महंगाई के आंकड़ों से पहले अमेरिकी डॉलर में ठहराव, वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में दिखा मिला-जुला असर अमेरिकी सीपीआई रिपोर्ट और फेडरल रिजर्व के रुख से पहले डॉलर इंडेक्स 102 के स्तर से ऊपर टिका हुआ है, जबकि रुपया, येन और सोने की कीमतों में सतर्कता बनी हुई है। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर इस समय एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। मुद्रास्फीति से जुड़े नए आंकड़ों के आने से पहले निवेशक बेहद सतर्क रुख अपना रहे हैं। अमेरिकी आर्थिक गतिविधियों से जुड़े हालिया नरम आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के नपे-तुले बयानों के बाद बाजार में तत्काल ब्याज दरें बढ़ने की संभावना काफी कम हो गई है। वित्तीय बाजारों में इस महीने नीतिगत दरों में बहुत मामूली बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है, जिसके चलते प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 102.00 के अहम स्तर के ठीक ऊपर मजबूती से टिका हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि सितंबर महीने के लिए आने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़े और फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉश की आगामी टिप्पणियां आगे की मौद्रिक नीति तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। अगर महंगाई के आंकड़ों में कोई अप्रत्याशित और बड़ा उछाल नहीं दिखता है, तो नीति नियंताओं द्वारा इस महीने ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया जा सकता है। इसके बाद बाजार दिसंबर में संभावित नीतिगत सख्ती की संभावनाओं पर नजर बनाए रखेगा। मुद्रा बाजार में रातों-रात प्रमुख विनिमय दरें स्थिर रहीं और डॉलर इंडेक्स अपने साल के उच्चतम दायरे के करीब बना रहा। मुद्रास्फीति रिपोर्ट पर टिकीं वित्तीय बाजारों की निगाहें एमयूएफजी के ली हार्डमैन का कहना है कि आगामी आर्थिक आंकड़े ब्याज दरों की दिशा तय करेंगे। उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, "जब तक अंतर्निहित मुद्रास्फीति में कोई बड़ा अप्रत्याशित उछाल नहीं आता, हम उम्मीद करते हैं कि फेड इस महीने दरों को यथावत रखेगा।" निवेशकों का ध्यान अब पूरी तरह बुधवार को जारी होने वाली सितंबर की सीपीआई रिपोर्ट पर केंद्रित है, जो यह स्पष्ट करेगी कि केंद्रीय बैंक की मौद्रिक सख्ती का असर महंगाई पर कितना गहरा पड़ा है। यदि मुद्रास्फीति के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक नरम आते हैं, तो केंद्रीय बैंक को दरों में बढ़ोतरी रोकने का ठोस आधार मिल जाएगा। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हालिया बहु-वर्षीय ऊंचे स्तरों से आई गिरावट ने भी डॉलर की एकतरफा तेजी पर कुछ हद तक ब्रेक लगाया है। इसके बावजूद डॉलर के सुरक्षित निवेश विकल्प होने की वजह से वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इसे लगातार निचली कीमतों पर खरीदारी का समर्थन मिल रहा है। जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति अन्य प्रमुख मुद्राओं की बात करें तो जापानी येन के मुकाबले डॉलर का विनिमय दर दायरा सीमित बना हुआ है और यह 158.00 के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है। टोक्यो में नीतिगत हस्तक्षेप की लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। बाजार सहभागियों को अंदेशा है कि जापानी अधिकारी गिरते येन को संभालने के लिए सीधे तौर पर बाजार में दखल दे सकते हैं, जिससे खरीदार बेहद सतर्क हैं। जापान और अमेरिका में सार्वजनिक अवकाश के कारण बाजार में तरलता काफी कम रही, जिसने बड़े उतार-चढ़ाव को सीमित रखा। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी ने डॉलर-येन की तेजी पर लगाम कसी है, लेकिन भू-राजनीतिक चिंताओं ने डॉलर को भारी गिरावट से बचाए रखा है। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भी अमेरिकी डॉलर के सामने दबाव झेल रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे ही बनी रही। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नवंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की घटती संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बनाए रखा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के बावजूद अमेरिकी डॉलर ने जो वापसी की कोशिश की, उसने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की किसी भी बड़ी रिकवरी को सीमित कर दिया। भारतीय रुपये में मजबूती और रिज़र्व बैंक के कदम घरेलू मोर्चे पर, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सोमवार को उल्लेखनीय बढ़त के साथ खुला। भारतीय मुद्रा ने अपनी शुरुआती बढ़त को बरकरार रखते हुए 95.80 के करीब कारोबार किया। रुपये को इस मजबूती का सहारा मुख्य रूप से भारतीय रिज़र्व बैंक के सक्रिय कदमों से मिला है। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने डॉलर की अनावश्यक मांग को रोकने और घरेलू मुद्रा में अत्यधिक अस्थिरता पर अंकुश लगाने के लिए कई नए नीतिगत उपाय लागू किए हैं। केंद्रीय बैंक के इन कदमों से विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की आक्रामक लिवाली पर रोक लगी है, जिससे भारतीय रुपये को फौरी राहत मिली है और यह विदेशी पूंजी बहिर्वाह के दबाव के बीच भी स्थिरता बनाए रखने में सफल रहा है। सोने की कीमतों पर दबाव और क्रिप्टो बाजार का हाल जिंस बाजार में, सुरक्षित निवेश माना जाने वाला सोना एक सप्ताह के उच्च स्तर से फिसल गया। शुरुआती यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान सोने की हाजिर कीमत गिरकर लगभग 4,170 डॉलर प्रति औंस के नए दैनिक निचले स्तर पर आ गई। अमेरिकी डॉलर में आई हल्की रिकवरी और फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत दृष्टिकोण ने बिना ब्याज वाली इस पीली धातु पर दबाव बढ़ा दिया है। जब डॉलर मजबूत होता है या ब्याज दरें ऊंची बनी रहने की संभावना होती है, तो गैर-उपज वाली संपत्तियों जैसे सोने की मांग पर नकारात्मक असर पड़ता है। डिजिटल परिसंपत्तियों के क्षेत्र में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला। पाई नेटवर्क पर सोमवार को भारी बिकवाली का दबाव रहा और इसका टोकन 0.0800 डॉलर के स्तर के ठीक ऊपर झूलता नजर आया। सोशल मीडिया पर चर्चा बढ़ने के बावजूद पाई टोकन की सट्टेबाजी मांग घटती दिखी है, और इसका ओपन इंटरेस्ट 9 मिलियन डॉलर से नीचे आ गया। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल है। तकनीकी स्तरों के अनुसार, पाई टोकन में मंदी का रुख बना हुआ है और यह अपने 0.0800 डॉलर के महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर को नीचे की ओर तोड़ने के जोखिम का सामना कर रहा है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और मुद्रास्फीति के रुझान का सीधा असर वैश्विक आयात लागत, ब्याज दरों और निवेश संपत्तियों पर पड़ता है। • भारतीय अर्थव्यवस्था पर: भारतीय रिज़र्व बैंक के कदमों से रुपये को 95.80 के आसपास सहारा मिला है। रुपये की मजबूती से भारत के कच्चे तेल और जरूरी सामानों के आयात बिल में कमी आ सकती है। • सोने के खरीदारों के लिए: सोने की कीमतों में गिरावट आकर भाव 4,170 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गया है। डॉलर में मजबूती रहने से घरेलू बाजार में भी सोने के दाम स्थिर या कुछ सस्ते हो सकते हैं। • वैश्विक यात्रियों और छात्रों के लिए: डॉलर इंडेक्स 102.00 से ऊपर टिके रहने से विदेशी यात्रा और पढ़ाई का खर्च ऊंचा बना हुआ है। किसी भी बड़े खर्च की योजना बनाने से पहले सीपीआई डेटा का इंतजार करना समझदारी होगी। • क्रिप्टो निवेशकों के लिए: पाई टोकन पर बिकवाली का दबाव बढ़ रहा है और यह 0.0800 डॉलर के समर्थन स्तर पर आ गया है। निवेशक घबराहट में बिना सोचे-समझे पोजीशन बनाने से बचें। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर का मौजूदा ठहराव और संपत्तियों में उठापटक आगामी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की बदलती प्राथमिकताओं का नतीजा है। • नरम आर्थिक आंकड़े: अमेरिकी अर्थव्यवस्था के हालिया कमजोर आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के बयानों ने तत्काल दर वृद्धि की उम्मीदों को कम कर दिया है। इसी कारण डॉलर इंडेक्स 102.00 के आसपास सीमित दायरे में टिका हुआ है। • मुद्रास्फीति की प्रतीक्षा: बुधवार को आने वाली सितंबर सीपीआई रिपोर्ट यह तय करेगी कि फेडरल रिजर्व अपनी दरों में विराम देगा या नहीं। निवेशक किसी भी बड़े निर्णय से पहले इस रिपोर्ट के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। • आरबीआई का सक्रिय हस्तक्षेप: भारतीय रिज़र्व बैंक ने डॉलर की मांग सीमित करने के कड़े नियम लागू किए हैं। इसी वजह से रुपया मजबूत होकर 95.80 के स्तर के पास टिकने में सक्षम हुआ। • बॉन्ड यील्ड में नरमी: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हालिया उच्च स्तरों से आई गिरावट ने डॉलर की बढ़त रोकी है, जबकि भू-राजनीतिक तनाव ने इसे सुरक्षित निवेश के रूप में सहारा दिया है। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स इस समय किस स्तर पर कारोबार कर रहा है? अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 102.00 के महत्वपूर्ण स्तर के ठीक ऊपर कारोबार कर रहा है। 2. फेडरल रिजर्व की आगामी नीति के लिए कौन सा डेटा सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है? बुधवार को जारी होने वाली सितंबर महीने की अमेरिकी सीपीआई रिपोर्ट नीतिगत फैसलों के लिए सबसे अहम मानी जा रही है। 3. भारतीय रुपये में किस वजह से मजबूती देखी गई? भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा डॉलर की मांग को रोकने के लिए उठाए गए नए कदमों से रुपये को 95.80 के करीब मजबूती मिली। 4. सोने की कीमतों में क्या रुझान देखने को मिला? सोने की कीमतों में गिरावट आई और यह शुरुआती यूरोपीय सत्र में लगभग 4,170 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर पर आ गया। 5. पाई नेटवर्क टोकन की वर्तमान कीमत और स्थिति क्या है? पाई टोकन बिकवाली के दबाव में 0.0800 डॉलर के स्तर के करीब कारोबार कर रहा है और इसका ओपन इंटरेस्ट 9 मिलियन डॉलर से नीचे आ गया है। https://trendkia.com/market/us-dollar-me-thehrav-cpi-aakdon-se-pehle-46998 TrendKia — Har trend, sabse pehle.