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  "type": "article",
  "title": "मजबूत रोजगार आंकड़ों के बीच अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में तेजी, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बढ़ी उम्मीदें",
  "summary": "अमेरिकी डॉलर इंडेक्स एशिया के शुरुआती कारोबारी सत्र में 99.20 के स्तर के आसपास मजबूत बना हुआ है। अगस्त के मजबूत रोजगार आंकड़ों के कारण फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को बल मिला है।",
  "content": "अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) सोमवार को एशिया के शुरुआती कारोबारी घंटों में 99.20 के आसपास कारोबार कर रहा है। डॉलर इंडेक्स में यह मजबूती अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों के तेजी से बढ़ने के कारण आई है। श्रम बाजार के इन बेहतर आंकड़ों के बाद मुद्रा बाजार में डॉलर का रुख सकारात्मक बना हुआ है, हालांकि श्रम दिवस (Labour Day) के अवसर पर अमेरिकी बाजार सोमवार को बंद रहे हैं।\n\nरोजगार आंकड़ों और श्रम बाजार का हाल\n\nअमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो (BLS) की ओर से शुक्रवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त महीने में नॉनफार्म पेरोल्स (NFP) में 162K की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह आंकड़ा पिछले महीने के संशोधित 21K के स्तर और बाजार के 56K के अनुमान से काफी ज्यादा बेहतर रहा। इसी अवधि के दौरान अमेरिका में बेरोजगारी दर स्थिर बनी हुई है और यह 4.1% पर बरकरार रही।\n\nबाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े गर्म रहते हैं, तो सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो सकता है और अमेरिकी डॉलर को और अधिक मजबूती मिल सकती है। इसके विपरीत, यदि आंकड़े नरम रहते हैं, तो दरों को स्थिर रखने की संभावना को बल मिलेगा जिससे डॉलर पर दबाव आ सकता है। टीडी सिक्योरिटीज (TD Securities) का कहना है कि ताजा श्रम बाजार रिपोर्ट ने मुद्रा और दरों के सेक्टर को तत्काल बढ़ावा दिया है, जिससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों ऊपर चढ़े हैं।\n\nतकनीकी विश्लेषण और प्रमुख स्तर\n\nदैनिक चार्ट के अनुसार, डॉलर इंडेक्स स्पॉट का रुख अभी भी कुछ हद तक मंदी की ओर है क्योंकि कीमत बोलिंगर मिडल बैंड से नीचे फिसल गई है, हालांकि यह अभी भी 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) से ऊपर टिकी हुई है। इंडेक्स अपने हालिया बोलिंगर एनवलप के निचले आधे हिस्से में बना हुआ है। इसके अलावा, 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) लगभग 43 के स्तर पर है, जो अत्यधिक बिकवाली की स्थिति के बजाय घटते हुए ऊपरी मोमेंटम का संकेत देता है, जिसका अर्थ है कि व्यापक ढांचा सीमित रहने पर तेजी के मौकों पर बिकवाली हो सकती है।\n\nऊपरी स्तरों पर, शुरुआती रेजिस्टेंस बोलिंगर मिडल बैंड के पास लगभग 99.35 पर है, जबकि खरीदार अगर अधिक जोर लगाते हैं तो ऊपरी बैंड के पास लगभग 100.10 पर मजबूत बाधा आ सकती है। दूसरी ओर, गिरावट की स्थिति में 100-दिवसीय SMA 99.75 पर एक महत्वपूर्ण मध्यम अवधि का सपोर्ट बना हुआ है, जबकि विक्रेताओं द्वारा दबाव बढ़ाने पर बोलिंगर लोअर बैंड 98.60 के करीब अगला लक्ष्य साबित हो सकता है।\n\nअमेरिकी डॉलर का वैश्विक प्रभाव और मौद्रिक नीति\n\nअमेरिकी डॉलर (USD) संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा है और दुनिया के कई अन्य देशों में भी स्थानीय नोटों के साथ बड़े पैमाने पर प्रचलन में है। साल 2022 के आंकड़ों के अनुसार, यह दुनिया की सबसे ज्यादा कारोबार की जाने वाली मुद्रा है, जो कुल वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार का 88% से अधिक यानी औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर प्रति दिन का लेन-देन संभालती है।\n\nद्वितीय विश्व युद्ध के बाद, ब्रिटिश पाउंड की जगह अमेरिकी डॉलर दुनिया की रिजर्व करेंसी बन गया था। अपने इतिहास के अधिकांश समय में अमेरिकी डॉलर सोने से समर्थित था, जब तक कि 1971 में ब्रेटन वुड्स समझौते के तहत गोल्ड स्टैंडर्ड समाप्त नहीं हो गया।\n\nअमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक मौद्रिक नीति है, जिसे फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा संचालित किया जाता है। फेड के दो मुख्य उद्देश्य हैं: मूल्य स्थिरता हासिल करना (मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना) और पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना। इन दोनों लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए फेड का मुख्य हथियार ब्याज दरों में समायोजन करना है।\n\nजब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं और महंगाई फेड के 2% के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो फेड दरें बढ़ा देता है जिससे डॉलर मजबूत होता है। इसके उलट, जब महंगाई 2% से नीचे गिर जाती है या बेरोजगारी दर बहुत अधिक हो जाती है, तो फेड ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिससे डॉलर पर असर पड़ता है।\n\nमात्रात्मक सहजता और कड़ाई की नीति\n\nअरे हालात में, फेडरल रिजर्व अधिक डॉलर छाप सकता है और मात्रात्मक सहजता (QE) लागू कर सकता है। QE वह प्रक्रिया है जिसके तहत फेड किसी अटके हुए वित्तीय प्रणाली में क्रेडिट के प्रवाह को काफी हद तक बढ़ा देता है। यह एक गैर-मानक नीतिगत उपाय है जिसका उपयोग तब किया जाता है जब काउंटरपार्टी डिफॉल्ट के डर से बैंक एक-दूसरे को कर्ज देने से कतराते हैं। यह 2008 के वित्तीय संकट के दौरान क्रेडिट संकट से निपटने के लिए फेड का पसंदीदा हथियार था।\n\nइसके विपरीत, मात्रात्मक कड़ाई (QT) वह प्रक्रिया है जिसमें फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड के मूलधन को नए बॉन्ड में पुनर्निवेशित नहीं करता है, जो आमतौर पर अमेरिकी डॉलर के लिए सकारात्मक होता है।\n\nअन्य प्रमुख मुद्राओं और वस्तुओं का प्रदर्शन\n\nAUD/USD जोड़ी नए सप्ताह की शुरुआत में 0.7200 के आसपास मंडरा रही है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) से तीखे रुख की उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन दे रही हैं, जबकि मजबूत अमेरिकी NFP रिपोर्ट ने फेड दरों की उम्मीदों को बढ़ाया है जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर को बल मिला है और इस करेंसी जोड़ी पर लगाम लगी है।\n\nUSD/JPY जोड़ी सोमवार को 156.00 से ऊपर स्थिर बनी हुई है। मजबूत NFP रिपोर्ट और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अमेरिकी डॉलर को समर्थन मिल रहा है, जबकि जापान के वित्तीय दृष्टिकोण को लेकर चिंताएं येन पर दबाव बना रही हैं।\n\nएशियाई सत्र के दौरान सोमवार को सोने की कीमत गिरकर लगभग 4,395 डॉलर के करीब आ गई। मजबूत अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के कारण फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ने से इस कीमती धातु पर दबाव लगातार बना हुआ है।\n\nइसके अलावा, तेल बाजार में डीजल एक अलग ही संकेत दे रहा है। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, जो WTI क्रूड के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम है, हाल ही में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया और 102.00 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आई यह मजबूती वैश्विक बाजारों और भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालती है।\n\n• भारत में: मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आयात महंगा हो सकता है और घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल तथा कच्चे तेल के दाम प्रभावित हो सकते हैं।\n\n• वैश्विक स्तर पर: निवेशकों के लिए सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग बढ़ेगी, जिससे सोने और अन्य जिंसों (Commodities) की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।\n\n• कच्चे तेल पर असर: डीजल और क्रूड ऑयल के ऊंचे क्रैक स्प्रेड से वैश्विक ऊर्जा लागत पर दबाव बना रहेगा, जिसका असर परिवहन और माल ढुलाई पर पड़ेगा।\n\n• ब्याज दरों का रुख: फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में बढ़ोतरी की संभावना से वैश्विक ऋण बाजार में उधार लेना महंगा हो सकता है।\n\n• शेयर बाजार: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से भारतीय बाजारों से पूंजी निकासी तेज हो सकती है, जिससे शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) अभी किस स्तर पर कारोबार कर रहा है?\nअमेरिकी डॉलर इंडेक्स एशिया के शुरुआती कारोबारी सत्र में 99.20 के आसपास कारोबार कर रहा है।\n\n2. अगस्त महीने में अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल्स (NFP) में कितनी बढ़ोतरी हुई?\nअगस्त में अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल्स में 162K की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बाजार के अनुमान से काफी अधिक थी।\n\n3. अगस्त के दौरान अमेरिका में बेरोजगारी दर कितनी रही?\nसमीक्षाधीन अवधि के दौरान अमेरिका में बेरोजगारी दर स्थिर रहते हुए 4.1% पर बनी रही।\n\n4. डॉलर इंडेक्स के लिए शुरुआती रेजिस्टेंस स्तर कहां पर है?\nडॉलर इंडेक्स के लिए शुरुआती रेजिस्टेंस बोलिंगर मिडल बैंड के पास लगभग 99.35 पर है।\n\n5. फेडरल रिजर्व के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?\nफेडरल रिजर्व के दो मुख्य उद्देश्य मूल्य स्थिरता हासिल करना और पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना हैं।\n\n6. सोने की कीमत में हाल ही में क्या रुख देखा गया?\nमजबूत अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के कारण एशियाई सत्र में सोने की कीमत गिरकर लगभग 4,395 डॉलर के करीब आ गई।",
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  "publishedAt": "2026-09-07",
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