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  "type": "article",
  "title": "वैश्विक तनाव के बीच डॉलर इंडेक्स में जोरदार तेजी, 102.30 के स्तर के पास पहुंचा",
  "summary": "मध्य पूर्व संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 102.30 के स्तर के पास पहुंच गया है, जो अप्रैल 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं और सुरक्षित निवेश मांग ने ग्रीनबैक को मजबूत सहारा दिया है।",
  "content": "सोमवार को नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत के साथ ही अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में आक्रामक खरीदारी देखने को मिली, जिसके चलते यह अप्रैल 2025 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की बास्केट के मुकाबले डॉलर का मूल्यांकन करने वाला यह सूचकांक यूरोपीय सत्र के शुरुआती घंटों में 102.30 के स्तर के करीब टिका रहा, जिसमें दिन के दौरान लगभग 0.35 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। शुक्रवार को कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के कारण आई हल्की गिरावट को पीछे छोड़ते हुए डॉलर ने जबरदस्त वापसी की है। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, डॉलर इंडेक्स 102.22 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 101.93 के बंद स्तर के मुकाबले 0.29 प्रतिशत की तेजी दर्शाता है, जबकि इसका 52 हफ्तों का दायरा 95.55 से 102.54 के बीच रहा है।\n\nभू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर को मजबूती\nवैश्विक वित्तीय बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव गहराने से सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग में भारी उछाल आया है। मध्य पूर्व में तनाव और रूस-यूक्रेन के बीच बढ़ते युद्ध ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों को सतर्क कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बयान दिया कि अमेरिका के साथ टकराव का कोई सैन्य समाधान नहीं है, हालांकि तेहरान दोबारा युद्ध में उतरने के लिए तैयार है। इसके साथ ही, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को खोला नहीं जाएगा। मध्य पूर्व के इस सामरिक जलमार्ग पर तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी जोखिम बढ़ा दिए हैं।\n\nइसी बीच यमन की प्रशासनिक परिषद के प्रमुख रशाद अल-अलिमी ने देश में हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले शेष क्षेत्रों को वापस लेने के लिए सैन्य अभियानों की घोषणा कर दी है। दूसरी तरफ, यूक्रेन ने रविवार को कीव क्षेत्र, खार्किव और निप्रो पर घातक रूसी हवाई हमलों की जानकारी दी। इस सैन्य हमले के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने संकल्प लिया कि रूस को निश्चित रूप से इसका जवाब भुगतना पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर एक साथ बढ़ रहे इन संघर्षों के कारण पूंजी बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिससे निवेशक डॉलर जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं।\n\nफेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और बाजार की उम्मीदें\nअमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और अक्टूबर में संभावित फेडरल रिजर्व दर वृद्धि को लेकर घटती उम्मीदों के बावजूद डॉलर के खरीदार बाजार में हावी बने हुए हैं। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज यानी CME Group के फेडवॉच टूल के आंकड़ों से पता चलता है कि वित्तीय बाजार के ट्रेडर अभी भी 85 प्रतिशत से अधिक संभावना मान रहे हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस वर्ष के अंत तक उधारी लागत में वृद्धि करेगा। बॉन्ड यील्ड के पीछे हटने के बावजूद दर वृद्धि की यह संभावना डॉलर को मजबूती प्रदान कर रही है।\n\nफेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के आगामी नीतिगत कदमों को लेकर दिशा-निर्देश हासिल करने के लिए बाजार सहभागियों की नजरें बुधवार को जारी होने वाले FOMC बैठक के विवरण पर टिकी हैं। ट्रेडर अल्पकालिक रणनीतियों के लिए अमेरिकी ISM सर्विसेज PMI आंकड़ों और प्रमुख फेडरल रिजर्व अधिकारियों के भाषणों का भी इंतजार कर रहे हैं। सेवा क्षेत्र के आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था के वास्तविक स्वास्थ्य को दर्शाएंगे, जिससे आने वाले महीनों में मौद्रिक सख्ती के फैसले प्रभावित हो सकते हैं।\n\nतकनीकी स्तर और चार्ट का विश्लेषण\nतकनीकी दृष्टिकोण से देखें तो पिछले सप्ताह 101.60 से 101.70 के क्षैतिज प्रतिरोध स्तर के ऊपर हुआ ब्रेकआउट डॉलर इंडेक्स के लिए एक बड़ा उत्प्रेरक साबित हुआ है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI 70 से ऊपर 74 के स्तर पर दर्ज किया गया है, जो ओवरबॉट क्षेत्र में होने का संकेत देता है। इसके बावजूद, तेजी की दिशा में गति पूरी तरह से खरीदारों के नियंत्रण में दिख रही है। 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 100.86, 50-दिवसीय EMA 100.32 और 200-दिवसीय EMA 99.48 पर स्थित है, जो एक मजबूत दीर्घकालिक अपट्रेंड और गोल्डन क्रॉस स्थिति को दर्शाते हैं।\n\nबोलिंजर बैंड्स (20,2) की सीमा 98.39 से 102.64 के बीच बनी हुई है और इसका मध्य स्तर 100.52 है, जिससे स्पष्ट है कि मौजूदा भाव बैंड के ऊपरी दायरे के अंदर सुरक्षित है। चार्ट पर 14-दिवसीय ADX सूचकांक 38 पर ट्रेंडिंग स्थिति दिखा रहा है, जबकि एमएसीडी 0.62 पर 0.44 की सिग्नल लाइन के ऊपर बना हुआ है, जिसका 0.19 का हिस्टोग्राम बुलिश मोमेंटम की पुष्टि करता है। स्टोकेस्टिक संकेतक की फास्ट लाइन 90 और सिग्नल लाइन 92 पर है, जबकि 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज यानी ATR 0.48 दर्ज की गई है। मुख्य स्तरों में पिवट 102.20 पर है, जिसमें निकटतम प्रतिरोध R1 102.55 और R2 102.88 पर स्थित हैं, वहीं समर्थन S1 101.87 और S2 101.52 पर देखा जा रहा है। यदि कोई सुधारात्मक गिरावट आती भी है, तो 101.60-101.70 का पूर्व प्रतिरोध अब एक मजबूत समर्थन के रूप में नए खरीदारों को आकर्षित कर सकता है।\n\nवैश्विक मुद्राओं और अन्य परिसंपत्तियों पर असर\nअमेरिकी डॉलर में आई मजबूती का सीधा असर अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और कमोडिटी बाजारों पर पड़ा है। सोमवार के कारोबार में यूरो के मुकाबले डॉलर सबसे अधिक मजबूत साबित हुआ। EUR/USD गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया है। यह जोड़ी बुधवार को 1.1312 के स्तर तक गिर चुकी थी और जनवरी के अपने 1.2082 के शिखर से काफी नीचे कारोबार कर रही है। ऊर्जा कीमतों के जोखिम और भू-राजनीतिक उथल-पुथल ने यूरोपीय मुद्रा पर भारी दबाव बनाया हुआ है।\n\nएशियाई सत्र के अंत में AUD/USD पर भी बिकवाली का दबाव देखा गया और यह 0.6900 के स्तर की ओर फिसल गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के ट्रेडर अब कच्चे तेल की कीमतों, ट्रेजरी यील्ड और रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की आगामी नीतिगत दिशा पर नजर रखे हुए हैं। दूसरी ओर, USD/JPY अपने नुकसान की भरपाई करते हुए 158.00 के स्तर को दोबारा हासिल करने में कामयाब रहा और पिछले एक सप्ताह के सीमित दायरे में बना रहा। हालांकि, बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख और संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाएं येन की गिरावट को सीमित कर सकती हैं।\n\nकमोडिटी बाजार में, सोने की कीमतें 4,150 डॉलर प्रति औंस से नीचे एक सीमित दायरे में बनी रहीं। मजबूत डॉलर ने सोने की तेजी पर अंकुश लगाया है, लेकिन अक्टूबर में फेड दर वृद्धि की घटती उम्मीदों ने इसकी गिरावट को भी सीमित रखा। क्रिप्टो बाजार की बात करें तो BNB, जिसे पहले बिनांस कॉइन के नाम से जाना जाता था, लगातार तीन हफ्तों की बढ़त के बाद सोमवार को गिरकर लगभग 790 डॉलर पर कारोबार करता दिखा। इसके बावजूद डेरिवेटिव बाजार में बढ़ते ओपन इंटरेस्ट और सकारात्मक फंडिंग दरों से संकेत मिलता है कि तेजी की स्थिति अभी भी बरकरार है।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी डॉलर में जारी इस तेजी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, मुद्रा विनिमय दरों और घरेलू महंगाई पर पड़ सकता है।\n\n• भारत में: मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और आयात महंगा हो सकता है। कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आयात बिल में बढ़ोतरी होने से घरेलू खुदरा कीमतों पर असर पड़ने की संभावना है।\n• वैश्विक स्तर पर: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत ग्रीनबैक अन्य मुद्राओं के मुकाबले व्यापार लागत को बढ़ा देता है। इसके चलते उभरते बाजारों से पूंजी निकासी तेज हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय कर्ज चुकाने की लागत बढ़ सकती है।\n• सोने और कमोडिटी के खरीदार: डॉलर की मजबूती के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण सोने में तेज गिरावट की संभावना सीमित रहेगी।\n• विदेशी यात्रियों और छात्रों के लिए: विदेशों में पढ़ाई और यात्रा का खर्च डॉलर महंगा होने से बढ़ सकता है। जिन छात्रों की फीस या रहने का खर्च डॉलर में देय है, उन्हें अतिरिक्त बजटीय योजना बनानी होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअमेरिकी डॉलर इंडेक्स में यह उछाल मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप में गहराते सैन्य संघर्षों के साथ-साथ अमेरिकी ब्याज दरों के ऊंचे स्तर पर बने रहने की संभावनाओं के कारण हुआ है।\n\n• सैन्य संघर्ष और सुरक्षित निवेश की मांग: ईरान, यमन और यूक्रेन में बढ़ते तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम की आशंकाएं बढ़ा दी हैं। निवेशक अनिश्चितता के दौर में अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिकी डॉलर जैसी परिसंपत्तियों का रुख कर रहे हैं।\n• फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की संभावनाएं: सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार 85 प्रतिशत से अधिक बाजार प्रतिभागी इस वर्ष के अंत तक फेड द्वारा उधारी लागत बढ़ाने की संभावना देख रहे हैं। कमजोर रोजगार आंकड़ों के बावजूद यह मौद्रिक सख्ती का रुख डॉलर को आधार दे रहा है।\n• तकनीकी स्तरों का ब्रेकआउट: पिछले सप्ताह डॉलर इंडेक्स द्वारा 101.60-101.70 के अहम तकनीकी प्रतिरोध को पार करने से खरीदारों का विश्वास मजबूत हुआ है। इस ब्रेकआउट ने अल्पकालिक ट्रेडर्स को नई खरीदारी करने के लिए प्रेरित किया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स हाल ही में किस स्तर तक पहुंच गया है?\nडॉलर इंडेक्स सोमवार को 102.30 के स्तर के पास पहुंच गया, जो अप्रैल 2025 के बाद का इसका उच्चतम स्तर है।\n\n2. डॉलर में इस मजबूती का मुख्य कारण क्या है?\nमध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन संघर्षों के कारण सुरक्षित निवेश की मांग और फेडरल रिजर्व द्वारा वर्ष के अंत तक ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना इसकी मुख्य वजह है।\n\n3. फेडवॉच टूल के अनुसार दर वृद्धि की कितनी संभावना जताई गई है?\nसीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के अनुसार 85 प्रतिशत से अधिक व्यापारी मानते हैं कि केंद्रीय बैंक इस साल के अंत तक उधारी लागत बढ़ाएगा।\n\n4. यूरो और जापानी येन के मुकाबले डॉलर का क्या प्रदर्शन रहा?\nयूरो गिरकर मई 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गया, जबकि डॉलर येन के मुकाबले अपने नुकसान की भरपाई करते हुए 158.00 के स्तर पर पहुंच गया।\n\n5. सोने की कीमतों पर डॉलर की तेजी का क्या असर पड़ा है?\nडॉलर की मजबूती के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें 4,150 डॉलर प्रति औंस के नीचे एक सीमित दायरे में कारोबार कर रही हैं।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-10-05",
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