# अमेरिकी डॉलर की छलांग से पस्त हुआ ब्रिटिश पाउंड, 1.3140 के सपोर्ट पर टिकी नजरें

> वैश्विक बाजारों में अमेरिकी डॉलर की भारी मांग के बीच ब्रिटिश पाउंड फिसलकर 1.3200 के करीब आ गया है, जहां 1.3140 का स्तर अहम रक्षा कवच बना हुआ है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-dollar-ki-chhalanga-se-pasta-hua-british-pound-1-3140-ke-saporta-para-tiki-najaren-43110 · **Language:** Hindi
**Tags:** GBP/USD, अमेरिकी डॉलर, फॉरेक्स बाजार, फेडरल रिजर्व, ब्रिटिश पाउंड, मुद्रा बाजार, वित्त

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की जोरदार मजबूती ने अन्य प्रमुख मुद्राओं की रफ्तार थाम दी है, जिसके चलते ब्रिटिश पाउंड में तेज गिरावट दर्ज की गई। ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर यानी GBP/USD लुढ़ककर 1.3200 के स्तर के बेहद करीब पहुंच गई। मुद्रा कारोबारियों द्वारा फेडरल रिजर्व की आगामी अक्टूबर बैठक को लेकर आक्रामक ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदें कम किए जाने के बावजूद डॉलर का दबदबा कायम रहा। फ्रांस में पैदा हुई बजटीय चिंताओं ने निवेशकों को सुरक्षित ठिकाने के रूप में अमेरिकी मुद्रा की ओर रुख करने पर मजबूर कर दिया, जिससे ग्रीनबैक को भारी समर्थन मिला।

## डॉलर इंडेक्स की नई ऊंचाई और मुद्राओं की चाल
छह प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर की ताकत आंकने वाला डॉलर इंडेक्स यानी DXY 0.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ 102.53 के आसपास कारोबार करता दिखा। कारोबार के दौरान DXY ने 102.53 के स्तर को छूते हुए साल का नया शिखर भी बनाया। वैश्विक मुद्रा पटल पर डॉलर का प्रदर्शन यूरो के मुकाबले सबसे ज्यादा आक्रामक रहा। विनिमय तालिका के अनुसार, यूरो के सामने डॉलर को सबसे बड़ी बढ़त हासिल हुई, जबकि जापानी येन सहित अन्य मुद्राओं पर भी दबाव साफ महसूस किया गया। निवेशक अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत समझने के लिए सितंबर महीने के आईएसएम सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी ISM Services PMI के आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। 14:00 GMT पर आने वाले इस आंकड़े के 55.7 पर रहने का अनुमान है, जो अगस्त के 55.4 से अधिक है।

## दैनिक चार्ट पर तकनीकी संकेत और प्रतिरोध स्तर
दैनिक मूल्य चार्ट पर नजर डालें तो GBP/USD 1.3207 पर कारोबार करते हुए निकट अवधि में मंदी का रुख दिखा रहा है। हाजिर कीमत 20 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA के स्तर 1.3324 से नीचे टिकी हुई है। इस ऊपरी 20-दिवसीय EMA के नीचे बने रहने से साफ संकेत मिलता है कि बिकवाल पूरी तरह हावी हैं, जबकि खरीदार टूटे हुए ट्रेंड को वापस हासिल करने में संघर्ष कर रहे हैं। तकनीकी संकेतक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI (14) इस समय 33 के आसपास डोल रहा है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र के बिल्कुल मुहाने पर है। यह स्थिति दर्शाती है कि मंदी का दबाव बना हुआ है, लेकिन बिकवाली की रफ्तार में पहले जैसी तेजी के बजाय कुछ धीमापन आ रहा है।

ऊपरी स्तरों पर तेजी लौटने की स्थिति में 20-दिवसीय EMA यानी 1.3324 का स्तर पहला बड़ा प्रतिरोध साबित होगा। अगर खरीदार इस बाधा को पार कर लेते हैं, तभी तात्कालिक बिकवाली का दबाव कम होगा और सुधारात्मक उछाल का रास्ता साफ हो सकेगा। इस 20-दिवसीय EMA से ठीक नीचे 1.3300 का मनोवैज्ञानिक गोल स्तर भी एक अहम तकनीकी अड़चन बना हुआ है। जब तक जोड़ी इन स्तरों को पार नहीं करती, तब तक किसी बड़े उलटफेर की संभावना कमजोर बनी रहेगी।

## निचले स्तरों पर 1.3140 का अहम सहारा
नीचे की ओर रुख करने पर, साल का न्यूनतम स्तर यानी 1.3140 सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट क्षेत्र के रूप में सामने आता है। यदि मंदड़िए इस स्तर को निर्णायक रूप से तोड़ते हैं, तो यह जोड़ी 1.3100 के स्तर तक फिसल सकती है। इसके बाद 1.3000 का अहम मनोवैज्ञानिक स्तर परीक्षण के दायरे में आ जाएगा। तकनीकी जानकारों के अनुसार, मौजूदा गिरावट यदि नहीं थमी तो इन स्तरों पर बिकवाली का नया दौर शुरू हो सकता है, जिससे पाउंड पर लंबे समय के लिए मंदी के बादल मंडराने लगेंगे।

## फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का डॉलर पर प्रभाव
अमेरिका में मौद्रिक नीति का संचालन फेडरल रिजर्व करता है, जिसे मुख्य रूप से दो जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं: मूल्य स्थिरता बनाए रखना और अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना। इन लक्ष्यों को साधने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों में बदलाव करना है। जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं और महंगाई फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो वह ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। इससे अर्थव्यवस्था में उधारी की लागत बढ़ जाती है। इसका सीधा नतीजा अमेरिकी डॉलर की मजबूती के रूप में निकलता है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अमेरिका में पूंजी लगाने को एक आकर्षक विकल्प बना देता है। इसके विपरीत, जब महंगाई 2 प्रतिशत से नीचे आ जाती है या बेरोजगारी दर बहुत बढ़ जाती है, तो फेडरल रिजर्व उधार को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिससे डॉलर पर दबाव बनता है।

फेडरल रिजर्व एक वर्ष में आठ मौद्रिक नीति बैठकें आयोजित करता है। इन बैठकों में फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी FOMC आर्थिक परिस्थितियों की समीक्षा करती है और ब्याज दरों पर निर्णय लेती है। FOMC में बारह फेडरल अधिकारी शामिल होते हैं, जिनमें बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात सदस्य, फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के अध्यक्ष और बाकी ग्यारह क्षेत्रीय रिजर्व बैंकों के चार अध्यक्ष शामिल होते हैं, जो एक-एक वर्ष के कार्यकाल के लिए बारी-बारी से सेवा देते हैं।

## क्वांटिटेटिव ईजिंग और टाइटनिंग की भूमिका
अत्यधिक विषम या संकटकालीन परिस्थितियों में फेडरल रिजर्व क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी QE की नीति का सहारा ले सकता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत केंद्रीय बैंक वित्तीय प्रणाली में ऋण के प्रवाह को तेजी से बढ़ाता है। यह एक गैर-मानक नीतिगत उपाय है जिसका इस्तेमाल संकट के समय या बेहद कम महंगाई की स्थिति में किया जाता है। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान फेडरल रिजर्व ने इसी रणनीति को मुख्य हथियार बनाया था। इसमें फेडरल रिजर्व अतिरिक्त डॉलर छापकर वित्तीय संस्थानों से उच्च श्रेणी के बॉन्ड खरीदता है। आम तौर पर QE की नीति अमेरिकी डॉलर को कमजोर करती है।

इसके विपरीत, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी QT की प्रक्रिया पूरी तरह उलट होती है। इसमें फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और अपने पास मौजूद मैच्योर होने वाले बॉन्ड से मिलने वाले मूलधन का नए बॉन्ड खरीदने में पुनर्निवेश नहीं करता। यह प्रक्रिया सामान्य तौर पर अमेरिकी डॉलर के मूल्य के लिए सकारात्मक मानी जाती है और मुद्रा को मजबूती प्रदान करती है।

## वैश्विक मुद्राओं और जिंस बाजार में उठापटक
अमेरिकी डॉलर के बढ़ते प्रभाव का असर केवल पाउंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्य अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों में भी स्पष्ट दिखाई दिया। एशियाई कारोबार के दौरान AUD/USD में नई बिकवाली देखी गई और यह गिरकर 0.6900 की ओर आ गया। मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनावों के बीच डॉलर की नई ताकत ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को पछाड़ दिया। बाजार की नजरें अब कच्चे तेल की कीमतों, ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी RBA से जुड़ी अपेक्षाओं पर टिकी हैं।

उधर USD/JPY ने अपनी पिछली गिरावट की भरपाई करते हुए एशियाई सत्र में 158.00 का स्तर दोबारा छू लिया, जो एक सप्ताह के सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने डॉलर को सहारा दिया है, हालांकि बैंक ऑफ जापान यानी BoJ की आक्रामक नीतियों की संभावना और संभावित बाजार हस्तक्षेप का जोखिम येन को कुछ सहारा दे सकता है। दूसरी तरफ, सोने की कीमतें एशियाई सत्र में मामूली बढ़त को बरकरार रखने के लिए जूझती दिखीं और 4,150 डॉलर प्रति औंस के ठीक नीचे लगभग स्थिर कारोबार करती रहीं। अप्रैल 2025 के बाद से डॉलर के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचने से पीली धातु पर दबाव बना, हालांकि अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की घटती संभावनाओं ने सोने की गिरावट को सीमित रखा। इस बीच, EUR/USD मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया। यह जोड़ी 1.1312 के स्तर तक लुढ़क गई, जो जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यह गिरावट डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक उथल-पुथल और यूरोप में ऊर्जा की ऊंची कीमतों की चिंताओं का मिलाजुला परिणाम है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर की इस जोरदार मजबूती से वैश्विक मुद्रा व्यापार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

- **मुद्रा कारोबारियों पर प्रभाव:** विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबार करने वालों को 1.3140 के अहम सपोर्ट स्तर पर सतर्क रहना होगा। इस स्तर के टूटने पर स्टॉप-लॉस ऑर्डर सक्रिय हो सकते हैं और बिकवाली और तेज हो सकती है।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए संकेत:** डॉलर इंडेक्स के 102.53 के नए शिखर पर पहुंचने से उभरते बाजारों और अन्य परिसंपत्तियों से पूंजी की निकासी तेज हो सकती है। सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ने से अन्य संपत्तियों में अस्थिरता बढ़ेगी।
- **आयात-निर्यात पर असर:** ब्रिटेन और यूरोप में आयात महंगा होने की संभावना बढ़ जाएगी क्योंकि डॉलर के मुकाबले उनकी स्थानीय मुद्राएं कमजोर हो रही हैं। इससे यूरोपीय देशों में ऊर्जा और अन्य जरूरी सामानों की लागत में वृद्धि हो सकती है।
- **आगामी आर्थिक आंकड़ों की भूमिका:** आईएसएम सर्विसेज पीएमआई के 55.7 आने के अनुमान पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि यह डेटा जारी होते ही बाजार में नया उतार-चढ़ाव आ सकता है। मजबूत डेटा आने पर डॉलर की बढ़त और अधिक मजबूत हो सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
मुद्रा बाजार में यह बड़ा उलटफेर कई प्रमुख वैश्विक कारकों और नीतिगत बदलावों के संयुक्त असर के कारण देखने को मिला है।

- **सुरक्षित निवेश की मांग:** फ्रांस में वित्तीय और बजटीय चिंताओं के गहराने के चलते वैश्विक निवेशकों ने जोखिम वाली संपत्तियों से दूरी बनाई। इस अनिश्चितता के बीच पूंजी सुरक्षित ठिकाने के रूप में अमेरिकी डॉलर में ट्रांसफर हुई।
- **फेडरल रिजर्व की नीतिगत स्थिति:** हालांकि व्यापारियों ने अक्टूबर नीति बैठक के लिए फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक दर वृद्धि की उम्मीदों को कम कर दिया था, लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सापेक्ष मजबूती ने डॉलर को मजबूत बनाए रखा। जब तक ब्याज दरें ऊंची रहेंगी, अमेरिकी परिसंपत्तियों का आकर्षण बना रहेगा।
- **तकनीकी स्तरों का टूटना:** पाउंड 20-दिवसीय मूविंग एवरेज 1.3324 से नीचे कारोबार कर रहा था, जिससे मंदड़ियों को बढ़त मिली। इस प्रमुख तकनीकी स्तर के नीचे बने रहने से स्वचालित बिक्री के दबाव ने गिरावट को और तेज कर दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. GBP/USD में हालिया गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
अमेरिकी डॉलर की चौतरफा मजबूती और फ्रांस की वित्तीय चिंताओं के कारण निवेशकों द्वारा सुरक्षित संपत्ति के तौर पर डॉलर को चुनने से पाउंड में गिरावट आई है।

### 2. तकनीकी नजरिए से इस जोड़ी के लिए प्रमुख सपोर्ट स्तर कौन सा है?
इस जोड़ी के लिए 1.3140 का साल का निचला स्तर मुख्य सपोर्ट का काम कर रहा है, जिसके टूटने पर कीमत 1.3100 और फिर 1.3000 तक जा सकती है।

### 3. डॉलर इंडेक्स ने कारोबार के दौरान क्या नया मुकाम हासिल किया?
डॉलर इंडेक्स यानी DXY 0.42 प्रतिशत बढ़कर 102.53 पर पहुंच गया, जो इस साल का उसका नया उच्चतम स्तर है।

### 4. GBP/USD के लिए तत्काल प्रतिरोध स्तर कहां स्थित है?
ऊपरी स्तर पर 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी 1.3324 और उसके नीचे 1.3300 का स्तर तत्काल प्रतिरोध के रूप में काम कर रहे हैं।

### 5. अमेरिकी अर्थव्यवस्था से कौन सा प्रमुख आर्थिक आंकड़ा जारी होने वाला है?
सितंबर महीने का आईएसएम सर्विसेज पीएमआई डेटा 14:00 GMT पर जारी होगा, जिसके 55.7 रहने का अनुमान है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._