अमेरिकी डॉलर की मजबूती के आगे पस्त हुआ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, सट्टेबाजी में शॉर्ट पोजीशन दिसंबर 2025 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की बढ़ती धमक के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव गहरा गया है, जहां मंदी के दांव यानी नेट शॉर्ट पोजीशन दिसंबर 2025 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के बढ़ते दबदबे के चलते प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इस तेज दबाव के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के खिलाफ सट्टेबाजी के मंदी वाले सौदे यानी नेट शॉर्ट पोजीशन में लगातार दूसरे सप्ताह तेजी दर्ज की गई है। राबोबैंक के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में बिकवाली के दांव बढ़कर दिसंबर 2025 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। हालांकि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर चालू वर्ष में अब तक जी10 (G10) मुद्राओं की सूची में दूसरा सबसे शानदार प्रदर्शन करने वाला वित्तीय साधन बना हुआ है, लेकिन मौजूदा महीने में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसमें 3.23% की तीव्र गिरावट आई है और यह अपने 0.72 के हालिया उच्च स्तर से लुढ़क कर 0.70 के स्तर पर आ गया है। डॉलर के मजबूत रुख से 0.7000 का अहम स्तर बचाने में जुटा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर हफ्ते के शुरुआती कारोबारी सत्र में AUD/USD की जोड़ी किसी तरह 0.7000 के बेहद अहम मनोवैज्ञानिक स्तर की रक्षा करने की जद्दोजहद में लगी रही। अमेरिकी डॉलर में बने तेज रुख के बीच यह मुद्रा जोड़ी 4 अगस्त के बाद से अपने सबसे निचले स्तर के आसपास कारोबार करती देखी गई। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब बनी हुई हैं, जिसका बड़ा कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से उपजे महंगाई के जोखिम हैं। इसके साथ ही वित्तीय बाजारों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी अक्टूबर बैठक में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी किए जाने की संभावनाओं पर दांव तेज हो गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक गतिरोध ने भी सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को मजबूत बनाए रखा है, जिससे मंगलवार को रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के नीतिगत फैसलों से ठीक पहले इस मुद्रा जोड़ी पर दबाव और गहरा गया है। बैंक ऑफ जापान के रुख और डॉलर की रिकवरी के बीच येन का संघर्ष एशियाई मुद्रा परिदृश्य में USD/JPY की जोड़ी में भी खासी हलचल देखी गई। शुक्रवार को जापानी येन को सहारा देने के लिए सरकारी अधिकारियों द्वारा बाजार में दखल दिए जाने की अटकलों के बाद भारी बिकवाली हुई थी, लेकिन नए कारोबारी सत्र में निचले स्तरों पर खरीदारों की सक्रियता से मुद्रा जोड़ी ने अपने नुकसान की कुछ भरपाई की। हालांकि, बैंक ऑफ जापान (BoJ) की हालिया मौद्रिक समीक्षा के नरम और उदार मिनट्स (बैठक के ब्योरे) ने येन की बढ़त की गुंजाइश को सीमित कर दिया है। दूसरी ओर, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिका और ईरान का तनाव, मुद्रास्फीति की नई चिंताएं और फेड द्वारा अक्टूबर में दरों में वृद्धि के बढ़ते दांव अमेरिकी डॉलर को मजबूत सहारा दे रहे हैं। इसी समर्थन के बल पर USD/JPY मुद्रा जोड़ी फिर से 158.00 के स्तर की तरफ कदम बढ़ाती नजर आई। फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान के नीतिगत कदमों में समानता वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर डालें तो फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में काफी मिलती-जुलती रणनीतिक पहल की है। दोनों प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने पिछले सप्ताह अपनी नीतिगत ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (bps) की बढ़ोतरी करने का फैसला किया था। इसके अलावा, दोनों ही संस्थान अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं में लगातार सिर उठा रहे महंगाई के जोखिमों का सीधे तौर पर सामना कर रहे हैं। भविष्य के नीतिगत कदमों और ब्याज दरों के रास्ते को लेकर भी दोनों की ओर से एक जैसा संकेत सामने आया है, जिसके तहत आने वाले सभी फैसले पूरी तरह से ताजा आर्थिक आंकड़ों और महंगाई के रुख पर ही निर्भर करेंगे। सोने में भारी गिरावट और बिटकॉइन के दायरे में कारोबार मुद्रा बाजार के साथ-साथ कीमती धातुओं और डिजिटल परिसंपत्तियों पर भी मजबूत डॉलर का सीधा असर देखा गया। सप्ताह की शुरुआत में सोने की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह बिकवाली के दबाव में फिसलकर 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में आ गया। सोने में यह स्तर इससे पहले अगस्त की शुरुआत में देखा गया था। वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के दोबारा उभरने के बावजूद मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने पीली धातु पर सोमवार को भारी दबाव बनाए रखा। डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में बिटकॉइन सोमवार को इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक 82,800 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा था। पिछले सप्ताह 4% से अधिक की बढ़त दर्ज करने के बाद अपने हालिया उच्च स्तरों के निकट आकर इस डिजिटल मुद्रा की तेजी की रफ्तार कुछ सुस्त पड़ती दिखी। हालांकि, स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में आ रहे नए संस्थागत निवेश और पूंजी प्रवाह के चलते बाजार में संस्थागत मांग का मजबूत सहारा लगातार बना हुआ है। डीजल की रिकॉर्ड कीमतें और ऊर्जा बाजार की बदलती तस्वीर कमोडिटी और ऊर्जा क्षेत्र में ब्रिटेन के भीतर डीजल के दाम एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे व्यापक आर्थिक चिंताएं और बढ़ गई हैं। वित्तीय बाजार जहां फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी के नए चक्र की तैयारी कर रहे हैं, वहीं इस बात पर भी बहस छिड़ी है कि क्या अर्थव्यवस्था के लिए ऐसा कदम वाकई जरूरी है। दूसरी तरफ, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद आपूर्ति को लेकर बनी तात्कालिक चिंताएं कुछ कम हुई हैं, जबकि निवेशक यह समझने की कोशिश में जुटे हैं कि मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े कारोबार और तकनीकी शेयरों के लिए आगे की दिशा क्या रहने वाली है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड्स में आई इस तेजी से वैश्विक स्तर पर आयात लागत और विदेशी निवेश पर सीधा असर पड़ सकता है। • मुद्रा विनिमय और यात्रा: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से अन्य विदेशी मुद्राओं के मुकाबले विदेश यात्रा और विदेशी शिक्षा का खर्च बढ़ सकता है। जिन छात्रों या पर्यटकों को विदेशी बिलों का भुगतान करना है, उन्हें मुद्रा के उतार-चढ़ाव पर नजर रखनी होगी। • सोना और आभूषण खरीदार: डॉलर की मजबूती के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव गिरकर 4,100 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गए हैं। इसका असर घरेलू सर्राफा बाजारों पर दिखेगा, जिससे खरीदारों को कीमतों में नरमी का फायदा मिल सकता है। • क्रिप्टोकरेंसी निवेशक: बिटकॉइन 82,800 डॉलर के नीचे कंसोलिडेट कर रहा है, जिससे खुदरा ट्रेडर्स को मुनाफावसूली का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि ईटीएफ (ETF) में मजबूत संस्थागत निवेश लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है। • ईंधन और महंगाई: कच्चे तेल की कीमतों और ब्रिटेन में डीजल के रिकॉर्ड भाव से परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है। यदि यह रुझान जारी रहा तो आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नया दबाव देखने को मिल सकता है। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर में यह ताजा तेजी कच्चे तेल के बढ़ते भावों से उपजी नई महंगाई और फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की बढ़ती आशंकाओं के कारण आई है। • महंगाई और दर वृद्धि की आशंकाएं: कच्चे तेल के बढ़ते दामों ने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति का नया खतरा पैदा कर दिया है। इसी के चलते निवेशकों ने अक्टूबर की बैठक में फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाने के दांव आक्रामक रूप से बढ़ा दिए हैं। • भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश: अमेरिका और ईरान के बीच गहराए भू-राजनीतिक गतिरोध ने अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। इस तनाव की वजह से वैश्विक निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों से निकलकर सुरक्षित पनाहगाह माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर का रुख कर रहे हैं। • केंद्रीय बैंकों के उदार संकेत: बैंक ऑफ जापान के मिनट्स में नरम मौद्रिक नीति का संकेत मिलने से येन कमजोर पड़ा। इसी तरह ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर मंदी के सट्टेबाजी सौदे बढ़ने से गैर-अमेरिकी मुद्राओं में गिरावट तेज हुई। सवाल-जवाब 1. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में हाल ही में कितनी गिरावट आई है? ऑस्ट्रेलियाई डॉलर चालू महीने में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 3.23% गिरकर 0.70 के स्तर पर आ गया है, जबकि इसका हालिया उच्च स्तर 0.72 के करीब था। 2. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में नेट शॉर्ट पोजीशन का क्या स्तर है? राबोबैंक के मुताबिक ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में नेट शॉर्ट पोजीशन लगातार दूसरे हफ्ते बढ़ी हैं और यह दिसंबर 2025 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। 3. अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में ब्याज दरों पर क्या फैसला लिया? दोनों केंद्रीय बैंकों ने पिछले सप्ताह अपनी नीतिगत ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (bps) की बढ़ोतरी की है और आगे के फैसले आंकड़ों पर आधारित रखने का संकेत दिया है। 4. सोने और बिटकॉइन की कीमतों का क्या रुख रहा? सोना गिरकर 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पास पहुंच गया है, जबकि बिटकॉइन पिछले हफ्ते 4% से अधिक की बढ़त के बाद 82,800 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा है। https://trendkia.com/market/us-dollar-ki-majabuti-ke-age-pasta-hua-australian-dollar-sattebaji-men-shorta-pojishana-december-2025-ke-bada-sabase-unche-stara-p-40193 TrendKia — Har trend, sabse pehle.