अमेरिकी डॉलर की तीन हफ़्ते की तेज़ी पर मौद्रिक नीति और चुनावी दबाव से ब्रेक लगने के आसार कमज़ोर मुद्रास्फीति आंकड़ों, बॉन्ड यील्ड में उछाल और आगामी मध्यावधि चुनावों के चलते अमेरिकी डॉलर की तेज़ी अब नीतिगत सीमाओं से टकरा रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार में बीते तीन सप्ताह से जारी अमेरिकी डॉलर की मज़बूती अब मौद्रिक नीति से जुड़ी सीमाओं के सामने दम तोड़ती दिख रही है। फेडरल रिज़र्व के वरिष्ठ अधिकारियों ने 28 अक्टूबर को होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक में लगातार दूसरी बार ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं को खारिज करना शुरू कर दिया है। अमेरिका में पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) मुद्रास्फीति के नरम आंकड़ों और गैर-कृषि पेरोल यानी नॉन-फार्म पेरोल्स में आई नरमी के बाद नीति निर्माताओं के सामने नई चिंताएं खड़ी हो गई हैं। ट्रेजरी यील्ड में उछाल और बाज़ार की नई चिंताएं अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े हालिया संकेतकों के बाद निवेशकों का ध्यान अब लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड में हो रही बढ़ोतरी के असहज करने वाले कारणों की तरफ मुड़ सकता है। लंबी अवधि की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड वैश्विक वित्तीय संकट से पहले के उच्च स्तरों के करीब पहुंच रही है, और यह अंतर अमेरिकी डॉलर की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदें कम होने के बावजूद ट्रेजरी यील्ड का यह स्तर उधारी लागत को लगातार ऊंचा बनाए हुए है। मध्यावधि चुनाव और बढ़ती महंगाई की राजनीतिक चुनौती अमेरिकी डॉलर के सामने 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव भी एक बड़ी राजनीतिक अड़चन बनकर उभरे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन को रहन-सहन की बढ़ती लागत के चलते मतदाताओं की भारी नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। आयात शुल्क यानी टैरिफ और ईरान संघर्ष के कारण आम उपभोक्ताओं के लिए किराना सामान और ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ चुकी हैं। इसके साथ ही, वास्तविक वेतन वृद्धि बेहद सुस्त बनी हुई है, जबकि अमेरिकी परिवारों को बंधक यानी मॉर्गेज और अन्य ऋणों पर भारी ब्याज दरों का बोझ उठाना पड़ रहा है। यदि प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर रिपब्लिकन पार्टी अपना नियंत्रण खो देती है, तो वित्तीय बाज़ार उस अमेरिकी असाधारणता के आख्यान का भी पुनर्मूल्यांकन कर सकते हैं, जिसने लिबरेशन डे के बाद आई बिकवाली से उबरने में अमेरिकी डॉलर का समर्थन किया था। राजनीतिक अनिश्चितता का यह माहौल मुद्रा बाज़ार के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है। वैश्विक मुद्राओं पर डॉलर का मिला-जुला असर सोमवार को देर से एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में नई बिकवाली देखी गई, जिससे AUD/USD की जोड़ी फिसलकर 0.6900 के स्तर की ओर आ गई। मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनावों के बीच डॉलर की नई ताकत ने इस जोड़ी पर दबाव बनाया। इस मुद्रा जोड़ी में आगामी रुख तय करने के लिए निवेशकों की नज़र कच्चे तेल की कीमतों, ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) से जुड़ी उम्मीदों पर टिकी हुई है। दूसरी ओर, एशियाई सत्र में USD/JPY ने शुरुआती गिरावट की भरपाई करते हुए 158.00 का स्तर दोबारा हासिल कर लिया और यह जोड़ी एक सप्ताह पुराने दायरे में कारोबार करती रही। फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदें घटने के बावजूद भू-राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर को सहारा दे रही है। हालांकि, बैंक ऑफ जापान (BoJ) के सख्त रुख और येन के समर्थन में संभावित बाज़ार हस्तक्षेप के जोखिम इस जोड़ी की आगे की बढ़त को सीमित कर सकते हैं। यूरोपीय मुद्रा के मोर्चे पर EUR/USD की जोड़ी मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। बुधवार को यह जोड़ी गिरकर 1.1312 के स्तर तक आ गई थी, जो कि जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यूरो में आई यह भारी गिरावट अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती, भू-राजनीतिक अस्थिरता और यूरोप में ऊर्जा की ऊंची कीमतों से जुड़े नए जोखिमों का सीधा नतीजा है। सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाज़ार की हलचल सोना इस दौरान एक सीमित दायरे में कारोबार करता रहा और यूरोपीय कारोबारी सत्र की शुरुआत में यह 4,150 डॉलर प्रति औंस के नीचे बना रहा, जो पिछले लगभग एक हफ्ते के दायरे के भीतर है। निवेशक शुक्रवार के निराशाजनक अमेरिकी रोज़गार आंकड़ों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ रहे हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर को मजबूत गति मिली और उसने अप्रैल 2025 के बाद का नया उच्चतम स्तर छू लिया। डॉलर की यह तेज़ी सोने की कीमतों पर दबाव बना रही है, हालांकि फेडरल रिज़र्व द्वारा अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना कम होने से सोने में बड़ी गिरावट भी थमी हुई है। डिजिटल एसेट बाज़ार में बीएनबी, जिसे पहले बाइनेंस कॉइन के नाम से जाना जाता था, लगातार तीन हफ्तों की बढ़त के बाद सोमवार को थोड़ा नरम होकर करीब 790 डॉलर पर कारोबार करता दिखा। इसके बावजूद डेरिवेटिव्स बाज़ार में बढ़ता ओपन इंटरेस्ट और सकारात्मक फंडिंग दरें यह संकेत दे रही हैं कि निवेशकों की तेजी की धारणा अभी भी मजबूत बनी हुई है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड की चाल से वैश्विक ब्याज दरों और आयात लागत पर सीधा असर पड़ता है। • भारतीय उपभोक्ताओं पर: डॉलर की मजबूती जारी रहने से कच्चे तेल और आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स महंगे हो सकते हैं। इससे घरेलू स्तर पर आयातित मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और ईंधन के खुदरा दामों पर दबाव बना रह सकता है। • वैश्विक निवेशकों पर: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी होने से उभरते बाज़ारों से पूंजी की निकासी तेज हो सकती है। निवेशकों को अपने विदेशी मुद्रा और ऋण निवेश की रणनीतियों को पुनर्संतुलित करना पड़ सकता है। • ऋणधारकों और होम लोन ग्राहकों पर: ऊंची अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरें वैश्विक स्तर पर उधारी दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखती हैं। इसका मतलब है कि निकट भविष्य में ईएमआई और बंधक ऋणों पर तुरंत राहत मिलने की संभावना सीमित है। • सोने और कमोडिटी खरीदारों के लिए: मजबूत डॉलर सोने की कीमतों को एक सीमित दायरे में बांधकर रखता है। आभूषण खरीदारों या सोने के निवेशकों को 4,150 डॉलर के स्तर के आसपास स्थिरता देखने को मिल सकती है। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर की तेज़ी रुकने और बाज़ार में अस्थिरता बढ़ने के पीछे नीतिगत बयान, कमज़ोर आर्थिक आंकड़े और राजनीतिक परिस्थितियां मुख्य वजह हैं। • फेडरल रिज़र्व के बयान और आर्थिक आंकड़े: फेड अधिकारियों ने 28 अक्टूबर की बैठक में लगातार दर वृद्धि की उम्मीदों को खारिज कर दिया है। इसके अलावा नरम PCE मुद्रास्फीति और कमज़ोर गैर-कृषि रोज़गार आंकड़ों ने केंद्रीय बैंक के आक्रामक रुख को धीमा कर दिया है। • बढ़ती बॉन्ड यील्ड का दबाव: लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड 2008 के वित्तीय संकट से पहले के उच्च स्तरों के करीब पहुंच गई है। यह स्थिति आर्थिक वृद्धि की जगह उधारी लागत और राजकोषीय चिंताओं के कारण बाज़ार में घबराहट पैदा कर रही है। • मध्यावधि चुनाव और घरेलू महंगाई: 3 नवंबर के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को मतदाताओं के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। टैरिफ और ईरान विवाद के कारण किराना और ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं, जिसने राजनीतिक जोखिम को गहरा कर दिया है। सवाल-जवाब 1. क्या 28 अक्टूबर को फेडरल रिज़र्व ब्याज दरें बढ़ाने जा रहा है? फेडरल रिज़र्व के वरिष्ठ अधिकारियों ने 28 अक्टूबर की FOMC बैठक में लगातार दूसरी बार ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं को खारिज कर दिया है। 2. अमेरिकी अर्थव्यवस्था के कौन से आंकड़े हाल ही में कमज़ोर रहे हैं? अमेरिका में पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) मुद्रास्फीति और गैर-कृषि पेरोल्स (रोज़गार) के आंकड़े उम्मीद से नरम दर्ज किए गए हैं। 3. 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों से डॉलर पर क्या असर पड़ सकता है? यदि रिपब्लिकन पार्टी हाउस का नियंत्रण खो देती है, तो बाज़ार अमेरिकी असाधारणता के आख्यान का पुनर्मूल्यांकन कर सकते हैं, जिससे डॉलर की धारणा प्रभावित होगी। 4. सोने की कीमतें वर्तमान में किस दायरे में कारोबार कर रही हैं? सोना पिछले एक हफ्ते से सीमित दायरे में बना हुआ है और यूरोपीय सत्र से पहले 4,150 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार कर रहा था। 5. मई 2025 के बाद EUR/USD किस निचले स्तर पर गिरा है? EUR/USD की जोड़ी गिरकर 1.1312 तक पहुंच गई है, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है और जनवरी के 1.2082 के उच्च स्तर से काफी नीचे है। 6. क्रिप्टोकरेंसी बीएनबी का ताज़ा कारोबारी स्तर क्या रहा? बीएनबी लगातार तीन हफ्तों की बढ़त दर्ज करने के बाद सोमवार को लगभग 790 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था। https://trendkia.com/market/us-dollar-ki-tina-hafte-ki-tezi-para-maudrika-niti-aura-chunavi-dabava-se-breka-lagane-ke-asara-43209 TrendKia — Har trend, sabse pehle.