# फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति के संकेतों से अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती, 100.35 के करीब पहुंचा स्तर

> फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की 88 फीसदी संभावना और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच डॉलर इंडेक्स बढ़त बनाए हुए है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-dollar-index-trades-firmly-near-100-35-ahead-of-fed-speeches-35627 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी डॉलर, फेडरल रिजर्व, डॉलर इंडेक्स, मुद्रा बाजार, ब्याज दरें, नील काशकारी, वैश्विक अर्थव्यवस्था, विदेशी मुद्रा व्यापार, वित्त

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में कारोबारी सप्ताह की शुरुआत अमेरिकी मुद्रा की ठोस मजबूती के साथ हुई है। फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीति को सख्त बनाए रखने के स्पष्ट संकेतों ने वैश्विक निवेशकों के रुझान को डॉलर की तरफ मोड़ दिया है। इस साल अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कम से कम एक और वृद्धि किए जाने की प्रबल संभावनाओं के बीच छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की सेहत मापने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.15 फीसदी की तेजी दर्ज करते हुए 100.37 के आसपास कारोबार करता नजर आया। विशेष रूप से जापानी येन के मुकाबले डॉलर का प्रदर्शन सबसे जोरदार देखा गया, जहां मुद्रा जोड़ी में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। वित्तीय बाजारों की नजर अब फेडरल रिजर्व के नीति निर्धारकों के आगामी भाषणों और न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर होने वाली कूटनीतिक वार्ताओं पर टिकी हुई है।

 

## फेडरल रिजर्व की सख्त नीति और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं

अमेरिकी केंद्रीय बैंक की भावी नीतियों को लेकर वायदा बाजार का मिजाज साफ तौर पर संकेत दे रहा है कि ब्याज दरों में ढील मिलने की उम्मीदें फिलहाल दूर की कौड़ी हैं। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज के फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस बात की लगभग 88 फीसदी संभावना है कि फेडरल रिजर्व इसी कैलेंडर वर्ष के दौरान कम से कम एक और ब्याज दर वृद्धि को अमलीजामा पहनाएगा। मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए केंद्रीय बैंक का यह रुख निवेशकों के बीच डॉलर की मांग को लगातार सहारा दे रहा है। व्यापक आर्थिक परिदृश्य में मुद्रास्फीति के दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, जिसके चलते मौद्रिक सख्ती को बरकरार रखना नीतिगत प्राथमिकता बना हुआ है।

 सप्ताहांत के दौरान मिनीपोलिस फेड बैंक के अध्यक्ष नील काशकारी ने फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम संडे मॉर्निंग फ्यूचर्स में दिए एक साक्षात्कार में नीतिगत प्राथमिकताओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने जोर देकर कहा कि नीति निर्माताओं के लिए उच्च मुद्रास्फीति अब भी एक गंभीर और प्राथमिक चिंता का विषय बनी हुई है। काशकारी ने स्पष्ट किया कि मूल्य वृद्धि का यह दबाव केवल कच्चे तेल या ऊर्जा की बढ़ती कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि अर्थव्यवस्था के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी पसरा हुआ है। विश्लेषणात्मक पैमाने पर उनके इन बयानों को 6.2 का स्कोर मिला, जो ऐतिहासिक औसत 6.3 के बेहद करीब है और केंद्रीय बैंक के स्थिर सख्त रुख को पुष्ट करता है।

 नील काशकारी के बयानों में यह बात प्रमुखता से रेखांकित की गई कि जब तक वास्तविक अर्थव्यवस्था में लचीलापन, ठोस आर्थिक वृद्धि और सुधरती उत्पादकता दिखाई दे रही है, तब तक मौद्रिक नीति में किसी तरह की ढील नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह याद दिलाते हुए बॉन्ड बाजार की दिशा तय करने का जिम्मा अमेरिकी ट्रेजरी पर छोड़ा कि नीति निर्माताओं का प्राथमिक ध्यान बाजार के उतार-चढ़ाव की बजाय निरंतर बने हुए अंतर्निहित मूल्य दबावों और मजबूत श्रम बाजार पर केंद्रित रहना चाहिए। इस बीच, फेड भावना सूचकांक 1.47 अंक घटकर 150.61 के स्तर पर दर्ज किया गया। हालांकि इसमें मामूली नरमी आई है, लेकिन यह अब भी निष्पक्ष 100 के स्तर से काफी ऊपर बना हुआ है, जो यह साबित करता है कि केंद्रीय बैंक सख्त नीति बनाए रखने के पक्ष में है।

 

## तकनीकी विश्लेषण और डॉलर इंडेक्स का चार्ट परिदृश्य

दैनिक मूल्य चार्ट पर नजर डालें तो डॉलर इंडेक्स स्पॉट 100.35 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। हालिया कारोबारी सत्रों में इंडेक्स ने 99.63 पर स्थित अपने 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) को निर्णायक रूप से पार कर लिया है, जिससे अल्पकालिक रुझान मजबूती की ओर झुक गया है। जब तक सूचकांक इस स्तर से ऊपर बना रहता है, खरीदारों का पलड़ा भारी रहने की उम्मीद है। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, डॉलर इंडेक्स 100.33 पर कारोबार कर रहा है, जबकि इसका पिछला बंद स्तर 100.22 था, जो 0.11 फीसदी की बढ़त दर्शाता है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान डॉलर इंडेक्स का दायरा 95.55 से 101.80 के बीच रहा है, और मौजूदा ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के 1.00 गुना पर बना हुआ है।

 तकनीकी संकेतकों में रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 63.15 के स्तर पर सकारात्मक क्षेत्र में टिका हुआ है, जबकि 14-अवधि का लाइव RSI 62 पर दर्ज किया गया है। यह रुझान दर्शाता है कि सूचकांक में तेजी की गति बनी हुई है और यह फिलहाल ओवरबॉट क्षेत्र में नहीं पहुंचा है। वहीं मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) 0.10 पर है जो सिग्नल लाइन -0.08 के मुकाबले 0.18 का सकारात्मक हिस्टोग्राम प्रस्तुत कर रहा है, जो तेजी का संकेत है। मूविंग एवरेजेस के मोर्चे पर, 20-दिवसीय EMA 99.66, 50-दिवसीय EMA 99.75 और 200-दिवसीय EMA 99.30 पर स्थित है, जबकि 50-दिवसीय SMA 99.94 और 200-दिवसीय SMA 99.16 पर बना हुआ है। 50-दिवसीय और 200-दिवसीय ईएमए के बीच बना गोल्डन क्रॉस लंबी अवधि के अपट्रेंड को मजबूती प्रदान करता है।

 अल्पकालिक प्रतिरोध और समर्थन स्तरों के संदर्भ में, 100.30 का स्तर मुख्य पिवट का काम कर रहा है। सूचकांक के लिए तात्कालिक प्रतिरोध R1 100.41 और R2 100.48 पर स्थित हैं, जबकि ऊपरी स्तरों पर पिछले सप्ताह का उच्चतम स्तर 100.55 और 20-दिवसीय प्रतिरोध 100.56 महत्वपूर्ण बाधाएं हैं। यदि सूचकांक इन स्तरों को पार करता है तो तेजी का दायरा बढ़ सकता है। इसके विपरीत, समर्थन स्तरों पर नजर डालें तो पहला सहारा S1 100.23 और दूसरा S2 100.13 पर मौजूद है, जबकि 20-दिवसीय समर्थन 98.60 के करीब है। बॉलिंगर बैंड्स (20, 2) का दायरा 98.45 से 100.43 के बीच है जिसका मध्य स्तर 99.44 है, और मौजूदा भाव बैंड के भीतर है। 27 के स्तर पर स्थित ADX एक सक्रिय ट्रेंड का संकेत दे रहा है, वहीं स्टोकेस्टिक फास्ट और सिग्नल लाइन 88 पर हैं। 0.43 का औसत ट्रू रेंज (ATR) दैनिक अस्थिरता को दर्शाता है, जिसे स्टॉप-लॉस बफर के रूप में देखा जा सकता है। 99.63 से नीचे दैनिक क्लोजिंग तेजी के रुझान में ठहराव ला सकती है।

 

## वैश्विक घटनाक्रम और अन्य प्रमुख परिसंपत्तियों का हाल

मुद्रा बाजार के अलावा व्यापक वित्तीय जगत में भू-राजनीतिक गतिविधियों पर भी बारीक नजर रखी जा रही है। सोमवार, 21 सितंबर से न्यूयॉर्क में शुरू हो रही संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और खाड़ी देशों के नेताओं के बीच होने वाली बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हैं। मध्य पूर्व में तनाव और वैश्विक कूटनीति के संभावित नतीजे कच्चे तेल की आपूर्ति और ऊर्जा लागत के जरिए वैश्विक महंगाई पर सीधा असर डाल सकते हैं, जिससे मुद्रा बाजार में हलचल तेज होने के आसार हैं।

 एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 0.7100 के ऊपर स्थिर बना रहा। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम रेट में कोई बदलाव न किए जाने से ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर दबाव पड़ा, लेकिन रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावनाओं और ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन से पहले इसे कुछ सहारा मिला। दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले डॉलर (USD/JPY) 157.00 के नीचे फिसलता नजर आया। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा किए गए रेट चेक के बाद संभावित बाजार हस्तक्षेप की आशंकाओं और जापान में छुट्टी के माहौल ने कारोबारियों को सतर्क रखा। इसके साथ ही रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व के तनाव ने भी डॉलर की गिरावट को सीमित करने में भूमिका निभाई। बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 फीसदी से बढ़ाकर 1.25 फीसदी कर दिया है, जो बाजार की अपेक्षाओं के अनुकूल रहा।

 कमोडिटी और डिजिटल एसेट बाजारों में भी मिलाजुला रुझान देखने को मिला। सोने की कीमतों में सप्ताह की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई, जहां शुक्रवार को 4,400 डॉलर के स्तर को छूने में नाकाम रहने के बाद पीली धातु 4,350 डॉलर के आसपास आ गई। निवेशक मध्य पूर्व संकट के घटनाक्रम और मुद्रास्फीति पर उसके प्रभावों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिसका सीधा असर बिना ब्याज वाली इस धातु पर पड़ता है। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में डॉगकॉइन ने अपनी रिकवरी जारी रखी और पिछले सप्ताह लगभग 6 फीसदी चढ़ने के बाद 0.088 डॉलर के ऊपर कारोबार किया। डॉगकॉइन स्पॉट ईटीएफ के जरिए संस्थागत मांग की वापसी, बेहतर होते तकनीकी संकेतक और व्हेल्स द्वारा की जा रही खरीदारी इस मीम कॉइन को समर्थन दे रही है। अमेरिका में इस सप्ताह घरेलू आर्थिक आंकड़ों की दृष्टि से कार्यक्रम हल्का है, जिसमें गुरुवार को आने वाली नए मकानों की बिक्री रिपोर्ट प्रमुख है। जुलाई में तेज गिरावट के बाद अगस्त में बिक्री 2.6 फीसदी सुधरकर 623K की रफ्तार तक पहुंचने का अनुमान है, जहां बंधक दरों में तेजी के बावजूद बिल्डरों द्वारा दी जा रही रियायतें बाजार को सहारा दे रही हैं।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर में जारी मजबूती और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी का असर वैश्विक व्यापार और व्यक्तिगत वित्त पर सीधे तौर पर पड़ेगा।

- **भारत में:** डॉलर मजबूत होने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और आयातित कच्चा तेल महंगा हो सकता है। इससे घरेलू बाजार में ईंधन और आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स के दामों में तेजी आ सकती है जिसका असर आम उपभोक्ता के मासिक बजट पर पड़ेगा।
- **वैश्विक स्तर पर:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर के मजबूत रहने से वैश्विक व्यापार में उधारी की लागत ऊंची बनी रहेगी। कंपनियों के लिए विदेशी कर्ज चुकाना महंगा साबित होगा और उभरते बाजारों से विदेशी संस्थागत पूंजी की निकासी की गति बढ़ सकती है।
- **सोना और कमोडिटी खरीदारों के लिए:** डॉलर इंडेक्स में उछाल के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर को प्राथमिकता दे सकते हैं, जिससे पीली धातु में अल्पकालिक नरमी देखने को मिल सकती है।
- **विदेशी मुद्रा और स्टॉक ट्रेडर्स के लिए:** डॉलर इंडेक्स के 100.30 के पिवट स्तर से ऊपर बने रहने से बुलिश रुझान मजबूत हुआ है। ट्रेडर्स को 99.63 के स्टॉप-लॉस स्तर और 100.56 के प्रतिरोध स्तर को ध्यान में रखकर अपनी पोजिशन व्यवस्थित करनी चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती का मुख्य कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा लगातार सख्त मौद्रिक रुख बनाए रखना और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है।

- **फेडरल रिजर्व का सख्त रुख:** अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगातार चिपचिपी महंगाई और मजबूत श्रम बाजार के चलते केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा रखने पर मजबूर है। सीएमई फेडवॉच टूल द्वारा इस साल एक और दर वृद्धि की 88 फीसदी संभावना दर्शाना डॉलर को सीधा सहारा दे रहा है।
- **नील काशकारी के नीतिगत बयान:** मिनीपोलिस फेड प्रमुख ने स्पष्ट किया कि मुद्रास्फीति केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं है बल्कि व्यापक अर्थव्यवस्था में मौजूद है। मजबूत आर्थिक विकास और उत्पादकता के बीच नीतिगत ढील न देने के उनके संकेत ने डॉलर की मांग बढ़ा दी।
- **वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव:** मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप में चल रहे तनाव के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग में इजाफा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान वैश्विक नेताओं की मुलाकातों से पहले निवेशक सतर्कता बरतते हुए डॉलर की खरीदारी कर रहे हैं।
- **जापान और चीन के नीतिगत फैसले:** बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें 1.25 फीसदी करने के बावजूद बाजार हस्तक्षेप की आशंकाओं और चीन द्वारा उधारी दरों को स्थिर रखने से डॉलर के मुकाबले अन्य एशियाई मुद्राओं में नरमी आई है।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) किस स्तर पर कारोबार कर रहा है?
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.15 फीसदी की तेजी के साथ 100.37 के करीब और स्पॉट स्तर पर 100.35 के आसपास कारोबार कर रहा है।

### 2. फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल ब्याज दर बढ़ाने की कितनी संभावना है?
सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, इस साल फेडरल रिजर्व द्वारा कम से कम एक और ब्याज दर वृद्धि किए जाने की संभावना लगभग 88 फीसदी है।

### 3. नील काशकारी ने मुद्रास्फीति को लेकर क्या बयान दिया?
उन्होंने कहा कि उच्च मुद्रास्फीति नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है और यह केवल कच्चे तेल तक सीमित न होकर अर्थव्यवस्था के अन्य हिस्सों में भी मौजूद है।

### 4. डॉलर इंडेक्स के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर कौन से हैं?
सूचकांक का 20-दिवसीय ईएमए 99.63 पर महत्वपूर्ण सपोर्ट है, जबकि 100.30 पिवट स्तर और 100.56 निकटवर्ती प्रतिरोध स्तर बना हुआ है।

### 5. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 फीसदी से बढ़ाकर 1.25 फीसदी कर दिया है।

### 6. सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार पर क्या असर देखा गया?
सोने की कीमत 4,400 डॉलर के स्तर को छूने में नाकाम रहने के बाद 4,350 डॉलर पर आ गई, जबकि डॉगकॉइन लगभग 6 फीसदी की साप्ताहिक बढ़त के साथ 0.088 डॉलर के ऊपर पहुंच गया।

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