# अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर बढ़ने की आशंका से डॉलर मजबूत, सोने पर दबाव

> फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी के अनुमान और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है, जिससे सोना गिरावट पर आ गया है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/us-dollar-majabuta-fed-byaja-dara-barhane-ki-ashnka-se-sone-para-dabava-35839 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी डॉलर, फेडरल रिजर्व, ब्याज दर, सोने का भाव, बैंक ऑफ जापान, विदेशी मुद्रा बाजार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर ने अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है, जिससे अन्य प्रमुख संपत्तियों और मुद्राओं के रुख पर गहरा असर देखा जा रहा है। हाल ही में बैंक ऑफ जापान द्वारा दरों की समीक्षा की चर्चाओं के चलते शुक्रवार को डॉलर में हल्की कमजोरी जरूर दर्ज की गई थी, लेकिन यह मुद्रा अभी भी बेहद ठोस आधार पर टिकी हुई है। विश्लेषकों का ताजा आकलन बताता है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इस साल अपनी मौद्रिक सख्ती के तहत ब्याज दरों में एक आखिरी बढ़ोतरी कर सकता है। इस संभावित बढ़ोतरी के लिए अक्टूबर के मुकाबले दिसंबर का समय अधिक अनुकूल माना जा रहा है, जिसकी एक वजह वहां होने वाले मध्यावधि चुनावों से जुड़ी संवेदनशीलता भी है। हालांकि, यदि आने वाले आर्थिक आंकड़े अप्रत्याशित मजबूती दिखाते हैं और ऊर्जा की कीमतों में और तेजी आती है, तो कारोबारी अगले महीने के लिए तय 13 बेसिस पॉइंट की संभावना में और इजाफा कर सकते हैं।

## फेडरल रिजर्व की नीति और डॉलर की आगे की चाल
बाजार का मौजूदा ढांचा यह संकेत देता है कि यदि नीतिगत निर्णय के दिन तक ब्याज दर बढ़ने की संभावना कम से कम दो-तिहाई तक पहुंच जाती है, तो केंद्रीय बैंक पर कदम उठाने का भारी दबाव बन सकता है। ऐसे में किसी सख्त आंतरिक प्रतिबद्धता के बिना भी फेडरल रिजर्व यील्ड कर्व के पिछले हिस्से में अप्रत्याशित अस्थिरता रोकने के लिए दरें बढ़ाने को मजबूर हो सकता है। सितंबर की बैठक के बाद फेडरल रिजर्व के और अधिक सख्त रुख अपनाने की संभावना डॉलर की बढ़त को आगे भी सहारा देने का मुख्य आधार बनी हुई है। हालांकि अल्पावधि में डॉलर में और मजबूती आने का जोखिम बना हुआ है, लेकिन साल के अंत और लंबी अवधि के परिदृश्य में डॉलर में धीरे-धीरे कमजोरी आने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि विश्लेषकों का दृष्टिकोण बाजार के मुकाबले फेडरल रिजर्व को लेकर अधिक नरम है और वे चौथी तिमाही में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट को अपने आधारभूत परिदृश्य के रूप में देख रहे हैं।

## भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वाशिंगटन में शीर्ष वार्ता
व्यापक कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा घटनाक्रम भी सामने आ रहा है, जहां डोनाल्ड ट्रंप गुरुवार को वाशिंगटन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने वाले हैं। हालांकि विश्लेषक इसे वित्तीय बाजारों के लिए कोई बहुत बड़ी उथल-पुथल मचाने वाली घटना नहीं मान रहे हैं, फिर भी व्यापार से जुड़ी सकारात्मक सुर्खियां अमेरिकी डॉलर को कुछ और मजबूती दे सकती हैं। इसके साथ ही रूस और यूक्रेन के बीच बना तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संकट निवेशकों को सतर्क रखे हुए हैं। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता है, तो पूंजी सुरक्षित ठिकानों की ओर भागती है, जिससे डॉलर को स्वाभाविक गति मिलती है।

## जापान, ऑस्ट्रेलिया और एशियाई मुद्राओं की स्थिति
एशियाई कारोबार के दौरान जापानी मुद्रा और डॉलर के बीच उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। बैंक ऑफ जापान द्वारा संभावित हस्तक्षेप के जोखिम और शुक्रवार को हुई दरों की समीक्षा के बाद जापानी येन में हल्का सुधार दर्ज हुआ, जिससे डॉलर और येन का अनुपात गिरकर 157.00 के नीचे आ गया। इसके अलावा जापान में अवकाश के कारण भी कारोबारी सहमे हुए हैं, जिससे डॉलर की तेज गिरावट थम गई और इस जोड़ी का निचला स्तर सीमित रह गया। वहीं दूसरी तरफ, बैंक ऑफ जापान ने पहले ही अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है, जो हफ्तों से बाजार की उम्मीदों के पूरी तरह अनुरूप रहा है।

ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बात करें तो यह एशियाई सत्र में 0.7100 के स्तर से ऊपर स्थिर बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर के जुलाई के अंत के उच्चतम स्तर से नीचे आने की गति थमने और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर मिला-जुला प्रभाव दिख रहा है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम रेट्स में कोई बदलाव न करने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर थोड़ा दबाव जरूर बना, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा एक और ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों ने ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात से पहले ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को गिरने से बचाए रखा।

## कमोडिटी और सॉवरेन बॉन्ड बाजार पर असर
मुद्रा बाजार की इस उठापटक का सीधा असर बहुमूल्य धातुओं पर पड़ा है। हफ्ते की शुरुआत में सोना मंदी के रुख के साथ खुला, जिससे उसकी पिछले दो दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे भी वृद्धि किए जाने की आशंकाओं और अमेरिकी डॉलर के मजबूत बने रहने से सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। आमतौर पर बढ़ती ब्याज दरें और मजबूत डॉलर सोने जैसी बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों के आकर्षण को घटा देते हैं।

वित्तीय बाजार इस समय तीसरी तिमाही के अंतिम हफ्तों में एक विचित्र स्थिति से गुजर रहे हैं। एक तरफ जहां बाजार में अनिश्चितता और भारी उतार-चढ़ाव हावी है, वहीं दूसरी तरफ तेल की कीमतों में नरमी आ रही है और यूरोपीय तथा अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ खुलने की तैयारी में हैं। हालांकि, वित्तीय तनाव का सबसे बड़ा केंद्र सरकारी बॉन्ड बने हुए हैं। शुक्रवार को देर से यूरोपीय और अमेरिकी यील्ड्स में एक बार फिर डर का माहौल बना और वे उछलकर ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं, जिसने बॉन्ड निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी डॉलर में जारी मजबूती और वैश्विक ब्याज दरों में वृद्धि की संभावनाओं से भारतीय उपभोक्ताओं, आयातकों और निवेशकों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

- **सोने के खरीदारों पर:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर मजबूत होने से सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है। घरेलू बाजार में आभूषण खरीदने वालों और त्योहारी सीजन की तैयारी कर रहे ग्राहकों को कीमतों में थोड़ी राहत मिल सकती है।
- **पेट्रोलियम और ईंधन पर:** कच्चे तेल की कीमतों में आ रही गिरावट से आयात बिल कम होने की उम्मीद है। यदि तेल की कीमतें नीचे बनी रहती हैं, तो घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की दरों में स्थिरता या कटौती की संभावना बन सकती है।
- **विदेशी यात्रा और पढ़ाई पर:** वैश्विक स्तर पर डॉलर के मजबूत रुख से अन्य मुद्राओं के मुकाबले खर्च बढ़ सकता है। विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों और वहां जाने वाले यात्रियों को मुद्रा विनिमय पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है।
- **शेयर और बॉन्ड निवेशकों पर:** सॉवरेन बॉन्ड यील्ड्स में उछाल और दरों में बढ़ोतरी के जोखिम से बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इक्विटी निवेशकों को जोखिम भरे पोर्टफोलियो को संभालते समय अधिक सतर्कता बरतनी होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में अतिरिक्त वृद्धि की संभावनाओं और प्रमुख भू-राजनीतिक तनावों से प्रेरित है। इसके साथ ही अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों के कदमों ने भी मुद्रा विनिमय दरों को व्यापक रूप से प्रभावित किया है।

- **फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती:** अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की मजबूती और ऊर्जा बाजार के रुख को देखते हुए एक और दर वृद्धि की संभावना बढ़ी है। यदि बाजार दो-तिहाई संभावना तय करता है, तो केंद्रीय बैंक यील्ड कर्व को संभालने के लिए दरें बढ़ाने को तैयार हो सकता है।
- **बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले:** बैंक ऑफ जापान ने दर समीक्षा के बाद अपनी अल्पकालिक नीतिगत दर को बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। इसके चलते येन में हल्की मजबूती आई, जिसने मुद्रा बाजार में कुछ समय के लिए डॉलर की बढ़त को रोका।
- **भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं:** रूस और यूक्रेन के बीच बना तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संकट सुरक्षित संपत्ति के रूप में डॉलर की मांग बनाए हुए हैं। इसके साथ ही वाशिंगटन में होने वाली द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं से पहले निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की सबसे अधिक संभावना कब है?
विश्लेषकों के अनुसार अक्टूबर के मुकाबले दिसंबर में दर वृद्धि की संभावना अधिक है, जिसकी एक वजह मध्यावधि चुनावों की नजदीकी है।

### 2. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है।

### 3. अमेरिकी डॉलर की मजबूती का सोने पर क्या असर पड़ा है?
मजबूत डॉलर और दर वृद्धि की आशंकाओं के कारण सोने में मंदी आई है और इसकी पिछले दो दिनों की बढ़त टूट गई है।

### 4. वाशिंगटन में किन दो बड़े नेताओं की बैठक होने जा रही है?
वाशिंगटन में गुरुवार को डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है।

### 5. डॉलर के मुकाबले जापानी येन किस स्तर पर कारोबार कर रहा है?
जापानी येन में हल्के सुधार के बाद डॉलर और येन की विनिमय दर घटकर 157.00 के नीचे आ गई है।

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