फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले अमेरिकी डॉलर में लगातार चौथे दिन मजबूती, तकनीकी बाधाओं पर टिकी निगाहें ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीदों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी डॉलर इंडेक्स लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त हासिल करने में कामयाब रहा है। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) ने अपनी सकारात्मक चाल को बरकरार रखते हुए लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त का सिलसिला कायम रखा है। निवेशक और मुद्रा कारोबारी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की दो दिवसीय नीतिगत समीक्षा बैठक के शुरू होने से पहले सतर्क रुख अपनाते हुए डॉलर की खरीदारी पर जोर दे रहे हैं। यूरोपीय सत्र की शुरुआत के दौरान डॉलर इंडेक्स 99.65 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया, जो पिछले कारोबारी दिन दर्ज किए गए करीब दो हफ्तों के उच्च स्तर के बेहद करीब है। कारोबारी सत्र के दौरान इसमें 0.15% से अधिक की तेजी देखी गई है। इस मजबूती के पीछे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं के साथ साथ ऊर्जा लागत बढ़ने से उपजी महंगाई चिंताएं और भू-राजनीतिक तनाव मुख्य कारक बनकर उभरे हैं। फेड की सख्ती की आशंका और बॉन्ड यील्ड में तेजी फेडरल रिजर्व की अहम नीतिगत बैठक से पहले बाजार भागीदार इस बात की अधिक संभावना मानकर चल रहे हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक आगामी फैसले में ब्याज दरों में वृद्धि कर सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई का दबाव फिर से बढ़ने का अंदेशा गहरा गया है। इस स्थिति ने अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड को ऊंचे स्तरों पर बनाए रखा है, जिससे ग्रीनबैक यानी अमेरिकी डॉलर को लगातार मजबूत सहारा मिल रहा है। दूसरी ओर, होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया झड़पों और अमेरिका तथा ईरान के बीच गहराते गतिरोध ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता बढ़ा दी है। इस अनिश्चित माहौल में वैश्विक निवेशक डॉलर को एक सुरक्षित विकल्प (सेफ-हेवन) मानकर अपने पोर्टफोलियो में जगह दे रहे हैं। बाजार के नीतिगत परिदृश्य के पुनर्मूल्यांकन के संदर्भ में डांस्के बैंक के विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड लगातार ऊपर की तरफ बढ़ रही है, जहां 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5% के अहम स्तर के पार कारोबार कर रही है। विश्लेषकों ने अपने नीतिगत अनुमानों को संशोधित करते हुए स्पष्ट किया है कि वे बुधवार को होने वाली बैठक में ब्याज दरों में 25bp की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। इसके साथ ही डांस्के बैंक का अनुमान है कि दिसंबर और मार्च की आगामी बैठकों में भी 25-25bp की दो और वृद्धि देखने को मिल सकती है। इस सख्त रुख के चलते फेड फंड्स रेट के 2027 के अंत तक बढ़कर 4.25-4.50% के दायरे में पहुंचने का अनुमान लगाया गया है, जबकि पहले इसके 4.00-4.25% रहने की संभावना जताई गई थी। यह संशोधन अमेरिकी ब्याज दरों के पहले के अनुमानों की तुलना में अधिक आक्रामक रुख की ओर स्पष्ट संकेत देता है। डॉलर इंडेक्स का तकनीकी ढांचा और प्रमुख स्तर तकनीकी चार्ट पर डॉलर इंडेक्स इस समय 99.80 के बेहद अहम संगम स्तर के करीब पहुंच रहा है। यह स्तर जुलाई और अगस्त के दौरान आई गिरावट के 38.2% फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट स्तर तथा 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) का साझा बिंदु है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस क्षेत्र के आसपास कुछ मुनाफावसूली या बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। यदि सूचकांक इस बाधा को निर्णायक रूप से पार करने में सफल रहता है, तो अल्पकालिक अवधि में और अधिक तेजी का रास्ता साफ हो जाएगा। दैनिक चार्ट पर गति संकेतक भी इस रुकावट के टूटने के पक्ष में संकेत दे रहे हैं। दैनिक समय-सीमा पर मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) हिस्टोग्राम मामूली रूप से सकारात्मक दायरे में आ चुका है। वहीं रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) लगभग 54 के स्तर पर बना हुआ है, जो गति में आ रहे सुधार की पुष्टि करता है। यदि तेजी की यह चाल आगे भी जारी रहती है, तो डॉलर इंडेक्स 100.14 के आसपास स्थित 50.0% फाइबोनैचि स्तर और 100.50 पर स्थित 61.8% रिट्रेसमेंट स्तर तक पहुंच सकता है। इसके बाद ऊपर की ओर 101.02 और 101.68 के मजबूत प्रतिरोध स्तर सामने आएंगे। इसके विपरीत, यदि गिरावट आती है तो शुरुआती सहारा 23.6% फाइबोनैचि स्तर पर 99.33 के करीब मिलेगा, जबकि निचला ठोस आधार 98.60 के आसपास बना हुआ है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, डॉलर इंडेक्स 100.22 पर दर्ज किया गया है, जो पिछले बंद स्तर 100.22 के बराबर है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 95.55 से 101.80 के बीच रहा है और ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना पर है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय RSI 60 पर है, जबकि MACD 0.05 पर सिग्नल लाइन -0.12 (हिस्टोग्राम 0.18, बुलिश) के ऊपर बना हुआ है। 20-दिवसीय घातीय मूविंग एवरेज (EMA) 99.58, 50-दिवसीय EMA 99.73 और 200-दिवसीय EMA 99.30 पर स्थित है, जिसमें 50-दिवसीय EMA का 200-दिवसीय EMA के ऊपर गोल्डन क्रॉस बना हुआ है। बोलिंगर बैंड्स (20,2) 98.43 से 100.30 के दायरे में हैं और कीमत बैंड्स के भीतर बनी हुई है। ट्रेंड की मजबूती दर्शाने वाला ADX 27 पर है, स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 83 और सिग्नल लाइन 91 पर है। 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज (ATR) 0.44 पर है, जो दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। 20-दिवसीय सपोर्ट 98.56 और रेजिस्टेंस 100.56 के आसपास है। प्रमुख ट्रेडिंग स्तरों में पिवट 100.32, रेजिस्टेंस R1 100.46, R2 100.71 तथा सपोर्ट S1 100.07 और S2 99.93 हैं। प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर का प्रदर्शन बीते 7 दिनों के दौरान प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर का रुख काफी मजबूत रहा है। इस दौरान न्यूजीलैंड डॉलर के खिलाफ अमेरिकी डॉलर ने सबसे अधिक मजबूती दर्ज की है। मुद्रा बाजार के हीट मैप से स्पष्ट होता है कि जब किसी आधार मुद्रा की तुलना दूसरी उद्धृत मुद्रा से की जाती है, तो डॉलर अधिकांश प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त बनाए रखने में कामयाब रहा है। उदाहरण के लिए, जब जापानी येन के मुकाबले डॉलर का मूल्यांकन किया जाता है, तो ग्रीनबैक की मजबूती का असर दोनों मुद्राओं के विनिमय अनुपात पर साफ दिखाई देता है। अन्य मुद्रा जोड़ों और सोने पर डॉलर की बढ़त का असर अमेरिकी डॉलर में आ रही मजबूती का सीधा प्रभाव अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ों और कीमती धातुओं पर भी देखने को मिल रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) मंगलवार को एशियाई कारोबारी सत्र में दबाव में रहा और 0.7150 के नीचे कारोबार करता नजर आया, जो पिछले दिन बने तीन हफ्ते से अधिक के निचले स्तर के करीब है। चीन के अगस्त माह के मिश्रित आर्थिक गतिविधियों से जुड़े आंकड़ों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई खास सहारा नहीं दिया, जबकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की मजबूती ने इस जोड़ी पर नीचे की ओर दबाव बनाए रखा। वहीं अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) का युग्म मंगलवार की सुबह 155.00 के स्तर की तरफ बढ़ता दिखाई दिया। ट्रेडर इस हफ्ते होने वाली FOMC और बैंक ऑफ जापान (BoJ) की बैठकों के नतीजों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जहां एक ओर अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी के दांव डॉलर को सहारा दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बैंक ऑफ जापान द्वारा मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने के आक्रामक रुख की संभावना जापानी येन को कुछ मजबूती दे सकती है, जिससे इस जोड़ी की ऊपरी चाल सीमित होने की संभावना भी बनी हुई है। दूसरी ओर, कमोडिटी बाजार में सोना अपनी मामूली एशियाई बढ़त को कायम रखने के लिए संघर्ष करता दिखा और पिछले दिन के एक महीने के निचले स्तर के पास बना रहा। सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली यह धातु 4,300 डॉलर के स्तर के ठीक नीचे कारोबार करती रही, क्योंकि महत्वपूर्ण दो दिवसीय नीतिगत बैठक से पहले कई बड़े ट्रेडरों ने किनारा करना और नए दांव लगाने से बचना बेहतर समझा। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर में जारी तेजी और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं का सीधा असर भारतीय बाजार, रुपये की कीमत और विदेशी व्यापार पर पड़ेगा। • भारत में: मजबूत डॉलर के कारण भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और आयात महंगा होने की संभावना है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें देश में आयातित मुद्रास्फीति को बढ़ा सकती हैं जिससे घरेलू ईंधन और लॉजिस्टिक्स की लागत पर असर पड़ेगा। • घरेलू निवेशकों पर: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5% के ऊपर रहने से विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पूंजी निकाल सकते हैं। शेयर बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है इसलिए निवेशकों को जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। • सोना खरीदारों पर: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतें 4,300 डॉलर के नीचे दबाव में बनी हुई हैं। यदि वैश्विक कीमतें कमजोर रहती हैं तो घरेलू स्तर पर आभूषण खरीदारों को कीमतों में स्थिरता या हल्की राहत मिल सकती है। • विदेशी यात्रियों और छात्रों पर: डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से विदेश में पढ़ाई और अंतरराष्ट्रीय यात्राएं अधिक खर्चीली हो जाएंगी। छात्रों और यात्रियों को अपने विदेशी मुद्रा खर्चों का बजट उसी अनुरूप योजनाबद्ध करना होगा। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर में आई हालिया मजबूती फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीति को सख्त रखने के संकेत, ऊर्जा कीमतों से जुड़े महंगाई के जोखिम और मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक तनावों का संयुक्त परिणाम है। • फेडरल रिजर्व की नीतिगत सख्ती: विश्लेषकों ने अपने अनुमानों में बदलाव करते हुए बुधवार की बैठक में 25bp की ब्याज दर वृद्धि की उम्मीद जताई है। इसके अलावा आगामी दिसंबर और मार्च में भी दरों में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है, जिससे डॉलर को सीधा समर्थन मिला। • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई फिर से बढ़ने की चिंताओं ने 10-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को 5% के महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर पहुंचा दिया है। उच्च प्रतिफल ने वैश्विक पूंजी को अमेरिकी डॉलर की ओर आकर्षित किया है। • पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संकट: होर्मुज जलडमरूमध्य में हुई झड़पों और अमेरिका तथा ईरान के बीच बढ़ते गतिरोध ने भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ा दिया है। इस अशांत माहौल में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने सुरक्षित ठिकाने के रूप में डॉलर को तरजीह दी है। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में तेजी क्यों आ रही है? फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं, 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के 5% से ऊपर पहुंचने और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण डॉलर मजबूत हुआ है। 2. डांस्के बैंक का फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर क्या अनुमान है? डांस्के बैंक बुधवार की बैठक के अलावा दिसंबर और मार्च में 25-25bp की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है, जिससे 2027 के अंत तक फेड फंड्स रेट 4.25-4.50% तक पहुंच सकता है। 3. डॉलर इंडेक्स के लिए प्रमुख तकनीकी स्तर कौन से हैं? सूचकांक 99.80 के संगम स्तर के करीब है, जबकि ऊपर की ओर 100.14 और 100.50 प्रमुख बाधाएं हैं। वहीं नीचे की तरफ 99.33 और 98.60 अहम सपोर्ट स्तर हैं। 4. इस तेजी का सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ा है? डॉलर की मजबूती और फेड की बैठक से पहले ट्रेडरों के सतर्क रुख के चलते सोना 4,300 डॉलर के स्तर के ठीक नीचे और एक महीने के निचले स्तर के पास बना हुआ है। https://trendkia.com/market/us-dollar-index-price-forecast-fed-meeting-se-pehle-majboot-33955 TrendKia — Har trend, sabse pehle.