# अमेरिकी डॉलर के सामने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव गहराया, 0.7050 तक फिसलने की आशंका

> फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और डॉलर की मजबूती के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7100 के नीचे फिसला है, जिससे आने वाले दिनों में इसके 0.7050 के स्तर तक जाने की संभावना बन रही है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-dollar-ke-samane-australian-dollar-para-dabava-gaharaya-0-7050-taka-phisalane-ki-ashnka-33654 · **Language:** Hindi
**Tags:** ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, अमेरिकी डॉलर, मुद्रा बाजार, फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ जापान, सोने का भाव, फॉरेक्स ट्रेडिंग

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मजबूत रुख के चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर लगातार बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। हालिया कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा टूटकर 0.7100 के अहम समर्थन स्तर से नीचे आ गई, जिससे आने वाले हफ्तों में इसमें और गिरावट की गुंजाइश बढ़ गई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक मौद्रिक रुख और वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताओं के बीच मुद्रा विश्लेषक अब इस जोड़ी में 0.7050 तक की गिरावट की संभावना तलाश रहे हैं। हालांकि एशियाई कारोबारी सत्र में निचले स्तरों पर कुछ लिवाली दर्ज की गई, लेकिन समग्र तकनीकी ढांचा अब भी कमजोरी की तरफ इशारा कर रहा है।

## हालिया सत्रों में तकनीकी उतार-चढ़ाव और स्तर
न्यू यॉर्क के कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने पहले तेजी दिखाते हुए 0.7140 का ऊपरी स्तर छुआ, लेकिन वहां बिकवाली तेज हो गई। इसके बाद मुद्रा तेजी से टूटकर 0.7100 से नीचे फिसल गई और 0.7075 के निचले स्तर तक पहुंच गई। सत्र के समापन पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7087 पर बंद हुआ, जिसमें 0.64 प्रतिशत की तीव्र गिरावट दर्ज की गई। 24 घंटे के नजरिए से देखा जाए तो हालांकि यह भारी गिरावट थोड़ी खिंची हुई और अत्यधिक दिखती है, लेकिन चार्ट पर स्थिरीकरण के ठोस संकेत फिलहाल नदारद हैं। विश्लेषकों का मानना है कि तात्कालिक दायरे में मुद्रा 0.7070 से 0.7115 के सीमित दायरे में झूल सकती है, जिसमें जोखिम का पलड़ा नीचे की तरफ ही झुका हुआ है।

मध्यम अवधि यानी एक से तीन हफ्तों के तकनीकी परिप्रेक्ष्य में नकारात्मक रुख पहले से ही गहरा रहा था। विश्लेषकों ने 11 सितंबर को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के 0.7160 के हाजिर भाव पर होने के दौरान नकारात्मक रुख का संकेत दिया था, जब 0.7120 तक की गिरावट की उम्मीद जताई गई थी। इसके बाद जब मुद्रा 0.7120 को तोड़कर 0.7109 तक गिरी, तो 15 सितंबर को हाजिर भाव 0.7135 पर रहते हुए यह स्पष्ट किया गया था कि शॉर्ट-टर्म स्थितियां ओवरसोल्ड जोन में हैं। साथ ही यह शर्त रखी गई थी कि 0.7050 की ओर जाने के लिए ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का 0.7100 के नीचे दैनिक बंद होना बेहद जरूरी है। कल मुद्रा ने 0.7100 का स्तर तोड़कर 0.7087 पर समापन दिया, जिससे अब 0.7050 तक की गिरावट का रास्ता खुल गया है। तकनीकी मोर्चे पर 0.7140 का स्तर अब मजबूत प्रतिरोध बन चुका है, जो पहले 0.7175 पर स्थित था। जब तक यह जोड़ी 0.7140 के ऊपर नहीं निकलती, तब तक इसमें वास्तविक स्थिरता की उम्मीद नहीं की जा सकती।

## एशियाई कारोबार में रिकवरी और केंद्रीय बैंकों का रुख
गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को निचले स्तरों पर नए खरीदार मिले, जिससे यह एक बार फिर 0.7100 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने में सफल रहा। अमेरिकी डॉलर की वह तेजी, जो फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत रुख के बाद जुलाई के अंत के अपने उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थी, फिलहाल थमती नजर आई। इसके अतिरिक्त, रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों और अमेरिका-ईरान राजनयिक प्रयासों की संभावनाओं ने जोखिम की भावना को थोड़ा बल दिया। जोखिम के प्रति संवेदनशील मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को इन वैश्विक कूटनीतिक और ब्याज दर से जुड़ी उम्मीदों से हल्का सहारा मिला।

वहीं दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी USD/JPY जोड़ी में भी हलचल देखी गई। गुरुवार को एशियाई सत्र में यह जोड़ी 156.00 के नीचे के संक्षिप्त गोते से संभलती दिखी और अपने तीन दिनों के विजयी क्रम को रोकने की कगार पर आ गई, जिसने पिछले दिन इसे लगभग दो सप्ताह के शीर्ष पर पहुंचा दिया था। फेड की बैठक के बाद सात सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंची डॉलर की रैली के सुस्त पड़ने और बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा नीतिगत सामान्यीकरण के आक्रामक रुख ने जापानी येन को समर्थन दिया है। इस बदलाव ने इस मुद्रा जोड़ी की बढ़त को सीमित रखा है, और बाजार प्रतिभागियों की निगाहें अब शुक्रवार को आने वाले बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले पर टिकी हुई हैं।

## सोने की कीमतों में सुधार और वैश्विक पूंजी प्रवाह का बदलता दौर
कमोडिटी बाजार में सोने ने यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में अपनी इंट्राडे बढ़त को आगे बढ़ाया। पीली धातु पिछले दिन छुए गए अपने लगभग छह सप्ताह के निचले स्तर से उबरने में कामयाब रही। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में मामूली गिरावट ने अमेरिकी डॉलर में मुनाफावसूली को प्रेरित किया, जिससे सोने की कीमतों को राहत मिली। फिर भी, फेडरल रिजर्व के सख्त ब्याज दर परिदृश्य और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने सेफ-हेवन ग्रीनबैक की गिरावट को सीमित रखा है, जिससे बिना ब्याज वाली संपत्ति यानी सोने की ऊपरी चाल भी बंधी हुई नजर आ रही है।

वैश्विक पूंजी प्रवाह के व्यापक नजरिए से देखें तो जापान की लंबे समय से चली आ रही बेहद कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की है। इस व्यवस्था ने जापानी येन को दुनिया भर में पूंजी जुटाने के सबसे सस्ते स्रोतों में से एक बना दिया था। जहां अधिकांश प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी की, वहीं जापान इस दौड़ में एक अपवाद बना रहा। लेकिन अब बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को और कड़ा करने की तैयारी के बीच यह ऐतिहासिक फंडिंग लाभ एक नए और नाजुक दौर में प्रवेश कर रहा है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में पूंजी की लागत पर व्यापक असर पड़ना तय है।

## इसका आप पर असर
मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की गिरावट से आयात लागत और अंतरराष्ट्रीय भुगतानों पर सीधा असर पड़ता है।

- **भारत में प्रभाव:** मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण भारतीय रुपये पर भी अप्रत्यक्ष दबाव बन सकता है। इससे विदेश यात्रा, विदेशी शिक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आयातित सामान महंगे हो सकते हैं।
- **फॉरेक्स और कमोडिटी ट्रेडर्स:** तकनीकी ब्रेकडाउन के कारण 0.7100 के नीचे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में शॉर्ट सेलिंग का जोखिम बढ़ गया है। ट्रेडर्स को 0.7050 के स्तर और 0.7140 के स्टॉप लॉस पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
- **सोने में निवेश:** डॉलर यील्ड में हल्की गिरावट से सोने में तात्कालिक रिकवरी दिखी है लेकिन फेड के सख्त रुख से बड़ी तेजी सीमित रहेगी। निवेशक किसी भी तेज उछाल के बजाय संभलकर खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं।
- **वैश्विक कर्ज और पूंजी लागत:** बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना से सस्ती जापानी पूंजी (येन कैरी ट्रेड) का दौर खत्म हो सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों और उभरते बाजारों में लिक्विडिटी की कमी का जोखिम पैदा हो सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों का रुझान सेफ-हेवन अमेरिकी डॉलर की तरफ बना हुआ है, जिससे अन्य प्रमुख मुद्राओं में तेज बिकवाली देखी गई है।

- **फेडरल रिजर्व का सख्त रुख:** फेड द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने के संकेतों ने डॉलर इंडेक्स को जुलाई के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया। इसने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी जोखिम से जुड़ी मुद्राओं पर तीव्र दबाव बनाया।
- **0.7100 का अहम तकनीकी ब्रेकडाउन:** ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पिछले कई सत्रों से कमजोर हो रहा था और 0.7100 के समर्थन स्तर के टूटने से स्वचालित तकनीकी बिकवाली शुरू हो गई। इस ब्रेकडाउन ने सीधे तौर पर 0.7050 तक की गिरावट की राह आसान कर दी।
- **जापानी नीति में बदलाव की आशंका:** बैंक ऑफ जापान द्वारा वर्षों बाद अपनी अति-उदार मौद्रिक नीति को सख्त करने की तैयारियों ने येन कैरी ट्रेड को प्रभावित किया है। इस वैश्विक लिक्विडिटी पुनर्संतुलन ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय दरों में अस्थिरता बढ़ा दी है।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए अगला लक्ष्य क्या है?
0.7100 के नीचे बंद होने के बाद तकनीकी तौर पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए अगला नकारात्मक लक्ष्य 0.7050 का स्तर है।

### 2. ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा में स्थिरता कब मानी जाएगी?
जब तक ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7140 के मजबूत प्रतिरोध स्तर को पार नहीं करता, तब तक इसमें वास्तविक स्थिरता की संभावना नहीं है।

### 3. गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में थोड़ा सुधार क्यों देखा गया?
अमेरिकी डॉलर की रैली के थमने, रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों और अमेरिका-ईरान कूटनीतिक चर्चाओं से इसे हल्का समर्थन मिला।

### 4. बैंक ऑफ जापान के आगामी फैसले का बाजार पर क्या असर हो सकता है?
जापान द्वारा नीतिगत दरें सख्त करने से दशकों पुराना सस्ता येन फंडिंग तंत्र बदल सकता है, जिससे वैश्विक निवेश लागत में इजाफा होगा।

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