# अमेरिकी डॉलर की मजबूती के आगे ब्रिटिश पाउंड दबाव में, 1.3200 के स्तर पर टिका

> कच्चे तेल से भड़की महंगाई और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के बीच ब्रिटिश पाउंड 1.3200 के करीब स्थिर हुआ, जबकि फेड और बैंक ऑफ इंग्लैंड की विपरीत नीतियों ने बढ़त सीमित की।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-dollar-ki-majabuti-ke-age-british-pound-dabava-men-1-3200-ke-stara-para-tika-38181 · **Language:** Hindi
**Tags:** ब्रिटिश पाउंड, अमेरिकी डॉलर, फॉरेक्स बाजार, फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड, ट्रेजरी बॉन्ड, कच्चा तेल, वित्त

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ब्रिटिश पाउंड ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.3200 के दायरे में खुद को संभालने की कोशिश की। यह स्तर 29 जून के बाद का सबसे निचला स्तर रहा है, जिसे पिछले कारोबारी दिन छुआ गया था। दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंचने के बाद थोड़ा सुस्ताता हुआ दिखाई दिया, लेकिन मुद्रा बाजार का बुनियादी ढांचा अब भी डॉलर के पक्ष में झुका हुआ है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और बैंक ऑफ इंग्लैंड के नीतिगत परिदृश्य में अंतर के चलते विश्लेषक पाउंड में किसी भी आक्रामक तेजी की स्थिति को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। लाइव आंकड़ों के अनुसार, GBP/USD वर्तमान में 1.32 के भाव पर बना हुआ है, जो पिछले बंद स्तर 1.32 से 0.17 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।

## तकनीकी स्तरों पर बिकवाली का दबाव बरकरार
तकनीकी विश्लेषण के नजरिए से देखें तो ब्रिटिश पाउंड लंबी अवधि के 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) के नीचे कारोबार कर रहा है। यह स्थिति स्पष्ट संकेत देती है कि जब तक बिकवाल हावी हैं, तब तक किसी भी उछाल पर ऊपरी स्तरों पर रुकावट देखने को मिलेगी। चार्ट पर 200-दिवसीय SMA 1.3452 पर स्थित है, जो खरीदारों के लिए सबसे बड़ी तात्कालिक बाधा बना हुआ है। जब तक यह स्तर फिर से हासिल नहीं होता, तब तक मौजूदा मंदी का रुख समाप्त होना मुश्किल है। नीचे की ओर, यदि भाव 1.3300 के स्तर से नीचे फिसलते हैं, तो जून महीने में बना 1.3265 का साल का निचला स्तर दोबारा सामने आ जाएगा। इसके नीचे बिकवाली का सिलसिला बढ़ने से मंदी के सौदे करने वालों को नई ताकत मिलेगी और पाउंड में आगे और गिरावट का रास्ता खुल सकता है।

वर्तमान लाइव तकनीकी संकेतों के मुताबिक, 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 25 पर पहुंच गया है, जो ओवरसोल्ड स्थिति को दर्शाता है। एमएसीडी (MACD) शून्य से 0.01 नीचे है और अपने सिग्नल के मुकाबले मंदी के संकेत दे रहा है। इसके अलावा, बोलिंजर बैंड के दायरे 1.33 से 1.37 के बीच हैं, जहां वर्तमान कीमत निचले बैंड से भी नीचे चल रही है। 14-दिवसीय एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 30 पर होने के कारण मौजूदा गिरावट का ट्रेंड मजबूत बना हुआ है। पाउंड का 52-सप्ताह का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच रहा है, जबकि 20-दिवसीय सपोर्ट 1.32 और रेजिस्टेंस 1.36 के आसपास दर्ज किया गया है।

## कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की उड़ान
अमेरिकी डॉलर की तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दो दिनों से जारी उछाल एक बड़ा कारण बनकर उभरा है। ऊर्जा कीमतों में इस वृद्धि ने वैश्विक बाजारों में महंगाई की आशंकाओं को फिर से जिंदा कर दिया है। फेडरल रिजर्व की सख्त ब्याज दर नीति के बीच, इन मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं ने अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के रिकॉर्ड उच्च स्तर तक पहुंचा दिया है। बढ़ती यील्ड सीधे तौर पर अमेरिकी डॉलर को समर्थन दे रही है, जिससे अन्य प्रमुख मुद्राओं पर दबाव गहराता जा रहा है। इसी सप्ताह मुद्रा बाजार के हीटमैप के अनुसार, अमेरिकी डॉलर ने अधिकांश प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत बढ़त हासिल की, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के खिलाफ इसकी तेजी सबसे ज्यादा देखने को मिली।

बढ़ती यील्ड को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कदम उठाए हैं। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को घोषणा की कि ट्रेजरी विभाग दीर्घकालिक बॉन्ड की यील्ड को थामने के प्रयासों के तहत 6 अरब डॉलर मूल्य के ट्रेजरी बॉन्ड का एक और बायबैक करेगा। यह इस दिशा में उठाया गया दूसरा विस्तारित बायबैक कार्यक्रम है, हालांकि बाजार में डॉलर की तेजी पर इसका तात्कालिक असर सीमित ही दिखा है।

## अन्य वैश्विक मुद्राओं और सोने की स्थिति
डॉलर के इस व्यापक दबदबे का असर केवल ब्रिटिश पाउंड तक सीमित नहीं रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) एशियाई सत्र के दौरान 200-दिवसीय SMA के नीचे फिसलने के बाद 0.7000 के स्तर के पास बेहद कमजोर स्थिति में आ गया और अगस्त की शुरुआत के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों पर भी भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत अमेरिकी डॉलर भारी पड़ते दिखे।

दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले डॉलर (USD/JPY) एशियाई सत्र में थोड़ा नीचे आया और 159.00 के तीन सप्ताह के शीर्ष स्तर पर ठहर गया। जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंका के कारण येन में बिकवाली कुछ हद तक थमी। हालांकि, बैंक ऑफ जापान द्वारा हाल ही में शॉर्ट-टर्म ब्याज दर लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत किए जाने के बावजूद, इस नीतिगत कदम को नरम माना गया, जिससे येन की मजबूती सीमित रह सकती है। मजबूत डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड के चलते बहुमूल्य धातु सोना भी दबाव में रहा और पिछले सत्र के मामूली सुधार के बाद 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे संघर्ष करता नजर आया।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में उछाल से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय दरों और आयात लागत पर सीधा असर पड़ रहा है।

- **भारत में प्रभाव:** मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण भारतीय रुपये पर आयातित मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है। इसके चलते कच्चे तेल और अन्य आयातित वस्तुओं की घरेलू कीमतों में वृद्धि होने की संभावना रहती है।
- **ब्रिटेन जाने वाले यात्रियों और छात्रों पर असर:** पाउंड के 1.3200 के स्तर पर कमजोर बने रहने से ब्रिटेन में रहने या पढ़ाई करने का खर्च डॉलर के मुकाबले अपेक्षाकृत स्थिर रहेगा। हालांकि, यदि डॉलर और मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की लागत बढ़ सकती है।
- **फॉरेक्स और कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए:** GBP/USD का 14-दिवसीय RSI 25 पर ओवरसोल्ड स्तर पर पहुंच गया है। ट्रेडर्स को 1.3452 के 200-दिवसीय SMA और 1.3265 के पूर्व निचले स्तर पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
- **सोने में निवेश करने वालों के लिए:** अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बहु-वर्षीय रिकॉर्ड स्तर पर रहने से बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने में सीमित बढ़त देखने को मिल रही है। 4,300 डॉलर के नीचे सोने का कारोबार सतर्कता बरतने की ओर इशारा करता है।

## ऐसा क्यों हुआ
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक मुद्रास्फीति की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है, जिससे अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल आया है। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीतिगत भिन्नता ने डॉलर को बढ़त दिलाई है।

- **ऊर्जा कीमतों में उछाल:** कच्चे तेल में लगातार दो दिनों की तेजी ने मुद्रास्फीति के दबाव को दोबारा सक्रिय कर दिया। इसके चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिससे डॉलर को मजबूती मिली।
- **केंद्रीय बैंकों की नीतियों में अंतर:** फेडरल रिजर्व का रुख अपेक्षाकृत आक्रामक बना हुआ है, जबकि बैंक ऑफ इंग्लैंड को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। ब्याज दरों के इस अंतर ने निवेशकों को डॉलर की तरफ आकर्षित किया।
- **तकनीकी स्तरों का टूटना:** पाउंड का 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 1.3452 के नीचे फिसलना तकनीकी मंदी का मुख्य कारण बना। इस स्तर के नीचे लगातार बने रहने से नए खरीदारों का आत्मविश्वास डगमगा गया।
- **ट्रेजरी बायबैक का सीमित प्रभाव:** ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट द्वारा 6 अरब डॉलर के बॉन्ड बायबैक की घोषणा के बावजूद यील्ड का दबाव पूरी तरह कम नहीं हुआ। बाजार में पैदा हुई तरलता की तुलना में मुद्रास्फीति की चिंताएं अधिक प्रभावी साबित हुईं।

## सवाल-जवाब

### 1. वर्तमान में ब्रिटिश पाउंड किस स्तर पर कारोबार कर रहा है?
ब्रिटिश पाउंड अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.3200 के दायरे में बना हुआ है, जो 29 जून के बाद का सबसे निचला स्तर है।

### 2. GBP/USD के लिए सबसे महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस स्तर कौन सा है?
200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 1.3452 पर स्थित है, जो तेजी की बहाली के लिए मुख्य बाधा बना हुआ है।

### 3. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी क्यों आ रही है?
कच्चे तेल में दो दिवसीय उछाल और फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख के कारण मुद्रास्फीति की चिंताएं बढ़ी हैं, जिससे यील्ड बढ़ी है।

### 4. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बॉन्ड यील्ड नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाया?
ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बढ़ती यील्ड को थामने के लिए दीर्घकालिक ट्रेजरी बॉन्ड के 6 अरब डॉलर के बायबैक की घोषणा की।

### 5. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया।

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