अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच यूरो में लगातार चौथे हफ्ते गिरावट, 1.1000 के स्तर पर टिकी निगाहें अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और यूरोज़ोन में बढ़ती महंगाई के बीच यूरो-डॉलर जोड़ी गिरकर 1.1215 के निचले स्तर तक पहुंची, जहां तकनीकी संकेतक आगे और कमजोरी के संकेत दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की चौतरफा मजबूती का सिलसिला जारी रहने से यूरो पर दबाव लगातार गहराता जा रहा है। यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर (EUR/USD) में लगातार चौथे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई, जिसके दौरान यह फिसलकर 1.1215 के स्तर तक पहुंच गई। यह निचला स्तर इससे पहले मई 2025 में देखा गया था। हफ्ते के अंतिम कारोबारी सत्रों में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) अपने एक साल से अधिक के उच्चतम स्तर से थोड़ा पीछे हटा, जिसके चलते यह मुद्रा जोड़ी सप्ताहांत के करीब 1.1280 के आसपास कारोबार करती दिखी। हालांकि, व्यापक आर्थिक रुझान और केंद्रीय बैंकों के आगामी कदम यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह जोड़ी 1.1000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर का भी परीक्षण कर सकती है। अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों में मजबूती और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का रुख अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े हालिया आंकड़ों ने निवेशकों की धारणा को काफी हद तक प्रभावित किया है। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़ों में संशोधन करते हुए दूसरी तिमाही की वार्षिक विकास दर को पुराने 1.5% के अनुमान से बढ़ाकर 2.2% कर दिया गया। इसके साथ ही मुद्रास्फीति के मोर्चे पर भी कुछ राहत भरे संकेत सामने आए। फेडरल रिजर्व (Fed) के पसंदीदा महंगाई संकेतक पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) प्राइस इंडेक्स में अगस्त के दौरान नरमी देखने को मिली और यह 3.4% पर स्थिर रहा। जुलाई महीने के आंकड़े को भी पहले के 3.7% से घटाकर 3.4% संशोधित किया गया। हालांकि यह आंकड़ा केंद्रीय बैंक के 2% के आदर्श लक्ष्य से ऊपर बना हुआ है, लेकिन चालू वर्ष के 4% के उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ चुका है। श्रम बाजार के मोर्चे पर मिले-जुले रुझान दर्ज किए गए। निजी क्षेत्र में रोजगार की स्थिति पर एडीपी द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में 90K नए रोजगार जोड़े गए, जो बाजार के 70K के अनुमान से बेहतर रहे। इसके विपरीत, नॉनफार्म पेरोल्स रिपोर्ट के अनुसार देश में सितंबर के दौरान केवल 29K नए रोजगार जुड़े, जो अपेक्षित 90K के मुकाबले काफी कमजोर रहे। अगस्त के रोजगार आंकड़े को भी पहले के 162K से घटाकर 133K कर दिया गया। इसी अवधि में बेरोजगारी दर मामूली रूप से बढ़कर 4.2% हो गई, जबकि श्रम बल भागीदारी दर 61.6% से बढ़कर 61.8% दर्ज की गई। वार्षिक वेतन वृद्धि को दर्शाने वाले एवरेज ऑवरली अर्निंग्स में सालाना आधार पर 3% की वृद्धि हुई, जो विश्लेषकों के 3.2% के अनुमान से कम रही। इन आंकड़ों ने न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को साबित किया, बल्कि आगामी मौद्रिक नीति निर्णयों से जुड़ी बाजार की अपेक्षाओं को भी बदल दिया। उम्मीद से नरम रहे व्यक्तिगत उपभोग व्यय मूल्य सूचकांक के बाद, 28 अक्टूबर को ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना काफी घट गई है। पिछले सप्ताह जहां अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना 70% से अधिक मानी जा रही थी, वहीं अब यह गिरकर करीब 21% रह गई है। निवेशकों के मन में ऊंची मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं जरूर हैं, लेकिन उनका यह भी मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अपने अन्य वैश्विक समकक्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन जारी रखेगी। यूरोपियन सेंट्रल बैंक के कदम और यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति की चुनौती दूसरी तरफ, यूरोज़ोन में स्थिति अधिक जटिल बनी हुई है। तीसरी तिमाही के अंत में यूरोपीय मुद्रास्फीति ने सबको चौंकाया और यह अनुमान से कहीं अधिक तेजी से बढ़ी। यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) द्वारा सख्त मौद्रिक कदम उठाने के बावजूद यूरो मुद्रा कमजोर बनी हुई है। यूरोपीय केंद्रीय बैंक इस साल अब तक दो बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर चुका है। मौजूदा बाजार परिदृश्य को देखते हुए निवेशक इस साल समाप्त होने से पहले कम से कम एक और ब्याज दर वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि 2027 तक तीन और संभावित दरों में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति के उच्च बने रहने का एक प्रमुख कारण पश्चिम एशिया का युद्ध है। अमेरिका और ईरान के बीच बना गतिरोध यथावत है और निकट भविष्य में किसी समाधान के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इस अनिश्चितता के कारण ऊर्जा कीमतों और महंगाई से जुड़ी चिंताएं शांत नहीं हो पा रही हैं, जिसका सीधा असर यूरोप पर पड़ रहा है। आने वाले सप्ताह में यूरोपियन सेंट्रल बैंक गुरुवार को अपनी मौद्रिक नीति बैठक का विवरण जारी करेगा, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका शुक्रवार को अक्टूबर के मिशिगन उपभोक्ता प्रत्याशा सूचकांक का प्रारंभिक अनुमान पेश करेगा। दैनिक चार्ट पर तकनीकी संकेतक और अहम समर्थन स्तर दैनिक तकनीकी चार्ट के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि शुक्रवार को दिखे हल्के सुधार के बावजूद अल्पावधि में EUR/USD का रुझान मंदी की ओर बना हुआ है। यह जोड़ी वर्तमान में अपने 20-दिवसीय, 100-दिवसीय और 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) से नीचे बनी हुई है, जो क्रमशः 1.1462, 1.1513 और 1.1609 के स्तर पर स्थित हैं। छोटी अवधि का मूविंग एवरेज लंबी अवधि के औसतों से नीचे फिसल रहा है, जिसे तकनीकी विश्लेषण में विक्रेताओं के मजबूत दबदबे का स्पष्ट संकेत माना जाता है। मोमेंटम और गति से जुड़े तकनीकी सूचकांक भी कमजोरी की पुष्टि कर रहे हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) इंडिकेटर 26 के स्तर पर बना हुआ है। हालांकि यह अत्यधिक बिकवाली (ओवरसोल्ड) के स्तर से थोड़ा सुधरा है, लेकिन गिरावट के समाप्त होने की पुष्टि करने से अभी काफी दूर है। मोमेंटम इंडिकेटर में भी मामूली सुधार दर्ज हुआ है, किंतु यह अब भी नकारात्मक दायरे में स्थित है, जिससे किसी भी तेज रिकवरी की गुंजाइश सीमित हो जाती है। ऊपर की ओर, शुरुआती प्रतिरोध 100-सप्ताह के SMA पर 1.1360 के स्तर पर देखा जा रहा है। इसके बाद 20-दिवसीय SMA 1.1462 और 100-दिवसीय SMA 1.1513 के स्तर पर बाधा उत्पन्न करेंगे। दूसरी ओर, नीचे की तरफ 200-सप्ताह का SMA 1.1096 के स्तर पर महत्वपूर्ण संरचनात्मक समर्थन और संभावित मंदी का लक्ष्य प्रदान करता है। यदि यह जोड़ी 1.1096 के नीचे फिसलती है, तो बिकवाली का दौर और गहरा सकता है, जिससे सीधे तौर पर 1.1000 के मनोवैज्ञानिक स्तर की राह खुल जाएगी। जनवरी में दर्ज किए गए 1.2082 के शिखर से काफी नीचे आ चुकी यह जोड़ी बुधवार को 1.1312 तक भी गिरी थी, जो डॉलर की मजबूती और ऊर्जा संकट की मार को रेखांकित करती है। अन्य वैश्विक संपत्तियों, मुद्राओं और कमोडिटी का साप्ताहिक रुख वैश्विक बाजारों में अन्य संपत्तियों में भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिली। शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) उछलकर 0.6950 के करीब पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर में 17 महीने के उच्च स्तर से मुनाफावसूली दर्ज की गई, जबकि वैश्विक बॉन्ड यील्ड और महंगाई के जोखिमों के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को नवंबर में ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदों से सहारा मिला। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) 158.00 के करीब संघर्ष करता दिखा। टोक्यो सीपीआई के उम्मीद से अधिक आने और डॉलर की नरमी के बीच यह जोड़ी अपने साप्ताहिक उच्च स्तर से नीचे खिसक गई। कमोडिटी बाजार में सोने की चाल असमंजस भरी रही। नॉनफार्म पेरोल्स रिपोर्ट के बाद 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पार गई सोने की तेजी टिक नहीं सकी और सप्ताह के अंत में यह गिरकर 4,180 डॉलर के दायरे में आ गया। दूसरी ओर, डिजिटल एसेट बाजार में शुक्रवार को व्यापक सुधार देखा गया। बिटकॉइन 86,000 डॉलर के स्तर के पार पहुंच गया, जबकि एथेरियम ने 2,700 डॉलर के पार निकलकर अपना सकारात्मक रुख मजबूत किया, हालांकि 2,800 डॉलर का क्षेत्र बढ़त को सीमित कर रहा है। इसी दौरान रिपल 1.54 डॉलर के करीब कारोबार करता नजर आया। आने वाले सप्ताह में बॉन्ड यील्ड, ऊर्जा संकट, आईएसएम सर्विसेज पीएमआई, अमेरिकी ट्रेजरी नीलामी, कनाडा में रोजगार और जापान में वेतन से जुड़े आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो में आई तेज गिरावट और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में अनिश्चितता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, यात्रा और निवेश पर पड़ता है। • मुद्रा विनिमय: यूरोप यात्रा करने वाले भारतीय पर्यटकों और छात्रों के लिए यूरो का कमजोर होना खर्च को थोड़ा किफायती बना सकता है। अगर डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है तो अमेरिकी यात्रा और पढ़ाई का बजट बढ़ सकता है। • आयात लागत: पश्चिम एशिया संकट के चलते कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में अस्थिरता बनी रहने से वैश्विक स्तर पर आयात बिल बढ़ सकता है। ऊर्जा आयात महंगा होने पर भारत सहित कई देशों में घरेलू ईंधन और परिवहन लागत पर असर पड़ सकता है। • निवेशक पोर्टफोलियो: विदेशी मुद्रा बाजारों में डॉलर की मजबूती से उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का जोखिम बढ़ता है। शेयर बाजार और बॉन्ड यील्ड में जारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। • वैश्विक केंद्रीय बैंक: यूरोपियन सेंट्रल बैंक और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों के संबंध में लिए जाने वाले फैसले दुनिया भर में कर्ज की दरों को तय करेंगे। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें ऊंची बने रहने से कॉर्पोरेट कर्ज और अंतरराष्ट्रीय फंडिंग महंगी बनी रह सकती है। ऐसा क्यों हुआ यूरो में आई कमजोरी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के पीछे अमेरिकी आर्थिक विकास में सुधार, यूरोप में बढ़ती महंगाई और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर है। • अमेरिकी आर्थिक आंकड़े: संयुक्त राज्य अमेरिका की दूसरी तिमाही की जीडीपी विकास दर 1.5% से सुधरकर 2.2% दर्ज की गई, जबकि पीसीई मुद्रास्फीति घटकर 3.4% रही। इस आर्थिक लचीलेपन ने डॉलर को अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले मजबूती प्रदान की। • यूरोप में महंगाई और नीतिगत अंतर: तीसरी तिमाही के अंत में यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति उम्मीद से अधिक बढ़ी, जिससे यूरोपियन सेंट्रल बैंक द्वारा इस साल दो बार ब्याज दरें बढ़ाने के बाद आगे और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। हालांकि आर्थिक सुस्ती की चिंताओं के कारण ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदों के बावजूद यूरो पर दबाव बना रहा। • पश्चिम एशिया भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध के चलते ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई से जुड़े जोखिम बने हुए हैं। इस अनिश्चितता ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर की ओर आकर्षित किया, जिससे यूरो 1.1215 के निचले स्तर तक फिसल गया। सवाल-जवाब 1. EUR/USD मुद्रा जोड़ी गिरकर किस स्तर तक पहुंच गई है? यूरो-डॉलर जोड़ी फिसलकर 1.1215 के स्तर तक गिर गई, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। 2. अमेरिकी जीडीपी और मुद्रास्फीति के हालिया आंकड़े क्या रहे? अमेरिका की दूसरी तिमाही की जीडीपी दर 2.2% पर संशोधित हुई, जबकि अगस्त का पीसीई प्राइस इंडेक्स 3.4% पर रहा। 3. 28 अक्टूबर को फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की कितनी संभावना है? ताजा आंकड़ों के बाद 28 अक्टूबर को ब्याज दर वृद्धि की संभावना घटकर करीब 21% रह गई है, जो पहले 70% से अधिक थी। 4. दैनिक चार्ट के अनुसार EUR/USD के लिए कौन सा अहम समर्थन स्तर है? 200-सप्ताह का एसएमए 1.1096 पर प्रमुख समर्थन है, जिसके टूटने पर जोड़ी 1.1000 के स्तर का परीक्षण कर सकती है। https://trendkia.com/market/us-dollar-ki-majabuti-ke-bicha-euro-men-lagatara-chauthe-haphte-giravata-1-1000-ke-stara-para-tiki-nigahen-42010 TrendKia — Har trend, sabse pehle.