अमेरिकी महंगाई के दबाव से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पस्त, पांचवें दिन भी गिरावट जारी ऊर्जा कीमतों से उपजी अमेरिकी महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर लगातार पांचवें सत्र में फिसलकर 0.6930 के स्तर पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव लगातार गहराता जा रहा है, जहां अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मजबूती के सामने स्थानीय मुद्रा संभल नहीं पा रही है। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 0.6930 के आसपास कारोबार कर रही है, जो लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में कमजोरी का संकेत है। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका में ऊर्जा की ऊंची कीमतों से उपजी महंगाई की चिंताएं हैं। ऊर्जा लागत में उछाल ने यह आशंका बढ़ा दी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व को लंबे समय तक अपनी नीतिगत ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ सकती हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर को मजबूत सहारा मिल रहा है और वैश्विक निवेशक जोखिम भरी मुद्राओं से दूरी बना रहे हैं। मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर का दबदबा और तकनीकी परिदृश्य अमेरिकी डॉलर अपने 17 महीने के उच्चतम स्तर के करीब मजबूती बनाए हुए है। तेल की कीमतों से उपजी महंगाई की चिंताओं ने अक्टूबर में फेड की दर वृद्धि के घटते दावों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट के असर को पूरी तरह बेअसर कर दिया है। तकनीकी स्तरों की पड़ताल करें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी के लिए ऊपर की तरफ तत्काल रुकावट 9 अवधि के ईएमए यानी 0.6993 पर बनी हुई है। यदि यह जोड़ी इससे ऊपर निकलती है, तो 50 अवधि का ईएमए 0.7073 के करीब एक प्रमुख बाधा के रूप में सामने आएगा। विश्लेषकों का मानना है कि इस स्तर पर बिकवाल एक बार फिर बाजार पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं। दूसरी ओर, गिरावट के रुख को देखें तो मौजूदा भाव 0.6927 के करीब एक अल्पकालिक धुरी बिंदु के रूप में काम कर रहा है। यदि बिकवाली का दबाव बना रहता है और मुद्रा नीचे की ओर फिसलती है, तो अगला महत्वपूर्ण ढांचागत समर्थन 0.6667 के क्षैतिज स्तर पर स्थित है। यदि मौजूदा गिरावट गहराती है, तो यह स्तर जोड़ी को स्थिर करने और आधार बनाने में मदद कर सकता है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, इस मुद्रा जोड़ी का 14 दिवसीय आरएसआई 25 के स्तर पर पहुंच गया है, जो ओवरसोल्ड स्थिति को दर्शाता है। वहीं एमएसीडी मंदी के रुख का संकेत दे रहा है और एडीएक्स 37 पर है, जो मौजूदा ट्रेंड की मजबूती की पुष्टि करता है। रोजगार आंकड़े और नीतिगत फैसलों पर टिकी निगाहें मुद्रा कारोबारियों की नजरें अब पूरी तरह से आने वाले अमेरिकी सितंबर रोजगार आंकड़ों पर टिकी हैं। बाजार का अनुमान है कि गैर-कृषि पेरोल में इस बार केवल 90,000 नई नौकरियां जुड़ेंगी, जो रोजगार बाजार की रफ्तार में सुस्ती का संकेत हो सकता है। यह आंकड़ा तय करेगा कि फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है। दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलिया के घरेलू मोर्चे पर सीबीए का मानना है कि रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दर बढ़ोतरी पर फिलहाल विराम लग चुका है। हालांकि, नवंबर की नीतिगत बैठक अभी भी पूरी तरह खुली हुई है और यह आने वाले मुद्रास्फीति आंकड़ों पर निर्भर करेगी। रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा तय की जाने वाली ब्याज दरें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की सेहत के लिए सबसे अहम चालकों में से एक हैं। केंद्रीय बैंक उन दरों को नियंत्रित करता है जिन पर ऑस्ट्रेलियाई बैंक आपस में उधारी लेते हैं, और यही दरें पूरी अर्थव्यवस्था में उधार लेने की लागत को प्रभावित करती हैं। रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया का प्राथमिक लक्ष्य ब्याज दरों को घटाकर या बढ़ाकर मुद्रास्फीति को 2 से 3 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखना है। जब अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों के मुकाबले ऑस्ट्रेलिया में ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो इससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिलता है, जबकि दरें कम रहने पर मुद्रा पर नकारात्मक असर पड़ता है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय बैंक ऋण स्थितियों को प्रभावित करने के लिए मात्रात्मक सहजता और कड़ाई का उपयोग करता है, जहां सहजता मुद्रा के लिए नकारात्मक और कड़ाई सकारात्मक मानी जाती है। चीन की अर्थव्यवस्था और लौह अयस्क का सीधा असर ऑस्ट्रेलिया प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है और उसका सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद लौह अयस्क है। साल 2021 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया का लौह अयस्क निर्यात सालाना 118 अरब डॉलर का रहा था, जिसका प्रमुख खरीदार चीन है। इसी वजह से वैश्विक बाजार में लौह अयस्क की कीमतों का सीधा असर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर देखने को मिलता है। आम तौर पर जब लौह अयस्क के दाम चढ़ते हैं, तो ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की कुल मांग बढ़ती है और उसकी कीमत में उछाल आता है। इसके उलट, जब अयस्क के भाव गिरते हैं तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर कमजोर पड़ता है। अयस्क के ऊंचे दाम ऑस्ट्रेलिया के लिए सकारात्मक व्यापार संतुलन बनाने में मदद करते हैं, जो मुद्रा के लिए बेहद अनुकूल होता है। चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसलिए चीनी अर्थव्यवस्था की सेहत सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को प्रभावित करती है। जब चीनी अर्थव्यवस्था में तेजी होती है, तो वह ऑस्ट्रेलिया से अधिक कच्चा माल, उत्पाद और सेवाएं आयात करता है। इससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की वैश्विक मांग में इजाफा होता है और उसका मूल्य बढ़ता है। इसके विपरीत, जब चीनी अर्थव्यवस्था उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं पकड़ पाती, तो आयात घट जाता है। चीन के आर्थिक वृद्धि आंकड़ों में आने वाले सकारात्मक या नकारात्मक उतार-चढ़ाव का सीधा असर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और उससे जुड़े मुद्रा जोड़ों पर पड़ता है। व्यापार संतुलन और व्यापक बाजार धारणा की भूमिका व्यापार संतुलन, जो किसी देश द्वारा अपने निर्यात से अर्जित कमाई और आयात पर किए गए खर्च का अंतर होता है, मुद्रा के मूल्य निर्धारण का एक अन्य महत्वपूर्ण पैमाना है। यदि ऑस्ट्रेलिया की ओर से उत्पादित वस्तुओं की मांग वैश्विक बाजार में अत्यधिक रहती है, तो निर्यात से प्राप्त अधिशेष मांग अपने आप मुद्रा को मजबूती प्रदान करती है। इस प्रकार शुद्ध सकारात्मक व्यापार संतुलन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती देता है, जबकि व्यापार संतुलन का नकारात्मक होना मुद्रा पर भारी पड़ता है। इसके साथ ही वैश्विक बाजार धारणा भी मुद्रा चाल को निर्धारित करती है। जब निवेशक जोखिम उठाने के लिए तैयार होते हैं और जोखिम भरी संपत्तियों की ओर बढ़ते हैं, तो यह रुख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए सकारात्मक साबित होता है। लेकिन जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है और निवेशक सुरक्षित ठिकानों की तलाश करते हैं, तो उच्च जोखिम वाली मुद्राओं में बिकवाली देखी जाती है। व्यापक वित्तीय बाजार में अमेरिकी डॉलर-जापानी येन की जोड़ी भी 158.00 के करीब टिकी हुई है, जहां टोक्यो सीपीआई के उम्मीद से अधिक आने से बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें बढ़ाने की संभावना बनी हुई है। वहीं सोना भी 4,150 डॉलर के करीब सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और तेल की महंगाई के बीच अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है, जिससे गैर-यील्ड वाली पीली धातु और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दोनों पर दबाव बना हुआ है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में कमजोरी से वैश्विक मुद्रा बाजारों में डॉलर आधारित लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की लागत प्रभावित होगी। • आयात और खर्च पर प्रभाव: डॉलर मजबूत होने से आयातित वस्तुओं और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं का खर्च बढ़ जाता है। विदेशों में पढ़ाई या यात्रा करने वाले लोगों को करेंसी एक्सचेंज पर अधिक प्रीमियम चुकाना पड़ सकता है। • वस्तुओं के दाम और धातु बाजार: लौह अयस्क जैसी प्रमुख औद्योगिक धातुओं की कीमतें मुद्रा के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होती हैं। निर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों की इनपुट लागत में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। • फॉरेक्स कारोबारियों के लिए रणनीति: मुद्रा जोड़ी में लगातार पांच दिन की गिरावट से तकनीकी स्तरों पर बिकवाली का दबाव बढ़ा है। कारोबारी 0.6920 के सपोर्ट और 0.6993 के रेजिस्टेंस स्तर को ध्यान में रखकर अपने पोजीशन साइज तय कर सकते हैं। • वैश्विक निवेश और जोखिम धारणा: जब निवेशक अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित मानकर अपनाते हैं, तो उभरते बाजारों और जोखिम भरी संपत्तियों से पूंजी निकासी होती है। इससे अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। ऐसा क्यों हुआ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिका में ऊर्जा की ऊंची कीमतों से उपजी महंगाई और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण आई है। साथ ही ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख निर्यात और उसके सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार की आर्थिक स्थिति भी इस दबाव की बड़ी वजह है। • ऊर्जा लागत और अमेरिकी मुद्रास्फीति: कच्चे तेल और ईंधन की ऊंची कीमतों ने अमेरिका में मुद्रास्फीति के दबाव को दोबारा बढ़ा दिया है। इससे बाजार में यह धारणा मजबूत हुई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखेगा। • प्रमुख निर्यात लौह अयस्क पर निर्भरता: ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में लौह अयस्क की हिस्सेदारी सालाना 118 अरब डॉलर है। चीन में मांग के रुख और अयस्क की कीमतों में नरमी का सीधा नकारात्मक प्रभाव ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मांग पर पड़ता है। • आगामी अमेरिकी रोजगार आंकड़ों की प्रतीक्षा: निवेशक सितंबर के नॉन-फार्म पेरोल आंकड़ों के जारी होने से पहले सतर्क रुख अपना रहे हैं। नौकरियों की संख्या में 90,000 की सुस्ती के अनुमान ने डॉलर को सुरक्षित निवेश के तौर पर समर्थन दिया है। • ब्याज दर चक्र का ठहराव: सीबीए के आकलन के अनुसार ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक की दर वृद्धि का चक्र ठहर चुका है। दरों में बढ़ोतरी पर ब्रेक लगने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को अन्य उच्च-उपज वाली मुद्राओं के मुकाबले बढ़त नहीं मिल पा रही है। सवाल-जवाब 1. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में गिरावट की मुख्य वजह क्या है? ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण अमेरिका में महंगाई का दबाव बढ़ा है, जिससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर गिरकर 0.6930 पर आ गया। 2. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए तत्काल तकनीकी स्तर क्या हैं? ऊपर की तरफ 0.6993 पर 9-दिवसीय ईएमए तात्कालिक रेजिस्टेंस है, जबकि नीचे की ओर 0.6927 और 0.6667 प्रमुख सपोर्ट स्तर हैं। 3. लौह अयस्क ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कैसे प्रभावित करता है? लौह अयस्क ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात है जो 2021 के आंकड़ों के अनुसार सालाना 118 अरब डॉलर का था। इसके दाम बढ़ने पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मजबूत होता है। 4. रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया का मुद्रास्फीति लक्ष्य क्या है? रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ब्याज दरों को समायोजित करके मुद्रास्फीति को 2 से 3 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने का लक्ष्य रखता है। 5. अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से बाजार को क्या उम्मीद है? ट्रेडर्स अमेरिकी सितंबर गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें नई नौकरियों की संख्या घटकर 90,000 रहने का अनुमान लगाया गया है। https://trendkia.com/market/us-dollar-ki-majabuti-se-australian-dollar-pasta-panchaven-dina-bhi-giravata-jari-41638 TrendKia — Har trend, sabse pehle.