# अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में उछाल के बीच यूरो समेत प्रमुख करेंसी में तेज हलचल

> फ्रांसीसी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण यूरो, येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में कमजोरी दर्ज की गई है, जबकि सोने की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-dollar-ki-majabuti-aura-bonda-yilda-men-uchhala-ke-bicha-euro-sameta-pramukha-karensi-men-teja-halachala-41167 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूरो डॉलर दर, विदेशी मुद्रा बाजार, बॉन्ड यील्ड, अमेरिकी डॉलर, यूरोपियन सेंट्रल बैंक, सोने का भाव, हाइपरलिक्विड

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर का दबदबा लगातार बना हुआ है, जिसके चलते यूरो, जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी प्रमुख करेंसियों पर दबाव बढ़ रहा है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर चल रहे नए आकलन ने डॉलर को मजबूती दी है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों से उपजी महंगाई की चिंताओं ने अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब पहुंचा दिया है। दूसरी ओर, यूरोप में राजनीतिक और वित्तीय अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है, जिससे यूरो में गिरावट देखने को मिल रही है।

## फ्रांसीसी सरकारी बॉन्ड में बिकवाली और यूरो पर खतरा
यूरोपीय बॉन्ड बाजार में तनाव बढ़ता जा रहा है, जिसका सीधा असर साझा यूरोपीय मुद्रा पर पड़ सकता है। फ्रांस के सरकारी बॉन्ड यानी ओएटी (OAT) और जर्मनी के बेंचमार्क बॉन्ड यानी बुंड (Bund) के बीच यील्ड का अंतर तेजी से बढ़कर प्लस 127 बेसिस प्वाइंट (+127bp) तक पहुंच गया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रसार का इतनी तेजी से चौड़ा होना एक बेहद चिंताजनक संकेत है। यह स्थिति यूरो में एक अतिरिक्त रिस्क प्रीमियम जोड़ सकती है और साथ ही यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) की ब्याज दरों में बढ़ोतरी या सख्ती के चक्र को भी सीमित कर सकती है।

विश्लेषकों का कहना है कि अब तक यह स्पष्ट रूप से पहचानना कठिन रहा है कि फ्रांस के कर्ज में जारी बिकवाली का असर यूरो की कीमत में पूरी तरह शामिल हुआ है या नहीं। यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (EUR/USD) में जो गिरावट आई है और यह अपने वार्षिक निचले स्तरों तक पहुंची है, उसकी मुख्य वजह अकेले यूरो की कमजोरी नहीं बल्कि फेडरल रिजर्व की नीतियों का आक्रामक पुनर्मूल्यांकन रहा है। हालांकि, बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि यदि फ्रांस और जर्मनी के बॉन्ड का यह अंतर और अधिक बढ़ता है और अमेरिका के आर्थिक आंकड़े मजबूत बने रहते हैं, तो EUR/USD जोड़ी गिरकर 1.11 से 1.12 के दायरे में आ सकती है।

## मई 2025 के बाद सबसे निचले स्तर पर यूरो
यूरो और डॉलर की विनिमय दर गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। बुधवार को यह जोड़ी लुढ़ककर 1.1312 के स्तर को छू गई, जो जनवरी के उच्चतम शिखर 1.2082 की तुलना में काफी नीचे है। इस तेज गिरावट के पीछे अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को लेकर यूरोप की संवेदनशीलता जैसे कारक जिम्मेदार हैं। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि यूरोज़ोन में महंगाई का कोई नया झटका साझा मुद्रा को एक अप्रत्याशित सहारा प्रदान कर सकता है, जिससे यूरो में सुधार की उम्मीद बन सकती है।

## ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दो महीने के निचले स्तर पर स्थिर
एशियाई कारोबारी सत्र में गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) अपने दो महीने के निचले स्तर के आसपास 0.6900 के मध्य क्षेत्र में कारोबार करती दिखी। अमेरिका के पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) आंकड़ों ने अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को थोड़ा नरम जरूर किया, लेकिन कच्चे तेल से जुड़े महंगाई के जोखिम ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊपर बनाए रखा। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष अगस्त में तेजी से घटकर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD495M) रह गया, जिसका मुद्रा की चाल पर बहुत सीमित प्रभाव देखने को मिला।

## जापानी येन 158.00 के पार और हस्तक्षेप का डर
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन की कमजोरी जारी है और USD/JPY जोड़ी गुरुवार को एशियाई सत्र में 158.00 के ऊपर अपने साप्ताहिक दायरे के शीर्ष स्तर पर बनी रही। अमेरिका में नरम पीसीई आंकड़ों के बावजूद अमेरिकी यील्ड मल्टी-ईयर हाई के करीब टिकी हुई है। इसके अतिरिक्त अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध के चलते सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ रही है। डॉलर की यह सर्वव्यापी मजबूती बैंक ऑफ जापान (BoJ) की सख्त नीतियों की संभावनाओं और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में संभावित मुद्रा हस्तक्षेप के जोखिम को भी पीछे छोड़ रही है।

## सोने की चाल सुस्त और हाइपरलिक्विड में गिरावट
कमोडिटी और क्रिप्टो बाजार में भी सतर्कता का माहौल देखने को मिला है। यूरोपीय सत्र के पहले भाग में सोना 4,200 डॉलर के आसपास मामूली इंट्राडे बढ़त दर्ज करने के बाद लगभग बिना किसी बदलाव के कारोबार करता दिखा। बुधवार को आए नरम अमेरिकी महंगाई आंकड़ों के बाद भी डॉलर की लगातार खरीदारी जारी रही और बॉन्ड यील्ड में लगातार तेजी ने बिना ब्याज देने वाले सोने की मांग को सीमित कर दिया।

वहीं क्रिप्टोकरेंसी के मोर्चे पर हाइपरलिक्विड (HYPE) टोकन में गुरुवार को 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले दिन की 5 प्रतिशत बढ़त कुछ कम हो गई। संस्थागत निवेशकों की मांग में कमी आई है और बुधवार को 5 मिलियन डॉलर की शुद्ध निकासी देखी गई। तकनीकी दृष्टि से HYPE का आउटलुक मिलाजुला बना हुआ है क्योंकि इसकी कीमत 90 डॉलर के नीचे सीमित बनी हुई है।

## इसका आप पर असर
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में उछाल का असर आयात लागत, अंतरराष्ट्रीय यात्रा और विभिन्न निवेश परिसंपत्तियों पर पड़ता है।

- **मुद्रा विनिमय और यात्रा:** विदेश यात्रा या शिक्षा के लिए डॉलर खरीदने वाले यात्रियों को अधिक लागत चुकानी पड़ सकती है। डॉलर की मजबूती अन्य मुद्राओं के मुकाबले खरीदारी की लागत को बढ़ा देती है।
- **सोने के निवेशक:** सोने की कीमतों में बड़ी तेजी सीमित रहने के संकेत मिल रहे हैं। बॉन्ड यील्ड ऊंची रहने के कारण बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने में तत्काल तेज उछाल की गुंजाइश सीमित हो जाती है।
- **विदेशी मुद्रा ट्रेडर्स:** यूरो और डॉलर के 1.11 से 1.12 के स्तर तक फिसलने की आशंका से जोखिम प्रबंधन जरूरी हो गया है। करेंसी डेरिवेटिव में पोजीशन रखने वाले निवेशकों को सख्त स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल करना चाहिए।
- **क्रिप्टो निवेशक:** ऑल्टकॉइन और नए डिजिटल टोकन में संस्थागत पूंजी निकासी के बीच सावधानी बरतनी होगी। 5 मिलियन डॉलर के आउटफ्लो के बाद 90 डॉलर के नीचे सीमित स्तरों पर जोखिम बढ़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की मजबूती, कच्चे तेल से पैदा हुई महंगाई की चिंताएं और यूरोपीय ऋण बाजारों में बढ़ता तनाव इस वैश्विक मुद्रा दबाव की मुख्य वजह हैं।

- **फेडरल रिजर्व की नीति का पुनर्मूल्यांकन:** अमेरिकी फेड की ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख ने डॉलर को बढ़त दिलाई है। बाजार ने दरों में जल्द कटौती या नरमी की संभावनाओं को कम करके आंका है।
- **कच्चे तेल से महंगाई का दबाव:** तेल की बढ़ती कीमतों ने लंबी अवधि में महंगाई बने रहने की आशंकाओं को जन्म दिया है। इसके चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर बनी हुई है।
- **फ्रांसीसी बॉन्ड यील्ड का अंतर:** फ्रांस के ओएटी और जर्मनी के बुंड का स्प्रेड +127bp तक फैलने से यूरोज़ोन में वित्तीय अनिश्चितता बढ़ी है। यह जोखिम यूरो पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।
- **भू-राजनीतिक तनाव:** अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग तेज बनी हुई है।

## सवाल-जवाब

### 1. EUR/USD जोड़ी में हालिया गिरावट का क्या स्तर रहा है?
बुधवार को EUR/USD लुढ़ककर 1.1312 पर पहुंच गया, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है और जनवरी के 1.2082 के उच्च स्तर से काफी नीचे है।

### 2. फ्रांस और जर्मनी के बॉन्ड स्प्रेड में कितनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है?
फ्रांस के ओएटी और जर्मनी के बुंड के बीच यील्ड का अंतर तेजी से बढ़कर प्लस 127 बेसिस प्वाइंट (+127bp) तक पहुंच गया है।

### 3. सोने की कीमतों में तेजी क्यों रुक गई?
सोना 4,200 डॉलर के स्तर के पास रुका हुआ है क्योंकि मजबूत अमेरिकी डॉलर और बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर टिकी बॉन्ड यील्ड सोने की मांग को सीमित कर रही है।

### 4. हाइपरलिक्विड (HYPE) में कितनी गिरावट और निकासी दर्ज हुई?
हाइपरलिक्विड में गुरुवार को 2% की गिरावट आई और संस्थागत निवेशकों की मांग कमजोर होने से बुधवार को 5 मिलियन डॉलर का आउटफ्लो देखा गया।

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