अमेरिकी डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बैंकों के फैसलों से पहले वैश्विक मुद्राओं में हलचल, न्यूजीलैंड डॉलर और येन पर बढ़ा दबाव फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान की अहम बैठकों से पहले वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है, जबकि न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर समेत जापानी येन में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में केंद्रीय बैंकों की आगामी ब्याज दर नीतियों और व्यापक आर्थिक आंकड़ों को लेकर निवेशकों की सतर्कता बढ़ गई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी नीतिगत फैसले और ऊर्जा की कीमतों से जुड़ी महंगाई की चिंताओं ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी है, जिससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंच गई है। इसके उलट, जोखिम के प्रति संवेदनशील मानी जाने वाली मुद्राओं जैसे न्यूजीलैंड डॉलर और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर लगातार दबाव बना हुआ है। इसके साथ ही, लंबे समय तक वैश्विक स्तर पर सस्ते कर्ज का माध्यम रहे जापानी येन की दिशा भी बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक सख्ती के अनुमानों के चलते एक नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है। न्यूजीलैंड की दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों और केंद्रीय बैंक का रुख न्यूजीलैंड के दूसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) आंकड़ों के प्रकाशन को लेकर बाजार में सुगबुगाहट तेज है। पहली तिमाही में दर्ज की गई 0.8% की मजबूत तिमाही वृद्धि के मुकाबले दूसरी तिमाही में आर्थिक विस्तार की दर तेजी से घटकर मात्र 0.1% तिमाही आधार पर रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि रिज़र्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड के नीतिगत निर्णयों में आर्थिक वृद्धि के आंकड़े महंगाई और रोजगार की स्थिति की तुलना में दूसरे पायदान पर आते हैं, लेकिन प्रमुख आंकड़ों के केवल त्रैमासिक आधार पर जारी होने के कारण बाजार पर इनका असर कहीं अधिक गहरा हो सकता है। आईएनजी के अनुसार, रिज़र्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड का मुख्य ध्यान अब भी महंगाई और नौकरियों के बाजार पर केंद्रित बना हुआ है। बैंक की ओर से दिसंबर में एक अंतिम ब्याज दर वृद्धि किए जाने की उम्मीद बरकरार है, जबकि अक्टूबर में दरें बढ़ाए जाने की संभावनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं। इसके बावजूद, न्यूजीलैंड डॉलर और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर (NZD/USD) घरेलू आंकड़ों के बजाय वैश्विक जोखिम धारणा और अमेरिका से जुड़े घटनाक्रमों से अधिक संचालित हो रही है। फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित दर वृद्धि और जोखिम भरी संपत्तियों में कमजोरी के चलते गिरावट का यह रुख अभी कुछ समय और खिंच सकता है। मुद्रा का निचला स्तर फिलहाल 0.570 के आसपास रहने का आकलन है, जहां से साल के अंत तक फेड की दरों के नरम पुनर्मूल्यांकन के साथ 0.590 तक वापसी की गुंजाइश देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में लगातार तीसरे दिन कमजोरी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर भी बिकवाली का दबाव साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD लगातार तीसरे दिन नकारात्मक दायरे में रहा और मासिक निचले स्तर के करीब कारोबार करते हुए 0.7100 के स्तर का बचाव करता नजर आया। अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के अपने उच्च स्तर के पास मजबूती से डटा हुआ है। मध्य पूर्व में गहराते तनाव ने भी सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में अमेरिकी डॉलर को समर्थन दिया है, जबकि विकास और जोखिम से जुड़े ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को नुकसान झेलना पड़ा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से प्रेरित मुद्रास्फीति का दबाव बना रहेगा और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड ऊंची रहेगी, तब तक ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी कमोडिटी से जुड़ी मुद्राओं के लिए बड़ी राहत मिलना मुश्किल रहेगा। निवेशक किसी भी नए दांव से पहले प्रमुख केंद्रीय बैंकों के बयानों का इंतजार कर रहे हैं। जापानी येन और बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठक जापानी मुद्रा के मोर्चे पर, बुधवार के एशियाई सत्र में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में कमजोरी दर्ज की गई और USD/JPY 155.00 के स्तर के ऊपर एक नए साप्ताहिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। तेल की कीमतों से उपजी महंगाई और फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की उम्मीदों ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को लगातार बढ़ावा दिया है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अमेरिकी डॉलर की वैश्विक आरक्षित मुद्रा की स्थिति को और सुदृढ़ किया है। हालांकि, आज होने वाले फेडरल रिजर्व के फैसले और गुरुवार से शुरू हो रही बैंक ऑफ जापान की बैठक से पहले ट्रेडर्स सतर्क हैं, जिसके चलते यह जोड़ी 155.00 के मध्य स्तर से नीचे बनी हुई है। जापान की अत्यंत निम्न ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की है, जिससे जापानी येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। जहां अधिकांश प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी की, वहीं जापान इस दौड़ से पूरी तरह अलग बना रहा। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति को और कड़ा करने की उम्मीदों के साथ, यह ऐतिहासिक फायदा एक पूरी तरह से नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जिससे वैश्विक निवेश प्रवाह में व्यापक बदलाव आ सकते हैं। अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़े और फेडरल रिजर्व की चुनौतियां वर्तमान बाजार स्थितियों के केंद्र में फेडरल रिजर्व का निर्णय सबसे महत्वपूर्ण बना हुआ है। इस फैसले से ठीक पहले आए अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़ों ने नीति निर्माताओं के सामने जटिल स्थिति पैदा की थी। अगस्त महीने की मजबूत अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट ने ब्याज दरों के वायदा बाजार में फेड की ओर से और अधिक सख्त नीतिगत कदमों की आशंकाओं को जन्म दिया था। हालांकि, इसके ठीक बाद आए अमेरिकी अगस्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों ने बाजार के लिए कहीं अधिक निर्णायक भूमिका निभाई, जिसने केंद्रीय बैंक के अगले कदमों को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। सोने की कीमतों में सीमित बढ़त और ट्रेडर्स का संयम यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सोने की कीमतों में मामूली दैनिक बढ़त दर्ज की गई, लेकिन इसमें नए खरीदारों की कमी देखी गई और यह 4,350 डॉलर के स्तर से नीचे ही सीमित रहा। दो सप्ताह के उच्च स्तर से अमेरिकी डॉलर में हुए आंशिक मुनाफावसूली ने पीली धातु को कुछ सहारा दिया। इसके बावजूद, केंद्रीय बैंकों के बड़े फैसलों से उत्पन्न होने वाले जोखिमों को देखते हुए बाजार प्रतिभागी आक्रामक दिशात्मक दांव लगाने से हिचक रहे हैं और फिलहाल किनारे बैठकर स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर में मजबूती और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के फैसलों से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय और आयात लागत पर सीधा असर पड़ सकता है। • विदेश यात्रा और पढ़ाई: मजबूत होते अमेरिकी डॉलर के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा, विदेशी विश्वविद्यालयों की फीस और विदेश में रहने का खर्च अधिक महंगा हो जाएगा। विदेश जाने की योजना बना रहे लोगों को अग्रिम मुद्रा विनिमय दरों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। • आयातित वस्तुएं और ऊर्जा: कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और डॉलर में तेजी से ईंधन और आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामानों की लागत बढ़ सकती है। इससे आने वाले हफ्तों में घरेलू बाजार में परिवहन लागत और खुदरा महंगाई पर दबाव देखने को मिल सकता है। • गोल्ड और कमोडिटी निवेशक: सोने की कीमतें फिलहाल 4,350 डॉलर के नीचे स्थिर बनी हुई हैं और नीतिगत फैसलों के बाद इसमें तेज उतार-चढ़ाव आ सकता है। सोने में निवेश करने वालों को केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर घोषणाओं के बाद ही नई खरीदारी की योजना बनानी चाहिए। • करेंसी ट्रेडर्स: न्यूजीलैंड डॉलर (NZD/USD) के 0.570 से 0.590 के दायरे में रहने और येन में संभावित नीतिगत बदलाव से फॉरेक्स बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी। मुद्रा वायदा में ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को सख्त स्टॉप-लॉस बनाए रखने की जरूरत है। ऐसा क्यों हुआ वैश्विक मुद्रा बाजार में यह उथल-पुथल केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक नीतियों को कड़ा करने के अनुमानों, आर्थिक विकास में सुस्ती और तेल-आधारित मुद्रास्फीति के एक साथ उभरने के कारण हुई है। • अमेरिकी ब्याज दरों और महंगाई का दबाव: अमेरिका में अगस्त के मजबूत रोजगार और सीपीआई आंकड़ों ने संकेत दिया कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में वृद्धि का सिलसिला जारी रख सकता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को फिर से हवा दी, जिससे बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंच गई। • न्यूजीलैंड की विकास दर में तेज गिरावट: पहली तिमाही की 0.8% की जीडीपी वृद्धि के बाद दूसरी तिमाही में वृद्धि घटकर मात्र 0.1% रहने के अनुमानों ने स्थानीय अर्थव्यवस्था पर मंदी का साया डाला है। आंकड़ों की कम आवृत्ति के कारण बाजार में इन अनुमानों का असर और अधिक तीव्र दिखाई दे रहा है। • बैंक ऑफ जापान का संभावित नीतिगत बदलाव: एक दशक से अधिक समय तक शून्य के करीब ब्याज दरों के जरिए वैश्विक निवेश को समर्थन देने के बाद जापान द्वारा नीतिगत सख्ती की संभावना बनी है। इससे लंबे समय से चले आ रहे येन-आधारित कैरी ट्रेड मॉडल में रुकावट की आशंका पैदा हो गई है। • भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग: मध्य पूर्व और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को जोखिम भरे बाजारों से हटाकर अमेरिकी डॉलर की ओर आकर्षित किया है। यह सुरक्षित निवेश मांग अन्य प्रमुख मुद्राओं पर अतिरिक्त दबाव बना रही है। सवाल-जवाब 1. न्यूजीलैंड की दूसरी तिमाही की जीडीपी दर क्या रहने का अनुमान है? दूसरी तिमाही में न्यूजीलैंड की जीडीपी वृद्धि दर घटकर मात्र 0.1% तिमाही आधार पर रहने का अनुमान है, जबकि पहली तिमाही में यह 0.8% थी। 2. रिज़र्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड द्वारा ब्याज दरों पर क्या कदम उठाने की उम्मीद है? केंद्रीय बैंक द्वारा दिसंबर में एक अंतिम दर वृद्धि की उम्मीद की जा रही है, जबकि अक्टूबर में भी दरें बढ़ाए जाने की संभावना बढ़ रही है। 3. न्यूजीलैंड डॉलर और अमेरिकी डॉलर (NZD/USD) का संभावित दायरा क्या है? साल के अंत तक NZD/USD के 0.570 के निचले स्तर से लेकर 0.590 तक के दायरे में कारोबार करने का अनुमान जताया गया है। 4. अमेरिकी डॉलर में हालिया मजबूती की मुख्य वजह क्या है? फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित दर वृद्धि, कच्चे तेल से प्रेरित महंगाई और मध्य पूर्व में तनाव के चलते डॉलर को सुरक्षित निवेश के रूप में भारी समर्थन मिला है। 5. बैंक ऑफ जापान की बैठक को लेकर बाजार में क्या उम्मीदें हैं? बाजार को उम्मीद है कि बैंक ऑफ जापान इस सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति को और सख्त कर सकता है, जिससे वर्षों पुरानी अत्यंत सस्ती फंडिंग का दौर प्रभावित होगा। 6. सोने की कीमतें किस स्तर के नीचे बनी हुई हैं? सोने की कीमतें यूरोपीय सत्र में मामूली बढ़त के बावजूद 4,350 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे सीमित बनी हुई हैं। https://trendkia.com/market/us-dollar-ki-majabuti-aura-kendriya-bainkon-ke-phaisalon-se-pahale-vaishvika-mudraon-men-halachala-new-zealand-dollar-aura-yen-par-33793 TrendKia — Har trend, sabse pehle.