अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच यूरो में सीमित सुधार, तकनीकी दबाव जारी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और यूरोज़ोन की आर्थिक चुनौतियों के कारण यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर में सुधार सीमित बना हुआ है। तकनीकी स्तरों पर प्रमुख मूविंग एवरेज के नीचे रहने से बिकवाली का दबाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी सीमित दायरे में कारोबार कर रही है, जहां अमेरिकी डॉलर की स्थिरता इस जोड़ी की बढ़त को सीमित कर रही है। गुरुवार के सत्र में डॉलर पर भारी दबाव देखने को मिला था, जिसके बाद शुक्रवार को डॉलर ने खुद को संभाला। इस दौरान विनिमय दर 1.1230 के आसपास कारोबार करती देखी गई, जो दिन के उच्चतम स्तर 1.1269 से नीचे है। इस सुस्त गति के बावजूद यह जोड़ी पिछले छह हफ्तों में अपनी पहली साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। बाजार सहभागियों की नजरें फेडरल रिजर्व की भावी ब्याज दर रणनीति और यूरोज़ोन की आर्थिक सेहत से जुड़े आंकड़ों पर टिकी हुई हैं। फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और डॉलर सूचकांक का रुख अमेरिकी मुद्रा को फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख से लगातार समर्थन मिल रहा है। हाल ही में जारी हुए अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों ने संकेत दिया है कि वर्ष समाप्त होने से पहले केंद्रीय बैंक एक और ब्याज दर वृद्धि कर सकता है। इस संभावना ने अमेरिकी डॉलर को मजबूत आधार दिया है। छह प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर के मूल्य को दर्शाने वाला अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DXY) 101.90 के आसपास कारोबार कर रहा है। इससे पहले यह दिन के निचले स्तर 101.58 तक फिसल गया था, जो एक अक्टूबर के बाद का इसका सबसे निचला स्तर था। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श की टिप्पणियों ने बाजार में अनिश्चितता बनाए रखी है। वार्श ने स्पष्ट किया है कि वे मूल्य स्थिरता लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने भविष्य की ब्याज दर बढ़ोतरी को लेकर कोई सीधा संकेत देने से परहेज किया है। यूरोपीय केंद्रीय बैंक की नीतियां और यूरोज़ोन के समक्ष चुनौतियां दूसरी तरफ यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ईसीबी) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों से यूरो को केवल सीमित सहारा मिल पा रहा है। मुद्रा कारोबारी यूरोज़ोन में आर्थिक विकास को लेकर बने जोखिमों का आकलन कर रहे हैं। इसके साथ ही फ्रांस में वित्तीय घाटे और राजनीतिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों के विश्वास को प्रभावित किया है। जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय केंद्रीय बैंक यूरोज़ोन के 20 सदस्य देशों की मौद्रिक नीतियों का संचालन करता है। ईसीबी का मुख्य दायित्व मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना है। ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार बैठक करती है, जिसमें सदस्य देशों के केंद्रीय बैंकों के प्रमुख और राष्ट्रपति क्रिस्टीन लेगार्ड सहित छह स्थायी सदस्य मौद्रिक फैसलों पर मुहर लगाते हैं। आर्थिक संकेतक और यूरो विनिमय दर का संबंध यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति को मापने वाला हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज (एचआईसीपी) यूरो की चाल निर्धारित करने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। जब मुद्रास्फीति ईसीबी के दो प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकलती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाने के लिए बाध्य होता है। अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर विदेशी पूंजी को आकर्षित करती हैं, जिससे यूरो मजबूत होता है। हालांकि, यूरोज़ोन के अन्य प्रमुख आर्थिक संकेतक जैसे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई आंकड़े और उपभोक्ता भावना सर्वेक्षण अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार को उजागर कर रहे हैं। जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन यूरोज़ोन की कुल अर्थव्यवस्था में 75 प्रतिशत का योगदान देते हैं, इसलिए इन चार देशों से आने वाले आंकड़े यूरो की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसके अलावा व्यापार संतुलन भी मुद्रा को प्रभावित करता है, जहां मजबूत निर्यात से मुद्रा को बल मिलता है। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो का प्रभाव यूरो दुनिया की 20 यूरोपीय संघ के देशों की आधिकारिक मुद्रा है और अमेरिकी डॉलर के बाद वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा कारोबार वाली दूसरी सबसे बड़ी मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, कुल विदेशी मुद्रा लेनदेन में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत थी, जिसका औसत दैनिक कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा। वैश्विक स्तर पर यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी कुल मुद्रा कारोबार के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है। इसके बाद यूरो और जापानी येन की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत, यूरो और ब्रिटिश पाउंड की हिस्सेदारी 3 प्रतिशत तथा यूरो और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत आंकी गई है। इस सप्ताह यूरो ने प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मिश्रित प्रदर्शन किया, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले यूरो का प्रदर्शन सबसे मजबूत दर्ज किया गया। तकनीकी विश्लेषण और महत्वपूर्ण मूल्य स्तर तकनीकी चार्ट पर यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर वर्तमान में 1.12 के स्तर पर स्थिर बनी हुई है, जो पिछले बंद स्तर के मुकाबले 0.40 प्रतिशत की बढ़त दर्शाती है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 1.11 से 1.20 के बीच बना हुआ है। दैनिक चार्ट पर यह जोड़ी प्रमुख मूविंग एवरेज के नीचे कारोबार कर रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में विक्रेता अभी भी नियंत्रण में हैं। 20 दिनों का घातीय मूविंग एवरेज (ईएमए) 1.13 पर, 50 दिनों का ईएमए 1.14 पर और 200 दिनों का ईएमए 1.16 पर स्थित है। 50 दिनों के साधारण मूविंग एवरेज (एसएमए) 1.15 और 200 दिनों के एसएमए 1.16 के नीचे रहने तथा 50 दिनों के ईएमए के 200 दिनों के ईएमए से नीचे फिसलने से डेथ क्रॉस बना हुआ है, जो दीर्घकालिक गिरावट के रुझान की पुष्टि करता है। मोमेंटम संकेतक और बाजार का रुख रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) 37 के स्तर पर मौजूद है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र के करीब हल्की स्थिरता का संकेत देता है। एमएसीडी संकेतक -0.01 पर है जबकि इसका सिग्नल भी -0.01 पर बना हुआ है, जिसका हिस्टोग्राम 0.00 पर मामूली तेजी के शुरुआती संकेत दे रहा है। हालांकि, तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि जब तक कीमत प्रमुख मूविंग एवरेज को पार नहीं करती, तब तक मजबूत तेजी की संभावना बेहद कमजोर है। एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (एडीएक्स) 51 पर दर्ज किया गया है, जो इस गिरावट के रुझान में अत्यधिक मजबूती को दर्शाता है। स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर की फास्ट लाइन 48 और सिग्नल लाइन 36 पर स्थित है। बोलिंजर बैंड्स का निचला दायरा 1.11 और ऊपरी दायरा 1.15 पर है, जबकि इसका मध्य स्तर 1.13 पर स्थित है। वर्तमान कीमत बोलिंजर बैंड के दायरे के भीतर बनी हुई है। कारोबारियों के लिए समर्थन और प्रतिरोध के प्रमुख बिंदु आगामी सत्रों के लिए 14 दिनों का एवरेज ट्रू रेंज (एटीआर) 0.01 पर है, जो दैनिक अस्थिरता को मापने और स्टॉप लॉस तय करने के लिए एक मानक सीमा प्रदान करता है। इस जोड़ी के लिए 20 दिनों का प्रमुख समर्थन 1.11 के स्तर पर बना हुआ है, जबकि प्रतिरोध 1.15 के करीब है। दैनिक पिवट बिंदु 1.12 पर स्थित है। यदि जोड़ी में ऊपर की ओर गति बनती है, तो पहला प्रतिरोध 1.13 और दूसरा प्रतिरोध भी 1.13 के उच्च दायरे में देखने को मिलेगा। वहीं नीचे की तरफ गिरावट की स्थिति में पहला समर्थन 1.12 और दूसरा समर्थन भी 1.12 के निचले दायरे में मजबूती प्रदान करेगा। जब तक विनिमय दर इन स्तरों के पार निर्णायक बढ़त नहीं बनाती, तब तक बाजार में सतर्कता बनी रहेगी। अन्य वित्तीय संपत्तियों और मुद्राओं का प्रदर्शन वैश्विक बाजार में व्यापक रुझानों को देखें तो अन्य परिसंपत्तियों में भी डॉलर की चाल का असर दिखा। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सुधरकर 0.6950 की ओर बढ़ा। केविन वार्श की टिप्पणियों के बाद डॉलर पर बने दबाव से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा मिला। दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी नए दबाव में आई और 158.00 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गई। कमोडिटी बाजार में सोने की कीमत 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे घट-बढ़ के दौर से गुजरती रही, जहां अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में मामूली सुधार और डॉलर की सुस्ती ने सोने की कीमतों को एक सीमित दायरे में रखा। डिजिटल संपत्ति बाजार में अक्टूबर के दौरान दबाव बना रहा, जहां बिटकॉइन इस सप्ताह 80,000 डॉलर से नीचे गिर गया था, जिसके बाद शुक्रवार को यह संभलकर लगभग 82,000 डॉलर के स्तर पर पहुंचा। यह दर्शाता है कि समष्टिगत आर्थिक दबाव और मांग में कमी अभी भी विभिन्न वित्तीय परिसंपत्तियों को प्रभावित कर रही है। इसका आप पर असर वैश्विक मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती और यूरो की सुस्ती का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और विदेश यात्रा की लागत पर पड़ता है। • मुद्रा कारोबारियों पर प्रभाव: विदेशी मुद्रा व्यापार करने वाले निवेशकों को मौजूदा स्तरों पर सख्त स्टॉप लॉस का इस्तेमाल करना चाहिए। 1.12 के पिवट स्तर और 1.13 के कड़े प्रतिरोध को देखते हुए नई लंबी पोजिशन लेने से पहले तकनीकी पुष्टि जरूरी है। • यूरोप यात्रा और पढ़ाई की लागत: यूरोपीय देशों की यात्रा करने या वहां अध्ययन करने वाले भारतीय छात्रों के लिए यूरो का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना यूरो आधारित खर्चों को स्थिर रख सकता है। हालांकि, डॉलर आधारित अंतरराष्ट्रीय लेन-देन और ट्यूशन फीस पर मुद्रा दरों में बदलाव का सीधा असर देखा जाएगा। • आयात और निर्यात क्षेत्र: यूरोप को निर्यात करने वाले भारतीय व्यापारियों के लिए विनिमय दर में स्थिरता मार्जिन सुरक्षित रखने में मददगार होगी। वहीं डॉलर में भुगतान करने वाले आयातकों को अमेरिकी मुद्रा की मजबूती के कारण अपनी हेजिंग रणनीतियों को मजबूत रखना होगा। • क्रॉस-एसेट निवेशकों पर असर: वैश्विक स्तर पर डॉलर सूचकांक की मजबूती से सोना और क्रिप्टोकरेंसी जैसी जोखिम भरी संपत्तियों पर दबाव बना रहता है। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाते समय ब्याज दरों के वैश्विक परिदृश्य पर नजर रखनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे वृद्धि की संभावना और यूरोज़ोन में सुस्त आर्थिक विकास के कारण यूरो पर लगातार दबाव बना हुआ है। • अमेरिकी ब्याज दर की उम्मीदें: हालिया अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा वर्ष के अंत से पहले ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को बल दिया है। इससे डॉलर सूचकांक को मजबूती मिली है और प्रतिस्पर्धी मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है। • यूरोज़ोन में विकास की सुस्ती: यूरोप की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं जैसे जर्मनी और फ्रांस में आर्थिक सुस्ती और कमजोर विनिर्माण आंकड़ों ने निवेशकों का रुझान यूरो से दूर किया है। इसके चलते यूरोपीय केंद्रीय बैंक के नीतिगत समर्थन का प्रभाव सीमित रहा है। • फ्रांस में राजनीतिक और वित्तीय अस्थिरता: फ्रांस में बढ़ते बजट घाटे और राजनीतिक चिंताओं ने यूरोज़ोन की वित्तीय स्थिरता को लेकर बाजार में चिंता बढ़ाई है। इस क्षेत्रीय अनिश्चितता का सीधा नकारात्मक प्रभाव यूरो की विनिमय दर पर देखा गया है। • तकनीकी गिरावट का चक्र: दैनिक चार्ट पर 50 दिनों के ईएमए का 200 दिनों के ईएमए से नीचे फिसलना डेथ क्रॉस का निर्माण करता है। इस तरह के मंदी के तकनीकी संकेतकों के कारण संस्थागत विक्रेताओं का दबाव लगातार बना हुआ है। सवाल-जवाब 1. वर्तमान में यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी किस स्तर पर कारोबार कर रही है? यह जोड़ी वर्तमान में 1.12 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो इसके पिछले बंद स्तर के मुकाबले 0.40 प्रतिशत की बढ़त दर्शाती है। 2. अमेरिकी डॉलर सूचकांक का ताजा स्तर क्या है? अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DXY) 101.90 के आसपास कारोबार कर रहा है, जो दिन के निचले स्तर 101.58 से सुधरा है। 3. यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था में किन देशों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है? जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन यूरोज़ोन की कुल अर्थव्यवस्था में लगभग 75 प्रतिशत का योगदान देते हैं। 4. तकनीकी चार्ट पर ईएमए का क्या रुख है? 20-दिवसीय ईएमए 1.13, 50-दिवसीय ईएमए 1.14 और 200-दिवसीय ईएमए 1.16 पर स्थित है, जो दीर्घकालिक मंदी के रुझान की पुष्टि करता है। 5. वैश्विक मुद्रा बाजार में यूरो और अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी कितनी है? वैश्विक स्तर पर कुल विदेशी मुद्रा लेनदेन में यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत आंकी गई है। https://trendkia.com/market/us-dollar-ki-majabuti-ke-bicha-euro-men-simita-sudhara-takaniki-dabava-jari-48346 TrendKia — Har trend, sabse pehle.