# अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच सोने की कीमतों पर दबाव, 20-दिवसीय ईएमए से नीचे फिसली बुलियन

> अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेतों और डॉलर की मजबूती के कारण सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। तकनीकी रूप से सोना अपने अहम 20-दिवसीय ईएमए से नीचे कारोबार कर रहा है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-dollar-ki-majbooti-ke-beech-gold-ki-keematon-par-dabav-20-day-ema-se-neeche-phisli-bullion-35751 · **Language:** Hindi
**Tags:** सोना, गोल्ड प्राइस, अमेरिकी डॉलर, फेडरल रिजर्व, ब्याज दर, कमोडिटी मार्केट, विदेशी मुद्रा, तकनीकी विश्लेषण, वित्त

अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मजबूती के सामने सोने की चमक फीकी पड़ती दिखाई दे रही है। हाजिर सोने के भाव फिसलकर 4,350 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गए हैं, क्योंकि निवेशकों के बीच अमेरिकी मुद्रा के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से चालू वर्ष में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी किए जाने के पुख्ता संकेतों ने बुलियन बाजार पर गहरा दबाव बना दिया है। तकनीकी चार्ट पर भी कीमती धातु अपने महत्वपूर्ण अल्पकालिक रुझान स्तरों से नीचे संघर्ष करती नजर आ रही है, जिससे अल्पावधि में बिकवाली का माहौल मजबूत बना हुआ है।

## अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में बढ़त और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY), जो दुनिया की छह प्रमुख प्रतिस्पर्धी मुद्राओं की तुलना में डॉलर के मूल्य का आकलन करता है, 0.1% की बढ़त के साथ 100.30 के आसपास कारोबार कर रहा है। यह स्तर शुक्रवार को दर्ज किए गए 100.56 के 50-दिवसीय उच्च स्तर के बेहद करीब है। मुद्रा बाजार में जब भी डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए डॉलर में आंकी जाने वाली संपत्तियां अपेक्षाकृत महंगी हो जाती हैं, जिससे सोने का जोखिम-इनाम संतुलन निवेशकों के लिए प्रतिकूल बन जाता है।

फेडरल रिजर्व ने पिछले सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (bps) की वृद्धि करते हुए नीतिगत दर को 3.75% से 4.00% के दायरे में पहुंचा दिया था। इसके अलावा नीति निर्माताओं द्वारा जारी डॉट प्लॉट के माध्यम से स्पष्ट संकेत दिए गए कि इस वर्ष कम से कम एक और ब्याज दर वृद्धि देखने को मिल सकती है। बिना ब्याज वाली इस परिसंपत्ति के लिए पूंजी की बढ़ती लागत हमेशा एक बड़ी बाधा साबित होती है, जिसके कारण ट्रेडर्स कीमती धातु से हाथ खींचते दिख रहे हैं।

## दैनिक चार्ट पर तकनीकी संकेत: 20-दिवसीय ईएमए के नीचे अटका भाव
दैनिक चार्ट पर XAU/USD का भाव 4,349.73 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जहां अल्पावधि का रुझान मंदी की ओर झुका हुआ है। भाव को 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के ऊपर टिकने में लगातार बिकवाली के दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जो लगभग 4,366.80 डॉलर पर स्थित है। हाल के दिनों में भाव में सुधार की जितनी भी कोशिशें हुईं, वे आगे खरीदारों को आकर्षित करने में नाकाम रहीं।

मोमेंटम इंडिकेटर्स की बात करें तो रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 49 के करीब बना हुआ है, जो हल्का नकारात्मक रुख प्रदर्शित करता है। जब तक सोने की कीमत इस अल्पकालिक रुझान रेखा से नीचे बनी रहती है, तब तक तेजी की संभावना बेहद कमजोर नजर आ रही है। यदि ऊपरी स्तरों पर तकनीकी अवरोध की बात करें, तो 4,366.80 डॉलर पर स्थित 20-दिवसीय ईएमए प्राथमिक रेजिस्टेंस बना हुआ है। मंदी के दबाव को समाप्त करने और 4,500 डॉलर की ओर नई रिकवरी शुरू करने के लिए इस बाधा के पार टिकाऊ ब्रेकआउट अनिवार्य होगा। नीचे की ओर, यदि गिरावट का दौर जारी रहता है, तो सोना जुलाई के उच्च स्तर 4,200 डॉलर के सपोर्ट की तरफ फिसल सकता है।

लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, सत्र के दौरान सोने की कीमत 4,387 डॉलर दर्ज की गई, जो पिछले बंद भाव 4,425 डॉलर के मुकाबले 0.85% की गिरावट दर्शाती है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 3,718 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है, जबकि वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का 0.29 गुना रहा है। लाइव तकनीकी संकेतकों पर RSI(14) 47 पर है और MACD सिग्नल लाइन 14.77 के मुकाबले -4.00 पर नकारात्मक बना हुआ है। मूविंग एवरेज में ईएमए20 4,426 डॉलर, ईएमए50 4,392 डॉलर और ईएमए200 4,429 डॉलर पर है। 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे जाना डेथ क्रॉस मंदी का संकेत दे रहा है। बोलिंजर बैंड 4,253 डॉलर से 4,702 डॉलर के बीच हैं। बाजार में दैनिक वोलैटिलिटी का दायरा 104.30 डॉलर (ATR) है। अहम ट्रेडिंग लेवल्स में पिवट 4,396 डॉलर पर है, जहां पहला रेजिस्टेंस 4,414 डॉलर व दूसरा रेजिस्टेंस 4,440 डॉलर पर है, जबकि सपोर्ट क्रमशः 4,369 डॉलर और 4,351 डॉलर पर मौजूद है।

## वैश्विक अर्थव्यवस्था में सोने की ऐतिहासिक और सुरक्षित निवेश भूमिका
मानव इतिहास में सोने ने हमेशा मूल्य के संचय और विनिमय के साधन के रूप में एक केंद्रीय भूमिका निभाई है। आभूषणों में इसकी चमक और उपयोग के अलावा, आधुनिक वित्तीय प्रणाली में इसे संकट के समय सबसे सुरक्षित आश्रय (सेफ-हेवन एसेट) माना जाता है। किसी विशिष्ट सरकार या वित्तीय संस्थान पर निर्भर न होने के कारण यह मुद्रा अवमूल्यन और अनियंत्रित मुद्रास्फीति के खिलाफ बचाव का सबसे भरोसेमंद माध्यम है।

दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। संकट और भू-राजनीतिक अस्थिरता के समय अपनी घरेलू मुद्राओं को मजबूती देने और विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीदते हैं। विशाल स्वर्ण भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता और साख का बड़ा प्रतीक माना जाता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों ने वर्ष 2022 में अपने भंडार में 1,136 टन सोना जोड़ा था, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 70 अरब डॉलर थी। रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से यह किसी एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी स्वर्ण खरीदारी थी। वर्तमान में चीन, भारत और तुर्की जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार में तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

## अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और जोखिम भरी संपत्तियों से विपरीत संबंध
वित्तीय बाजारों में सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ विपरीत संबंध देखा जाता है। दोनों ही प्रमुख आरक्षित और सुरक्षित संपत्तियां हैं। जब अमेरिकी डॉलर में गिरावट आती है, तो सोने की कीमतें ऊपर चढ़ने लगती हैं, जिससे संस्थागत निवेशकों और केंद्रीय बैंकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अवसर मिलता है। इसी तरह, इक्विटी और अन्य जोखिम भरी परिसंपत्तियों के साथ भी इसका विपरीत रुख रहता है। शेयर बाजारों में तेजी आमतौर पर सोने को कमजोर करती है, जबकि जोखिम भरे बाजारों में बिकवाली का दौर सोने की मांग को बढ़ा देता है।

सोने के मूल्य में उतार-चढ़ाव कई वृहद कारकों पर निर्भर करता है। भू-राजनीतिक अस्थिरता या गहरी मंदी की आशंका से सेफ-हेवन मांग अचानक बढ़ जाती है, जिससे भाव तेजी से उछलते हैं। हालांकि, डॉलर के व्यवहार की भूमिका सबसे अहम होती है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सोना डॉलर (XAU/USD) में तय होता है। एक मजबूत डॉलर सोने के भाव को सीमित रखता है, जबकि कमजोर डॉलर कीमतों को तेजी से ऊपर खींचने का काम करता है।

## विदेशी मुद्रा बाजारों में हलचल: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन का रुख
सोमवार को एशियाई सत्र के दौरान अन्य मुद्रा जोड़ों में भी उल्लेखनीय गतिविधियां देखी गईं। AUD/USD 0.7100 के ऊपर स्थिर बना रहा, जहां लगातार भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी डॉलर ने अपने हालिया उच्चतम स्तरों से गिरावट को रोक दिया। हालांकि, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) द्वारा लोन प्राइम रेट्स को यथावत रखे जाने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव पड़ा, लेकिन आरबीए द्वारा ब्याज दर में एक और बढ़ोतरी की उम्मीदों ने ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन से पहले इसे जरूरी सहारा दिया।

दूसरी ओर, USD/JPY एशियाई कारोबार में 157.00 के नीचे आ गया। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा ब्याज दर जांच के बाद मुद्रा हस्तक्षेप के बढ़ते जोखिमों के चलते जापानी येन में मामूली मजबूती आई। जापान में अवकाश के माहौल और रूस-यूक्रेन व मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ट्रेडर्स सतर्क रहे, जिससे डॉलर की गिरावट सीमित रही और इस करेंसी पेयर का नुकसान रुक गया। इसके अतिरिक्त, बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया, जो कि बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप था।

## यूरोपीय सत्र में मंदी का रुख और वैश्विक बॉन्ड बाजार में चिंताएं
यूरोपीय कारोबारी सत्र के पहले हिस्से में भी सोने पर बिकवाली का दबाव हावी रहा। भाव 0.50% से अधिक की दैनिक गिरावट के साथ 4,350 डॉलर के आसपास बना रहा। फिर भी, कीमती धातु पिछले बुधवार को बने छह सप्ताह के निचले स्तर से काफी ऊपर टिकी हुई है। ट्रेडर्स इस समय मध्य पूर्व संकट के घटनाक्रमों और मुद्रास्फीति पर उसके संभावित प्रभावों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे आगामी ब्याज दर अपेक्षाएं तय होंगी।

तीसरी तिमाही के अंतिम हफ्तों में वित्तीय बाजार एक अजीबोगरीब स्थिति से गुजर रहे हैं। बाजार में अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव बना हुआ है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें गिर रही हैं तथा यूरोपीय और अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ खुलने की तैयारी में हैं। सबसे बड़ा दबाव सॉवरेन बॉन्ड बाजारों में देखा जा रहा है, जहां अमेरिकी और यूरोपीय यील्ड्स में शुक्रवार देर रात अचानक उछाल दर्ज किया गया था। बॉन्ड यील्ड की यह मजबूती गैर-उपज वाली कीमती धातुओं के लिए निकट भविष्य में एक बड़ी चुनौती बनी रह सकती है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण सोने की कीमतों में गिरावट का सीधा असर खुदरा आभूषण खरीदारों, निवेशकों और आयात बिल पर पड़ता है।

- **खुदरा खरीदारों के लिए:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में नरमी से घरेलू बाजारों में आभूषणों की कीमतों में स्थिरता या हल्की राहत मिल सकती है। त्योहारी या शादी-विवाह के सीजन से पहले खरीदारी करने वालों के लिए यह एक अनुकूल समय साबित हो सकता है।
- **गोल्ड ईटीएफ और निवेशकों के लिए:** तकनीकी रूप से 20-दिवसीय ईएमए से नीचे रहने के कारण अल्पकालिक निवेशकों को तुरंत भारी तेजी की उम्मीद से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशक चरणबद्ध तरीके से खरीदारी (एसआईपी) करने की रणनीति पर विचार कर सकते हैं।
- **आयात लागत और अर्थव्यवस्था पर:** वैश्विक स्तर पर सोने के कमजोर भाव से देश के चालू खाता घाटे और आयात बिल पर दबाव कुछ हद तक कम होता है। हालांकि डॉलर की मजबूती आयातित वस्तुओं की घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
- **सुरक्षित निवेश का विकल्प:** वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद ऊंची ब्याज दरें सोने की चमक को सीमित कर रही हैं। पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखने के लिए कुल निवेश का 10-15 प्रतिशत हिस्सा सोने में बनाए रखना व्यावहारिक माना जाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
सोने की कीमतों में यह गिरावट अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीति में सख्ती बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में डॉलर के मजबूत होने के कारण दर्ज की गई है।

- **फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति:** केंद्रीय बैंक द्वारा हाल ही में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि की गई और चालू वर्ष में एक और बढ़ोतरी के स्पष्ट संकेत दिए गए। ब्याज दरों में वृद्धि से बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने की होल्डिंग लागत बढ़ जाती है।
- **अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में तेजी:** छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर इंडेक्स 100.30 के स्तर तक पहुंच गया, जो हाल के 50-दिवसीय उच्च स्तर के करीब है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर मजबूत होने पर अन्य मुद्राओं के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग घटती है।
- **तकनीकी स्तरों पर बिकवाली:** दैनिक चार्ट पर भाव 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (4,366.80 डॉलर) के नीचे बने रहने से तकनीकी ट्रेडर्स में मुनाफावसूली और शॉर्ट सेलिंग का रुझान बढ़ा है। रिकवरी के प्रयासों में लगातार खरीदारी की कमी देखी गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे और बढ़ोतरी के संकेतों के कारण सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

### 2. तकनीकी चार्ट पर सोने के लिए महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस लेवल कौन सा है?
सोने के लिए पहला मजबूत तकनीकी रेजिस्टेंस 20-दिवसीय ईएमए के पास लगभग 4,366.80 डॉलर पर स्थित है।

### 3. यदि गिरावट जारी रहती है तो सोने को कहां सपोर्ट मिल सकता है?
विश्लेषण के अनुसार नीचे की ओर सोने को जुलाई के उच्च स्तर 4,200 डॉलर के आसपास मजबूत सपोर्ट मिल सकता है।

### 4. फेडरल रिजर्व ने अपनी पिछली बैठक में ब्याज दरों में कितना बदलाव किया था?
फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करके इसे 3.75% से 4.00% के दायरे में कर दिया था।

### 5. डॉलर के मजबूत होने से सोने के भाव पर क्या असर पड़ता है?
चूंकि सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में आंका जाता है, इसलिए डॉलर मजबूत होने पर यह अन्य मुद्रा धारकों के लिए महंगा हो जाता है और मांग घटने से भाव गिरते हैं।

### 6. वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने कितना सोना खरीदा था?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड 1,136 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा था।

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