# अमेरिकी डॉलर की मजबूती के आगे पस्त हुआ स्विस फ्रैंक, फेडरल रिजर्व और एसएनबी की नीतियों में दिखा बड़ा अंतर

> अमेरिका में महंगाई के गर्म आंकड़ों और बॉन्ड यील्ड में सुधार से डॉलर को भारी समर्थन मिला है, जिससे स्विस फ्रैंक दबाव में आ गया है। वैश्विक बाजारों में ब्याज दरों के बदलते समीकरणों के बीच विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजार में हलचल तेज है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-dollar-ki-majabuti-ke-age-pasta-hua-swiss-franc-federal-reserve-aura-snb-ki-nitiyon-men-dikha-bara-antara-49550 · **Language:** Hindi
**Tags:** स्विस फ्रैंक, अमेरिकी डॉलर, फेडरल रिजर्व, मुद्रा बाजार, मुद्रास्फीति, सोना, बिटकॉइन, विदेशी मुद्रा

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर ने अपनी मजबूत स्थिति फिर से स्थापित करनी शुरू कर दी है, जिसका सीधा असर स्विस फ्रैंक पर देखने को मिल रहा है। स्विट्जरलैंड की मुद्रा में कमजोरी का मुख्य कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई हालिया रिकवरी और दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों के नीतिगत रुख में बढ़ता फासला है। पिछले हफ्ते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज गिरावट के चलते डॉलर में जो सुस्ती आई थी, वह अब थमती नजर आ रही है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन डॉलर बनाम स्विस फ्रैंक की विनिमय दर में हल्की बढ़त दर्ज की गई और यह जोड़ी 0.27 प्रतिशत के दैनिक उछाल के साथ लगभग 0.8263 के स्तर पर कारोबार करती देखी गई। डॉलर को इस समय उन मजबूत आर्थिक आंकड़ों से सहारा मिल रहा है, जो संकेत दे रहे हैं कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों का उच्च स्तर अभी लंबा खिंच सकता है।

 

## अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने बदली ब्याज दरों की उम्मीदें

अमेरिकी डॉलर के निचले स्तरों पर मजबूत सहारा मिलने की सबसे अहम वजह फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे भी वृद्धि किए जाने की बढ़ती संभावनाएं हैं। हाल ही में सामने आए मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने बाजार के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI के सितंबर महीने के आंकड़ों में महीने-दर-महीने आधार पर 0.6 प्रतिशत और सालाना आधार पर 3.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही, कोर मुद्रास्फीति बढ़कर 2.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि बाजार इसके 2.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगा रहा था। खुदरा महंगाई के अलावा थोक स्तर पर उत्पादक मूल्य सूचकांक यानी PPI के आंकड़े भी उम्मीद से अधिक मजबूत आए हैं। उत्पादक और उपभोक्ता दोनों स्तरों पर बढ़ती कीमतें यह साफ दर्शाती हैं कि महंगाई को केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य तक लाने का सफर अभी लंबा और कठिन है।

 इन आंकड़ों के आने के बाद फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर निवेशकों की रणनीति में बदलाव आया है। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष वॉर्श ने 28 अक्टूबर को होने वाली आगामी बैठक में दरों को यथावत रखने के संकेत दिए हैं। इसके बावजूद वायदा बाजार अब दो चरणों वाली नीतिगत प्रक्रिया को मानकर चल रहा है। इस परिदृश्य में संभावना यह जताई जा रही है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक 28 अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और ठहराव की नीति अपनाएगा, लेकिन उसके बाद 9 दिसंबर को होने वाली बैठक में नीतिगत दरों में एक और बढ़ोतरी का फैसला लिया जा सकता है। साल के अंत से पहले उधारी लागत में इस संभावित इजाफे ने वैश्विक निवेशकों के लिए अमेरिकी प्रतिभूतियों को आकर्षक बनाए रखा है, जिससे डॉलर इंडेक्स को मजबूती मिल रही है।

 

## स्विस नेशनल बैंक का रुख और यूरो के मुकाबले फ्रैंक की चाल

दूसरी तरफ, स्विट्जरलैंड के घरेलू आर्थिक हालात अमेरिका से पूरी तरह उलट नजर आते हैं। स्विट्जरलैंड में मुद्रास्फीति बेहद निचले स्तर पर बनी हुई है, जिसके कारण स्विस नेशनल बैंक द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की कोई तात्कालिक आवश्यकता महसूस नहीं की जा रही है। दरों में बढ़ोतरी की कमजोर संभावनाओं ने फ्रैंक की उपज क्षमता को सीमित कर दिया है, जिससे अधिक ब्याज दर वाले डॉलर के मुकाबले इसमें बिकवाली देखी जा रही है। इसके बावजूद, यदि वैश्विक मुद्राओं के आपसी उतार-चढ़ाव पर नजर डालें तो स्विस फ्रैंक ने अन्य प्रमुख मुद्राओं के सामने मिला-जुला प्रदर्शन किया है। इस महीने यूरोपीय साझा मुद्रा यूरो के मुकाबले स्विस फ्रैंक सबसे मजबूत स्थिति में रहा है, जबकि डॉलर के मुकाबले इसका संघर्ष साफ तौर पर नीतिगत अंतर के कारण जारी है।

 

## ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और चीनी अर्थव्यवस्था से मिले सकारात्मक संकेत

वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य हिस्सों में भी व्यापक फेरबदल देखने को मिला है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी में लगातार दूसरे कारोबारी दिन खरीदारी का सिलसिला देखा गया। पिछले हफ्ते की रिकवरी को आगे बढ़ाते हुए यह जोड़ी 0.7000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर बढ़ती नजर आई। ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को यह गति चीन की तीसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP के मजबूत आंकड़ों और सितंबर महीने के बेहतर आर्थिक गतिविधियों से मिली है। चीन, जो ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, वहां से आर्थिक सुधार के मजबूत संकेत आने से ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था को सीधा संबल मिला है। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के सहायक गवर्नर क्रिस केंट के आक्रामक नीतिगत बयानों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के पक्ष में माहौल तैयार किया है।

 

## जापानी येन और बैंक ऑफ जापान का सख्त रुख

डॉलर बनाम जापानी येन के मोर्चे पर स्थिति काफी रक्षात्मक बनी रही और एशियाई सत्र में यह जोड़ी 158.00 के स्तर के करीब सीमित दायरे में रही। अमेरिकी डॉलर दो हफ्ते के निचले स्तर के आसपास बना रहा, जिसे बॉन्ड यील्ड में पिछली गिरावट से दबाव का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर, जापानी मुद्रा को बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा के सख्त बयानों से सहारा मिला है। गवर्नर उएदा के रुख से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि जापानी केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीति को धीरे-धीरे सख्त कर सकता है। साथ ही, मुद्रा बाजार में जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित सरकारी हस्तक्षेप का खतरा भी निवेशकों को सतर्क बनाए हुए है। हालांकि, अमेरिका में साल के अंत तक फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण डॉलर में बहुत बड़ी गिरावट आने की संभावना सीमित ही दिखाई देती है।

 

## सोने की कीमतों पर दबाव और क्रिप्टोकरेंसी का रुख

अमेरिकी डॉलर में स्थायित्व और ट्रेजरी यील्ड में विभिन्न परिपक्वताओं पर आए उछाल ने बहुमूल्य धातुओं के बाजार को भी प्रभावित किया है। सोने की कीमतें शुक्रवार की गिरावट को जारी रखते हुए सोमवार को प्रति ट्रॉय औंस 4,150 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गईं। ट्रेजरी यील्ड में सुधार आने से बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने की होल्डिंग लागत बढ़ जाती है, जिससे पीली धातु में मुनाफावसूली का दौर देखा जा रहा है। बुलियन निवेशक अब फेडरल रिजर्व की आने वाली बैठकों और ब्याज दरों की अंतिम सीमा को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं।

 डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में बिटकॉइन ने अपनी मजबूती बनाए रखी है और यह 82,000 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है। पिछले सप्ताह स्पॉट एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ETF से लगभग 229 मिलियन डॉलर की निकासी दर्ज किए जाने के बावजूद बिटकॉइन ने निचले स्तरों पर मजबूत संरचनात्मक समर्थन का प्रदर्शन किया है। इसी तरह, दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी एथेरियम में भी सुधार देखा गया और यह 2,400 डॉलर के स्तर से ऊपर वापस आने में कामयाब रहा। तकनीकी मोमेंटम संकेतकों में सुधार के साथ खरीदार एक बार फिर बाजार के रुझान पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास करते दिख रहे हैं। कुल मिलाकर, वैश्विक वित्तीय बाजार वर्तमान में विभिन्न केंद्रीय बैंकों की अलग-अलग मौद्रिक प्राथमिकताओं और मुद्रास्फीति के दबावों के बीच अपनी दिशा तय करने की कोशिश में जुटे हैं।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर में मजबूती और ब्याज दरों के ऊंचे स्तर बने रहने से अंतरराष्ट्रीय यात्रा, आयात लागत और वैश्विक निवेश पर सीधा असर पड़ता है।

- **भारत में:** डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे विदेशों से कच्चा तेल और अन्य जरूरी सामान मंगाना अधिक खर्चीला हो सकता है। यह स्थिति आने वाले महीनों में घरेलू बाजार में आयातित वस्तुओं की कीमतों और ईंधन लागत को प्रभावित कर सकती है।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सुधार से बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने में निवेश की मांग कमजोर पड़ सकती है। यदि आप सोने या विदेशी शेयरों में निवेश करते हैं, तो पोर्टफोलियो आवंटन को ब्याज दरों के नए संकेतों के आधार पर व्यवस्थित करना जरूरी हो सकता है।
- **क्रिप्टोकरेंसी व्यापारियों के लिए:** बिटकॉइन का 82,000 डॉलर और एथेरियम का 2,400 डॉलर से ऊपर बने रहना यह दर्शाता है कि ईटीएफ से निकासी के बावजूद बाजार में स्थिरता है। ट्रेडर अल्पकालिक उतार-चढ़ाव पर नजर रखते हुए स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल करके अपने जोखिम को नियंत्रित कर सकते हैं।
- **विदेशी यात्रियों और छात्रों के लिए:** डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं के कमजोर होने से अमेरिका में पढ़ाई और यात्रा का खर्च भारतीय परिवारों के लिए बढ़ सकता है। विदेशी मुद्रा विनिमय करने से पहले विनिमय दरों की निगरानी करना बजट प्रबंधन के लिए फायदेमंद रहेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी डॉलर में आई तेजी और स्विस फ्रैंक में कमजोरी का मुख्य कारण अमेरिका में उम्मीद से अधिक मुद्रास्फीति के आंकड़े और दोनों देशों की मौद्रिक नीतियों में बढ़ता अंतर है। इसके चलते वित्तीय बाजारों में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें फिर से मजबूत हो गई हैं।

- **गर्म अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़े:** सितंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में 0.6 प्रतिशत मासिक और 3.7 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कोर मुद्रास्फीति 2.6 प्रतिशत रही। उत्पादक मूल्य सूचकांक के आंकड़े भी अनुमान से अधिक रहने से फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत लक्ष्य को हासिल करने में देरी की आशंका बढ़ गई है।
- **केंद्रीय बैंकों की नीतियों में भिन्नता:** स्विट्जरलैंड में महंगाई का स्तर काफी कम बना हुआ है, जिससे स्विस नेशनल बैंक द्वारा दरें बढ़ाने का दबाव खत्म हो गया है। इसके विपरीत, फेडरल रिजर्व द्वारा 9 दिसंबर को दरें बढ़ाने की प्रबल संभावना ने डॉलर को यील्ड का बड़ा लाभ दिया है।
- **अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सुधार:** पिछले सप्ताह बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट के बाद इसमें तेजी से सुधार हुआ है, जिससे डॉलर को निचले स्तरों पर ठोस समर्थन मिला। बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने से वैश्विक पूंजी सुरक्षित और उच्च रिटर्न वाले अमेरिकी संपत्तियों की ओर आकर्षित हो रही है।
- **आगामी बैठकों का संभावित क्रम:** फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष वॉर्श के संकेतों के अनुसार 28 अक्टूबर को दरों पर रोक लगने की उम्मीद है, लेकिन 9 दिसंबर को बढ़ोतरी का अनुमान बाजार में डॉलर की मांग बनाए रखे हुए है।

## सवाल-जवाब

### 1. USD/CHF मुद्रा जोड़ी में क्या बदलाव देखा गया है?
सप्ताह की शुरुआत में USD/CHF में 0.27 प्रतिशत की दैनिक बढ़त देखी गई और यह लगभग 0.8263 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

### 2. अमेरिका में सितंबर महीने की महंगाई के आंकड़े क्या रहे?
सितंबर में हेडलाइन CPI में मासिक आधार पर 0.6% और वार्षिक आधार पर 3.7% की बढ़ोतरी हुई, जबकि कोर महंगाई 2.6% रही।

### 3. फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों को लेकर बाजार का क्या अनुमान है?
बाजार का अनुमान है कि 28 अक्टूबर की बैठक में दरों में बदलाव नहीं होगा, जबकि 9 दिसंबर को ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है।

### 4. स्विस फ्रैंक पर दबाव क्यों देखा जा रहा है?
स्विट्जरलैंड में कम मुद्रास्फीति के कारण दरों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है, जिससे उच्च ब्याज दर वाले अमेरिकी डॉलर के मुकाबले फ्रैंक कमजोर हुआ है।

### 5. सोने की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती का क्या प्रभाव पड़ा?
डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में उछाल के चलते सोने की कीमत प्रति ट्रॉय औंस 4,150 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गई।

### 6. क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन और एथेरियम का क्या रुख रहा?
बिटकॉइन 229 मिलियन डॉलर की ईटीएफ निकासी के बावजूद 82,000 डॉलर से ऊपर रहा, जबकि एथेरियम 2,400 डॉलर से ऊपर पहुंच गया।

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