# महंगाई के आंकड़ों से पहले अमेरिकी डॉलर में ठहराव, 102.50 के नए शिखर के बाद सीमित दायरे में कारोबार

> सितंबर के मुद्रास्फीति आंकड़ों से पहले अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 102.22 के स्तर पर स्थिर बना हुआ है। तकनीकी चार्ट पर मजबूत बढ़त के बावजूद बाजार नए ट्रिगर की प्रतीक्षा कर रहा है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-dollar-index-price-forecast-turns-sideways-after-hitting-fresh-yearly-highs-near-102-50-46821 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी डॉलर, डॉलर इंडेक्स, फेडरल रिजर्व, मुद्रास्फीति, भारतीय रुपया, विदेशी मुद्रा बाजार, वित्त

अमेरिकी मुद्रा बाजार में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत काफी सुस्त रफ्तार के साथ हुई है, जहां निवेशक अमेरिका के आगामी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई आंकड़ों पर पूरी नजरें गड़ाए बैठे हैं। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की चाल को मापने वाला डॉलर इंडेक्स यूरोपीय कारोबार के दौरान 102.22 के आसपास लगभग सपाट स्थिति में कारोबार करता दिखाई दिया। पिछले सप्ताह 102.54 के स्तर पर साल का नया उच्चतम स्तर छूने के बाद से डॉलर इंडेक्स में किसी एक दिशा में बड़ी तेजी की जगह साइडवेज चाल देखने को मिल रही है, क्योंकि कारोबारी बड़े मैक्रो आंकड़े जारी होने से पहले नए सौदे बनाने से बच रहे हैं।

## तकनीकी संकेत और दैनिक चार्ट की स्थिति
दैनिक तकनीकी चार्ट पर डॉलर इंडेक्स स्पॉट 102.22 पर टिका हुआ है, जहां अल्पकालिक नजरिया अभी भी मजबूती का बना हुआ है। इंडेक्स अपने 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी 20-डे ईएमए से काफी ऊपर बना हुआ है, जो वर्तमान में 101.35 के स्तर पर स्थित है। इस प्रमुख सपोर्ट स्तर से मौजूदा दूरी यह दर्शाती है कि हालिया तेजी का रुख तकनीकी तौर पर सुरक्षित है। हालांकि, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 70.65 के स्तर पर पहुंच गया है, जो तकनीकी रूप से ओवरबॉट जोन में आता है। ओवरबॉट क्षेत्र में आरएसआई की यह मौजूदगी संकेत देती है कि तेजी की रफ्तार बरकरार होने के बावजूद बाजार में किसी भी समय ठहराव या सुधारात्मक गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।

यदि डॉलर इंडेक्स में नीचे की ओर गिरावट आती है, तो पहला मजबूत तकनीकी सपोर्ट 20-दिवसीय ईएमए के पास 101.35 के स्तर पर मौजूद है। जब तक व्यापक स्तर पर तेजी का ट्रेंड बरकरार रहता है, तब तक इस सपोर्ट के करीब आने पर नए लिवालों के सक्रिय होने की उम्मीद की जा सकती है। इसके विपरीत, ऊपर की दिशा में यदि डॉलर इंडेक्स 102.54 के वार्षिक उच्चतम स्तर को मजबूती से पार कर लेता है, तो इसमें तेजी का एक नया दौर शुरू हो सकता है। ताजा लाइव आंकड़ों के अनुसार, डॉलर इंडेक्स 102.24 पर कारोबार कर रहा है, जबकि इसका पिछला बंद स्तर 102.21 था और 52-सप्ताह का दायरा 95.55 से 102.54 का रहा है। लाइव तकनीकी स्तरों में 14-दिवसीय आरएसआई 69 पर है, एमएसीडी 0.64 बनाम सिग्नल लाइन 0.57 पर बुलिश है, और धुरी स्तर यानी पिवट 102.21 के साथ पहला रेसिस्टेंस 102.33 और दूसरा 102.42 पर आंका गया है।

## फेडरल रिजर्व का दोहरा जनादेश और महंगाई का दबाव
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के पास दो मुख्य जिम्मेदारियां हैं, जिनमें कीमतों की स्थिरता बनाए रखना और अधिकतम रोजगार सुनिश्चित करना शामिल है। इस संस्थागत जनादेश के तहत, वार्षिक मुद्रास्फीति की दर लगभग 2% के आसपास होनी चाहिए। हालांकि, कोरोना महामारी के बाद से उपजी आर्थिक परिस्थितियों के कारण मुद्रास्फीति लक्ष्य को हासिल करना केंद्रीय बैंक के लिए सबसे कमजोर कड़ी साबित हुआ है, और इसका असर वर्तमान समय तक खिंचता चला आ रहा है। सप्लाई चेन की बाधाओं और व्यापारिक अड़चनों के कारण कीमतों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक कई दशकों के ऊंचे स्तरों पर बना हुआ है। फेडरल रिजर्व ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए पहले ही कड़े कदम उठाए हैं और आने वाले समय में भी केंद्रीय बैंक के सख्त रुख को बरकरार रखने की संभावना जताई जा रही है।

वित्तीय बाजारों का ऐसा अनुमान है कि सितंबर महीने में अमेरिकी मुद्रास्फीति की रफ्तार पहले से अधिक तेज रही हो सकती है। एमयूएफजी के विश्लेषकों का मानना है कि जब तक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े उम्मीद से कहीं अधिक चौंकाने वाले नहीं आते, तब तक फेडरल रिजर्व इस महीने ब्याज दरों को स्थिर बनाए रख सकता है। यदि महंगाई के आंकड़े अनुमान से ज्यादा गर्म आते हैं, तभी ब्याज दरों को लेकर बाजार की अपेक्षाओं में तत्काल बड़ा बदलाव आ सकता है।

## वैश्विक मुद्राओं पर डॉलर की चाल का प्रभाव
अमेरिकी डॉलर में जारी इस ठहराव का असर अन्य प्रमुख विदेशी मुद्रा जोड़ियों पर भी साफ देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD ने सप्ताह की शुरुआत में एक मामूली मंदी वाले गैप को भर दिया, लेकिन एशियाई कारोबारी सत्र में छुट्टी के चलते कम तरलता के बीच यह जोड़ी 0.7000 के स्तर से नीचे ही बनी रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बहु-वर्षीय उच्चतम स्तरों से नीचे आने के बावजूद अमेरिकी डॉलर ने उबरने का प्रयास किया, जिससे इस जोड़ी की बढ़त सीमित रही। इसके अतिरिक्त, नवंबर में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी आरबीए द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की घटती संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की तेजी पर ब्रेक लगा रखा है।

दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन यानी USD/JPY में नए सप्ताह में भी सीमित दायरे का कारोबार देखने को मिल रहा है और यह जोड़ी 158.00 से ऊपर बनी हुई है। बाजार के खरीदार इस आशंका को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं कि जापानी अधिकारी अपनी मुद्रा को सहारा देने के लिए बाजार में सीधा हस्तक्षेप कर सकते हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी के कारण डॉलर खरीदारों का उत्साह कुछ धीमा पड़ा है, जिससे जोड़ी की ऊपरी तेजी सीमित रही। हालांकि, जापान और अमेरिका में सार्वजनिक छुट्टियों के कारण कम तरलता के बीच भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं सेफ-हेवन अमेरिकी डॉलर की संभावित गिरावट को रोकने का काम कर रही हैं।

भारतीय रुपये की बात करें तो, सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले उल्लेखनीय मजबूती के साथ खुलने के बाद भारतीय रुपया यानी INR 95.80 के करीब अपनी रिकवरी बढ़त को बनाए रखने में सफल रहा। इस जोड़ी पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई द्वारा डॉलर की मांग पर अंकुश लगाने के लिए उठाए गए नए कदमों का असर बना हुआ है, जिससे घरेलू मुद्रा को काफी राहत मिली है।

## सोने, कच्चे तेल और क्रिप्टो बाजार की हलचल
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में सप्ताह के पहले दिन कुछ मुनाफावसूली दर्ज की गई। एक सप्ताह के उच्चतम स्तर को छूने के बाद यूरोपीय सत्र के दौरान पीली धातु फिसलकर 4,200 डॉलर के स्तर से नीचे आ गई, जिससे इसकी लगातार दो दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया। फेडरल रिजर्व का सख्त रुख डॉलर को नीचे गिरने से रोक रहा है, जिससे बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने की बढ़त पर दबाव बना हुआ है। इसी बीच, रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा युद्धविराम समझौते की उम्मीदों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक ईंधन की कमी दूर होने और मुद्रास्फीति के जोखिमों में कमी आने की संभावना बलवती हुई है।

डिजिटल एसेट बाजार में कार्डानो यानी ADA पिछले सप्ताह 2.85% के सुधार के बाद सोमवार को अपने प्रमुख सपोर्ट जोन से ऊपर वापसी करने में सफल रहा। डेरिवेटिव बाजार की सुधरती स्थिति और रचनात्मक तकनीकी परिदृश्य ने एडीए की रिकवरी को आधार दिया है। वायदा बाजार के आंकड़ों से कार्डानो के ट्रेडर्स में सकारात्मक धारणा का पता चलता है। कॉइनग्लास का कार्डानो के लिए लॉन्ग-टू-शॉर्ट अनुपात सोमवार को 1.01 दर्ज किया गया, जो इसके सकारात्मक दायरे में प्रवेश करने का स्पष्ट प्रमाण है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर के ऊंचे स्तरों पर टिके रहने से वैश्विक आयात लागत और मुद्रा विनिमय दरों पर सीधा असर पड़ता है।

- **भारत में:** डॉलर की मजबूती के बीच भारतीय रुपया 95.80 के करीब स्थिर होने की कोशिश कर रहा है, जिससे विदेश में पढ़ाई और यात्रा का खर्च ऊंचा बना हुआ है। आरबीआई के कदमों से डॉलर की मांग पर नियंत्रण रहने से जरूरी आयातित वस्तुओं की कीमतों में अचानक उछाल आने से राहत मिल सकती है।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** डॉलर इंडेक्स का 102.22 पर ठहरना और सोने का 4,200 डॉलर से नीचे खिसकना यह दर्शाता है कि सुरक्षित निवेश में सतर्कता बढ़ रही है। व्यापारी मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बाद ही ब्याज दरों की दिशा स्पष्ट होने पर नए निवेश का फैसला ले सकते हैं।
- **उपभोक्ताओं के लिए:** रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा युद्धविराम की उम्मीदों से कच्चे तेल के दाम नरम होने का सीधा फायदा ईंधन की कीमतों पर दिख सकता है। ईंधन सस्ता होने से आने वाले समय में माल ढुलाई की लागत घटने से महंगाई का दबाव कुछ कम हो सकता है।
- **क्रिप्टो ट्रेडर्स के लिए:** कार्डानो का 2.85% सुधार के बाद प्रमुख सपोर्ट के ऊपर लौटना डिजिटल संपत्तियों में संभलने के संकेत देता है। डेरिवेटिव में 1.01 का लॉन्ग-टू-शॉर्ट अनुपात यह दिखाता है कि गिरावट के बाद सौदों में तेजी की नई स्थिति बन रही है।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी डॉलर में जारी ठहराव और मुद्रास्फीति के दबाव के पीछे कई प्रमुख आर्थिक कारण और परिस्थितियां जिम्मेदार हैं।

- **महंगाई के आंकड़ों का इंतजार:** वित्तीय बाजार सितंबर के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के तेजी से बढ़ने की आशंका जता रहे हैं, जिसके कारण डॉलर इंडेक्स 102.54 के नए शिखर के बाद स्थिर हो गया है। निवेशक बड़े नीतिगत आंकड़ों की पुष्टि से पहले नई दिशा तय करने में संकोच कर रहे हैं।
- **सप्लाई चेन और महामारी का असर:** वैश्विक महामारी के बाद से आपूर्ति श्रृंखला में पैदा हुई रुकावटों और अड़चनों ने वस्तुओं की कीमतों को कई दशकों के ऊंचे स्तरों पर पहुंचा दिया है। इसके चलते केंद्रीय बैंक के लिए अपने 2% वार्षिक मुद्रास्फीति लक्ष्य को पाना सबसे कठिन चुनौती बन गया है।
- **फेडरल रिजर्व की सख्त नीतियां:** फेडरल रिजर्व ने कीमतों की स्थिरता बहाल करने के लिए आक्रामक उपाय अपनाए हैं और आने वाले समय में भी सख्त रुख जारी रखने की संभावना है। एमयूएफजी के अनुसार, केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को तभी अपरिवर्तित रखेगा जब तक महंगाई के आंकड़े कोई बड़ा उलटफेर न दिखाएं।

## सवाल-जवाब

### 1. वर्तमान में डॉलर इंडेक्स किस स्तर पर कारोबार कर रहा है?
डॉलर इंडेक्स 102.54 के हालिया वार्षिक उच्चतम स्तर को छूने के बाद 102.22 के आसपास लगभग सपाट कारोबार कर रहा है।

### 2. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स के लिए प्रमुख तकनीकी सपोर्ट क्या है?
इंडेक्स के लिए पहला मजबूत तकनीकी सपोर्ट 20-दिवसीय ईएमए के पास 101.35 के स्तर पर स्थित है।

### 3. एमयूएफजी के अनुसार फेडरल रिजर्व ब्याज दरों पर क्या कदम उठा सकता है?
एमयूएफजी का मानना है कि जब तक सीपीआई के आंकड़े अप्रत्याशित रूप से ज्यादा नहीं आते, तब तक केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है।

### 4. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की क्या स्थिति है?
सोमवार को मजबूत शुरुआत के बाद भारतीय रुपया 95.80 के करीब अपनी रिकवरी बढ़त को बनाए हुए है।

### 5. सोने की कीमतों में यूरोपीय सत्र के दौरान क्या बदलाव आया?
सोना एक सप्ताह के उच्च स्तर को छूने के बाद फिसलकर 4,200 डॉलर के स्तर से नीचे आ गया।

### 6. कार्डानो में हालिया सुधार के बाद क्या तकनीकी रुझान दिखा?
पिछले सप्ताह 2.85% की गिरावट के बाद कार्डानो अहम सपोर्ट से ऊपर लौट आया और कॉइनग्लास का लॉन्ग-टू-शॉर्ट अनुपात 1.01 दर्ज हुआ।

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