अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्रिटेन के सुस्त सर्विस आंकड़ों से पाउंड 12 हफ्तों के निचले स्तर पर फिसला ब्रिटेन के सेवा क्षेत्र में मंदी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कड़े रुख से पाउंड स्टर्लिंग 1.3270 के पास आ गया है, जबकि वैश्विक बाजारों में डॉलर की व्यापक बढ़त देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड पर दबाव गहराता जा रहा है, जिससे जीबीपी/यूएसडी (GBP/USD) मुद्रा जोड़ी फिसलकर 1.3270 के स्तर के आसपास पहुंच गई है। यह गिरावट पाउंड को लगभग 12 सप्ताह के निचले स्तर पर ले आई है। इस तेज बिकवाली के पीछे दो मुख्य कारक काम कर रहे हैं: एक तरफ ब्रिटेन के ताजा आर्थिक आंकड़ों में सेवा क्षेत्र की सुस्त रफ्तार ने निवेशकों को निराश किया है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी डॉलर को लगातार मजबूत समर्थन मिल रहा है। वैश्विक स्तर पर निवेशक अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीतियों और भू-राजनीतिक मोर्चों पर नजर बनाए हुए हैं, जिससे पाउंड में सुधार की गुंजाइश सीमित हो गई है। ब्रिटेन के ताजा आर्थिक आंकड़े: मैन्युफैक्चरिंग में सुधार, लेकिन सर्विसेज ने बढ़ाई चिंता एसएंडपी ग्लोबल (S&P Global) द्वारा जारी किए गए सितंबर महीने के प्रारंभिक परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई (PMI) आंकड़ों ने ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था की मिली-जुली तस्वीर पेश की है। आंकड़ों के अनुसार ब्रिटेन की मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि में अप्रत्याशित सुधार दर्ज किया गया है। विनिर्माण पीएमआई अगस्त के 51.7 से बढ़कर सितंबर में 52.0 पर पहुंच गया। बाजार को आशंका थी कि इसमें मामूली सुस्ती आएगी और यह 51.6 पर रहेगा, लेकिन कारखानों के बेहतर उत्पादन ने इस अनुमान को गलत साबित कर दिया। हालांकि अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े हिस्से यानी सर्विस सेक्टर से निराशा हाथ लगी है। सेवा क्षेत्र का पीएमआई अगस्त के 52.5 से घटकर सितंबर में 51.7 पर आ गया। बाजार विश्लेषक इसके 52.0 पर रहने की उम्मीद कर रहे थे। सेवाओं में आई इस सुस्ती का सीधा असर समग्र आर्थिक गतिविधियों पर पड़ा, जिसके चलते ब्रिटेन का कंपोजिट पीएमआई सूचकांक अगस्त के 52.5 से गिरकर सितंबर में 51.7 पर दर्ज हुआ। सेवा क्षेत्र में मांग की कमी और विकास की धीमी रफ्तार ने स्टर्लिंग पर सीधा दबाव डाला है। अमेरिकी डॉलर की चौतरफा बढ़त और फेडरल रिजर्व का रुख दूसरी तरफ, अमेरिकी मुद्रा बाजार में पूरी मजबूती के साथ टिकी हुई है। निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में अपनी मौद्रिक सख्ती जारी रख सकता है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की नई कोशिशों से जुड़ी सकारात्मक उम्मीदों ने भी बाजार की धारणा को सहारा दिया है। आईएनजी (ING) के रणनीतिकारों का कहना है कि ऊर्जा की गिरती कीमतों और जोखिम भरे माहौल के बावजूद डॉलर लगातार लचीलापन दिखा रहा है, जो यह साबित करता है कि फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का असर अभी भी बाजारों पर हावी है। एशियाई कारोबार में अन्य प्रमुख मुद्राओं और संपत्तियों की स्थिति डॉलर की मजबूती केवल ब्रिटिश पाउंड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर अन्य वैश्विक मुद्राओं और कीमती धातुओं पर भी साफ देखा जा रहा है। बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में भी नई बिकवाली देखने को मिली और एयूडी/यूएसडी (AUD/USD) 0.7100 के स्तर का परीक्षण कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया के ताजा फ्लैश पीएमआई आंकड़ों में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र संकुचन में चला गया है, जबकि सेवा क्षेत्र लगातार दूसरे महीने धीमी गति से विस्तार कर रहा है। इसके साथ ही गुरुवार को होने वाली ट्रंप-शी बैठक से पहले व्यापारी सतर्क रुख अपना रहे हैं, जबकि अमेरिका-ईरान अप्रत्यक्ष वार्ताओं को बाजार ने नजरअंदाज कर दिया है। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) एशियाई सत्र में 157.00 के मध्य स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जो पिछले शुक्रवार को छूए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब है। बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। यह फैसला 7-2 के बहुमत से लिया गया और यह पूरी तरह बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था। हालांकि बैंक ऑफ जापान के इस नरम दर वृद्धि रुख ने येन को कमजोर बनाए रखा है। यद्यपि येन में संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंका डॉलर की बढ़त को एक सीमित दायरे में बांध रही है। कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा। यूरोपीय कारोबारी सत्र के पहले हिस्से में सोने ने अपनी इंट्राडे गिरावट को बढ़ाया और पिछले कारोबारी सत्र में 4,300 डॉलर से नीचे के स्तर से हुई रिकवरी का एक हिस्सा गंवा दिया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत रुख के कारण डॉलर में लगातार खरीदारी बनी हुई है, जिससे बिना ब्याज वाली इस पीली धातु से निवेशकों की पूंजी बाहर निकल रही है। इसका आप पर असर वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और पाउंड में कमजोरी से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विदेश यात्रा और आयात लागत पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। • भारतीय यात्रियों और छात्रों पर असर: ब्रिटेन में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए पाउंड की कमजोरी ट्यूशन फीस और रहने के खर्च के लिहाज से राहत दे सकती है। दूसरी तरफ, अमेरिका जाने वाले छात्रों और पर्यटकों के लिए मजबूत डॉलर के कारण खर्च में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। • आयात और ईंधन की लागत: वैश्विक बाजारों में मजबूत डॉलर कच्चे तेल और जरूरी आयातों के बिल को बढ़ा सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर आयातित वस्तुओं और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों पर दबाव बन सकता है। • विदेशी मुद्रा व्यापारियों के लिए: मुद्रा बाजार में कारोबार करने वालों के लिए 1.3270 का स्तर जीबीपी/यूएसडी में अहम सपोर्ट क्षेत्र बन गया है। ट्रेडर्स को आने वाले दिनों में फेडरल रिजर्व के बयानों और भू-राजनीतिक वार्ताओं पर सख्त नजर रखनी चाहिए। • सोना निवेशकों के लिए प्रभाव: मजबूत डॉलर और सख्त ब्याज दरों की संभावना के चलते सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। 4,300 डॉलर के स्तर के आसपास शॉर्ट टर्म में पीली धातु में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ ब्रिटिश पाउंड में आई हालिया तेज गिरावट और अमेरिकी डॉलर की चौतरफा तेजी के पीछे ब्रिटेन के कमजोर आर्थिक आंकड़े, केंद्रीय बैंकों के नीतिगत मतभेद और भू-राजनीतिक कारक जिम्मेदार हैं। • ब्रिटेन के सर्विस पीएमआई में गिरावट: ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था काफी हद तक सेवा क्षेत्र पर निर्भर है, जिसका सितंबर पीएमआई 52.5 से गिरकर 51.7 पर आ गया। बाजार को 52.0 की उम्मीद थी, इसलिए इस आंकड़े के कमजोर रहने से अर्थव्यवस्था की गति धीमी होने की चिंताएं बढ़ गईं। • फेडरल रिजर्व का सख्त नीतिगत रुख: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आने वाले महीनों में और अधिक मौद्रिक सख्ती करने की बाजार अपेक्षाओं ने डॉलर को मजबूत समर्थन दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की पूंजी डॉलर की ओर आकर्षित हो रही है। • भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कूटनीति: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के नए प्रयासों को लेकर बाजार में बनी आशावादिता ने अमेरिकी परिसंपत्तियों में भरोसा बढ़ाया है। इसके अलावा ट्रंप और शी के बीच होने वाली आगामी बैठक से पहले भी डॉलर में सुरक्षित निवेश की मांग बनी हुई है। • बैंक ऑफ जापान का नरम रवैया: बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरें 1.00% से बढ़ाकर 1.25% तो कीं, लेकिन उसके नरम रुख ने येन को कमजोर रखा। इस वजह से डॉलर इंडेक्स को अन्य मुद्राओं के मुकाबले अतिरिक्त बढ़त हासिल हुई। सवाल-जवाब 1. ब्रिटिश पाउंड 12 हफ्तों के निचले स्तर पर क्यों फिसला? ब्रिटेन के सेवा क्षेत्र का पीएमआई घटकर 51.7 पर आ गया, जो उम्मीद से कम था। साथ ही अमेरिकी डॉलर में भारी मजबूती के कारण पाउंड 1.3270 के पास आ गया। 2. ब्रिटेन के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई आंकड़े क्या रहे? सितंबर में ब्रिटेन का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 51.7 से बढ़कर 52.0 हो गया, जबकि सर्विसेज पीएमआई 52.5 से घटकर 51.7 पर आ गया। 3. अमेरिकी डॉलर में तेजी की मुख्य वजह क्या है? अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आने वाले महीनों में और मौद्रिक सख्ती की उम्मीदों तथा अमेरिका-ईरान शांति समझौते से जुड़ी आशावादिता से डॉलर मजबूत बना हुआ है। 4. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों पर क्या फैसला लिया? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। 5. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और सोने पर डॉलर की मजबूती का क्या असर पड़ा? ऑस्ट्रेलियाई डॉलर गिरकर 0.7100 के स्तर पर आ गया, जबकि सोने की कीमतों में भी गिरावट जारी रही और यह 4,300 डॉलर के नीचे के स्तरों से हुई रिकवरी गंवा बैठा। https://trendkia.com/market/us-dollar-ki-majabuti-aura-uk-ke-susta-sarvisa-ankaron-se-pound-12-haphton-ke-nichale-stara-para-phisala-37094 TrendKia — Har trend, sabse pehle.