अमेरिकी गैर-कृषि पेरोल आंकड़ों से पहले डॉलर इंडेक्स 101 के पार स्थिर, ईरान तनाव और कच्चे तेल में उछाल से मिला समर्थन महत्वपूर्ण अमेरिकी श्रम बाजार आंकड़ों से पहले वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर 101.10 के आसपास स्थिर कारोबार कर रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को हवा दी है। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत पर अमेरिकी डॉलर शांत और स्थिर रुख के साथ कारोबार करता दिखा। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 101.10 के स्तर के आसपास बना रहा। बाजार के भागीदार इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी गैर-कृषि पेरोल यानी एनएफपी आंकड़ों से पहले सतर्क रुख अपना रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विकल्प को खुला रखे जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती देखने को मिली है, जिससे मुद्रास्फीति की चिंताएं दोबारा उभरने लगी हैं। तकनीकी विश्लेषण: तेजी के दायरे में डॉलर इंडेक्स दैनिक चार्ट पर डॉलर इंडेक्स का हाजिर भाव 101.09 पर कारोबार कर रहा है, जबकि हालिया सत्रों में यह 101.13 के आसपास देखा गया है। सूचकांक का अल्पकालिक रुझान सकारात्मक बना हुआ है क्योंकि यह अपने 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) 100.19 से काफी ऊपर टिका हुआ है। यह स्थिति डॉलर में मजबूत अंतर्निहित तेजी का संकेत देती है। वर्तमान में 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) 68.36 के स्तर पर पहुंच गया है, जो ओवरबॉट क्षेत्र के बेहद करीब है। इसका अर्थ है कि हालांकि तेजी की गति मजबूत बनी हुई है, लेकिन निकट भविष्य में इसमें हल्का ठहराव या कंसॉलिडेशन देखने को मिल सकता है। नीचे की ओर, डॉलर इंडेक्स के लिए पहला मजबूत समर्थन 20-दिवसीय ईएमए पर लगभग 100.19 के स्तर पर मौजूद है। यह स्तर हालिया तेजी को सुरक्षित रखता है और किसी भी गहरी गिरावट की पुष्टि के लिए सूचकांक को इस स्तर से नीचे फिसलना होगा। चूंकि मौजूदा तकनीकी संरचना में ऊपर की तरफ तत्काल कोई बड़ा अवरोध नहीं दिखाई दे रहा है, इसलिए डॉलर इंडेक्स के पास निकट अवधि में और ऊपर जाने की पूरी गुंजाइश बनी हुई है, भले ही अत्यधिक खिंचे हुए आरएसआई संकेतकों के चलते नई बढ़त की रफ्तार थोड़ी धीमी रह सकती है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिकी डॉलर की भूमिका अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक राष्ट्रीय मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य देशों में स्थानीय नोटों के समानांतर प्रचलन में रहने वाली वास्तविक मुद्रा भी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, कुल वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार में 88 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी अकेले अमेरिकी डॉलर की है, जो दैनिक लेनदेन में औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर बैठता है। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद, अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह लेते हुए दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा का दर्जा हासिल किया था। अपने इतिहास के अधिकांश हिस्से में अमेरिकी डॉलर को स्वर्ण का समर्थन प्राप्त था। हालांकि, वर्ष 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के समाप्त होने के साथ ही गोल्ड स्टैंडर्ड व्यवस्था हमेशा के लिए खत्म हो गई और डॉलर पूरी तरह से एक फिएट मुद्रा बन गया। फेडरल रिजर्व की नीतियां और मात्रात्मक मौद्रिक उपाय अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण घटक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के पास दो प्रमुख जिम्मेदारियां हैं: पहली कीमतों में स्थिरता बनाए रखना यानी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना, और दूसरी पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना। इन दोनों लक्ष्यों को पूरा करने के लिए फेडरल रिजर्व का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों में समायोजन करना है। जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं और मुद्रास्फीति फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के वार्षिक लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है, जिससे अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब महंगाई 2 प्रतिशत से नीचे आ जाती है या बेरोजगारी दर बहुत अधिक हो जाती है, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिससे डॉलर पर दबाव पड़ता है। अत्यधिक गंभीर आर्थिक संकट की स्थितियों में फेडरल रिजर्व अतिरिक्त डॉलर छाप सकता है और क्वांटिटेटिव ईजिंग (क्यूई) लागू करता है। क्यूई वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से केंद्रीय बैंक संकटग्रस्त वित्तीय प्रणाली में ऋण प्रवाह को बड़े पैमाने पर बढ़ाता है। यह एक गैर-मानक नीतिगत उपाय है, जिसका सहारा तब लिया जाता है जब बैंकों के बीच एक-दूसरे पर अविश्वास के कारण ऋण प्रवाह पूरी तरह सूख जाता है। यह अंतिम उपाय के रूप में प्रयुक्त होता है जब केवल ब्याज दरों में कटौती से राहत नहीं मिल पाती। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान फेडरल रिजर्व ने इसी रणनीति को अपनाया था, जिसमें मुख्य रूप से वित्तीय संस्थानों से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदे गए थे। इस प्रक्रिया से आमतौर पर अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है। इसके उलट, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (क्यूटी) वह प्रक्रिया है जिसमें केंद्रीय बैंक बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व बॉन्ड से मिलने वाले मूलधन का दोबारा निवेश नहीं करता, जो सामान्यतः अमेरिकी डॉलर के लिए सकारात्मक माना जाता है। प्रमुख मुद्रा जोड़ियों और सोने पर प्रभाव डॉलर की मजबूती का असर अन्य प्रमुख परिसंपत्तियों पर साफ देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (एयूडी/यूएसडी) सप्ताह की शुरुआत में 0.7000 के स्तर का बचाव करने की कोशिश कर रही है, जो 4 अगस्त के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब बनी हुई है क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई का जोखिम बढ़ा है और अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने के दांव तेज हो गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी डॉलर को सुरक्षित निवेश के रूप में सहारा दे रहा है, जबकि बाजार की नजरें मंगलवार को आने वाली ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक (आरबीए) की नीतिगत घोषणाओं पर टिकी हैं। उधर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (यूएसडी/जेपीवाई) में निचले स्तरों पर खरीदार सक्रिय हुए हैं। जापानी अधिकारियों द्वारा येन को सहारा देने के लिए हस्तक्षेप की अटकलों के बीच शुक्रवार को आई गिरावट अब थम रही है। हालांकि, बैंक ऑफ जापान (बीओजे) के नीतिगत मिनट्स के नरम रुख ने येन की बढ़त को सीमित रखा है। इसके साथ ही कच्चे तेल में तेजी और फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दरें बढ़ाने की संभावनाओं ने डॉलर को 158.00 के स्तर की ओर धकेल दिया है। दूसरी ओर, सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली सोने की कीमतों में सप्ताह की शुरुआत में तेज गिरावट दर्ज की गई। सोना आठ हफ्तों में पहली बार 4,200 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे फिसल गया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार मजबूती और अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावनाओं ने सोने पर भारी दबाव बनाया है। गौरतलब है कि फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान दोनों ने पिछले सप्ताह ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (बीपीएस) की बढ़ोतरी की थी और दोनों ही केंद्रीय बैंकों ने यह संकेत दिया है कि भविष्य के सभी नीतिगत फैसले आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेंगे। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती का सीधा असर वैश्विक वित्तीय बाजारों, आयात लागत और सुरक्षित निवेश परिसंपत्तियों पर पड़ता है। • भारत में: डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और आयातित कच्चे तेल की लागत महंगी हो सकती है। इससे घरेलू स्तर पर पेट्रोल, डीजल और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों में तेजी का जोखिम बना रहता है। • सोने के निवेशकों पर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव 4,200 डॉलर से नीचे आने से घरेलू सर्राफा बाजार में भी कीमतों पर दबाव देखा जा सकता है। निवेशक नई खरीदारी से पहले अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़ों और ब्याज दरों के रुख पर नजर रख सकते हैं। • विदेशी मुद्रा व्यापारियों पर: डॉलर इंडेक्स 101 के ऊपर टिके रहने से प्रमुख मुद्रा जोड़ियों में अस्थिरता बनी रहेगी। व्यापारियों को 100.19 के 20-दिवसीय ईएमए स्तर को सख्त समर्थन मानकर जोखिम प्रबंधन करना चाहिए। • ऋण और ब्याज दरों पर: फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दरें बढ़ाने की संभावनाओं से वैश्विक स्तर पर उधारी की लागत ऊंची बनी रह सकती है। इससे वैश्विक शेयर बाजारों में पूंजी प्रवाह प्रभावित होने की संभावना है। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में स्थिरता और मजबूती के पीछे भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा बाजार की हलचल और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां मुख्य कारण हैं। • भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के विकल्प खुले रखने से वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ी है। इसके चलते सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग को सीधा समर्थन मिला है। • कच्चे तेल में तेजी: पश्चिम एशिया संकट के चलते कच्चे तेल के दामों में उछाल आया है, जिससे नई महंगाई की आशंकाएं पैदा हुई हैं। मुद्रास्फीति बढ़ने की स्थिति में केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने की संभावना बढ़ जाती है। • अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद: हालिया नीतिगत बैठकों में फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान दोनों ने दरों में 25 बीपीएस की वृद्धि की है। तेल की कीमतों से उपजी महंगाई ने अक्टूबर में फेड द्वारा एक और दर वृद्धि की संभावनाओं को हवा दी है। सवाल-जवाब 1. सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स किस स्तर पर कारोबार कर रहा है? अमेरिकी डॉलर इंडेक्स एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान 101.10 के स्तर के आसपास स्थिर रुख के साथ कारोबार कर रहा है। 2. डॉलर इंडेक्स के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी समर्थन स्तर कौन सा है? सूचकांक के लिए तात्कालिक और मजबूत समर्थन 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) पर 100.19 के स्तर पर स्थित है। 3. सोने की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह क्या है? अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, डॉलर की मजबूती और अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाने की बढ़ती संभावनाओं के चलते सोना 4,200 डॉलर से नीचे फिसल गया है। 4. क्वांटिटेटिव ईजिंग (क्यूई) का डॉलर के मूल्य पर क्या प्रभाव पड़ता है? क्वांटिटेटिव ईजिंग के तहत फेडरल रिजर्व अतिरिक्त मुद्रा छापकर बॉन्ड खरीदता है, जिससे वित्तीय प्रणाली में नकदी बढ़ती है और आमतौर पर डॉलर कमजोर होता है। https://trendkia.com/market/us-dollar-index-nfp-ankaron-se-pahale-101-ke-para-sthira-iran-tanava-aura-kachche-tela-se-mila-sahara-39761 TrendKia — Har trend, sabse pehle.