशों में यह स्थानीय मुद्रा के साथ समानांतर रूप से स्वीकार की जाती है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार के कुल कारोबार में डॉलर की हिस्सेदारी 88 प्रतिशत से अधिक है, जो प्रतिदिन औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर के लेन-देन को दर्शाती है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा का स्थान लिया था। अपने इतिहास के अधिकांश हिस्से में डॉलर सोने के समर्थन पर आधारित था, लेकिन 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के टूटने के साथ ही गोल्ड स्टैंडर्ड समाप्त हो गया। आज डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। फेडरल रिजर्व के दो मुख्य लक्ष्य हैं: मूल्य स्थिरता बनाए रखना यानी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना और पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना। इन लक्ष्यों को पाने के लिए ब्याज दरों में बदलाव केंद्रीय बैंक का मुख्य हथियार होता है। जब मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, जिससे आम तौर पर डॉलर मजबूत होता है। इसके विपरीत, जब महंगाई दर 2 प्रतिशत से नीचे गिरती है या बेरोजगारी बढ़ती है, तो ब्याज दरों में कटौती की जाती है, जिसका डॉलर पर नकारात्मक असर पड़ता है। संकट के दौर में केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी क्यूई का सहारा लेता है, जिसमें नए डॉलर बनाकर वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड खरीदे जाते हैं, जिससे डॉलर कमजोर होता है। वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी के तहत बॉन्ड खरीद बंद की जाती है, जो डॉलर के लिए सकारात्मक मानी जाती है। क्रॉस करेंसी और अन्य वित्तीय बाजारों की चाल डॉलर में जारी उतार-चढ़ाव का सीधा असर दुनिया भर के अन्य प्रमुख करेंसी पेयर्स और कमोडिटीज पर भी देखने को मिल रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमरीकी डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी 0.7000 की ओर मजबूत होता दिखा, जिसे बेहतर बाजार धारणा और डॉलर की तेजी पर लगे ब्रेक से सहारा मिला। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और आगामी एआई टेक नतीजों को लेकर बनी सतर्कता इस तेजी को सीमित कर सकती है। दूसरी तरफ, अमरीकी डॉलर बनाम जापानी येन यानी यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र में 158.50 के स्तर के आसपास स्थिर रहा। निवेशक शुक्रवार को आने वाले जापान के नेशनल कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी सीपीआई मुद्रास्फीति आंकड़ों से पहले किसी बड़े दांव से बचते दिखे। अमरीकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में मजबूती ने इस जोड़ी में डॉलर को सहारा दिया। कमोडिटी बाजार में सोने की कीमत यूरोपीय कारोबार के दौरान फिसलकर 4,120 डॉलर के करीब आ गई। अमरीकी बॉन्ड यील्ड में सुधार और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण बहुमूल्य धातु पर बिकवाली का दबाव देखा गया। 10-वर्षीय अमरीकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह 5.13 प्रतिशत के करीब आ गई, हालांकि सोमवार को इसमें 1.2 प्रतिशत की बढ़त रही थी। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में नियर प्रोटोकॉल की कीमत में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि बिटवाइज़ के नियर-केंद्रित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ईटीएफ में सोमवार को 5 मिलियन डॉलर से अधिक का संस्थागत प्रवाह दर्ज किया गया। इसका आप पर असर अमरीकी डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव और 101.70 के सपोर्ट स्तर पर टिकने से आयात-निर्यात लागत, यात्रा और कमोडिटी की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। • भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: डॉलर की मजबूती या नरमी से भारतीय रुपये की विनिमय दर सीधे तौर पर प्रभावित होती है। यदि डॉलर में कमजोरी आती है तो भारत के लिए कच्चे तेल और अन्य आयातित वस्तुओं का बिल कम हो सकता है। • सोना और निवेश पोर्टफोलियो: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने के भाव डॉलर की चाल और बॉन्ड यील्ड के विपरीत दिशा में चलते हैं। डॉलर में किसी भी बड़े ब्रेकडाउन से सोने की कीमतों में घरेलू स्तर पर नया उछाल देखने को मिल सकता है। • विदेशी शिक्षा और यात्रा: विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और यात्रा करने वालों के लिए डॉलर की दर बेहद अहम है। डॉलर की मौजूदा स्थिरता से विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में तात्कालिक राहत मिल सकती है। • आईटी और निर्यात कंपनियाँ: भारतीय निर्यातकों और आईटी सेवा प्रदाताओं की आय सीधे डॉलर की मजबूती से जुड़ी होती है। डॉलर इंडेक्स में 101.70 से नीचे ब्रेकडाउन होने पर इन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ अमरीकी डॉलर इंडेक्स में यह सुस्ती तकनीकी प्रतिरोध स्तरों और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता के कारण आई है। प्रमुख नीतिगत बैठकों से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। • तकनीकी रेजिस्टेंस का दबाव: दैनिक चार्ट पर 101.98 पर स्थित 9-दिवसीय ईएमए इंडेक्स के लिए तात्कालिक बाधा बना हुआ है। खरीदारों द्वारा इस स्तर को पार करने में असमर्थ रहने से कीमतों में सुस्ती दर्ज की गई। • फेडरल रिजर्व का सतर्क रुख: फेड चेयर वॉर्श के हालिया बयानों में आर्थिक विकास की तारीफ के बावजूद वित्तीय संकट के पुराने अनुभवों का हवाला दिया गया। इस सतर्क रुख से आक्रामक नीतिगत सख्ती की उम्मीदें कमजोर हुई हैं। • आगामी नीतिगत बैठकें: बाजार प्रतिभागी अक्टूबर और दिसंबर की आगामी केंद्रीय बैंक बैठकों के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। नीतिगत मार्ग को लेकर स्पष्ट प्रतिबद्धता न होने से डॉलर पर ऊपरी स्तरों पर बिकवाली देखी जा रही है। सवाल-जवाब 1. अमरीकी डॉलर इंडेक्स के लिए मौजूदा सपोर्ट स्तर क्या है? डॉलर इंडेक्स के लिए तात्कालिक सपोर्ट 101.70 के पास असेंडिंग चैनल की निचली सीमा पर है, जिसके बाद 100.94 पर 50-दिवसीय ईएमए स्थित है। 2. इंडेक्स के लिए ऊपर की ओर मुख्य रेजिस्टेंस स्तर कौन सा है? ऊपर की ओर पहला बड़ा रेजिस्टेंस 101.98 पर स्थित 9-दिवसीय ईएमए है, जिसे पार करने पर इंडेक्स 102.94 की ओर बढ़ सकता है। 3. 14-दिवसीय आरएसआई इंडेक्स के बारे में क्या संकेत दे रहा है? 14-दिवसीय आरएसआई 55 के आसपास है, जो स्थिर मोमेंटम को दर्शाता है और यह बताता है कि बाजार अभी ओवरबॉट नहीं है। 4. फेडरल रिजर्व के रुख का डॉलर पर क्या असर पड़ रहा है? फेड चेयर के सतर्क बयानों और नीतिगत रुख को लेकर अनिश्चितता के चलते डॉलर में आक्रामक तेजी की संभावना सीमित हो गई है। https://trendkia.com/market/us-dollar-index-men-barhata-ki-raphtara-thami-101-70-ke-chainala-saporta-para-tiki-najaren-49975 TrendKia — Har trend, sabse pehle.