अमेरिकी डॉलर के सामने कनाडाई डॉलर 5 अगस्त के बाद के सबसे निचले स्तर पर फिसला, व्यापार तनाव से बढ़ा दबाव कनाडा और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक टकराव और मजबूत डॉलर के चलते कनाडाई डॉलर 5 अगस्त के बाद के न्यूनतम स्तर पर आ गया है। कच्चे तेल में मामूली सुधार और बैंक ऑफ कनाडा के सख्त बयानों के बावजूद मुद्रा दबाव में दिख रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में कनाडाई मुद्रा भारी दबाव का सामना कर रही है, जहां अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह 5 अगस्त के बाद के अपने सबसे कमजोर पायदान तक लुढ़क गई है। मुद्रा की इस चाल पर नजर डालें तो यूएसडी/सीएडी में एक मजबूत तेजी के बाद ठहराव का दौर देखा जा रहा है। हालांकि ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए हल्के उछाल ने स्थानीय मुद्रा को थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन समग्र माहौल अब भी ग्रीनबैक यानी अमेरिकी डॉलर के पक्ष में झुका हुआ है। हाजिर बाजार में खरीदारी का रुख बना हुआ है और निवेशकों की नजरें सीमा पार व्यापारिक घटनाक्रमों पर टिकी हैं। व्यापार तनाव और नए शुल्कों से कनाडाई अर्थव्यवस्था पर संशय दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच व्यापारिक खींचतान लगातार गहराती जा रही है, जिसका सीधा असर विनिमय दर पर देखा जा रहा है। बैंक ऑफ कनाडा के प्रमुख मैक्लम ने स्पष्ट किया है कि वाशिंगटन की व्यापार नीतियों में अप्रत्याशित बदलावों ने उद्यमों और औद्योगिक घरानों के सामने भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अनिश्चित व्यापारिक रुख देश की हालिया आर्थिक प्रगति की गति को थाम सकता है या उसे पीछे धकेल सकता है। कड़वाहट की शुरुआत तब और तेज हो गई जब 22 अगस्त को संयुक्त राज्य अमेरिका ने लगभग 20 अरब डॉलर मूल्य के कनाडाई सामानों पर 50 प्रतिशत तक का भारी शुल्क लगा दिया। इसके जवाब में कनाडा ने भी कड़ा कदम उठाते हुए 8 सितंबर को करीब 20 अरब डॉलर के अमेरिकी सामानों पर 15 से 50 प्रतिशत तक के जवाबी टैरिफ लागू कर दिए, जिससे पूर्ण व्यापार युद्ध की आशंकाएं गहरा गई हैं। केंद्रीय बैंकों के रुख और ब्याज दरों का समीकरण मुद्रा की दिशा तय करने में नीतिगत ब्याज दरें बेहद निर्णायक भूमिका निभाती हैं। बैंक ऑफ कनाडा अंतर-बैंक उधारी दरों को तय करता है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में ऋण की लागत नियंत्रित होती है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक लक्ष्य मुद्रास्फीति को 1 से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना होता है। जब ब्याज दरें अपेक्षाकृत ऊंची रहती हैं, तो वह मुद्रा के लिए सकारात्मक मानी जाती हैं। इसके अलावा क्वांटिटेटिव इजिंग से तरलता बढ़ने पर मुद्रा कमजोर होती है, जबकि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग से उसमें मजबूती आती है। दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख ने भी ग्रीनबैक को सहारा दे रखा है। एचएसबीसी के रणनीतिकारों के अनुसार, 25 आधार अंकों के कदम के व्यापक अनुमानों के बावजूद निर्णय के बाद डॉलर और मजबूत हुआ। उनका मानना है कि समिति के सख्त रुख ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है, जिसमें 2026 के मध्य बिंदु से संकेत मिलता है कि साल के अंत से पहले एक और बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि 2027 में भी कुछ अधिकारी बढ़ोतरी की संभावना देख रहे हैं। हालांकि विश्लेषकों का यह भी कहना है कि बाजार पहले ही इन संभावनाओं को काफी हद तक भुना चुका है। कच्चे तेल की कीमत और कनाडाई डॉलर का सीधा नाता कनाडा के आर्थिक ढांचे में पेट्रोलियम का निर्यात सबसे बड़ा स्थान रखता है, जिसके चलते तेल की वैश्विक दरों में होने वाला उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर घरेलू करेंसी की मांग को तय करता है। यदि कच्चे तेल के भाव मजबूत होते हैं तो कनाडा के निर्यात मूल्य में बढ़ोतरी होती है, जिससे व्यापार संतुलन अनुकूल होने की संभावना बढ़ जाती है और मुद्रा को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत जब तेल की कीमतें नीचे आती हैं, तो कुल मांग घटने से मुद्रा पर गिरावट का दबाव बनता है। हाल ही में कच्चे तेल में आई नरमी ने महंगाई की चिंताओं को थोड़ा घटाया, जिसके चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट देखी गई और डॉलर के खरीदारों ने बहुत आक्रामक दांव लगाने से थोड़ा परहेज किया। व्यापक आर्थिक आंकड़े और आधुनिक मुद्रास्फीति का प्रभाव किसी भी देश की आर्थिक सेहत का आकलन करने के लिए सकल घरेलू उत्पाद, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई आंकड़े, रोजगार की स्थिति और उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण बेहद अहम माने जाते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था विदेशी पूंजी को आकर्षित करती है, जिससे बैंक ऑफ कनाडा को ब्याज दरें ऊंची रखने का आधार मिलता है और मुद्रा को बल मिलता है। आधुनिक वित्तीय व्यवस्था में, सीमा पार पूंजी नियंत्रण हटने के बाद, उच्च मुद्रास्फीति से निपटने के लिए जब केंद्रीय बैंक दरें बढ़ाते हैं तो आकर्षक रिटर्न की तलाश में विदेशी निवेशक पूंजी प्रवाह बढ़ाते हैं, जिससे स्थानीय करेंसी की मांग बढ़ जाती है। वहीं वैश्विक बाजार में जोखिम उठाने की धारणा भी मायने रखती है, जहां रिस्क-ऑन माहौल में कनाडाई डॉलर को बढ़त मिलती है, जबकि सुरक्षित निवेश की मांग होने पर डॉलर आगे रहता है। तकनीकी स्तर और लाइव बाजार आंकड़े लाइव सत्र के दौरान यूएसडी/सीएडी 1.40 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 1.40 की तुलना में 0.34 प्रतिशत की मजबूती दर्शाता है। इस मुद्रा जोड़ी का 52 सप्ताह का दायरा 1.35 से 1.42 के बीच रहा है, जबकि कारोबारी वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के 1.00 गुना के बराबर दर्ज किया गया है। तकनीकी संकेतकों में 14 दिवसीय आरएसआई 66 पर है और एमएसीडी 0.00 पर अपने सिग्नल के मुकाबले तेजी का संकेत दे रहा है। मूविंग एवरेज पर नजर डालें तो ईएमए20 1.39, ईएमए50 1.39 और ईएमए200 1.39 पर स्थित हैं, जहां ईएमए50 का ईएमए200 से ऊपर रहना यानी गोल्डन क्रॉस दीर्घकालिक तेजी की ओर इशारा करता है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 1.37 से 1.40 के दायरे में है और भाव ऊपरी बैंड के ऊपर बना हुआ है। एडीएक्स 24 पर दायरे में रहने का संकेत दे रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक में फास्ट लाइन 99 और सिग्नल लाइन 93 पर ओवरबॉट क्षेत्र में है। दैनिक अस्थिरता बफर के लिए एटीआर 0.01 पर है। प्रमुख तकनीकी स्तरों में दैनिक पिवट 1.40 पर है, जिसके ऊपर पहला प्रतिरोध 1.40 और दूसरा प्रतिरोध 1.41 पर स्थित है। वहीं गिरावट की स्थिति में 50.0 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर 1.3992 पर तात्कालिक मांग देखी जा रही है, जिसके नीचे 100 दिवसीय एसएमए 1.3953 पर सहारा दे सकता है। और गहरी बिकवाली आने पर 38.2 प्रतिशत रिट्रेसमेंट 1.3932 और 23.6 प्रतिशत स्तर 1.3857 पर संभावित खरीदार सक्रिय हो सकते हैं। वैश्विक घटनाक्रमों पर टिकी बाजार की निगाहें विश्व के अन्य वित्तीय बाजारों में भी तिमाही के आखिरी हफ्तों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के बीच गुरुवार को होने वाली उच्चस्तरीय बैठक पर निवेशकों की पैनी नजर है। साथ ही पश्चिम एशिया संकट से जुड़े ताजा घटनाक्रम भी विनिमय दरों को नई दिशा देंगे। अन्य मुद्राओं की बात करें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7100 के ऊपर मजबूती के साथ बना हुआ है, जबकि जापानी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दर को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत करने के बाद भी येन में सीमित हलचल रही। दूसरी तरफ सोने की कीमतें 4,400 डॉलर के नीचे सकारात्मक दायरे में कारोबार कर रही हैं। संप्रभु बॉन्ड बाजारों में पैदा हुआ तनाव और वैश्विक अनिश्चितता आने वाले दिनों में मुद्रा विनिमय दरों की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। इसका आप पर असर कनाडा और अमेरिका के बीच नए सीमा शुल्क और विनिमय दर में गिरावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आयात लागत और यात्रा खर्च पर पड़ने वाला है। • मुद्रा विनिमय दर: कनाडाई डॉलर कमजोर होकर 1.40 के करीब पहुंच गया है, जिसका मतलब है कि कनाडाई नागरिकों के लिए अमेरिकी सामान और अमेरिका की यात्रा करना महंगा हो जाएगा। विदेशी यात्रा की योजना बनाने वाले यात्रियों को अपने बजट में अतिरिक्त आवंटन रखना होगा। • आयात-निर्यात कारोबार: दोनों देशों द्वारा 20 अरब डॉलर के सामानों पर 15 से 50 प्रतिशत तक के नए शुल्क लागू किए गए हैं। इन शुल्कों के चलते खुदरा बाजार में आयातित वस्तुओं के अंतिम दाम बढ़ सकते हैं। • कच्चा तेल और ईंधन: कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर ऊर्जा कंपनियों और परिवहन लागत को प्रभावित करेगा। यदि तेल की कीमतें फिर गिरती हैं तो कनाडाई डॉलर पर बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है। • निवेशक और व्यापारी: फॉरेक्स बाजार में यूएसडी/सीएडी 1.40 के प्रमुख तकनीकी प्रतिरोध पर है और आरएसआई 66 पर पहुंच चुका है। ट्रेडर्स को 0.01 के एटीआर स्टॉप-लॉस बफर और 1.3992 के सपोर्ट स्तर पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी व्यापार नीति में अनिश्चितता और दोनों देशों द्वारा अरबों डॉलर के सामानों पर लगाए गए दंडात्मक शुल्कों के कारण कनाडाई डॉलर में यह तेज गिरावट आई है। साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव ने भी दबाव बढ़ाया है। • दंडात्मक आयात शुल्क: 22 अगस्त को अमेरिका द्वारा करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामानों पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने के बाद दोनों देशों में तनाव भड़का। कनाडा ने भी 8 सितंबर को लगभग 20 अरब डॉलर के अमेरिकी आयात पर 15 से 50 प्रतिशत तक के शुल्क लगाकर जवाबी कार्रवाई की। • नीतिगत अनिश्चितता: बैंक ऑफ कनाडा के प्रमुख मैक्लम ने आगाह किया है कि वाशिंगटन की अप्रत्याशित व्यापार नीतियों से व्यापार जगत में भारी अनिश्चितता है। इस माहौल से हालिया आर्थिक प्रगति के रुकने का जोखिम पैदा हो गया है। • केंद्रीय बैंकों का ब्याज दर अंतर: फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे भी बढ़ोतरी के संकेत देने से अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है। एचएसबीसी के अनुसार वर्ष 2026 और 2027 के अनुमानों ने डॉलर को सुरक्षित बढ़त दी है। • कच्चे तेल की नरमी: कनाडा के सबसे बड़े निर्यात उत्पाद कच्चे तेल में पूर्व में आई गिरावट ने मुद्रास्फीति की चिंताएं घटाकर बॉन्ड यील्ड पर असर डाला, जिससे कनाडाई मुद्रा को मिलने वाला स्वाभाविक समर्थन कमजोर हुआ। सवाल-जवाब 1. कनाडाई डॉलर किस तारीख के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा है? कनाडाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5 अगस्त के बाद के अपने सबसे निचले स्तर तक लुढ़क गया है। 2. अमेरिका और कनाडा के बीच किन तारीखों पर नए शुल्क लगाए गए? अमेरिका ने 22 अगस्त को 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामानों पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया, जिसके जवाब में कनाडा ने 8 सितंबर को 20 अरब डॉलर के अमेरिकी सामानों पर 15 से 50 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाया। 3. बैंक ऑफ कनाडा की ब्याज दर नीति का मुख्य लक्ष्य क्या है? बैंक ऑफ कनाडा का मुख्य उद्देश्य ब्याज दरों को आवश्यकतानुसार घटा-बढ़ाकर मुद्रास्फीति को 1 से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना है। 4. यूएसडी/सीएडी के लिए तात्कालिक तकनीकी सपोर्ट स्तर कौन से हैं? पहला तात्कालिक सपोर्ट 50.0 प्रतिशत रिट्रेसमेंट पर 1.3992 है, जिसके बाद 100 दिवसीय एसएमए 1.3953 और 38.2 प्रतिशत रिट्रेसमेंट 1.3932 पर स्थित है। 5. कच्चे तेल की कीमतें कनाडाई मुद्रा को कैसे प्रभावित करती हैं? पेट्रोलियम कनाडा का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है, इसलिए कच्चे तेल के दाम बढ़ने से निर्यात आय बढ़ती है और मुद्रा मजबूत होती है, जबकि दाम गिरने पर मुद्रा कमजोर होती है। 6. बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में ब्याज दरों में क्या बदलाव किया? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। https://trendkia.com/market/us-dollar-ke-samane-canadian-dollar-5-agasta-ke-bada-ke-sabase-nichale-stara-para-phisala-vyapara-tanava-se-barha-dabava-36083 TrendKia — Har trend, sabse pehle.